Beyond E (Hindi)


अगर आप आज भी पुराने तरीके से सेल्स कर रहे हैं तो मुबारक हो। आप अपने कॉम्पिटिटर को अमीर बनाने का नेक काम कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न करना वैसा ही है जैसे रेस में बैलगाड़ी लेकर उतरना। आपकी पुरानी स्ट्रेटेजी बस आपको मार्केट से बाहर का रास्ता दिखाएगी।

स्टीफन डियोरियो की किताब बियॉन्ड ई हमें सिखाती है कि कैसे मॉडर्न टेक्नोलॉजी सेल्स और मार्केटिंग को पूरी तरह बदल रही है। चलिए जानते हैं वह तीन बड़े लेसन जो आपके बिजनेस को डूबने से बचाकर उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।


लेसन १ : टेक्नोलॉजी सिर्फ एक टूल नहीं बल्कि आपकी ग्रोथ का इंजन है।

आज के दौर में अगर आप सोचते हैं कि ऑफिस में बस एक कंप्यूटर रख लेने से आप डिजिटल हो गए हैं तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे हाथ में आईफोन लेकर आप खुद को स्टीव जॉब्स समझने लगें। स्टीफन डियोरियो अपनी किताब बियॉन्ड ई में बहुत साफ कहते हैं कि टेक्नोलॉजी कोई सजावट की चीज नहीं है जिसे आप बस दिखावे के लिए इस्तेमाल करें। यह तो आपके बिजनेस का वह इंजन है जो आपको उस जगह ले जाएगा जहाँ आपके सपने बसते हैं।

जरा सोचिए उस दुकानदार के बारे में जो आज भी हाथ से लिखे बिल काटता है। जब तक वह एक बिल बनाता है तब तक उसका पड़ोसी अमेजन पर दस ऑर्डर पैक कर चुका होता है। यहाँ फर्क मेहनत का नहीं बल्कि समझदारी का है। लोग कहते हैं कि वे बहुत बिजी हैं इसलिए नई चीजें नहीं सीख सकते। यह तो वही बात हुई कि आप गड्ढा खोद रहे हैं और कोई आपको मशीन देने आए तो आप कहें कि भाई अभी फुर्सत नहीं है मैं खोदने में बहुत बिजी हूँ।

सेल्स और मार्केटिंग में टेक्नोलॉजी का मतलब सिर्फ ईमेल भेजना नहीं है। इसका मतलब है वह सिस्टम बनाना जो आपके सो जाने के बाद भी आपके लिए काम करे। अगर आपकी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी में ऑटोमेशन नहीं है तो आप असल में मार्केटिंग नहीं कर रहे बल्कि बस अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पुराने जमाने में लोग घर घर जाकर सामान बेचते थे और आज लोग रील बनाकर करोड़ों कमा रहे हैं। जो लोग बदलाव से डरते हैं वे अक्सर इतिहास बन जाते हैं और जो बदलाव को अपना लेते हैं वे इतिहास रचते हैं।

क्या आपको याद है वह दोस्त जो हमेशा कहता था कि उसे ऑनलाइन शॉपिंग पर भरोसा नहीं है। आज वही बंदा सेल के चक्कर में रात के बारह बजे तक जागता है। यही ताकत है टेक्नोलॉजी की। जब आप इसे अपने सेल्स प्रोसेस में जोड़ते हैं तो आप केवल सामान नहीं बेचते बल्कि आप एक सिस्टम बेचते हैं। सिस्टम वह होता है जो थकता नहीं है और जो कभी छुट्टी पर नहीं जाता।

आपका कॉम्पिटिटर शायद आपसे ज्यादा टैलेंटेड न हो लेकिन अगर उसके पास बेहतर टूल्स हैं तो वह आपको आराम से हरा देगा। यह एक कड़वा सच है जिसे जितनी जल्दी मान लिया जाए उतना अच्छा है। टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करने का मतलब है अपने कस्टमर के आने से पहले ही उसे पहचान लेना। अगर आप अभी भी वही घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं तो आप बस अपनी दुकान बंद होने का इंतजार कर रहे हैं।

सेल्स में डेटा का इस्तेमाल करना वैसा ही है जैसे अंधेरे कमरे में टॉर्च जलाना। बिना डेटा के आप बस अंधेरे में तीर चला रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि निशाना लग जाए। लेकिन असलियत में वह तीर बस आपकी अपनी ही साख को नुकसान पहुँचा रहा है। स्टीफन हमें सिखाते हैं कि जब हम टेक्नोलॉजी को अपनी स्ट्रेटेजी का हिस्सा बनाते हैं तो हम अनिश्चितता को खत्म कर देते हैं। अब यह आपकी पसंद है कि आप बैलगाड़ी चलाना चाहते हैं या फिर रॉकेट की सवारी करना चाहते हैं।


लेसन २ : कस्टमर के अनुभव को पर्सनल बनाना ही असली जीत है।

क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि आपका फोन आपकी बातें सुन रहा है। आपने अभी मन में सोचा कि एक नया जूता लेना है और अगले ही पल फेसबुक पर जूतों के विज्ञापन आने लगे। इसे कुछ लोग जादू कहते हैं और कुछ लोग डर जाते हैं। लेकिन सच तो यह है कि यही वह लेवल है जहाँ सेल्स और मार्केटिंग आज खड़ी है। स्टीफन डियोरियो कहते हैं कि अगर आप हर कस्टमर को एक ही चश्मे से देख रहे हैं तो आप असल में किसी को नहीं देख रहे हैं। आज का कस्टमर बहुत डिमांडिंग है। उसे वैसी ही इज्जत चाहिए जैसी किसी शादी में फूफा जी को मिलती है।

अगर आप अपने क्लाइंट को वही घिसा पिटा मैसेज भेजते हैं जो आपने हजार लोगों को भेजा है तो वह उसे पढ़ता भी नहीं है। वह मैसेज सीधा डिलीट होता है या स्पैम में जाता है। आज का जमाना वन साइज फिट्स ऑल का नहीं है। आपको हर कस्टमर के लिए अपनी स्ट्रेटेजी को वैसे ही फिट करना होगा जैसे टेलर कपड़े सिलता है। अगर आप लूज फिटिंग वाली मार्केटिंग करेंगे तो आपका ब्रांड किसी पुराने झोले जैसा दिखेगा।

टेक्नोलॉजी हमें वह सुपरपावर देती है जिससे हम जान सकें कि कस्टमर को क्या चाहिए और कब चाहिए। जरा उस सेल्समैन के बारे में सोचिए जो गर्मी के मौसम में आपको स्वेटर बेचने की कोशिश करे। आप उसे क्या कहेंगे। शायद यही कि भाई पहले दिमाग का इलाज करा ले। लेकिन असल में बहुत सारे बिजनेस आज भी यही कर रहे हैं। वे बिना सोचे समझे बस अपना प्रोडक्ट लोगों के मुंह पर मार रहे हैं।

पर्सनलाइजेशन का मतलब यह नहीं है कि आप बस ईमेल के ऊपर उनका नाम लिख दें। यह तो वही बात हुई कि आपने शादी का कार्ड भेजा और ऊपर पेन से नाम लिख दिया लेकिन अंदर की दावत में नमक कम है। असली पर्सनलाइजेशन वह है जब आप कस्टमर की जरूरतों को उनसे बेहतर समझने लगें। जब आपकी सर्विस उन्हें यह महसूस कराए कि आप सच में उनकी फिक्र करते हैं। डाटा का सही इस्तेमाल आपको यह बताता है कि कस्टमर ने पिछली बार क्या खरीदा था और उसे आगे क्या पसंद आ सकता है।

कुछ लोग कहते हैं कि इतनी टेक्नोलॉजी से बिजनेस में इंसानियत खत्म हो जाएगी। लेकिन हकीकत में यह टेक्नोलॉजी ही है जो आपको हजारों लोगों से एक साथ जुड़ने और फिर भी हर किसी को स्पेशल फील कराने की ताकत देती है। अगर आप एक साथ दस हजार लोगों को अलग अलग और उनके काम की सलाह दे सकते हैं तो वही तो असली स्किल है। जो बिजनेस आज भी रैंडम कॉल्स और बिना सिर पैर के विज्ञापनों पर पैसा लुटा रहे हैं वे बस अपनी बर्बादी का जश्न मना रहे हैं।

कस्टमर आज कल बहुत स्मार्ट हो गया है। उसे पता है कि कब उसे बेचा जा रहा है और कब उसकी मदद की जा रही है। जब आप टेक्नोलॉजी की मदद से उसे सही समय पर सही चीज देते हैं तो वह आपकी सेल्स नहीं बल्कि उसकी मदद बन जाती है। और जब आप लोगों की मदद करते हैं तो पैसा अपने आप पीछे पीछे आता है। अगर आप अभी भी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कस्टमर खुद चलकर आपकी दुकान पर आएगा तो शायद आप बहुत लंबी नींद में हैं। जाग जाइए क्योंकि आपके कस्टमर को अब घर बैठे ही दुनिया भर के ऑप्शन मिल रहे हैं।


लेसन ३ : सेल्स और मार्केटिंग के बीच की दीवार को गिराना होगा।

पुराने समय से चला आ रहा एक बड़ा ड्रामा है सेल्स और मार्केटिंग टीम के बीच की लड़ाई। यह बिल्कुल वैसी ही लड़ाई है जैसी सास और बहू के बीच होती है जहाँ हर कोई दूसरे को नीचा दिखाने का मौका ढूंढता है। मार्केटिंग टीम कहती है कि हमने तो बहुत बढ़िया लीड्स दी थीं लेकिन सेल्स टीम उन्हें क्लोज नहीं कर पाई। दूसरी तरफ सेल्स टीम रोना रोती है कि मार्केटिंग वालों ने जो डेटा दिया है वह तो किसी कबाड़ी की लिस्ट जैसा है। स्टीफन डियोरियो अपनी किताब बियॉन्ड ई में कहते हैं कि अगर आप जीतना चाहते हैं तो इस दीवार को तोड़ना होगा।

आज के डिजिटल युग में सेल्स और मार्केटिंग दो अलग रास्ते नहीं बल्कि एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। अगर एक भी पहिया अपनी मर्जी से चलेगा तो आपकी गाड़ी सिर्फ गोल गोल घूमेगी और आप कहीं नहीं पहुँच पाएंगे। टेक्नोलॉजी इन दोनों के बीच वह पुल है जो इन्हें जोड़ता है। जब आपका मार्केटिंग डेटा सीधे सेल्स टीम के पास पहुंचता है और सेल्स टीम का फीडबैक मार्केटिंग को बेहतर बनाता है तब असली ग्रोथ शुरू होती है।

जरा कल्पना कीजिए एक ऐसी क्रिकेट टीम की जहाँ बैट्समैन को फर्क ही नहीं पड़ता कि बॉलर क्या कर रहा है। ऐसी टीम सिर्फ हारने के लिए ही मैदान में उतरती है। बिजनेस में भी यही होता है जब मार्केटिंग वाले कुछ और ही कहानी सुना रहे होते हैं और सेल्स वाले ग्राउंड पर जाकर कुछ और ही बेच रहे होते हैं। इससे कस्टमर कन्फ्यूज हो जाता है और कन्फ्यूज कस्टमर कभी अपनी जेब से पैसे नहीं निकालता।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके आप एक ऐसा रिवॉल्विंग दरवाजा बना सकते हैं जहाँ जानकारी का फ्लो कभी नहीं रुकता। जब आप कस्टमर की जर्नी को शुरू से अंत तक ट्रैक करते हैं तो आपको पता चलता है कि वह कहाँ पर अटक रहा है। क्या उसे आपकी मार्केटिंग पसंद नहीं आई या फिर आपकी सेल्स पिच में दम नहीं था। जब आपके पास यह क्लैरिटी होती है तो आप किसी पर उंगली नहीं उठाते बल्कि समस्या को जड़ से खत्म करते हैं।

जो लोग आज भी इन दोनों डिपार्टमेंट्स को अलग अलग कमरों में बिठाकर काम करवा रहे हैं वे असल में अपने बिजनेस का गला घोंट रहे हैं। मार्केटिंग का काम सिर्फ अवेयरनेस फैलाना नहीं है और सेल्स का काम सिर्फ डील साइन करना नहीं है। दोनों का एक ही मकसद है और वह है कस्टमर की लाइफ में वैल्यू ऐड करना। जब आप टेक्नोलॉजी की मदद से इन दोनों को एक ही पेज पर ले आते हैं तो आपका बिजनेस एक वेल ऑयल्ड मशीन की तरह काम करने लगता है।

अब समय आ गया है कि आप अपनी टीम को यह समझाएं कि वे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। बिना अच्छी मार्केटिंग के सेल्स टीम का काम पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल हो जाएगा और बिना अच्छी सेल्स के मार्केटिंग का सारा बजट पानी में बह जाएगा। तकनीक आपको वह चश्मा देती है जिससे आप पूरी तस्वीर साफ देख सकते हैं। तो अब बहाने बनाना बंद कीजिए और अपनी टीम को एक साथ जोड़कर मार्केट पर राज करने की तैयारी कीजिए।


बिजनेस करना कोई तुक्का नहीं बल्कि एक साइंस है और बियॉन्ड ई हमें वही साइंस सिखाती है। अब फैसला आपके हाथ में है कि आप कल की तकनीकों से आज का बिजनेस चलाना चाहते हैं या फिर आज की हार को कल की कहानी बनाना चाहते हैं। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो आज भी पुराने तरीकों में फंसे हुए हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपके बिजनेस में सबसे बड़ी चुनौती क्या है। चलिए मिलकर इस डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनते हैं।

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