क्या आप भी उन्हीं लोगों में से हैं जो ऑफिस में शरीफ बनकर प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। बधाई हो, आप अपनी जिंदगी और करियर दोनों को गड्ढे में डाल रहे हैं। स्टीव बालमर जैसे पागलपन के बिना आप सिर्फ एक एम्प्लॉई बनकर रह जाएंगे, लीडर कभी नहीं।
इस आर्टिकल में हम स्टीव बालमर की लाइफ से वो ३ सीक्रेट लेसन सीखेंगे जिन्होंने एक आम सेल्समैन को माइक्रोसॉफ्ट का बादशाह बना दिया। अगर आप अपनी ग्रोथ को लेकर सीरियस हैं, तो ये बातें आपके बहुत काम आएंगी।
लेसन १ : पागलपन वाला पैशन और हाई वोल्टेज एनर्जी
अगर आप सोचते हैं कि ऑफिस में चुपचाप कोने में बैठकर और कंप्यूटर पर उंगलियां चलाकर आप दुनिया जीत लेंगे, तो भाई आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। स्टीव बालमर कोई मामूली मैनेजर नहीं थे, वो माइक्रोसॉफ्ट के अंदर एक चलते फिरते बिजली के खंभे थे। उनका पैशन ऐसा था कि जब वो स्टेज पर चिल्लाते थे, तो सामने बैठे लोगों के कान के पर्दे फटने के साथ साथ उनके अंदर का आलस भी मर जाता था। आपने शायद वो वीडियो देखा होगा जहाँ वो पागलों की तरह नाचते हुए स्टेज पर आते हैं और 'डेवलपर्स, डेवलपर्स' चिल्लाते हैं। लोग उनका मजाक उड़ाते थे, उन्हें 'बैड बॉय' कहते थे, लेकिन सच तो यह है कि उस एनर्जी के बिना माइक्रोसॉफ्ट कभी इतना बड़ा एम्पायर नहीं बन पाता।
आजकल के कॉर्पोरेट कल्चर में लोग 'कूल' दिखने के चक्कर में अपनी भावनाओं को दबाकर रखते हैं। मीटिंग में ऐसे बैठेंगे जैसे किसी की तेरहवीं में आए हों। बालमर हमें सिखाते हैं कि अगर आप अपने काम को लेकर इमोशनल नहीं हैं, अगर आपके अंदर अपने प्रोडक्ट को लेकर वो पागलपन नहीं है, तो आप बस वक्त काट रहे हैं। लाइफ में कुछ बड़ा करने के लिए थोडा 'लाउड' होना पड़ता है। जब बालमर सेल्स करने निकलते थे, तो सामने वाला उनकी बातें सुनकर नहीं, बल्कि उनकी आँखों में वो चमक और उनके चिल्लाने में छिपी सच्चाई देखकर डील साइन कर देता था।
मान लीजिए आप एक स्टार्टअप में काम करते हैं और आपको क्लाइंट को एक नया आईडिया बेचना है। आप वहां जाते हैं और मरी हुई आवाज में पीपीटी दिखाते हैं। क्लाइंट को लगेगा कि भाई जब इसे खुद यकीन नहीं है, तो मैं इस पर पैसे क्यों लगाऊं। वहीं दूसरी तरफ बालमर स्टाइल में सोचिए। जब आप पूरी जान लगाकर, आँखों में आँखें डालकर और जोश के साथ अपना विजन बताते हैं, तो लोग आपके आईडिया से पहले आपकी एनर्जी के फैन हो जाते हैं। लोग उन लोगों के साथ काम करना चाहते हैं जो जिंदादिल हैं, न कि उन लोगों के साथ जो सुबह उठकर ऑफिस सिर्फ इसलिए जाते हैं क्योंकि उनके पास कोई और चारा नहीं है।
बालमर की ये एनर्जी सिर्फ दिखावा नहीं थी। वो सुबह से लेकर रात तक इसी इंटेंसिटी के साथ काम करते थे। उनकी डिक्शनरी में 'थकान' जैसा कोई शब्द नहीं था। हम अक्सर एक छोटी सी हार के बाद मुंह लटकाकर बैठ जाते हैं और फिर हफ्ते भर नेटफ्लिक्स पर दुख भरी फ़िल्में देखते हैं। लेकिन बालमर का फंडा सिंपल था, अगर हार मिले तो और जोर से चिल्लाओ और अगली बार और ज्यादा ताकत से हमला करो। उनका ये अग्रेसिव व्यवहार कई बार लोगों को अजीब लगता था, लेकिन इसी वजह से कंपनी के कॉम्पिटिटर्स उनसे खौफ खाते थे। जब लीडर खुद एक शेर की तरह दहाड़ता है, तो टीम में मौजूद सियार भी शेर बन जाते हैं। तो अगर आप अपनी फील्ड के बादशाह बनना चाहते हैं, तो अपनी एनर्जी को ४४० वोल्ट पर रखिए, क्योंकि ठंडे लोग सिर्फ बर्फ की सिल्ली की तरह कोने में पड़े रहते हैं, इतिहास नहीं रचते।
लेसन २ : हार न मानने वाला अग्रेसिव कम्पेटिटिव स्पिरिट
बिजनेस की दुनिया कोई सत्संग नहीं है जहाँ आप शांति से बैठकर माला जपेंगे और सक्सेस आपके चरणों में आकर गिर जाएगी। यहाँ हर मोड़ पर कोई न कोई बैठा है जो आपका गला काटने और आपकी कुर्सी छीनने के लिए तैयार है। स्टीव बालमर इस बात को बहुत अच्छे से समझते थे। उनके अंदर जीत का ऐसा कीड़ा था जो उन्हें तब तक चैन से बैठने नहीं देता था जब तक वो अपने कॉम्पिटिटर को धूल न चटा दें। जब माइक्रोसॉफ्ट के सामने गूगल या एप्पल जैसी कम्पनियाँ खड़ी होती थीं, तो बालमर घबराकर मीटिंग रूम में छिपते नहीं थे। वो सीधे मैदान में उतरते थे। उनका मानना था कि अगर आप मार्केट में टिके रहना चाहते हैं, तो आपको थोड़ा बेरहम होना पड़ेगा।
आजकल के 'सॉफ्ट' जमाने में लोग कॉम्पिटिशन से डरते हैं। लोग कहते हैं कि हमें बस खुद से बेहतर बनना है। सुनने में तो यह बहुत अच्छा लगता है, लेकिन असल दुनिया में अगर आप अपने पड़ोसी से तेज नहीं दौड़ेंगे, तो वो आपकी जगह हड़प लेगा। बालमर ने सिखाया कि अपने विरोधियों की ताकत को पहचानो और फिर उन पर अपनी पूरी ताकत से प्रहार करो। वो माइक्रोसॉफ्ट के हर एम्प्लॉई को एक फाइटर की तरह देखते थे। उनके लिए मार्केट शेयर सिर्फ एक नंबर नहीं था, वो उनके आत्मसम्मान की बात थी। अगर विंडोज का इस्तेमाल करने वाला एक भी यूजर किसी और सॉफ्टवेयर पर शिफ्ट होता था, तो बालमर को ऐसा लगता था जैसे किसी ने उनके घर में घुसकर चोरी कर ली हो।
मान लीजिए आप गली क्रिकेट खेल रहे हैं और सामने वाली टीम का बॉलर आपको स्लेज कर रहा है। एक तरीका है कि आप शरीफ बनो और चुपचाप आउट होकर चले जाओ। दूसरा है बालमर तरीका। आप उसकी आँखों में आँखें डालो, बल्ला घुमाओ और ऐसा छक्का मारो कि गेंद पड़ोसी के आंगन में जाकर गिरे। बालमर की यही स्पिरिट माइक्रोसॉफ्ट को हर मुश्किल दौर से बाहर निकाल कर लाई। जब नेटस्केप ने माइक्रोसॉफ्ट के ब्राउजर डोमिनेंस को चुनौती दी, तो बालमर ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पूरी टीम को झोंक दिया और इंटरनेट एक्सप्लोरर को ऐसा बनाया कि बाकी सब पीछे छूट गए। लोग उन्हें जिद्दी कहते थे, लेकिन वो जिद्द ही थी जिसने उन्हें माइक्रोसॉफ्ट का सबसे ताकतवर सिपाही बनाया।
कई बार बालमर इतने अग्रेसिव हो जाते थे कि वो अपनी कुर्सी तक पटक देते थे। लोग कहते थे कि भाई इतना गुस्सा सेहत के लिए अच्छा नहीं है। लेकिन बालमर के लिए वो गुस्सा उनकी फिक्र थी। जब आप किसी चीज को अपनी जान से ज्यादा प्यार करते हैं, तो आप उसे हारते हुए नहीं देख सकते। हम अक्सर अपनी गलतियों पर पर्दा डाल देते हैं और कहते हैं कि चलो कोई बात नहीं, अगली बार देख लेंगे। लेकिन बालमर के लिए 'अगली बार' जैसा कुछ नहीं था। जो करना है अभी करना है और सबसे बेस्ट करना है। उन्होंने सिखाया कि अगर आप बिजनेस की जंग जीतना चाहते हैं, तो आपको अपनी मासूमियत को घर छोड़कर आना होगा। दुनिया उन्हीं का सम्मान करती है जो अपनी जगह के लिए लड़ना जानते हैं।
लेसन ३ : लॉयल्टी और अटूट पार्टनरशिप का पावर
आज के जमाने में जहाँ लोग थोड़े से ज्यादा पैसों के लिए अपनी कंपनी और दोस्तों को बीच मझधार में छोड़ देते हैं, वहां स्टीव बालमर की वफादारी एक मिसाल है। बालमर सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट के एक एम्प्लॉई या सीईओ नहीं थे, वो बिल गेट्स के सबसे भरोसेमंद साथी थे। उनकी दोस्ती हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के दिनों से थी और जब बिल ने उन्हें माइक्रोसॉफ्ट जॉइन करने के लिए बुलाया, तो बालमर ने बिना किसी स्वार्थ के अपना सब कुछ उस विजन के लिए झोंक दिया। उन्होंने सिखाया कि अकेले आप शायद तेज दौड़ सकते हैं, लेकिन बहुत दूर तक जाने के लिए आपको एक मजबूत पार्टनरशिप और अटूट लॉयल्टी की जरूरत होती है।
हम अक्सर सोचते हैं कि अगर हम नंबर २ की पोजीशन पर हैं, तो हम कमतर हैं। लेकिन बालमर ने दिखाया कि एक बेहतरीन नंबर २ होना भी अपने आप में एक बहुत बड़ी कला है। उन्होंने बिल गेट्स के विजन को जमीन पर उतारा। बिल गेट्स अगर दिमाग थे, तो बालमर उस शरीर की ताकत थे जिसने माइक्रोसॉफ्ट को हर घर तक पहुंचाया। उनकी वफादारी का आलम यह था कि उन्होंने अपनी पूरी प्रोफेशनल लाइफ सिर्फ एक ही कंपनी को समर्पित कर दी। आजकल लोग हर दो साल में रिज्यूमे अपडेट करते हैं, लेकिन बालमर ने साबित किया कि अगर आप एक जगह टिक कर अपनी पूरी जान लगा देते हैं, तो आप न केवल अमीर बनते हैं बल्कि एक लेजेंड भी बन जाते हैं।
आपने शोले फिल्म के जय और वीरू को तो देखा ही होगा। अगर जय कहता कि 'भाई गब्बर ज्यादा पैसे दे रहा है, मैं उसकी टीम में जा रहा हूँ', तो क्या वो फिल्म इतनी बड़ी हिट होती। कभी नहीं। बालमर माइक्रोसॉफ्ट के वो 'जय' थे जिन्होंने आखिरी दम तक कंपनी का साथ दिया। कई बार उनके और बिल गेट्स के बीच जबरदस्त बहस होती थी, कमरे के अंदर चीखने चिल्लाने की आवाजें आती थीं, लेकिन कमरे से बाहर निकलते ही वो फिर से एक चट्टान की तरह साथ खड़े होते थे। यह सबक आज के युवाओं के लिए बहुत जरूरी है जो छोटी सी अनबन पर अपने मेंटोर या पार्टनर का साथ छोड़ देते हैं। रिश्ते और बिजनेस दोनों को निभाने के लिए जिगरा चाहिए होता है।
बालमर की इस वफादारी ने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर इंसानों में से एक बना दिया। उन्होंने कभी अपनी अलग कंपनी शुरू करने की नहीं सोची क्योंकि उन्हें पता था कि उनकी ताकत माइक्रोसॉफ्ट के साथ ही है। जब वो रिटायर हुए, तो उनकी आँखों में आंसू थे। वो आंसू किसी हार के नहीं थे, बल्कि उस सफर के थे जो उन्होंने अपने दोस्त और अपनी कंपनी के साथ जिया था। उन्होंने हमें सिखाया कि प्रोफेशनल वर्ल्ड में स्किल्स तो सब सीख लेते हैं, लेकिन 'लॉयल्टी' ऐसी चीज है जो आपको भीड़ से अलग खड़ा करती है। अगर आप किसी के साथ जुड़े हैं, तो उस पर भरोसा रखिए और अपनी पूरी वफादारी के साथ उसे सफल बनाइये, आपकी सफलता अपने आप उसके पीछे चली आएगी।
स्टीव बालमर की कहानी हमें सिखाती है कि लाइफ में सिर्फ टैलेंटेड होना काफी नहीं है। आपके अंदर वो आग, वो लड़ने का जज्बा और अपनों के प्रति वफादारी होनी चाहिए जो पहाड़ों को भी हिला सके। 'बैड बॉय' कहलाने में कोई बुराई नहीं है अगर आप अपने सपनों और अपनी टीम के लिए लड़ रहे हैं। तो अब आपकी बारी है। क्या आप में वो हिम्मत है कि आप अपनी अगली मीटिंग में बालमर जैसी एनर्जी दिखा सकें। क्या आप अपने काम के प्रति उतने ही वफादार हैं जितने बालमर थे। कमेंट्स में हमें जरूर बताएं कि इस 'बैड बॉय' की कौन सी बात ने आपके दिल को छू लिया। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे थोड़े से मोटिवेशन और बहुत सारी एनर्जी की जरूरत है। चलिए, मिलकर कुछ बड़ा करते हैं।
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