अगर आप आज भी वही पुराने घिसे पिटे तरीके से बिजनेस कर रहे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द बर्बाद होने वाले हैं। अपनी छोटी सी दुकान या स्टार्टअप को महान बनाने का सपना तो देख लिया पर एम्प्लॉईज को इंसान समझना भूल गए। ऐसे ही चलता रहा तो आपकी कंपनी भी इतिहास के कूड़ेदान में मिलेगी।
आज के इस आर्टिकल में हम बिल ह्युलेट और डेव पैकार्ड की जिंदगी से वो ३ सीक्रेट लेसन सीखेंगे जिन्होंने एचपी को दुनिया की सबसे महान कंपनी बनाया। चलिए जानते हैं कैसे उन्होंने सिलीकॉन वैली की नींव रखी।
लेसन १ : मैनेजमेंट बाय वॉकिंग अराउंड (एमबीवाएए)
आजकल के बॉसेस को लगता है कि एअर कंडिशन्ड केबिन में बैठकर ज़ूम कॉल पर चिल्लाना ही असली लीडरशिप है। पर बिल और डेव ने दुनिया को सिखाया कि असली धंधा केबिन में नहीं बल्कि ऑफिस के गलियारों में होता है। इस पहले लेसन को ध्यान से समझिये क्योंकि यह आपके ईगो की धज्जियां उड़ाने वाला है।
बिल ह्युलेट और डेव पैकार्ड ने जब एचपी की शुरुआत की थी तब उनके पास कोई बहुत बड़ा बंगला या आलीशान ऑफिस नहीं था। उन्होंने एक छोटे से गैराज से शुरुआत की थी। लेकिन जैसे ही कंपनी बड़ी हुई उन्होंने एक बहुत ही अजीब काम शुरू किया। उन्होंने अपने केबिन के दरवाजे ही हटा दिए। जी हां आज के जमाने में जहां छोटे से मैनेजर को भी लगता है कि उसका अलग केबिन होना चाहिए वहां इन दिग्गजों ने सबके बीच बैठना पसंद किया।
इसे कहते हैं मैनेजमेंट बाय वॉकिंग अराउंड। इसका मतलब ये नहीं है कि आप हाथ में कॉफी का मग लेकर बस ऑफिस में टहल रहे हैं और देख रहे हैं कि कौन काम कर रहा है और कौन रील देख रहा है। इसका असली मतलब है अपने लोगों से जुड़ना। डेव पैकार्ड अक्सर बिना बताए किसी भी एम्प्लॉई के पास जाकर बैठ जाते थे और पूछते थे कि भाई क्या नया बना रहे हो।
आज के बॉसेस को लगता है कि अगर वो एम्प्लॉई के पास जाकर बैठेंगे तो उनकी इज्जत कम हो जाएगी। उन्हें लगता है कि डराना ही मोटिवेशन है। लेकिन बिल और डेव का मानना था कि जब आप अपने एम्प्लॉई के पास जाकर उसकी समस्या सुनते हैं तो उसे लगता है कि उसकी कदर है। सोचिये अगर आपका बॉस आपके पास आए और बोले कि यार वो कल वाला सर्किट कैसे डिजाइन किया था मुझे भी सिखाओ। आपकी छाती तो गर्व से चौड़ी हो जाएगी। लेकिन नहीं हमारे यहाँ तो बॉस को लगता है कि वो भगवान है और एम्प्लॉई बस एक नंबर।
ह्युलेट और पैकार्ड ने भरोसा करना सिखाया। एक बार एक एम्प्लॉई ने लैब का दरवाजा लॉक कर दिया था क्योंकि उसे लगा कि सामान चोरी हो जाएगा। बिल ह्युलेट ने वो ताला तोड़ दिया और वहां एक नोट छोड़ दिया कि एचपी में हम अपने लोगों पर भरोसा करते हैं और यहाँ कुछ भी लॉक नहीं रहता। ये सुनकर आज के जमाने के वो लोग शॉक हो जाएंगे जो ऑफिस के पेन तक पर नजर रखते हैं जैसे वो कोहिनूर हीरा हो।
अगर आप अपनी कंपनी को महान बनाना चाहते हैं तो अपनी कुर्सी को छोड़िये और अपने लोगों के बीच जाइये। उनके साथ चाय पीजिये उनकी परेशानियों को समझिये। जब आप एम्प्लॉई को इंसान समझते हैं तब वो आपके लिए मशीन की तरह नहीं बल्कि एक पार्टनर की तरह काम करता है। यही वह बुनियाद थी जिसने एचपी को सिर्फ एक कंपनी नहीं बल्कि एक लेजेंड बना दिया। बिना इस भरोसे के आप सिर्फ एक जेल चला रहे हैं कंपनी नहीं। और जेल में लोग सिर्फ भागने का रास्ता ढूंढते हैं काम करने का नहीं।
इसी भरोसे और इंसानी रिश्ते की बदौलत एचपी ने वो मुकाम हासिल किया जिसके बारे में बाकी कंपनियां सिर्फ सपना देखती हैं। लेकिन क्या सिर्फ अच्छे रिश्ते काफी थे। बिलकुल नहीं क्योंकि रिश्ते तो चाय की दुकान पर भी बन जाते हैं पर करोड़ों की कंपनी के लिए कुछ और भी चाहिए था।
लेसन २ : प्रॉफिट से पहले प्रोडक्ट की क्वालिटी
ज्यादातर स्टार्टअप आजकल बस एक ही सपने के साथ पैदा होते हैं कि कैसे जल्दी से जल्दी फंडिंग मिल जाए और कब वो अपनी कंपनी को किसी बड़े बेवकूफ को बेचकर निकल लें। उनका ध्यान इस बात पर होता है कि ग्राफ ऊपर कैसे जाए चाहे अंदर माल कचरा ही क्यों न हो। लेकिन बिल और डेव का स्टाइल थोड़ा अलग था। वो उस जमाने के लोग थे जब लोग काम की इज्जत करते थे न कि सिर्फ बैंक बैलेंस की।
उनका मानना था कि अगर आपका प्रोडक्ट दुनिया की कोई बड़ी समस्या हल नहीं कर रहा है तो आपका धंधा करना बेकार है। आज के समय में कंपनियां ऐसे फोन बनाती हैं जो दो साल में अपने आप मर जाते हैं ताकि आप नया फोन खरीदें। इसे कहते हैं प्लांड ऑबसोलेसेंस। पर एचपी के शुरुआती दिनों में बिल और डेव का कहना था कि हम ऐसा सामान बनाएंगे जो कभी फेल न हो। उनका एक ऑसिलेटर नाम का मशीन था जिसे डिज्नी ने अपनी फिल्म फैंटासिया के लिए खरीदा था। वो मशीन इतनी दमदार थी कि लोग कहते थे कि इसे तोड़ना नामुमकिन है।
आजकल के मार्केटिंग गुरु आपको सिखाएंगे कि पैकेजिंग पर करोड़ों खर्च करो भले ही अंदर बिस्किट की जगह पत्थर हो। पर बिल और डेव कहते थे कि अगर प्रोडक्ट में दम है तो मार्केटिंग की जरूरत कम पड़ेगी। उन्होंने कभी भी प्रॉफिट को अपना पहला मकसद नहीं बनाया। उनके लिए प्रॉफिट एक रिजल्ट था न कि गोल। सुनने में यह बात बहुत फिल्मी लगती है पर असलियत यही है। अगर आप सिर्फ पैसे के पीछे भागेंगे तो आप शायद एक अमीर दुकानदार बन जाएं पर आप एक महान कंपनी कभी नहीं बना पाएंगे।
जरा सोचिये आप एक ऐसी कार कंपनी चला रहे हैं जिसके ब्रेक कभी कभी फेल हो जाते हैं। एक नॉर्मल बिजनेसमैन सोचेगा कि यार रिकॉल करेंगे तो करोड़ों का घाटा हो जाएगा छोड़ो कौन सा रोज एक्सीडेंट होता है। लेकिन बिल और डेव के लिए यह मौत जैसा था। उनकी नजर में क्वालिटी ही उनकी इज्जत थी। अगर प्रोडक्ट में एक छोटा सा भी डिफेक्ट होता था तो वो पूरी टीम को तब तक चैन से नहीं बैठने देते थे जब तक वो ठीक न हो जाए।
आज के दौर में जहां लोग शॉर्टकट ढूंढते हैं वहां बिल और डेव का यह लेसन एक तमाचे जैसा है। वो कहते थे कि धंधा करने का हक सिर्फ उसे है जो समाज को कुछ वैल्यू दे रहा है। अगर आप सिर्फ लोगों की जेब काटने के लिए बैठे हैं तो आप बिजनेसमैन नहीं बल्कि एक पॉकेटमार हैं जिसने बस एक महंगा सूट पहन रखा है। जब आप क्वालिटी पर ध्यान देते हैं तो कस्टमर आपका फैन बन जाता है। और एक फैन जो एडवरटाइजिंग करता है वो करोड़ों के विज्ञापन से भी ज्यादा ताकतवर होती है।
यही वजह थी कि एचपी के प्रोडक्ट्स को देखकर लोग कहते थे कि भाई ये तो एचपी का है मतलब बेस्ट ही होगा। यह भरोसा कमाने में दशकों लगते हैं और इसे गंवाने में बस एक घटिया प्रोडक्ट। लेकिन सिर्फ प्रोडक्ट अच्छा होने से काम नहीं चलता। उसे बनाने वाले हाथ भी तो खुश होने चाहिए।
लेसन ३ : एम्प्लॉई फर्स्ट कल्चर और कलेक्टिव सक्सेस
आजकल की कॉर्पोरेट दुनिया में एम्प्लॉईज को 'रिसोर्स' कहा जाता है जैसे वो कोई कोयला या पेट्रोल हों जिसे जलाकर काम निकालना है। कंपनियां बड़े-बड़े विजन स्टेटमेंट लिखती हैं पर मंडे आते ही एम्प्लॉई की हालत किसी बंधुआ मजदूर जैसी कर दी जाती है। बिल और डेव ने ६०-७० साल पहले ही समझ लिया था कि अगर आप अपने लोगों का ख्याल रखेंगे तो आपके लोग आपके बिजनेस का ख्याल रखेंगे। इसे ही 'एचपी वे' का सबसे जरूरी हिस्सा माना गया।
बिल और डेव के समय में जब अमेरिका में मंदी आई तो बाकी कंपनियां धड़ाधड़ अपने वर्कर्स को नौकरी से निकाल रही थीं ताकि उनका प्रॉफिट कम न हो। लेकिन एचपी ने कुछ ऐसा किया जो आज के जमाने के 'हायर एंड फायर' वाले स्टार्टअप्स सोच भी नहीं सकते। उन्होंने किसी को नौकरी से नहीं निकाला। इसके बजाय उन्होंने पूरी कंपनी के साथ एक मीटिंग की और फैसला लिया कि हर कोई हफ्ते में एक दिन कम काम करेगा और १० परसेंट कम सैलरी लेगा। मालिक से लेकर चपरासी तक सबने यह कुर्बानी दी। नतीजा यह हुआ कि किसी का घर नहीं उजड़ा और मंदी खत्म होते ही एचपी के पास दुनिया की सबसे वफादार टीम थी।
आज के बॉसेस को लगता है कि एम्प्लॉई को दिवाली पर एक सोन पापड़ी का डिब्बा और घटिया क्वालिटी की टी-शर्ट दे दी तो उनका कल्चर 'बेस्ट' हो गया। पर बिल और डेव के लिए कल्चर का मतलब था मुसीबत में साथ खड़े होना। एक बार एक एम्प्लॉई के घर में मेडिकल इमरजेंसी थी और उसके पास पैसे नहीं थे। बिल ह्युलेट ने बिना किसी फॉर्मेलिटी के खुद उसकी मदद की। वो जानते थे कि अगर इंसान का दिमाग घर की चिंताओं में फंसा होगा तो वो लैब में इनोवेशन नहीं कर पाएगा।
ह्युलेट और पैकार्ड ने प्रॉफिट शेयरिंग की शुरुआत की थी। उनका मानना था कि अगर कंपनी करोड़ों कमा रही है तो उसका हिस्सा उस इंसान को भी मिलना चाहिए जो जमीन पर बैठकर स्क्रू टाइट कर रहा है। आज की कंपनियां प्रॉफिट खुद डकार जाती हैं और एम्प्लॉई को मिलता है 'एम्प्लॉई ऑफ द मंथ' का एक सस्ता सा कागज का टुकड़ा। बिल और डेव का मजाक उड़ाने वाले लोग बहुत थे जो कहते थे कि तुम लोग बिजनेस नहीं चैरिटी चला रहे हो। लेकिन जब एचपी दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी बनी तब उन आलोचकों के मुंह पर ताला लग गया।
सच्चाई तो यह है कि अगर आप अपने एम्प्लॉई को सिर्फ एक मशीन समझेंगे तो वो भी आपकी कंपनी को सिर्फ एक एटीएम मशीन समझेगा। जैसे ही उसे ज्यादा पैसे मिलेंगे वो भाग जाएगा। लेकिन अगर आप उसे इज्जत और अपनापन देंगे तो वो कंपनी को अपना बच्चा समझकर पालेगा। बिल और डेव ने एक ऐसी लेगेसी छोड़ी जहां लोग रिटायरमेंट तक उसी कंपनी में रहना चाहते थे।
तो दोस्तों अगर आप भी कुछ बड़ा बनाना चाहते हैं तो याद रखिये कि ईंट-पत्थर से सिर्फ इमारत बनती है कंपनी तो लोगों के भरोसे और प्यार से बनती है। बिल और डेव की यह कहानी हमें सिखाती है कि महान बनने के लिए आपको सिर्फ शातिर दिमाग नहीं बल्कि एक बड़ा दिल भी चाहिए।
अगर आपको बिल और डेव की ये फिलॉसफी पसंद आई और आप चाहते हैं कि आपके दोस्त भी एक अच्छे लीडर बनें तो इस आर्टिकल को अभी शेयर कीजिये। और कमेंट में बताइये कि क्या आपका बॉस भी 'एचपी वे' फॉलो करता है या उसे अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#Entrepreneurship #Leadership #BusinessGrowth #HPWay #SuccessMindset
_