अगर आपको लगता है कि छोटी गलतियों से कोई फर्क नहीं पड़ता तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का सामान खुद तैयार कर रहे हैं। बिना एक्सीलेंस के आपकी मेहनत सिर्फ टाइम पास है और दुनिया आपके फेलियर पर हँसने के लिए तैयार बैठी है। क्या सच में आप अपनी लाइफ को कबाड़ बनाना चाहते हैं?
गैरी ब्लेयर की किताब एवरीथिंग काउंट्स हमें बताती है कि कैसे छोटी चीजें ही असल में सब कुछ होती हैं। चलिए इस बुक के उन ३ पावरफुल लेसन को समझते हैं जो आपकी पूरी लाइफ बदल देंगे।
लेसन १ : छोटी चीजों की बड़ी ताकत
दोस्तो, अक्सर हमें लगता है कि लाइफ में कुछ बड़ा उखाड़ने के लिए किसी बहुत बड़े धमाके की जरूरत है। हम सोचते हैं कि जिस दिन लॉटरी लगेगी या जिस दिन कोई बड़ा चमत्कार होगा बस उसी दिन से हमारी किस्मत चमक जाएगी। लेकिन गैरी ब्लेयर अपनी किताब एवरीथिंग काउंट्स में हमें एक करारा तमाचा मारते हुए कहते हैं कि भाई साहब असल में हर छोटी चीज मायने रखती है। आप सुबह उठकर अपना बिस्तर ठीक करते हैं या नहीं या फिर आप अपने क्लाइंट को दो मिनट देरी से रिप्लाई करते हैं यह सब आपके फ्यूचर का फैसला कर रहे हैं। हम इंडियंस की सबसे बड़ी बीमारी है चलता है वाला एटीट्यूड। हम सोचते हैं कि अगर एक ईमेल में स्पेलिंग गलत हो गई तो क्या हुआ या अगर मीटिंग में पांच मिनट लेट पहुँचे तो क्या पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन सच तो यह है कि वही पांच मिनट और वही एक गलत स्पेलिंग आपकी प्रोफेशनल इमेज की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है।
मान लीजिए आप एक बहुत ही महंगे और चमकते हुए रेस्टोरेंट में खाना खाने जाते हैं। वहां का एम्बिएंस एकदम झकास है और वेटर ने भी टाई पहनी हुई है। आप इम्प्रेस हो जाते हैं लेकिन जैसे ही आपके सामने पानी का गिलास आता है आप देखते हैं कि उस पर किसी के फिंगरप्रिंट्स लगे हैं और वो थोड़ा गंदा है। बस खेल खत्म। अब चाहे वहां का खाना कितना भी लजीज क्यों न हो आपके दिमाग में बस वही गंदा गिलास घूमेगा। आप बाहर आकर सबको यही कहेंगे कि भाई वहां मत जाना सफाई के नाम पर जीरो हैं वो लोग। उस रेस्टोरेंट के मालिक ने लाखों रुपये इंटीरियर पर खर्च किए लेकिन एक मामूली से गिलास की गंदगी ने उसका पूरा बिजनेस डुबो दिया। यही है एवरीथिंग काउंट्स का असली मतलब। आपकी लाइफ भी उस रेस्टोरेंट जैसी ही है। आप कितनी भी बड़ी बड़ी बातें कर लें लेकिन अगर आपकी छोटी छोटी आदतें खराब हैं तो लोग आपको कभी सीरियसली नहीं लेंगे।
लोग अक्सर कहते हैं कि अरे भाई छोटी बातों पर ध्यान देना तो छोटे लोगों का काम है हम तो बड़े विजन वाले लोग हैं। सच तो यह है कि बिना छोटी ईंटों के कोई बड़ा महल खड़ा नहीं होता। अगर आप अपनी रोज की टू डू लिस्ट के छोटे छोटे टास्क पूरे नहीं कर पा रहे हैं तो आप खाक दुनिया बदलेंगे। एक्सीलेंस कोई ऐसी चीज नहीं है जो आपको किसी दुकान पर मिल जाएगी। यह तो वो छोटी छोटी चॉइस है जो आप हर सेकंड लेते हैं। जब आप जिम में आखिरी एक रैप एक्स्ट्रा मारते हैं जब आप अपनी रिपोर्ट को भेजने से पहले एक बार फिर चेक करते हैं या जब आप अपने पार्टनर को बिना किसी वजह के थैंक यू बोलते हैं तब आप एक्सीलेंस की तरफ एक कदम बढ़ाते हैं। जो इंसान छोटी चीजों को संभालना नहीं जानता उसे कुदरत कभी बड़ी चीजें नहीं सौंपती। इसलिए अपनी लाइफ के हर छोटे काम को उतनी ही शिद्दत से कीजिए जैसे आपकी पूरी साख उसी पर टिकी हो। याद रखिए समंदर भी बूंद बूंद से ही बनता है और आपकी बर्बादी या कामयाबी भी उन्हीं छोटी छोटी आदतों का नतीजा है जिन्हें आप आज नजरअंदाज कर रहे हैं।
लेसन २ : एक्सीलेंस की आदत और अनुशासन
दोस्तो, बहुत से लोगों को लगता है कि एक्सीलेंस कोई ऐसी चीज है जो अचानक से किसी खास दिन हासिल हो जाती है। जैसे कोई अवार्ड फंक्शन हो या प्रमोशन का दिन। लेकिन गैरी ब्लेयर हमें समझाते हैं कि एक्सीलेंस कोई मंजिल नहीं है बल्कि यह एक सफर है जो हर दिन तय करना पड़ता है। असल में एक्सीलेंस एक आदत है। अगर आप अपने काम को आधे मन से करते हैं और सोचते हैं कि जब बड़ा मौका आएगा तब आप अपना बेस्ट देंगे तो आप खुद को धोखा दे रहे हैं। जो इंसान अपनी छोटी सी दुकान पर ठीक से झाड़ू नहीं लगा सकता वो कल को मल्टीनेशनल कंपनी क्या खाक चलाएगा। अनुशासन का मतलब यह नहीं है कि आप खुद को किसी जेल में बंद कर लें बल्कि इसका मतलब है खुद को उन घटिया बहानों से आजाद करना जो आपको आगे बढ़ने से रोकते हैं। हमारे यहाँ लोगों को लगता है कि जुगाड़ ही सब कुछ है। हम सोचते हैं कि काम बस किसी तरह निपट जाए लेकिन यही सोच हमें एवरेज बनाकर छोड़ देती है।
मान लीजिए आप अपने किसी दोस्त की शादी में जाने के लिए एक दर्जी के पास अपना सूट सिलवाने देते हैं। दर्जी बहुत बड़ा नाम है और वो बड़ी बड़ी बातें करता है। लेकिन जब आप सूट लेने जाते हैं तो देखते हैं कि उसकी एक बाजू दूसरी बाजू से आधी इंच छोटी है। दर्जी कहता है कि अरे भाई साहब शादी में इतनी भीड़ होगी कौन आपके हाथ नापने आएगा थोड़ा एडजस्ट कर लीजिए। क्या आप दोबारा उस दर्जी के पास जाएंगे? बिलकुल नहीं। उस दर्जी के लिए वो सिर्फ आधा इंच था लेकिन आपके लिए वो उसका काम के प्रति घटिया रवैया था। यही फर्क होता है एक प्रोफेशनल और एक नौसिखिए में। एक प्रोफेशनल जानता है कि एक्सीलेंस का मतलब है हर उस चीज पर ध्यान देना जिसे बाकी लोग अनदेखा कर देते हैं। अगर आप अपनी फील्ड के टॉप १ परसेंट में आना चाहते हैं तो आपको उन चीजों में भी परफेक्शन लाना होगा जो किसी को दिखाई नहीं देतीं।
आजकल के दौर में सबको इंस्टेंट कामयाबी चाहिए। सबको लगता है कि कोई रील वायरल हो जाए और रातों रात फेम मिल जाए। लेकिन बिना अनुशासन के मिली कामयाबी उस गुब्बारे जैसी है जिसमें एक छोटी सी पिन लगते ही उसकी हवा निकल जाएगी। अनुशासन का मतलब है वह काम करना जो जरूरी है चाहे आपका मन हो या न हो। जब आप थक चुके हों तब भी अपनी फाइल पूरी करना या जब नींद आ रही हो तब भी अपनी पढ़ाई पूरी करना ही असल अनुशासन है। एक्सीलेंस का मतलब यह नहीं है कि आप कभी गलती नहीं करेंगे बल्कि इसका मतलब यह है कि आप अपनी गलतियों को छुपाने के बजाय उनसे सीखेंगे और अगली बार उन्हें नहीं दोहराएंगे। जब आप अपनी लाइफ में एक्सीलेंस को एक स्टैंडर्ड बना लेते हैं तो कामयाबी आपके पीछे झक मारकर आती है। आपको किसी को इम्प्रेस करने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि आपका काम खुद चीख चीख कर आपकी काबिलियत बताता है। याद रखिए दुनिया में टैलेंटेड लोगों की कमी नहीं है लेकिन अनुशासित लोग बहुत कम हैं और जीत हमेशा अनुशासन की ही होती है।
लेसन ३ : अपनी जिम्मेदारी खुद लेना
दोस्तो, हम इंसानों की एक बहुत ही पुरानी और पसंदीदा आदत है और वो है दूसरों पर उंगली उठाना। अगर हमारा करियर नहीं चल रहा तो सरकार खराब है। अगर हम फिट नहीं हैं तो जिम बहुत दूर है। और अगर हम अमीर नहीं बन पा रहे तो शायद हमारे सितारे ही गर्दिश में हैं। गैरी ब्लेयर अपनी किताब एवरीथिंग काउंट्स में हमें आईना दिखाते हुए कहते हैं कि जब तक आप अपनी लाइफ की स्टियरिंग व्हील किसी और के हाथ में रखेंगे तब तक आप अपनी मंजिल तक कभी नहीं पहुँच पाएंगे। अकाउंटेबिलिटी यानी अपनी जिम्मेदारी खुद लेना ही वो पावर है जो एक आम इंसान को लीडर बनाती है। एक्सीलेंस का सीधा संबंध इस बात से है कि आप अपनी गलतियों का दोष किसे देते हैं। अगर आप बहाने बनाने में एक्सपर्ट हैं तो समझ लीजिए कि आप अपनी तरक्की के दरवाजे खुद बंद कर रहे हैं।
मान लीजिए आप एक क्रिकेट मैच खेल रहे हैं और आप जीरो पर आउट हो जाते हैं। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह कि आप कहें कि पिच खराब थी या अंपायर ने गलत फैसला दिया। इस रास्ते पर चलने से आपको थोड़ा मानसिक सुकून तो मिल जाएगा लेकिन अगली बार भी आप जीरो पर ही आउट होंगे क्योंकि आपने अपनी कमी पर ध्यान ही नहीं दिया। दूसरा रास्ता यह है कि आप मान लें कि आपका शॉट सिलेक्शन गलत था और आपको और प्रैक्टिस की जरूरत है। बस इसी पल से आपकी ग्रोथ शुरू हो जाती है। लाइफ में भी यही होता है। जब आप यह कहना बंद कर देते हैं कि मेरी किस्मत खराब है और यह कहना शुरू करते हैं कि मैं अपनी मेहनत बढ़ाऊंगा तब आप असल मायने में बड़े बन जाते हैं। जो लोग हर छोटी हार के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराते हैं दुनिया उन्हें कभी सीरियसली नहीं लेती और वो बस एक शिकायत करने वाले इंसान बनकर रह जाते हैं।
अकाउंटेबिलिटी का मतलब सिर्फ अपनी हार को स्वीकार करना नहीं है बल्कि अपनी प्रोग्रेस का हिसाब रखना भी है। अगर आप आज कल से बेहतर नहीं हैं तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ आपकी है। बहुत से लोग सोचते हैं कि कोई फरिश्ता आएगा और उनकी लाइफ बदल देगा। सच तो यह है कि वो फरिश्ता आप खुद हैं। जब आप अपने हर काम की १०० परसेंट जिम्मेदारी लेते हैं तो आपके पास कंट्रोल आ जाता है। आपको पता होता है कि अगर आज रिजल्ट नहीं मिल रहे तो इसका मतलब है कि आपके एफर्ट्स में कहीं न कहीं कोई कमी है जिसे आपको ही सुधारना है। एक्सीलेंस का रास्ता जिम्मेदारी के कांटों से होकर ही गुजरता है। जो इंसान जिम्मेदारी उठाने से डरता है वो कभी एक्सीलेंस का स्वाद नहीं चख सकता। इसलिए आज से ही खुद से ये वादा कीजिए कि आप अपने फेलियर का टोकरा किसी और के सिर पर नहीं फोड़ेंगे। जब आप अपनी लाइफ के खुद मालिक बन जाते हैं तो कामयाबी के रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं।
दोस्तो, एवरीथिंग काउंट्स सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि यह जीने का एक तरीका है। यह हमें याद दिलाती है कि हमारी लाइफ की छोटी छोटी चॉइस ही हमारा भविष्य तय करती हैं। अगर आप भी उस एवरेज लाइफ से ऊब चुके हैं और कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो आज से ही अपनी हर छोटी आदत पर ध्यान देना शुरू करें। नीचे कमेंट में मुझे बताइए कि वो कौन सी एक छोटी सी आदत है जिसे आप कल से बदलने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा अपनी किस्मत को कोसता रहता है। चलिए साथ मिलकर एक्सीलेंस की इस जर्नी को शुरू करते हैं।
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