क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो हर साल 'सेफ' गोल्स बनाकर खुद को दिलासा देते हैं और फिर साल के अंत में अपनी मि़डियोक्रिटी का जश्न मनाते हैं। बधाई हो। आप अपनी कंपनी और करियर को धीरे-धीरे कब्र की ओर ले जा रहे हैं क्योंकि बड़े गोल्स से डरना ही फेलियर की पहली सीढ़ी है।
आज हम बिल डेविडसन की बुक ब्रेकथ्रू से सीखेंगे कि कैसे दुनिया की महान कंपनियां डरावने गोल्स सेट करती हैं। यह समरी आपको बताएगी कि इम्पॉसिबल को पॉसिबल कैसे बनाना है ताकि आप भीड़ का हिस्सा न बनें।
लेसन १ : आउटरेजियस ऑब्जेक्टिव्स - यानी 'पागलपन' वाले गोल्स सेट करना
ज्यादातर लोग और कंपनियां अपनी लाइफ में क्या करती हैं। वो पिछले साल के रिजल्ट्स देखती हैं और कहती हैं कि इस साल हम दस परसेंट ज्यादा मेहनत करेंगे। वाह। क्या क्रांतिकारी सोच है। बिल डेविडसन कहते हैं कि अगर आप सिर्फ दस परसेंट की ग्रोथ चाह रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि बस वक्त काट रहे हैं। असल ब्रेकथ्रू तब आता है जब आप ऐसे गोल्स सेट करते हैं जिन्हें सुनकर आपके कॉम्पिटिटर्स को लगे कि आपका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। इसे ही बुक में 'आउटरेजियस ऑब्जेक्टिव्स' कहा गया है।
सोचिए अगर आप एक मोहल्ले की छोटी सी किराने की दुकान चला रहे हैं और आप गोल सेट करते हैं कि अगले दो साल में मुझे पूरे शहर की सप्लाई चैन कंट्रोल करनी है। आपके पड़ोसी हंसेंगे। आपके रिश्तेदार आपको डॉक्टर को दिखाने की सलाह देंगे। लेकिन यही वो मोमेंट है जहां से असली खेल शुरू होता है। जब गोल इतना बड़ा हो कि पुराने तरीकों से काम न चले तो आपका दिमाग नए रास्ते खोजना शुरू करता है। अगर गोल छोटा है तो आप वही घिसे-पिटे तरीके अपनाएंगे जो आपके दादाजी के जमाने से चले आ रहे हैं।
मान लीजिए राहुल नाम का एक लड़का है जो जिम जाता है। राहुल का गोल है कि उसे बस अपना पेट थोड़ा कम करना है। वह रोज ट्रेडमिल पर दस मिनट टहलता है और घर आकर समोसे दबा लेता है। क्यों। क्योंकि उसका गोल उसे चैलेंज नहीं कर रहा। अब मान लीजिए राहुल का गोल है कि उसे अगले छह महीने में नेशनल लेवल की बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप जीतनी है। अब क्या राहुल समोसे छुएगा। बिल्कुल नहीं। अब उसका हर मिनट कीमती है। उसका हर वर्कआउट इंटेंस है। बड़े गोल्स आपकी औकात नहीं बढ़ाते बल्कि वो आपको आपकी असली काबिलियत से मिलवाते हैं।
कंपनियों के मामले में भी यही होता है। जब मोटोरोला ने पहली बार मोबाइल फोन बनाने का सोचा था तब लोगों को लगा था कि बिना तार के बात करना जादू टोना है। अगर वो सिर्फ लैंडलाइन फोन को थोड़ा बेहतर बनाने का सोचते तो आज हम शायद अब भी पीसीओ के बाहर लाइन में खड़े होते। आउटरेजियस गोल का मतलब है अपनी लिमिट्स को धक्का देना। यह सिर्फ प्रॉफिट बढ़ाने के बारे में नहीं है। यह मार्केट के नियम बदलने के बारे में है।
लेकिन भाई साहब ध्यान रहे। सिर्फ बड़े सपने देखना काफी नहीं है। अगर आप रात को सपने में खुद को एलन मस्क समझ रहे हैं और सुबह उठकर ग्यारह बजे तक सो रहे हैं तो वह ब्रेकथ्रू नहीं बल्कि केवल एक अच्छी नींद है। आउटरेजियस ऑब्जेक्टिव्स के लिए एक खास तरह की जिद चाहिए होती है। आपको यह मानना होगा कि जो चीज आज इम्पॉसिबल लग रही है वह सिर्फ इसलिए इम्पॉसिबल है क्योंकि अभी तक किसी ने उसे करने की हिम्मत नहीं दिखाई। अपनी टीम को बुलाइए और उनसे कहिए कि हमें चांद पर जाना है। जो डर कर भाग जाएं उन्हें जाने दीजिए क्योंकि ब्रेकथ्रू डरपोक लोगों के लिए नहीं बना है।
लेसन २ : कल्चर ऑफ इनोवेशन - जब हर एम्प्लॉई एक साइंटिस्ट बन जाए
अगर आपने गोल तो सेट कर लिया कि आपको दुनिया जीतनी है लेकिन आपकी टीम अभी भी लंच ब्रेक के बाद दो घंटे सोने के सपने देखती है, तो आपका ब्रेकथ्रू सिर्फ कागजों पर ही रहेगा। बिल डेविडसन कहते हैं कि महान कंपनियां केवल प्रोडक्ट्स नहीं बनातीं, वो एक ऐसा 'कल्चर' बनाती हैं जहाँ फेलियर को गाली नहीं बल्कि एक लेसन माना जाता है। कल्चर ऑफ इनोवेशन का मतलब यह नहीं है कि आपने ऑफिस में एक टेबल टेनिस की मेज रख दी या फ्री में कॉफी पिला दी। इसका असली मतलब है कि आपके ऑफिस का सबसे जूनियर लड़का भी आपसे आकर कह सके कि सर, आपका यह आईडिया एकदम बकवास है और मेरे पास इससे बेहतर प्लान है।
जरा सोचिए, अगर किसी कंपनी में बॉस 'हिटलर' बना बैठा हो तो क्या वहां कोई नया आईडिया आएगा। कभी नहीं। वहां सिर्फ 'जी हुजूर' करने वाले लोग होंगे। और जहां सिर्फ 'जी हुजूर' होता है, वहां इनोवेशन की मौत हो जाती है। एक मजेदार एग्जांपल लेते हैं। मान लीजिए एक सॉफ्टवेयर कंपनी है जहाँ बॉस ने कह रखा है कि जो भी गलती करेगा उसकी सैलरी कटेगी। अब वहां का डेवलपर क्या करेगा। वह वही पुराना, सेफ और बोरिंग कोड लिखेगा जिसे वह पिछले पांच साल से लिख रहा है। वह कुछ भी नया ट्राई नहीं करेगा क्योंकि उसे पता है कि अगर कुछ गड़बड़ हुई तो शाम को उसके घर में दाल-रोटी के लाले पड़ सकते हैं।
अब इसके उलट एक ऐसी कंपनी को देखिए जहाँ इनोवेशन का कल्चर है। वहां बॉस कहता है कि इस महीने जिसने सबसे शानदार फेलियर फेस किया उसे बोनस मिलेगा। अब वहां का माहौल देखिए। लोग पागलों की तरह नए एक्सपेरिमेंट्स करेंगे। वो कुछ ऐसा बनाने की कोशिश करेंगे जो पहले कभी नहीं बना। इनोवेशन का मतलब सिर्फ रॉकेट साइंस नहीं होता। अगर आप अपनी डिलीवरी का टाइम पांच मिनट कम करने का कोई नया तरीका ढूंढ लेते हैं, तो वह भी एक ब्रेकथ्रू इनोवेशन है। लेकिन इसके लिए आपको अपनी टीम को यह आजादी देनी होगी कि वो रिस्क ले सकें।
सच्चाई तो यह है कि ज्यादातर इंडियन स्टार्टअप्स में इनोवेशन के नाम पर सिर्फ दूसरे की कॉपी की जाती है। अगर पड़ोसी ने चाय का ठेला खोला और वह चल पड़ा, तो हम भी उसके सामने 'एमबीए चाय वाला' बनकर खड़े हो जाते हैं। यह इनोवेशन नहीं, यह भेड़चाल है। ब्रेकथ्रू कंपनियां भेड़चाल नहीं चलतीं, वो अपना रास्ता खुद बनाती हैं। वो अपने एम्प्लॉई को सिर्फ एक मशीन का पुर्जा नहीं समझतीं बल्कि उन्हें एक विजन का हिस्सा बनाती हैं।
जब आपकी कंपनी में हर इंसान यह सोचने लगे कि मैं आज के काम को कल से बेहतर कैसे कर सकता हूं, तब समझ लीजिए कि ब्रेकथ्रू आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। इसके लिए आपको डर का माहौल खत्म करना होगा। डर और क्रिएटिविटी कभी एक ही कमरे में नहीं रह सकते। अगर आपकी टीम आपसे डरती है तो वो कभी आपको वो आईडिया नहीं देगी जो आपकी कंपनी की किस्मत बदल सकता है। इसलिए बॉस बनना छोड़िए और एक ऐसा लीडर बनिए जो लोगों को गलतियां करने का हौसला दे सके।
लेसन ३ : स्ट्रैटेजिक अलाइनमेंट - जब सब एक ही दिशा में धक्का मारें
आपने गोल बड़ा रख लिया और टीम को आजादी भी दे दी। लेकिन अगर मार्केटिंग वाली टीम उत्तर की तरफ भाग रही है और सेल्स वाली टीम दक्षिण की तरफ, तो आपकी कंपनी कहीं नहीं पहुंचेगी। वह बस बीच में खड़ी होकर गोल-गोल घूमती रहेगी। बिल डेविडसन इसे 'स्ट्रैटेजिक अलाइनमेंट' कहते हैं। इसका मतलब है कि कंपनी का हर एक रुपया, हर एक घंटा और हर एक एम्प्लॉई उस एक 'आउटरेजियस गोल' की तरफ फोकस्ड होना चाहिए। अगर आपका गोल है दुनिया की सबसे तेज कार बनाना, तो आपके एकाउंटेंट को भी पता होना चाहिए कि वह जो बिजली का बिल बचा रहा है, वह उस कार की स्पीड बढ़ाने में कैसे मदद करेगा।
मान लीजिए एक शादी का घर है। दूल्हे के पापा चाहते हैं कि खाना बेस्ट हो। मम्मी चाहती हैं कि डेकोरेशन सबसे महंगा हो। और दूल्हा चाहता है कि बस उसकी एंट्री में आग लग जाए। अब अगर इन तीनों के बीच अलाइनमेंट नहीं है, तो क्या होगा। पता चला कि डेकोरेशन तो बहुत भारी हो गया लेकिन खाने में नमक गायब है क्योंकि सारा बजट तो फूलों पर उड़ गया। एंड में मेहमान गालियां देते हुए ही जाएंगे। बिजनेस में भी यही होता है। अगर आपके डिपार्टमेंट्स आपस में लड़ रहे हैं या उन्हें यह नहीं पता कि बड़ा लक्ष्य क्या है, तो आप कभी ब्रेकथ्रू हासिल नहीं कर पाएंगे।
अलाइनमेंट का मतलब है क्लेरिटी। जब तक एक चपरासी से लेकर सीईओ तक सबको यह नहीं पता कि इस साल हम क्या बड़ा उखाड़ने वाले हैं, तब तक सब अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग बजाएंगे। अक्सर कंपनियों में मीटिंग्स होती हैं जो तीन-तीन घंटे चलती हैं लेकिन निकलता कुछ नहीं है। क्यों। क्योंकि किसी को यही नहीं पता कि हम यह सब कर क्यों रहे हैं। ब्रेकथ्रू कंपनियां फालतू के कामों को कचरे के डिब्बे में डाल देती हैं। वो केवल उन्हीं चीजों पर फोकस करती हैं जो उन्हें उनके बड़े लक्ष्य के करीब ले जाती हैं।
सच्चाई तो यह है कि अलाइनमेंट करने में सबसे ज्यादा तकलीफ ईगो की वजह से होती है। हर मैनेजर चाहता है कि उसका डिपार्टमेंट सबसे बड़ा दिखे, चाहे कंपनी डूबे या तैरे। लेकिन एक असली लीडर वही है जो इन सबको एक धागे में पिरो सके। आपको अपनी पूरी ताकत को एक लेजर बीम की तरह इस्तेमाल करना होगा। एक बल्ब की रोशनी पूरे कमरे में फैलती है पर वह दीवार नहीं तोड़ सकती। लेकिन वही रोशनी जब लेजर बन जाती है, तो लोहे को भी काट देती है। स्ट्रैटेजिक अलाइनमेंट आपकी कंपनी को वही लेजर बनाता है।
तो भाई साहब, अगर आप सच में कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो अपनी बिखरी हुई एनर्जी को समेटिए। उन प्रोजेक्ट्स को बंद कर दीजिए जो सिर्फ आपका समय खा रहे हैं और आपको आपके बड़े लक्ष्य से दूर ले जा रहे हैं। जब आपकी पूरी ऑर्गनाइजेशन एक सुर में गाएगी, तभी मार्केट में आपकी सफलता का शोर मचेगा। ब्रेकथ्रू रातों-रात नहीं मिलता, यह हर दिन सही दिशा में एक साथ कदम बढ़ाने का नतीजा होता है।
बिल डेविडसन की यह बुक हमें सिखाती है कि मि़डियोक्रिटी एक चॉइस है। अगर आप छोटे गोल्स के साथ खुश हैं, तो यह दुनिया आपको बहुत जल्द भुला देगी। लेकिन अगर आपमें वो पागलपन है कि आप आउटरेजियस गोल्स सेट कर सकें, एक ऐसा कल्चर बना सकें जहाँ आईडियाज की कद्र हो और अपनी पूरी टीम को एक दिशा में अलाइन कर सकें, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। अब समय आ गया है कि आप अपनी डायरी उठाएं और वो एक गोल लिखें जिससे आपको डर लगता है। क्या आप तैयार हैं अपने करियर या बिजनेस में ब्रेकथ्रू लाने के लिए। कमेंट्स में अपना वो एक 'आउटरेजियस गोल' शेयर करें जिसे आप अचीव करना चाहते हैं। चलिए मिलकर इस इम्पॉसिबल दिखने वाले सफर को शुरू करते हैं।
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