अगर आपको लगता है कि आपकी कूल एडवरटाइजिंग और महंगे लोगो से सेल बढ़ेगी तो मुबारक हो आप अपनी तिजोरी में खुद आग लगा रहे हैं। लोग आपकी क्रिएटिविटी के नहीं बल्कि काम की चीज के पैसे देते हैं। बिना आर ओ आई वाली मार्केटिंग करके आप सिर्फ अपना बैंक बैलेंस खाली कर रहे हैं।
आज हम मार्क स्टीवंस की किताब योर मार्केटिंग सक्स से वे कड़वे सच जानेंगे जो आपकी सेल्स की दुनिया बदल देंगे। चलिए इन ३ लेसन के जरिए समझते हैं कि अपनी मार्केटिंग को बर्बादी से कैसे बचाएं।
लेसन १ : मार्केटिंग का मतलब सिर्फ और सिर्फ आर ओ आई है
मार्केटिंग की दुनिया में सबसे बड़ा झूठ यह फैलाया गया है कि आपको ब्रांड अवेयरनेस बढ़ानी चाहिए। भाई साहब अवेयरनेस से घर का राशन नहीं आता। मार्क स्टीवंस अपनी किताब में बहुत साफ कहते हैं कि अगर आप मार्केटिंग पर एक रुपया भी खर्च कर रहे हैं और उसके बदले में आपको एक रुपया और एक पैसा वापस नहीं मिल रहा है तो आप मार्केटिंग नहीं कर रहे बल्कि दान पुण्य कर रहे हैं। और सच तो यह है कि चैरिटी करने के लिए मंदिर या गुरुद्वारे जाना बेहतर है बिजनेस में यह सब नहीं चलता।
सोचिए आपने एक बहुत ही खूबसूरत और चमकता हुआ विज्ञापन बनवाया। उसमें बहुत बढ़िया म्यूजिक है और एक मशहूर मॉडल एक्टिंग कर रही है। लोग उसे देखकर कह रहे हैं वाह क्या एड है। लेकिन शाम को जब आप अपना गल्ला चेक करते हैं तो वहां सन्नाटा पसरा होता है। ऐसी मार्केटिंग का क्या फायदा। क्या आप उस एड की तारीफ को बैंक में जमा करके लोन की ई एम आई भर सकते हैं। बिल्कुल नहीं। मार्क स्टीवंस इसे एक्सट्रीम मार्केटिंग कहते हैं। उनका मानना है कि मार्केटिंग एक निवेश यानी इन्वेस्टमेंट है और हर इन्वेस्टमेंट का एक रिटर्न होना चाहिए जिसे हम आर ओ आई यानी रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट कहते हैं।
आजकल के स्टार्टअप फाउंडर्स और छोटे बिजनेस ओनर्स अक्सर इंस्टाग्राम पर लाइक्स और कमेंट्स के पीछे भागते रहते हैं। उन्हें लगता है कि अगर हजार लोगों ने पोस्ट को लाइक कर दिया तो बिजनेस हिट हो गया। लेकिन मेरे दोस्त लाइक्स से बिजली का बिल नहीं भरता। असली मार्केटिंग वह है जो कस्टमर की जेब से पैसा निकालकर आपकी जेब में डाल दे। अगर आपका विज्ञापन सिर्फ लोगों का मनोरंजन कर रहा है तो आप एक मार्केटर नहीं बल्कि एक सस्ते कॉमेडियन बन चुके हैं।
मान लीजिए मोहल्ले के दो हलवाई हैं। पहला हलवाई अपनी दुकान के बाहर बड़े बड़े बैनर लगाता है जिन पर लिखा है शुद्ध देसी घी के लड्डू। वह बैनर बहुत सुंदर है और उसे देखकर लोग मुस्कुराते हुए निकल जाते हैं। दूसरा हलवाई कोई बैनर नहीं लगाता। वह बस एक छोटा सा लड़का खड़ा कर देता है जो आने जाने वाले हर इंसान को एक छोटा सा लड्डू चखने को देता है। अब आप खुद सोचिए शाम तक किसके पास ज्यादा भीड़ होगी। पहले वाले हलवाई को सिर्फ तारीफ मिली लेकिन दूसरे वाले को सेल्स मिली। यही है आर ओ आई का असली खेल।
ज्यादातर कंपनियां अपनी मार्केटिंग टीम को इसलिए पैसे देती हैं ताकि वे कुछ क्रिएटिव कर सकें। लेकिन बिजनेस में क्रिएटिविटी की कीमत जीरो है अगर वह सेल्स में न बदले। आपको एक एक पैसे का हिसाब रखना होगा। अगर फेसबुक एड्स पर दस हजार खर्च किए हैं तो क्या उससे कम से कम ग्यारह हजार का फायदा हुआ। अगर जवाब नहीं है तो अपनी स्ट्रेटेजी को कचरे के डिब्बे में डाल दीजिए और कुछ नया सोचिए। बिजनेस भावनाओं से नहीं बल्कि नंबर्स से चलता है। और जो मार्केटर नंबर्स को इग्नोर करता है उसका बिजनेस बहुत जल्द इतिहास के पन्नों में खो जाता है।
अपनी मार्केटिंग को ट्रैक करना सीखिए। आपको पता होना चाहिए कि कौन सा पोस्टर या कौन सा मैसेज कस्टमर को दुकान तक खींचकर लाया है। अगर आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं तो उम्मीद मत रखिए कि निशाना सही लगेगा। आपकी मार्केटिंग की हर एक्टिविटी का एक ही मकसद होना चाहिए और वह है पैसा बनाना। जब तक आप इस कड़वे सच को गले नहीं लगाएंगे तब तक आपकी मार्केटिंग हमेशा बेकार ही रहेगी।
लेसन २ : क्रिएटिविटी के चक्कर में बर्बाद होना बंद करें
मार्क स्टीवंस कहते हैं कि अगर आपकी एड एजेंसी को उनकी बनाई एड के लिए कोई बड़ा अवार्ड मिलता है, तो आपको खुश होने के बजाय उन्हें तुरंत नौकरी से निकाल देना चाहिए। सुनने में यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन इसके पीछे का तर्क बहुत गहरा है। अक्सर एड एजेंसियां और मार्केटिंग गुरु ऐसे विज्ञापन बनाने में लग जाते हैं जो दिखने में बहुत 'आर्टिस्टिक' और 'कूल' होते हैं। वे चाहते हैं कि उनके काम की तारीफ इंडस्ट्री के लोग करें ताकि उन्हें अवार्ड्स मिलें। लेकिन आपकी कंपनी का मकसद अवार्ड जीतना नहीं, बल्कि सामान बेचना है।
सोचिए, आप टीवी पर एक विज्ञापन देखते हैं जो इतना शानदार है कि आपकी आंखों में आंसू आ जाते हैं। आप अपने दोस्तों को फोन करके कहते हैं कि भाई क्या गजब का एड देखा आज। लेकिन जब दोस्त पूछता है कि एड किस चीज का था, तो आप अपना सिर खुजलाने लगते हैं। अगर कस्टमर को यही याद नहीं रहा कि प्रोडक्ट क्या था और उसे क्यों खरीदना चाहिए, तो वह एड पूरी तरह से फेल है। ऐसी 'क्रिएटिविटी' सिर्फ आपके बैंक अकाउंट में छेद करती है और कुछ नहीं।
ज्यादातर लोग मार्केटिंग को एक कला समझते हैं, जबकि मार्क स्टीवंस के हिसाब से यह एक साइंस है। विज्ञान में भावनाओं की जगह नहीं होती, सिर्फ रिजल्ट्स देखे जाते हैं। अक्सर बड़े ब्रांड्स करोड़ों रुपये सिर्फ इसलिए फूंक देते हैं ताकि वे मार्केट में 'दिखते' रहें। इसे वे ब्रांड बिल्डिंग का नाम देते हैं। लेकिन छोटे और मीडियम बिजनेस के लिए यह एक सुसाइड मिशन है। आपको अपनी मार्केटिंग को एक सेल्समैन की तरह देखना होगा। क्या आप किसी ऐसे सेल्समैन को सैलरी देंगे जो बहुत अच्छी कविताएं सुनाता हो, जोक्स मारकर सबको हंसाता हो, लेकिन महीने के आखिर में एक भी सेल न कर पाए। शायद नहीं। तो फिर आप अपनी मार्केटिंग से ऐसी उम्मीद क्यों रखते हैं।
मान लीजिए आपको एक नया फोन खरीदना है। एक कंपनी आपको एक ऐसा विज्ञापन दिखाती है जिसमें एक अंतरिक्ष यात्री मंगल ग्रह पर नाच रहा है और बैकग्राउंड में बहुत ही महंगा संगीत बज रहा है। वहीं दूसरी कंपनी एक साधारण सा वीडियो दिखाती है जिसमें बताया गया है कि इस फोन की बैटरी तीन दिन चलती है और इसका कैमरा अंधेरे में भी साफ फोटो खींचता है। आप किसका फोन खरीदेंगे। यकीनन दूसरी कंपनी का। क्योंकि उसने आपकी जरूरत की बात की, न कि अपना 'टैलेंट' दिखाया।
मार्केटिंग का काम लोगों को इम्प्रेस करना नहीं, बल्कि उन्हें एक्शन लेने के लिए मजबूर करना है। अगर आपका मैसेज सीधा और साफ नहीं है, तो लोग उसे इग्नोर कर देंगे। आज के दौर में लोगों के पास समय बहुत कम है। वे स्क्रोल करते हुए सिर्फ वही रुकते हैं जो उनकी किसी प्रॉब्लम का सलूशन दे रहा हो। अगर आप अपनी एड में पहेलियां बुझा रहे हैं या बहुत ज्यादा फिलॉसफी झाड़ रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप अपना पैसा कचरे में डाल रहे हैं।
हमेशा याद रखिए, एक अच्छी मार्केटिंग वह है जो कस्टमर के दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल पैदा करे और वह है कि मैं इसे अभी कैसे खरीद सकता हूं। अगर आपकी मार्केटिंग देखने के बाद लोग आपके 'क्रिएटिव विजन' की चर्चा कर रहे हैं, तो समझ जाइए कि आपकी मार्केटिंग पूरी तरह सक्स यानी बेकार है। आपको आर्टिस्ट नहीं, बल्कि एक जिद्दी सेल्समैन बनने की जरूरत है जो अपनी बात मनवाकर ही दम ले। जब आप क्रिएटिविटी का चश्मा उतारकर सेल्स के चश्मे से देखेंगे, तभी आपको असली मुनाफा नजर आएगा।
लेसन ३ : नए कस्टमर के पीछे भागना छोड़ें और अपनों को पहचानें
मार्क स्टीवंस एक बहुत ही कड़वी सच्चाई बताते हैं जिसे सुनकर शायद आपको झटका लगे। हम अपनी मार्केटिंग का ८० परसेंट बजट नए कस्टमर्स को ढूंढने और उन्हें पटाने में खर्च कर देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एक नए इंसान को अपना सामान बेचना, पुराने कस्टमर को बेचने के मुकाबले १० गुना ज्यादा महंगा पड़ता है। अक्सर बिजनेस ओनर्स उस शिकारी की तरह व्यवहार करते हैं जो हमेशा नए जंगल की तलाश में रहता है, जबकि उसके अपने घर के पीछे सोने की खदान दबी होती है।
सोचिए, एक ऐसा कस्टमर जिसने पहले ही आपसे सामान खरीदा है, जिसे आपके ब्रांड पर भरोसा है और जिसके पास आपका नंबर सेव है। उसे दोबारा कुछ बेचना कितना आसान है। लेकिन नहीं, हमें तो फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अनजान लोगों को एड्स दिखाकर उन्हें इम्प्रेस करना है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपनी शादीशुदा बीवी को इग्नोर करके मोहल्ले की दूसरी लड़कियों को गुलाब के फूल बांट रहे हों। अंत में आपको सिर्फ जूते पड़ेंगे और हाथ कुछ नहीं आएगा।
एक मजेदार उदाहरण देखिए। मान लीजिए आपकी एक जिम है। आप नए मेंबर्स लाने के लिए शहर भर में पर्चे बंटवाते हैं और भारी डिस्काउंट देते हैं। लेकिन आपके जो पुराने मेंबर्स हैं, जो पिछले दो साल से आ रहे हैं, आप उनका हाल तक नहीं पूछते। नतीजा यह होता है कि पुराने लोग आपकी जिम छोड़कर चले जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी कोई वैल्यू नहीं है। मार्क स्टीवंस कहते हैं कि असली पैसा 'बैक एंड' सेल्स में है। यानी एक बार जब कोई आपके सिस्टम में आ जाए, तो उसे बार बार और बेहतर चीजें बेचते रहें।
अक्सर दुकानदार सोचते हैं कि सेल हो गई तो रिश्ता खत्म हो गया। भाई साहब, सेल तो रिश्ते की शुरुआत है। अगर आप अपने पुराने कस्टमर्स का डेटा नहीं रख रहे, उन्हें उनके जन्मदिन पर विश नहीं कर रहे या उन्हें एक्सक्लूसिव ऑफर्स नहीं दे रहे, तो आप अपनी मार्केटिंग के साथ गद्दारी कर रहे हैं। पुराने कस्टमर न सिर्फ आपसे दोबारा सामान खरीदते हैं, बल्कि वे आपके फ्री के मार्केटिंग एजेंट भी बन जाते हैं। वे चार और लोगों को बताएंगे कि आपकी सर्विस कितनी लाजवाब है। और याद रखिए, किसी दोस्त की सलाह पर लिया गया सामान किसी भी महंगे विज्ञापन से ज्यादा असरदार होता है।
तो अब से अपनी स्ट्रेटेजी बदलिए। नए कस्टमर जरूर लाएं, लेकिन अपनी तिजोरी की चाबी यानी पुराने कस्टमर्स को संभालकर रखें। उनके लिए स्पेशल लॉयल्टी प्रोग्राम बनाइए। उन्हें वह इज्जत दीजिए जो कोई और नहीं दे रहा। जब आप अपने मौजूदा कस्टमर्स का ख्याल रखते हैं, तो आपका बिजनेस एक मजबूत किले की तरह बन जाता है जिसे कोई भी मंदी या कॉम्पिटिटर हिला नहीं सकता। मार्केटिंग का असली जादू नए लोगों को लाने में नहीं, बल्कि आए हुए लोगों को रोककर रखने में है।
अगर आज की इस चर्चा से आपने कुछ सीखा है, तो वह यह है कि अपनी मार्केटिंग को सिर्फ एक शौक या मजबूरी मत समझिए। यह आपके बिजनेस का इंजन है। अगर इंजन में तेल की जगह पानी डालेंगे, तो गाड़ी कभी नहीं चलेगी। आर ओ आई पर ध्यान दें, फालतू की क्रिएटिविटी से बचें और अपने कस्टमर्स की कद्र करें।
क्या आप भी अपनी मेहनत की कमाई बेकार की एड्स पर लुटा रहे हैं। आज ही बैठें और हिसाब लगाएं कि आपकी कौन सी मार्केटिंग आपको सच में पैसा कमाकर दे रही है। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो बिजनेस तो करना चाहते हैं लेकिन मार्केटिंग के नाम पर सिर्फ पैसा बर्बाद कर रहे हैं। कमेंट्स में बताएं कि इन ३ लेसन में से आपको सबसे ज्यादा कौन सा पसंद आया।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#MarketingTips #BusinessGrowth #SalesStrategy #EntrepreneurshipIndia #YourMarketingSucks
_