Behind the Cloud (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बिना करोड़ों के ऑफिस और पुराने घिसे पिटे तरीकों के बिजनेस नहीं चलता। अगर हाँ तो मुबारक हो आप अपनी कंपनी को डूबते हुए देखने की तैयारी कर रहे हैं। मार्क बेनिऑफ की यह कहानी आपकी पुरानी सोच की धज्जियां उड़ा देगी।

आज हम बात करेंगे सेल्सफोर्स की उस अनसुनी कहानी की जिसने पूरी दुनिया के बिजनेस करने का तरीका ही बदल दिया। आइए जानते हैं वो ३ पावरफुल लेसन जो एक छोटे से आईडिया को बिलियन डॉलर एम्पायर बना सकते हैं।


लेसन १ : पुराने खेल के नए नियम बनाओ

अगर आप सोच रहे हैं कि मार्केट के बड़े खिलाड़ियों को उनके ही तरीके से हराकर आप जीत जाएंगे तो शायद आप अभी भी किसी पुरानी फिल्म के हीरो बनने का सपना देख रहे हैं। मार्क बेनिऑफ ने जब सेल्सफोर्स शुरू किया था तब दुनिया पर माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल जैसे दिग्गजों का राज था। वो लोग भारी भरकम सॉफ्टवेयर सीडी में बेचते थे जिसे इंस्टॉल करने में ही इंसान की आधी उम्र निकल जाए। मार्क ने कहा कि हमें सॉफ्टवेयर बेचना ही नहीं है। उन्होंने नारा दिया नो सॉफ्टवेयर। लोग उन्हें पागल समझ रहे थे जैसे कोई हलवाई कहे कि वो बिना शक्कर की मिठाई बेचेगा। लेकिन यही वो मास्टरस्ट्रोक था जिसने पूरी इंडस्ट्री को हिला दिया।

आज के दौर में अगर आप वही कर रहे हैं जो सब कर रहे हैं तो आप सिर्फ भीड़ का हिस्सा हैं। मान लीजिए आप एक चाय की दुकान खोलना चाहते हैं। अब अगर आप भी वही पुरानी काली कढ़ाई और कांच के गिलासों में चाय देंगे तो आप बस एक और चायवाले बनकर रह जाएंगे। लेकिन अगर आप कहें कि मेरी दुकान पर चाय नहीं बल्कि सुकून मिलता है और आप वहां का माहौल बिलकुल अलग कर दें तो लोग आपके पास खिंचे चले आएंगे। मार्क ने भी यही किया। उन्होंने क्लाउड कंप्यूटिंग को तब पेश किया जब लोग इंटरनेट पर ढंग से ईमेल भी नहीं भेज पाते थे। उन्होंने यह साबित किया कि जरूरी नहीं कि आप वही बेचें जो सब बेच रहे हैं। आप वो बेचें जिसकी लोगों को जरूरत है पर उन्हें पता नहीं है।

अक्सर हमें सिखाया जाता है कि बड़े बुजुर्गों के बनाए रास्तों पर चलो। पर बिजनेस में यह सलाह आपको दिवालिया बना सकती है। अगर आप दुनिया के साथ चलेंगे तो दुनिया के पीछे ही रहेंगे। आपको कुछ ऐसा करना होगा जो सुनने में थोड़ा अजीब लगे और करने में थोड़ा रिस्की। सेल्सफोर्स ने सॉफ्टवेयर को सब्सक्रिप्शन मॉडल पर लाकर रख दिया। यानी जब तक इस्तेमाल करो तब तक पैसा दो। यह वैसा ही था जैसे पहले आपको पूरी फिल्म की रील खरीदनी पड़ती थी और अब आप नेटफ्लिक्स पर बस महीने के पैसे देते हैं। यह बदलाव ही उनकी जीत की पहली सीढ़ी बना।

ज्यादातर लोग डरते हैं कि अगर हमने कुछ अलग किया तो लोग हँसेंगे। सच तो यह है कि अगर लोग आप पर नहीं हँस रहे तो समझ लीजिए आपका आईडिया बहुत ही बोरिंग है। मार्क बेनिऑफ पर पूरी इंडस्ट्री हँसी थी। बड़े बड़े एक्सपर्ट्स ने कहा था कि इंटरनेट पर बिजनेस सॉफ्टवेयर कभी नहीं चलेगा। आज वही एक्सपर्ट्स सेल्सफोर्स के ऑफिस के बाहर फोटो खिंचवाते फिरते हैं। असली सक्सेस वही है जहाँ आप अपनी जिद्द से मार्केट के नियमों को ही बदल डालें। तो क्या आप तैयार हैं अपनी खुद की प्लेबुक लिखने के लिए या फिर दूसरों की नकल करके ही खुश रहेंगे।


लेसन २ : मार्केटिंग का मतलब सिर्फ पैसा लुटाना नहीं है

अगर आपको लगता है कि बड़ी मार्केटिंग के लिए आपको बैंक लूटने की जरूरत है या फिर आईपीएल के बीच में करोड़ों का विज्ञापन देना पड़ेगा तो आप अभी भी नादान हैं। सेल्सफोर्स के पास शुरुआत में इतना बजट नहीं था कि वो टीवी पर छा जाएं। तो मार्क बेनिऑफ ने क्या किया। उन्होंने अपने सबसे बड़े दुश्मन यानी सीबेल सिस्टम्स की एनुअल कॉन्फ्रेंस को ही अपना स्टेज बना लिया। उन्होंने वहां जाकर एक नकली धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। उनके लोग चिल्ला रहे थे नो सॉफ्टवेयर। यह वैसा ही था जैसे किसी शादी में जाकर आप दूल्हे से ज्यादा लाइमलाइट चुरा लें। मीडिया को मसाला चाहिए था और मार्क ने उन्हें वो प्लेट में सजाकर दे दिया।

आजकल के स्टार्टअप फाउंडर्स को लगता है कि इंस्टाग्राम पर एड्स चलाकर ही ब्रांड बनता है। असल में मार्केटिंग वो है जो लोगों के दिमाग में घर कर जाए। मान लीजिए आप जिम खोलते हैं और आप शहर के सबसे मोटे आदमी को ढूंढते हैं और उसे चैलेंज देते हैं कि अगर वो पतला हो गया तो आप उसे इनाम देंगे। अब पूरा शहर उस इंसान को देखेगा और साथ में आपके जिम को भी। इसे कहते हैं स्मार्ट मार्केटिंग। मार्क ने पेरिस में एक बार सारी टैक्सियां बुक कर लीं और उनमें अपनी कंपनी के एड्स लगा दिए। लोग अपनी मीटिंग्स पर जाने के लिए परेशान थे और उन्हें सिर्फ सेल्सफोर्स दिख रहा था। मार्क जानते थे कि अगर आप शोर नहीं मचाएंगे तो इस भीड़ भरी दुनिया में आपको कोई नहीं सुनेगा।

अक्सर लोग अपनी कमजोरी को छुपाते हैं पर मार्क ने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाया। उनके पास बड़े ऑफिस नहीं थे तो उन्होंने इवेंट्स को ही अपना ऑफिस बना लिया। उन्होंने दुनिया को यह यकीन दिला दिया कि वो एक क्रांति ला रहे हैं। लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते लोग एक कहानी खरीदते हैं। अगर आपकी कहानी में दम है तो लोग आपके पीछे दीवाने हो जाएंगे। आपने देखा होगा कि कुछ लोग बिना किसी वजह के भी मशहूर हो जाते हैं क्योंकि वो कुछ ऐसा अतरंगी करते हैं कि लोग अपनी नजरें नहीं हटा पाते। बिजनेस में भी यही फंडा काम करता है। अगर आप सीधे सादे बनकर कोने में बैठे रहेंगे तो लोग आपको भूल जाएंगे।

सेल्सफोर्स ने कभी भी सिर्फ फीचर्स की बात नहीं की। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि कैसे वो दुनिया को पुराने सॉफ्टवेयर की गुलामी से आजाद करा रहे हैं। उन्होंने अपने कस्टमर्स को ही अपना हीरो बना दिया। जब आप अपने क्लाइंट को सेलिब्रिटी जैसा फील कराते हैं तो वो आपका सबसे बड़ा मार्केटर बन जाता है। मार्केटिंग का असली जादू यही है कि आप बिना चिल्लाए अपनी बात सबके कानों तक पहुंचा दें। तो अगली बार जब आप अपने बिजनेस की मार्केटिंग के बारे में सोचें तो तिजोरी की तरफ नहीं अपने दिमाग की तरफ देखें। क्या आपमें वो हिम्मत है कि आप अपने कॉम्पिटिटर की नाक के नीचे से बाजी मार सकें।


लेसन ३ : सिर्फ पैसा मत कमाओ, एक मकसद कमाओ

आजकल के दौर में हर कोई बस नोट छापने की मशीन बनना चाहता है। लोग सोचते हैं कि जब बैंक बैलेंस में नौ जीरो लग जाएंगे तब वो समाज के बारे में सोचेंगे। लेकिन मार्क बेनिऑफ ने दुनिया को एक अलग ही आईना दिखाया। उन्होंने कंपनी शुरू करने के पहले दिन ही १-१-१ मॉडल बना लिया था। इसका मतलब था कि कंपनी की १ परसेंट इक्विटी, १ परसेंट प्रोडक्ट और १ परसेंट कर्मचारियों का समय दान में जाएगा। लोग फिर हँसे कि अभी कंपनी का पता ठिकाना नहीं है और ये भाई साहब दान की बातें कर रहे हैं। पर यही वो विजन था जिसने सेल्सफोर्स को एक ब्रांड नहीं बल्कि एक इमोशन बना दिया।

मान लीजिए आपके मोहल्ले में दो हलवाई हैं। एक बहुत ही खड़ूस है जो सिर्फ पैसे से मतलब रखता है और दूसरा वो है जो हर संडे गरीब बच्चों को मुफ्त में जलेबी खिलाता है। आप किसके पास जाएंगे। जाहिर है दूसरे वाले के पास क्योंकि आपको लगता है कि उसके काम में सच्चाई है। मार्क ने भी यही किया। उन्होंने अपने बिजनेस को सिर्फ एक सॉफ्टवेयर कंपनी नहीं बल्कि एक बेहतर दुनिया बनाने का जरिया बना लिया। जब आपके पास एक बड़ा मकसद होता है तो आपके कर्मचारी सिर्फ सैलरी के लिए काम नहीं करते बल्कि वो उस मिशन का हिस्सा बन जाते हैं।

अक्सर हमें लगता है कि बिजनेस और भलाई दो अलग रास्ते हैं। पर सच तो ये है कि अगर आपका बिजनेस किसी की जिंदगी में कोई अच्छी वैल्यू ऐड नहीं कर रहा तो आपका वजूद मिट्टी के बराबर है। सेल्सफोर्स ने दिखाया कि आप दुनिया के सबसे अमीर इंसान बनकर भी अपनी जड़ों से जुड़े रह सकते हैं। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत की उस पुरानी सोच को बदल दिया जहाँ सिर्फ मुनाफा ही खुदा होता था। जब आप दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाते हैं तो कुदरत आपकी मदद के लिए हजार रास्ते खोल देती है। मार्क के इस मॉडल को आज गूगल और दूसरी बड़ी कंपनियां भी फॉलो कर रही हैं।

तो लेसन बहुत साफ है। अगर आप सिर्फ खुद के लिए जी रहे हैं तो आप सिर्फ एक नंबर हैं। लेकिन अगर आप दूसरों के लिए कुछ कर रहे हैं तो आप एक मिसाल हैं। बिजनेस में उतार चढ़ाव तो आएंगे ही पर आपका मकसद आपको हमेशा सीधा खड़ा रखेगा। सेल्सफोर्स की कामयाबी के पीछे सिर्फ कोडिंग और सेल्स नहीं थी बल्कि वो दुआएं भी थीं जो उन लोगों से मिलीं जिनकी मदद इस कंपनी ने की। याद रखिए जेब भरने से आप अमीर तो बन सकते हैं पर महान बनने के लिए आपको दिल बड़ा करना पड़ेगा। तो क्या आप सिर्फ एक कंपनी खड़ी करना चाहते हैं या फिर एक ऐसी विरासत छोड़ना चाहते हैं जिसे दुनिया याद रखे।


बिहाइंड द क्लाउड सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि एक रोडमैप है उन लोगों के लिए जो अपनी शर्तों पर दुनिया बदलना चाहते हैं। मार्क बेनिऑफ ने यह साबित कर दिया कि एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ आईडिया भी पूरी दुनिया की सोच बदल सकता है। बस जरूरत है तो थोड़े पागलपन की और बहुत सारी हिम्मत की। तो उठिए और अपनी खुद की क्रांति शुरू कीजिए।

अगर आपको इस कहानी ने अंदर से हिला दिया है तो कमेंट्स में लिखकर बताइए कि आप अपने बिजनेस या लाइफ में वो कौन सा एक बड़ा बदलाव लाने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपना स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहा है पर डरता है। क्या पता आपकी एक शेयरिंग किसी की तकदीर बदल दे।

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