क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो डिस्काउंट के नाम पर अपना बिजनेस नीलाम कर रहे हैं। मुबारक हो क्योंकि आपके कॉम्पिटिटर आपकी इसी बेवकूफी का फायदा उठाकर आपको मार्केट से बाहर फेंकने की तैयारी में हैं। जब आप सस्ता बेचकर खुद को महान समझ रहे होते हैं तब असल में आप अपनी बर्बादी के वारंट पर साइन कर रहे होते हैं।
इस आर्टिकल में हम रिचर्ड डी अेवेनी की किताब बीटिंग द कमोडिटी ट्रैप की मदद से समझेंगे कि कैसे आप इस घटिया कॉम्पिटिशन से बाहर निकलकर अपनी प्राइसिंग पावर को बढ़ा सकते हैं। अगर आप अपनी वैल्यू बढ़ाना चाहते हैं तो ये 3 लेसन आपके लिए गेम चेंजर साबित होंगे।
लेसन १ : सस्ते के चक्कर में खुद का गला मत घोटिये
दोस्तो, अगर आपको लगता है कि दाम कम करके आप मार्केट के राजा बन जाएंगे तो आप एक बहुत बड़ी गलतफहमी पाल रहे हैं। हमारे देश में हर गली के नुक्कड़ पर एक ऐसा बिजनेस मालिक बैठा है जो सोचता है कि अगर पड़ोसी समोसा 10 रुपये में बेच रहा है तो मैं 8 रुपये में बेचकर पूरी दुनिया जीत लूँगा। लेकिन असलियत में वह सिर्फ अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट लिख रहा होता है। रिचर्ड डी अेवेनी इसे ही कमोडिटी ट्रैप कहते हैं जहाँ आपका प्रोडक्ट सिर्फ एक आम चीज बनकर रह जाता है जिसकी कोई इज्जत नहीं होती। जब आप अपनी कीमत गिराते हैं तब आप कस्टमर को यह सिग्नल दे रहे होते हैं कि आपके माल में कोई दम नहीं है।
सोचिये अगर आईफोन अपनी कीमत कम करके चाइनीज फोन के बराबर कर दे तो क्या आप उसे वैसी ही हसरत भरी नजरों से देखेंगे। बिल्कुल नहीं क्योंकि तब वह सिर्फ एक फोन रह जाएगा स्टेटस सिंबल नहीं। जब आप प्राइस वॉर में कूदते हैं तो आप एक ऐसी रेस लड़ रहे होते हैं जिसमें जीतने वाला भी असल में हार ही रहा होता है क्योंकि उसका प्रॉफिट मार्जिन खत्म हो चुका होता है। भारत के मार्केट में अक्सर लोग यही गलती करते हैं कि वे यूनिक बनने के बजाय सस्ता बनने की कोशिश करते हैं। अगर आप सिर्फ कीमत के दम पर बिजनेस कर रहे हैं तो कल कोई और आएगा जो आपसे भी 1 रुपया कम कर देगा और आपके वफादार कस्टमर पलक झपकते ही वहां शिफ्ट हो जाएंगे।
इस जाल से निकलने का एकमात्र तरीका है अपनी पोजीशन को इतना मजबूत करना कि लोग आपको कीमत से नहीं बल्कि आपकी वैल्यू से पहचानें। आपको यह तय करना होगा कि आप मार्केट के कौवे बनना चाहते हैं जो हर जगह गंदगी में लड़ते हैं या वह बाज जो ऊंचाइयों पर अकेला उड़ता है। अपनी सर्विस और क्वालिटी को ऐसा बनाइये कि जब आप बिल भेजें तो कस्टमर के हाथ न कांपें बल्कि उसे लगे कि उसने कुछ कीमती पाया है। याद रखिये कि डिस्काउंट देना कमजोरी की निशानी है और अपनी कीमत पर अड़े रहना असली ताकत है। अगर आप आज खुद को सस्ता बेचेंगे तो कल दुनिया आपको कौड़ियों के दाम पर भी नहीं पूछेगी।
जब आप इस सस्तेपन की बीमारी से बाहर निकल आते हैं तब जाकर आप असली बिजनेस की शुरुआत करते हैं। लेकिन सिर्फ महंगा होना काफी नहीं है बल्कि आपको यह भी समझना होगा कि कस्टमर की जेब से पैसा निकालने की कला क्या है। यहाँ से शुरू होती है असली दिमागी कसरत जो हमें अगले लेसन की तरफ ले जाती है जहाँ हम समझेंगे कि अपनी प्राइसिंग पावर को कैसे कंट्रोल किया जाए।
लेसन २ : कस्टमर के दिमाग से खेलिए और अपनी कीमत खुद तय कीजिये
अब जरा ईमानदारी से बताइये कि जब आप किसी शोरूम में जाते हैं और वहां सेल्समैन आपको एक टीशर्ट दिखाता है जिसकी कीमत 2000 रुपये है तो आप क्या करते हैं। आप शायद उसे ध्यान से देखते हैं उसकी क्वालिटी चेक करते हैं और फिर उसे चुपचाप रख देते हैं। लेकिन जैसे ही वह सेल्समैन कहता है कि सर इसके साथ एक फ्री है या फिर इस पर 50 परसेंट का टैग लगा है तो अचानक वही टीशर्ट आपको दुनिया की सबसे हसीन चीज लगने लगती है। यही तो है कस्टमर साइकोलॉजी का खेल जिसे रिचर्ड डी अेवेनी अपनी किताब में समझाते हैं। आपकी प्राइसिंग पावर इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपने प्रोडक्ट बनाने में कितना खर्चा किया है बल्कि इस बात पर करती है कि कस्टमर के दिमाग में आपकी इमेज क्या है।
मार्केट में दो तरह के खिलाड़ी होते हैं। एक वो जो कस्टमर के पीछे भागते हैं और दूसरे वो जिनके पीछे कस्टमर लाइन लगाकर खड़े होते हैं। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको मुंह मांगी कीमत दें तो आपको अपनी ब्रांडिंग और पोजीशनिंग को एक प्रीमियम लेवल पर ले जाना होगा। भारत में लोग इमोशन्स और भरोसे पर पैसा खर्च करते हैं लॉजिक पर नहीं। अगर आपने अपने प्रोडक्ट के साथ एक अच्छी कहानी जोड़ दी या उसे एक खास प्रॉब्लम का अकेला सॉल्यूशन बना दिया तो फिर आप राजा हैं। लोग तब आपसे मोलभाव नहीं करेंगे क्योंकि उन्हें पता होगा कि जो आप दे रहे हैं वो कोई और नहीं दे सकता।
एक आम पानी की बोतल रेलवे स्टेशन पर 20 रुपये की मिलती है वही बोतल किसी फाइव स्टार होटल में 150 रुपये की हो जाती है। पानी वही है प्यास भी वही बुझा रहा है लेकिन जगह और प्रेजेंटेशन बदल गई। अगर आप खुद को रेलवे स्टेशन वाले सप्लायर की तरह पेश करेंगे तो लोग आपसे चवन्नी के लिए भी बहस करेंगे। लेकिन अगर आप अपनी वैल्यू को एक लग्जरी अनुभव की तरह पेश करेंगे तो लोग हंसते हुए ज्यादा पैसे देंगे। आपको अपने बिजनेस में वह 'प्रीमियम फैक्टर' ढूंढना होगा। क्या आपकी सर्विस सबसे तेज है। क्या आपका प्रोडक्ट सबसे ज्यादा टिकाऊ है। या फिर क्या आपके पास वो सीक्रेट फार्मूला है जो किसी और के पास नहीं है।
जब आप अपनी प्राइसिंग पावर का इस्तेमाल करते हैं तो आप मार्केट के रूल्स फॉलो नहीं करते बल्कि रूल्स खुद बनाते हैं। लेकिन सावधान रहिये क्योंकि बहुत ज्यादा हवा में उड़ना भी खतरनाक हो सकता है। आपको यह भी पता होना चाहिए कि मार्केट में छिपे हुए वो कौन से गड्ढे हैं जो आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकते हैं। यहाँ से हम अपनी कहानी के आखिरी और सबसे जरूरी हिस्से की तरफ बढ़ेंगे जहाँ हम उन अलग अलग खतरों को पहचानेंगे जो आपके बिजनेस को निगल सकते हैं।
लेसन ३ : मार्केट के गिरगिट बनिए और हर जाल को तोड़ दीजिये
बिजनेस की दुनिया किसी जंगल से कम नहीं है और यहाँ हर मोड़ पर एक नया जाल आपका इंतज़ार कर रहा है। रिचर्ड डी अेवेनी कहते हैं कि कमोडिटी ट्रैप सिर्फ एक तरह का नहीं होता बल्कि यह अलग-अलग रूप बदलकर आता है। कभी यह आपके कॉम्पिटिटर के रूप में आएगा जो रातों-रात अपनी कीमतें गिरा देगा तो कभी यह उन कस्टमर्स के रूप में आएगा जिन्हें सिर्फ और सिर्फ 'सस्ता' चाहिए। अगर आप एक ही ढर्रे पर चलते रहे तो मार्केट आपको वैसे ही भुला देगा जैसे लोग पुराने नोकिया फोन को भूल गए। आपको मार्केट के उस गिरगिट की तरह बनना होगा जो खतरा भांपते ही अपना रंग बदल लेता है और खुद को ढाल लेता है।
जरा सोचिये उन कंपनियों के बारे में जो सालों से राज कर रही थीं लेकिन एक छोटी सी तकनीक बदली और उनका बोरिया-बिस्तर सिमट गया। भारत में हमने देखा है कि कैसे एक टेलिकॉम कंपनी ने आकर सबको फ्री डेटा का लालच दिया और बाकी बड़े-बड़े दिग्गज ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इसे कहते हैं डिस्ट्रक्टिव ट्रैप। अगर आप अपनी गद्दी बचाना चाहते हैं तो आपको हमेशा अपने प्रतिद्वंद्वी से दो कदम आगे की सोचनी होगी। आपको सिर्फ आज का मुनाफा नहीं देखना है बल्कि यह देखना है कि अगले पांच साल में मार्केट किस तरफ करवट लेगा। क्या आप भी वही घिसी-पिटी स्ट्रेटेजी अपना रहे हैं जो दादा-परदादा के जमाने से चली आ रही है। अगर हाँ तो यकीन मानिए कि आपका अंत करीब है।
आपको अपने बिजनेस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटना सीखना होगा। अगर कोई सेगमेंट कमोडिटी बन रहा है यानी वहां बहुत ज्यादा भीड़ हो गई है तो तुरंत अपनी ताकत किसी नए और अनोखे सेगमेंट में लगा दीजिये। अपनी जड़ें इतनी गहरी कर लीजिये कि कोई भी आंधी आपको हिला न सके। नवाचार यानी इनोवेशन कोई फैंसी शब्द नहीं है बल्कि यह आपके बिजनेस की ऑक्सीजन है। अगर आप हर दिन कुछ नया नहीं सोच रहे हैं तो आप धीरे-धीरे मर रहे हैं। अपने आप को इतना खास बना लीजिये कि आपका कॉम्पिटिटर आपकी नकल तो कर सके लेकिन आपकी बराबरी कभी न कर पाए। जब आप इस लेवल पर पहुँच जाते हैं तब आप सिर्फ एक दुकानदार या बिजनेसमैन नहीं रह जाते बल्कि आप एक मार्केट लीडर बन जाते हैं।
याद रखिये कि बदलाव ही एकमात्र सच है। जो रुक गया वह खत्म हो गया। अपनी पोजीशन को बार-बार चेक कीजिये और जहाँ भी कमजोरी दिखे उसे तुरंत ठीक कीजिये। जब आप इन सभी लेसन को एक साथ जोड़कर देखते हैं तो आपको समझ आता है कि बिजनेस करना सिर्फ सामान बेचना नहीं है बल्कि एक साम्राज्य खड़ा करना है जहाँ नियम आपके चलते हैं।
दोस्तो, याद रखिये कि दुनिया आपको उतनी ही कीमत देगी जितनी आप खुद की लगाएंगे। अगर आप खुद को सेल में लगी हुई किसी पुरानी चीज की तरह पेश करेंगे तो लोग आप पर तरस खा सकते हैं लेकिन आपकी इज्जत कभी नहीं करेंगे। आज ही अपनी स्ट्रेटेजी बदलिये और उस कमोडिटी ट्रैप से बाहर निकलिए जो आपकी ग्रोथ को रोक रहा है। नीचे कमेंट में मुझे बताइये कि आपके बिजनेस का वो कौन सा 'यूनीक' पॉइंट है जो आपको दूसरों से अलग बनाता है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो दिन-रात डिस्काउंट देने की टेंशन में रहते हैं। उठिये और अपनी असली वैल्यू पहचानिये।
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