क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अपना बिजनेस बढ़ाने के चक्कर में अपनी जड़ों को ही जला रहे हैं। मुबारक हो आप बहुत जल्दी सड़क पर आने वाले हैं और आपके कॉम्पिटिटर आपकी इसी बेवकूफी का इन्तजार कर रहे हैं। बिना सोचे समझे मार्केट फैलाने की आपकी यह भूख आपको कहीं का नहीं छोड़ेगी।
क्या आप जानते हैं कि दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियाँ सिर्फ एक गलत कदम की वजह से अर्श से फर्श पर आ गिरीं। आज हम क्रिस जुक की किताब बियॉन्ड द कोर से वह ३ बड़े लेसन सीखेंगे जो आपको मार्केट का राजा बना देंगे और आपकी ग्रोथ को रॉकेट की तरह उड़ा देंगे।
लेसन १ : अपनी जड़ों को मत भूलना वरना मार्केट तुम्हें भूल जाएगा
आजकल हर दूसरे इंसान को लगता है कि वो एलन मस्क का खोया हुआ भाई है। कल एक छोटी सी दुकान खोली नहीं कि आज उन्हें पूरी दुनिया फतह करनी है। क्रिस जुक अपनी किताब में सबसे पहले यही समझाते हैं कि भाई साहब, अपनी औकात और अपनी जड़ों यानी कोर बिजनेस को कभी मत भूलना। कोर बिजनेस वह चीज है जो आपके घर का चूल्हा जलाती है और ग्राहकों के दिल में आपकी जगह बनाती है। लोग अक्सर क्या करते हैं। एक काम में थोड़ी सक्सेस मिली नहीं कि उन्हें लगता है कि अब तो हम सब कुछ कर सकते हैं। हलवाई की दुकान अच्छी चली तो सीधा रॉकेट बनाने का सपना देखने लगते हैं। यह कॉन्फिडेंस नहीं, यह वो बीमारी है जिसे बिजनेस की दुनिया में सुसाइड कहते हैं।
सोचिए एक ऐसी कंपनी के बारे में जो अपने समय की राजा थी लेकिन उसे लगा कि उसे और बड़ा बनना है। उसने अपने असली काम को छोड़कर ऐसी जगह हाथ डाला जहाँ उसका कोई लेना देना नहीं था। नतीजा क्या हुआ। मार्केट ने उसे थप्पड़ मारकर बाहर निकाल दिया। क्रिस जुक कहते हैं कि आपकी ९० परसेंट वैल्यू आपके कोर बिजनेस से आती है। अगर आप अपने असली काम पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो आप एक खोखले पेड़ की तरह हैं जो पहली आंधी में गिर जाएगा। लोग नए मार्केट के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कोई पड़ोसी की नई गाड़ी देखकर अपनी पुरानी साइकिल को लात मार रहा हो। यह भूल जाते हैं कि वो पुरानी साइकिल ही उन्हें वक्त पर ऑफिस पहुँचाती थी।
आज के दौर में इंडिया में स्टार्टअप्स की बाढ़ आई हुई है। हर कोई फण्डिंग लेकर यहाँ वहाँ हाथ मार रहा है। लेकिन असली खिलाड़ी वही है जिसे पता है कि उसका हार्टलैंड क्या है। अगर आप अपने सबसे वफादार ग्राहकों को इग्नोर करके नए लोगों को इम्प्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं, तो आप उस आशिक की तरह हैं जो अपनी बीवी को छोड़कर पड़ोस की शादी में इम्प्रेस करने की कोशिश कर रहा है। अंत में आप अकेले ही बचेंगे। अपनी जड़ों को मजबूत करना बोरिंग लग सकता है लेकिन यही वो चीज है जो आपको लंबे समय तक टिकाए रखती है।
जब आपका कोर मजबूत होता है तब आप उस पर एक पूरी इमारत खड़ी कर सकते हैं। बिना नीव के महल सिर्फ कहानियों में अच्छे लगते हैं हकीकत में वो सिर्फ मलबे का ढेर बनते हैं। इसलिए पहले अपने घर के शेर बनिए फिर जंगल जीतने की सोचिए। अगर आपकी सर्विस में दम नहीं है और आप मार्केटिंग के भरोसे नया मार्केट जीतना चाहते हैं तो आप सिर्फ अपना वक्त और पैसा दोनों बर्बाद कर रहे हैं। याद रखिये मार्केट बहुत बेरहम है। वो आपकी पुरानी गलतियों को नहीं भूलता और आपकी नई कोशिशों को तब तक भाव नहीं देता जब तक उसे आप पर भरोसा न हो। और भरोसा सिर्फ एक ही चीज से आता है और वो है आपका पुराना रिकॉर्ड यानी आपका मजबूत कोर।
लेसन २ : अडजेसेंट मार्केट का खेल यानी पड़ोसी की थाली में झांकना
जब आपका कोर बिजनेस सेट हो जाता है तो मन में एक खुजली होती है कि अब और क्या नया करें। क्रिस जुक कहते हैं कि यहाँ सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग सीधा मंगल ग्रह पर जमीन खरीदने निकल पड़ते हैं। भाई साहब, अगर आप जूते बेच रहे हैं तो अचानक से सॉफ्टवेयर बेचना शुरू मत कीजिये। इसे कहते हैं अडजेसेंट मार्केट की ताकत। यानी अपने पुराने काम से सटा हुआ कोई नया काम ढूंढना। यह वैसा ही है जैसे आप दाल-चावल बेच रहे थे और अब आपने अचार बेचना शुरू कर दिया। लॉजिक सिंपल है, जो दाल खरीदेगा वो अचार भी लेगा ही। लेकिन हमारे यहाँ के जोश से भरे बिजनेसमैन को लगता है कि अगर वो दाल बेच रहे हैं तो अब उन्हें सीधा लोहा पिघलाने वाली फैक्ट्री डालनी चाहिए।
इमेजिन कीजिये एक ऐसी जिम चैन के बारे में जो बहुत अच्छा काम कर रही है। अब उन्हें ग्रो करना है। समझदारी क्या होगी। वो प्रोटीन सप्लीमेंट बेचना शुरू कर दें या जिम के कपड़े बेचना शुरू करें। यह उनके काम से जुड़ा हुआ है। लेकिन अगर वो जिम का मालिक सोचे कि अब मैं अपनी जिम के अंदर ही चाइनीज फ़ूड का ठेला लगाऊंगा तो यह ग्रोथ नहीं बर्बादी है। लोग जिम में पसीना बहाने आते हैं मंचूरियन खाने नहीं। क्रिस जुक हमें यही समझाते हैं कि नए मार्केट में कदम रखते समय आपके पास एक रिपीटिबल फार्मूला होना चाहिए। यानी जो तरीका आपने पहले बिजनेस में अपनाया था क्या वही तरीका यहाँ भी काम आएगा। अगर नहीं, तो आप अपनी कब्र खुद खोद रहे हैं।
अक्सर लोग अपनी ईगो की वजह से ऐसे मार्केट में घुस जाते हैं जहाँ उनका कोई नाम नहीं होता। उन्हें लगता है कि उनका नाम ही काफी है। पर जनाब, मार्केट आपकी फोटो देखकर नहीं आपकी वैल्यू देखकर चलता है। अगर आप अपने कोर बिजनेस से बहुत दूर चले गए तो आपके पुराने वफादार ग्राहक भी कंफ्यूज हो जाएंगे कि आप आखिर करना क्या चाहते हैं। यह वैसा ही है जैसे कोई मशहूर सिंगर अचानक से क्रिकेट टीम का कोच बन जाए। टैलेंट होगा अपनी जगह पर लेकिन फील्ड पूरी तरह अलग है।
क्रिस जुक का यह लेसन हमें सिखाता है कि सीढ़ियां एक-एक करके चढ़ी जाती हैं, सीधा छत पर छलांग लगाने वाले अक्सर अस्पताल में मिलते हैं। अपने बिजनेस के आसपास के मौकों को पहचानिए। देखिए कि आपका मौजूदा ग्राहक आपसे और क्या उम्मीद करता है। क्या आप उनकी कोई और छोटी प्रॉब्लम सॉल्व कर सकते हैं। अगर हाँ, तो वही आपका अगला बड़ा मार्केट है। बिना सिर-पैर के विस्तार करना विस्तार नहीं बल्कि बिखराव है। और जब बिजनेस बिखरता है तो समेटने के लिए भी कोई नहीं मिलता।
लेसन ३ : एक्जीक्यूशन ही असली किंग है वरना आईडिया तो रद्दी के भाव बिकते हैं
क्या आपको भी लगता है कि आपके पास एक ऐसा आईडिया है जो पूरी दुनिया बदल देगा। अगर हाँ, तो ठंडे पानी से मुँह धो लीजिए क्योंकि मार्केट को आपके आईडिया से रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता। क्रिस जुक का तीसरा सबसे बड़ा लेसन यही है कि आप मार्केट को कितना भी अच्छे से चुन लें, अगर आपका एक्जीक्यूशन यानी काम को पूरा करने का तरीका घटिया है, तो आपकी हार पक्की है। लोग अक्सर मीटिंग रूम में बैठकर बड़ी-बड़ी पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन बनाते हैं और खुद को अगला बड़ा टाइकून समझने लगते हैं। लेकिन जब मैदान में उतरने की बात आती है, तो उनके हाथ-पाँव फूल जाते हैं। यह वैसा ही है जैसे कोई इंसान घंटों तक यूट्यूब पर स्विमिंग के वीडियो देखे और फिर सीधा समंदर में छलांग लगा दे। नतीजा आपको पता ही है।
बिजनेस को एक्सपैंड करते समय सबसे बड़ी चुनौती होती है अपनी क्वालिटी को मेंटेन रखना। अक्सर जब कंपनियाँ बड़ी होती हैं, तो उनका सिस्टम इतना पेचीदा हो जाता है कि एक छोटा सा फैसला लेने में भी महीनों लग जाते हैं। क्रिस जुक कहते हैं कि अगर आप ग्रो करना चाहते हैं, तो आपको अपनी रफ्तार और सादगी को बनाए रखना होगा। लेकिन हमारे यहाँ क्या होता है। जैसे ही बिजनेस थोड़ा बढ़ा, मालिक साहब एसी कैबिन में बैठकर हुक्म चलाने लगते हैं और ग्राउंड रियलिटी से उनका कनेक्शन कट जाता है। उन्हें लगता है कि उनके एम्प्लोयी उनके विजन को वैसे ही समझते हैं जैसे वो खुद। पर असलियत में एम्प्लोयी सिर्फ इस बात का इंतज़ार कर रहे होते हैं कि कब शाम के छः बजें और वो घर जाएँ। अगर आपकी टीम आपके विजन के साथ नहीं जुड़ी है, तो आपका एक्सपेंशन सिर्फ कागजों पर ही अच्छा लगेगा।
सोचिए उस कंपनी के बारे में जिसने एक शहर में बहुत नाम कमाया। अब उन्होंने दूसरे शहर में ब्रांच खोली लेकिन वहाँ के मैनेजर को बस यह बता दिया गया कि "काम कर लेना"। न कोई ट्रेनिंग, न कोई सिस्टम, न कोई सपोर्ट। अब ग्राहक वहां जाकर पुरानी वाली सर्विस ढूंढता है और उसे मिलता है सिर्फ कचरा। फिर क्या होता है। सोशल मीडिया पर गालियां पड़ती हैं और ब्रांड की इज्जत मिट्टी में मिल जाती है। क्रिस जुक हमें आगाह करते हैं कि बिना एक मजबूत स्ट्रक्चर और सही लोगों के नया मार्केट जीतना नामुमकिन है। आप अपनी जीत को तभी दोहरा सकते हैं जब आपके पास एक लॉजिक हो जिसे कोई भी फॉलो कर सके।
अंत में बात सिर्फ इतनी है कि क्या आप अपने काम को लेकर वाकई सीरियस हैं या बस भीड़ का हिस्सा बनना चाहते हैं। दुनिया उन्हीं को याद रखती है जो अंत तक टिके रहते हैं और अपने वादे को पूरा करते हैं। तो क्या आप तैयार हैं अपनी जड़ों को मजबूत करके आसमान छूने के लिए। फैसला आपका है क्योंकि मार्केट और वक्त किसी का इंतज़ार नहीं करते। आज ही अपने कोर बिजनेस को पहचानिए और सही दिशा में कदम बढ़ाइए। याद रखिए, महानता सिर्फ सोचने में नहीं, उसे सच कर दिखाने में है।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#BusinessGrowth #EntrepreneurshipIndia #ChrisZook #BookSummary #SuccessMindset
_