क्या आप अभी भी वही घिसे पिटे प्रोडक्ट्स बनाकर करोड़पति बनने का सपना देख रहे हैं। सच तो यह है कि आपका आईडिया शायद कूड़ेदान के लायक भी नहीं है क्योंकि आप मार्केट की नब्ज ही नहीं पकड़ पा रहे। बधाई हो आप अपनी मेहनत और पैसा दोनों डुबाने की पूरी तैयारी में हैं।
लेकिन रुकिए। अगर आप नहीं चाहते कि आपका स्टार्टअप भी उन 90 परसेंट फेलियर्स की लिस्ट में शामिल हो तो आपको गैरी लिन के ये सीक्रेट्स जानने होंगे। आज हम ब्लॉकबस्टर प्रोडक्ट्स बनाने के उन 3 जादुई लेसन्स की बात करेंगे जो आपकी तकदीर बदल सकते हैं।
लेसन १ : विजन के प्रति अटूट निष्ठा और कमिटमेंट
अगर आपको लगता है कि एक शानदार प्रोडक्ट बस एक अच्छे आईडिया से बन जाता है तो शायद आप अभी भी परियों की कहानियों में जी रहे हैं। मार्केट में हजारों आईडिया रोज दम तोड़ देते हैं क्योंकि उनके पीछे कोई ठोस विजन नहीं होता। गैरी लिन और रिचर्ड रेली अपनी रिसर्च में साफ कहते हैं कि एक ब्लॉकबस्टर प्रोडक्ट तभी पैदा होता है जब लीडरशिप का विजन एकदम क्रिस्टल क्लियर हो और उस पर पूरी टीम का अटूट विश्वास हो। इसे आप एक ऐसी जिद्दी आशिक की तरह समझ सकते हैं जिसे पता है कि उसे क्या चाहिए और वह उसे पाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
जरा सोचिए आप एक नया स्मार्टफोन बनाने निकले हैं। आधी टीम कह रही है कि कैमरा अच्छा करो और बाकी आधी कह रही है कि बैटरी बढ़ाओ। अंत में आप एक ऐसा खिचड़ी प्रोडक्ट बना देते हैं जो न इधर का रहता है और न उधर का। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप जिम तो जा रहे हैं लेकिन वर्कआउट के बाद रोज समोसे और जलेबी पेल रहे हैं। बिना विजन के प्रोडक्ट बनाना मतलब बिना एड्रेस के चिट्ठी भेजना है जो कहीं नहीं पहुँचती। ब्लॉकबस्टर टीमें अपने विजन को लेकर इतनी पागल होती हैं कि वे छोटे मोटे बदलावों के लिए अपने मूल आईडिया से समझौता नहीं करतीं।
हमारे देश के चुलबुले मार्केट को ही देख लीजिए। यहाँ लोग आईडिया तो मार्क जुकरबर्ग वाला लेकर आते हैं लेकिन मेहनत सरकारी ऑफिस के बाबू जितनी भी नहीं करना चाहते। अगर आपकी टीम में विजन को लेकर कंफ्यूजन है तो समझ लीजिए कि आपका प्रोडक्ट लॉन्च होने से पहले ही वेंटिलेटर पर है। एक लीडर का काम सिर्फ हुक्म चलाना नहीं बल्कि अपनी टीम के खून में उस विजन को इंजेक्ट करना है। जब तक आपकी टीम को यह नहीं लगेगा कि वे दुनिया बदलने वाला कुछ बना रहे हैं तब तक वे सिर्फ अपनी शिफ्ट पूरी करेंगे।
विजेता वही होता है जो मुश्किल समय में भी अपने विजन को नहीं छोड़ता। जब लोग आपके आईडिया पर हँस रहे हों और फंड्स की कमी हो तब सिर्फ आपका विजन ही आपको डूबने से बचाता है। जो लोग हर हफ्ते अपना प्लान बदलते हैं वे असल में विजनरी नहीं बल्कि कंफ्यूज आत्माएं हैं। इसलिए अगर आप सच में कुछ बड़ा बनाना चाहते हैं तो पहले एक ऐसा विजन बनाइये जिसके लिए आप अपनी रातों की नींद कुर्बान कर सकें। वरना मार्केट तो वैसे भी उन लोगों से भरा पड़ा है जो बस सर्वाइव करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह पहला लेसन हमें सिखाता है कि क्लैरिटी ही असली पावर है। जब तक आप खुद श्योर नहीं होंगे कि आप क्या बना रहे हैं तब तक दुनिया आप पर दांव क्यों लगाएगी। अब जब आपका विजन सेट हो चुका है तो अगला कदम यह देखना है कि क्या असल में किसी को आपके इस महान आईडिया की जरूरत भी है या नहीं। यहीं से हमारा दूसरा और सबसे प्रैक्टिकल लेसन शुरू होता है।
लेसन २ : कस्टमर की आवाज को दिल से लगाना
क्या आपको भी लगता है कि आप दुनिया के सबसे बड़े जीनियस हैं और जो आप बनाएंगे जनता उसे सर आँखों पर बिठा लेगी। अगर हाँ तो मुबारक हो आप एक बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं। गैरी लिन हमें सिखाते हैं कि एक ब्लॉकबस्टर प्रोडक्ट कमरे के अंदर बंद होकर नहीं बल्कि मार्केट की धूल फाँककर बनता है। कस्टमर कोलैबोरेशन कोई फॉर्मेलिटी नहीं बल्कि सर्वाइवल की चाबी है। लोग अक्सर अपनी लैब में बैठकर कुछ ऐसा अजूबा तैयार करते हैं जिसकी जरूरत शायद इस ग्रह पर किसी को नहीं है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपनी गर्लफ्रेंड के लिए बड़े प्यार से करेले का हलवा बनाएं और उम्मीद करें कि वह आपको किस करेगी।
मार्केट में असली खिलाड़ी वही है जो प्रोडक्ट बनाने से पहले कस्टमर के पास जाकर उनकी तकलीफें सुनता है। अगर आप कस्टमर से बात नहीं कर रहे तो आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं और यकीन मानिए आपका निशाना अपनी ही टांग पर लगने वाला है। अक्सर लोग सोचते हैं कि कस्टमर को क्या पता उसे क्या चाहिए। लेकिन सच तो यह है कि कस्टमर को अपनी समस्या पता होती है और आपको उसका समाधान बेचना है। अगर आप उनकी अनकही बातों को नहीं सुन पा रहे तो आप बस एक और नाकाम दुकानदार बनकर रह जाएंगे।
जरा अपने आस पास के उन स्टार्टअप्स को देखिए जो करोड़ों का फंड पाकर भी बंद हो गए। वजह क्या थी। उन्होंने वह बनाया जो उन्हें अच्छा लगा न कि वह जो मार्केट को चाहिए था। वे अपनी ही तारीफों के पुल बांधने में इतने बिजी थे कि उन्होंने कस्टमर के फीडबैक को कचरा समझ लिया। यह तो वही बात हुई कि आप डॉक्टर के पास जाएं और वह आपकी बीमारी सुने बिना ही आपको जबरदस्ती पेट दर्द की गोली दे दे क्योंकि उसे वही बनाना पसंद है। ऐसी जिद्दी कंपनियां बहुत जल्दी इतिहास के पन्नों में दफन हो जाती हैं।
ब्लॉकबस्टर प्रोडक्ट्स बनाने वाली टीमें कस्टमर को अपना पार्टनर मानती हैं। वे प्रोटोटाइप लेकर मार्केट में उतरते हैं और लोगों की गालियां और तारीफें दोनों को बड़े चाव से सुनते हैं। जब तक आप कस्टमर के जूतों में पैर डालकर नहीं देखेंगे तब तक आपको पता नहीं चलेगा कि कंकड़ कहाँ चुभ रहा है। यहाँ आपका ईगो आपके काम का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर आपको लगता है कि आपका प्रोडक्ट परफेक्ट है तो समझ लीजिए कि आपके पतन की शुरुआत हो चुकी है।
कस्टमर के साथ यह रिश्ता आपको वह इनसाइट्स देता है जो बड़े बड़े डेटा साइंटिस्ट भी नहीं दे सकते। उनकी छोटी छोटी शिकायतें ही आपके अगले बड़े फीचर का रास्ता खोलती हैं। तो अपनी उस आलीशान कुर्सी को छोड़िए और बाहर जाकर लोगों से मिलिए। पूछिए उनसे कि उनकी जिंदगी में क्या कमी है जिसे आप दूर कर सकते हैं। जब आप उनके लिए कुछ बनाएंगे तभी वे आपके लिए अपना बटुआ खोलेंगे। अब जब आप कस्टमर की नब्ज पकड़ चुके हैं तो समय आता है उस माहौल को बनाने का जहाँ असल में जादू होता है।
लेसन ३ : प्रेशर कुकर एनवायरनमेंट और डेडिकेटेड टीम
अगर आपको लगता है कि एक ब्लॉकबस्टर प्रोडक्ट किसी सरकारी दफ्तर जैसी सुस्ती में बन जाएगा जहाँ लोग बस लंच ब्रेक का इंतजार करते हैं तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। गैरी लिन कहते हैं कि महान प्रोडक्ट्स हमेशा एक प्रेशर कुकर वाले माहौल में जन्म लेते हैं। यहाँ प्रेशर का मतलब अपनी टीम का खून चूसना नहीं है बल्कि उन्हें एक ऐसे मिशन पर लगाना है जहाँ उनके पास फालतू की चीजों के लिए वक्त ही न हो। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एग्जाम से एक रात पहले पढ़ाई करते हैं। उस वक्त जो आउटपुट निकलता है वह पूरे साल की पढ़ाई पर भारी पड़ता है क्योंकि आपका पूरा फोकस सिर्फ एक ही लक्ष्य पर होता है।
ज्यादातर कंपनियां गलती यह करती हैं कि वे एक ही टीम को दस अलग अलग काम सौंप देती हैं। अब बेचारा एम्प्लॉई सुबह ईमेल का जवाब दे रहा है दोपहर में मीटिंग्स में चाय पी रहा है और शाम को रिपोर्ट बना रहा है। ऐसे माहौल में इनोवेशन नहीं सिर्फ थकान पैदा होती है। ब्लॉकबस्टर बनाने के लिए आपको अपनी बेस्ट टीम को बाकी दुनिया से काट देना चाहिए। उन्हें एक अलग कमरे में डालिए उन्हें सारे संसाधनों से लैस करिए और कहिए कि जब तक यह प्रोडक्ट तैयार नहीं होता तब तक दुनिया की कोई और फिक्र मत करो।
यह वैसा ही है जैसे आप शादी की तैयारी कर रहे हों। अगर घर का हर बंदा हलवाई से लेकर टेंट वाले तक सब संभाल रहा है तो समझ लीजिए कि मेहमानों को कच्ची पूड़ियां ही मिलेंगी। लेकिन अगर आप काम बांट देते हैं और एक ग्रुप को सिर्फ खाने की जिम्मेदारी देते हैं तभी स्वाद उभर कर आता है। ब्लॉकबस्टर प्रोडक्ट्स के पीछे ऐसी ही पागल टीमें होती हैं जो अपने काम के प्यार में इतनी डूबी होती हैं कि उन्हें संडे और मंडे का फर्क ही पता नहीं चलता। अगर आपकी टीम में वह जुनून और प्रेशर झेलने की ताकत नहीं है तो आप बस एक एवरेज प्रोडक्ट ही बना पाएंगे।
अक्सर देखा गया है कि लोग डेडलाइन को मजाक समझते हैं। लेकिन बिना डेडलाइन के काम करना वैसा ही है जैसे बिना गोल पोस्ट के फुटबॉल खेलना। आप बस दौड़ते रहेंगे लेकिन गोल कभी नहीं होगा। प्रेशर कुकर माहौल आपकी टीम की असली काबिलियत को बाहर निकालता है। जब वक्त कम हो और काम पहाड़ जैसा तो दिमाग के वो हिस्से खुलते हैं जो सामान्य स्थिति में सोए रहते हैं। यह माहौल डराने के लिए नहीं बल्कि सबको एक धागे में पिरोने के लिए होता है।
तो अपनी कंपनी में वह आग लगाइए जो सबको जलने के लिए नहीं बल्कि चमकने के लिए मजबूर कर दे। अपनी टीम को फालतू की कॉर्पोरेट बकवास और लंबी मीटिंग्स से आजादी दिलाइए। उन्हें वह माहौल दीजिए जहाँ वे सिर्फ और सिर्फ उस एक ब्लॉकबस्टर प्रोडक्ट के बारे में सोच सकें। जब पूरी टीम का फोकस लेजर की तरह एक ही पॉइंट पर होगा तभी वह मार्केट की चट्टान को चीर पाएगा।
ब्लॉकबस्टर प्रोडक्ट बनाना कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची समझी स्ट्रेटेजी है। यह आपके विजन आपकी कस्टमर के प्रति ईमानदारी और आपकी टीम के पागलपन का नतीजा है। अगर आप आज भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं तो संभल जाइए वरना मार्केट आपको याद भी नहीं रखेगा। उठिए अपने विजन को साफ करिए कस्टमर से बात करिए और अपनी टीम को एक मिशन पर लगा दीजिए। क्या आप तैयार हैं अपना पहला ब्लॉकबस्टर बनाने के लिए या फिर आप भी उन लोगों की भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं जो सिर्फ दूसरों की कामयाबी की कहानियाँ पढ़ते हैं। नीचे कमेंट्स में बताइए कि इन तीनों में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा झकझोर गया। अभी शुरुआत करिए क्योंकि कल कभी नहीं आता।
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