क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि मेहनत से प्रोडक्ट बनाना ही अमीर बनने का इकलौता रास्ता है। मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। आज के दौर में सिर्फ प्रोडक्ट बेचना गरीबी का सबसे फास्ट ट्रैक है और आप शायद अभी तक पुराने जमाने के बिजनेस आइडियाज लेकर बैठे हैं।
आज हम डेविड इवांस की किताब कैथलिस्ट कोड से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो फेसबुक और एमेजॉन जैसी कंपनियों को दुनिया पर राज करने की ताकत देते हैं। अगर आप भी अपने बिजनेस को एक पावरफुल प्लेटफॉर्म में बदलना चाहते हैं तो यह 3 लेसन आपकी पूरी सोच बदल देंगे।
लेसन १ : मल्टी साइडेड प्लेटफॉर्म की पावर
आजकल हर दूसरा इंसान अपनी दुकान खोलने या कोई नया सामान बेचने के सपने देख रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया की सबसे बड़ी टैक्सी कंपनी उबेर के पास खुद की एक भी कार नहीं है। या एयरबीएनबी जिसके पास अपना एक भी होटल कमरा नहीं है फिर भी वह दुनिया का सबसे बड़ा होटल चेन है। इसे कहते हैं कैथलिस्ट बिजनेस। एक नॉर्मल बिजनेस में आप सामान बनाते हैं और कस्टमर को बेच देते हैं। कहानी खत्म। लेकिन एक कैथलिस्ट बिजनेस एक मैचमेकर की तरह काम करता है। यह दो या दो से ज्यादा ऐसे ग्रुप्स को एक साथ लाता है जिन्हें एक दूसरे की जरूरत है। जैसे कि एक तरफ भूखे लोग जिन्हें खाना चाहिए और दूसरी तरफ रेस्टोरेंट्स जिन्हें ऑर्डर्स चाहिए। बीच में आ गया जोमैटो जो खुद खाना नहीं बनाता बस दोनों को मिलवाता है और बीच में अपना मोटा कमीशन काट लेता है।
अगर आप आज भी पुराने तरीके से सिर्फ एक चीज बनाकर उसे बेचने की कोशिश कर रहे हैं तो आप असल में गधे की तरह मेहनत कर रहे हैं। कैथलिस्ट कोड हमें सिखाता है कि असली पैसा सामान बेचने में नहीं बल्कि लोगों को आपस में जोड़ने में है। मान लीजिए आप एक मोहल्ले में किराने की दुकान खोलते हैं। वहां आप सिर्फ वही सामान बेच पाएंगे जो आपकी दुकान में है। आपकी ग्रोथ आपकी दुकान की दीवारों तक सिमट कर रह जाएगी। लेकिन अगर आप एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना दें जहां मोहल्ले के दस दुकानदार अपना सामान लिस्ट कर सकें और मोहल्ले के लोग वहां से ऑर्डर कर सकें तो आप बिना कोई सामान खरीदे करोड़पति बन सकते हैं। यह सुनने में जितना आसान लगता है उतना है नहीं क्योंकि आपको दोनों तरफ के लोगों को एक साथ खुश रखना पड़ता है।
जरा सोचिए अगर फेसबुक पर सिर्फ आप अकेले होते और दुनिया का कोई और इंसान न होता तो क्या आप वहां अपनी फोटो डालते। बिल्कुल नहीं। वहां फोटो डालने का मजा ही तब है जब दूसरे लोग उसे देखकर जलें या कम से कम लाइक तो करें। यही कैथलिस्ट बिजनेस की असली खूबसूरती है। यह एक ऐसी पार्टी की तरह है जहां लड़कियां तब आती हैं जब उन्हें पता हो कि वहां अच्छे लड़के आएंगे और लड़के तब आते हैं जब उन्हें पता हो कि वहां लड़कियां होंगी। अगर पार्टी का होस्ट यानी आप सिर्फ एक ही ग्रुप को बुला पाए तो आपकी पार्टी फ्लॉप होना तय है। इसीलिए आपको एक ही समय पर दो अलग अलग दुनियाओं को एक छत के नीचे लाना पड़ता है।
सफल होने के लिए आपको यह समझना होगा कि आपके कस्टमर्स कौन हैं और उन्हें किस दूसरे ग्रुप की तलाश है। अगर आप सिर्फ एक साइड पर फोकस करेंगे तो आपका बिजनेस कभी उड़ान नहीं भर पाएगा। यह ठीक वैसा ही है जैसे एक शादी करवाने वाला पंडित। अगर उसके पास सिर्फ दूल्हों की लिस्ट है और एक भी दुल्हन का अता पता नहीं है तो बेचारे दूल्हे भी भाग जाएंगे और पंडित जी की दक्षिणा भी डूब जाएगी। इसलिए आपको एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जहां हर कोई एक दूसरे की वजह से प्लेटफॉर्म पर रुकने के लिए मजबूर हो जाए। जब आप यह तालमेल बिठा लेते हैं तो आप सिर्फ एक बिजनेस नहीं बल्कि एक पूरा साम्राज्य खड़ा कर देते हैं।
लेसन २ : नेटवर्क इफेक्ट का जादू
क्या आपने कभी सोचा है कि व्हाट्सएप इतना हिट क्यों है। जबकि मार्केट में उससे कहीं ज्यादा फीचर्स वाले ऐप्स मौजूद हैं। इसका जवाब बहुत सिंपल है और उसे कहते हैं नेटवर्क इफेक्ट। नेटवर्क इफेक्ट का सीधा सा मतलब है कि जैसे जैसे आपके प्लेटफॉर्म पर लोग बढ़ेंगे वैसे वैसे उसकी वैल्यू भी बढ़ती जाएगी। इसे एक छोटे से उदाहरण से समझिए। मान लीजिए पूरी दुनिया में सिर्फ एक ही टेलीफोन होता तो उसकी कीमत एक रद्दी के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं होती क्योंकि आप फोन आखिर मिलाते किसको। लेकिन जैसे ही दूसरा फोन आया उसकी वैल्यू बढ़ गई। और जब करोड़ों फोन आ गए तो वह इंसान की सबसे बड़ी जरूरत बन गया। कैथलिस्ट कोड हमें यही सिखाता है कि अगर आप अपने बिजनेस में नेटवर्क इफेक्ट नहीं ला पा रहे हैं तो आप बस भीड़ का हिस्सा हैं।
अक्सर लोग अपना नया ऐप या वेबसाइट लॉन्च करते हैं और सोचते हैं कि लोग खुद चलकर आएंगे। भाई साहब लोग तब तक नहीं आएंगे जब तक उन्हें वहां दूसरे लोग न दिखें। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक खाली रेस्टोरेंट में जाने से डरते हैं भले ही वहां का खाना कितना भी लजीज क्यों न हो। आप हमेशा उसी ढाबे पर रुकते हैं जहाँ पहले से दस गाड़ियां खड़ी हों। बिजनेस की दुनिया में इसे ही पॉजिटिव फीडबैक लूप कहते हैं। जितने ज्यादा कस्टमर्स आएंगे उतना ही ज्यादा सेलर्स का फायदा होगा और जितने ज्यादा सेलर्स होंगे उतने ही ज्यादा नए कस्टमर्स खिंचे चले आएंगे। अगर आप इस लूप को शुरू करने में कामयाब हो गए तो फिर आपको मार्केटिंग पर पैसे फूंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि आपका बिजनेस अपने आप एक रफ़्तार पकड़ लेगा।
लेकिन याद रखिए यह नेटवर्क इफेक्ट एक दोधारी तलवार की तरह भी है। अगर आपके प्लेटफॉर्म पर गलत लोग जुड़ गए या सर्विस खराब हो गई तो लोग उतनी ही तेजी से भागेंगे जितनी तेजी से आए थे। जैसे शादी के किसी ग्रुप में अगर सिर्फ फालतू के मैसेज आने लगें तो अच्छे लोग तुरंत लेफ्ट मार देते हैं। कैथलिस्ट बनने का मतलब सिर्फ भीड़ इकट्ठी करना नहीं है बल्कि एक क्वालिटी नेटवर्क बनाना है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि हर नया जुड़ने वाला सदस्य पुराने सदस्यों के लिए कुछ न कुछ वैल्यू लेकर आए। अगर आपका प्लेटफॉर्म लोगों का समय बर्बाद कर रहा है या उन्हें वो नहीं दे पा रहा जिसकी उन्हें तलाश है तो आपका नेटवर्क इफेक्ट कचरे के ढेर में बदल जाएगा।
ज्यादातर स्टार्टअप्स यहीं पर दम तोड़ देते हैं क्योंकि वो चिकन और एग वाली प्रॉब्लम में फंस जाते हैं। यानी पहले मुर्गी आएगी या अंडा। पहले कस्टमर लाऊं या सेलर। डेविड इवांस कहते हैं कि इसके लिए आपको शुरू में किसी एक साइड को रिश्वत देनी पड़ सकती है या उसे फ्री सर्विस देनी पड़ सकती है। जैसे क्रेडिट कार्ड कंपनियां शुरू में आपको रिवॉर्ड पॉइंट्स का लालच देती हैं ताकि आप कार्ड इस्तेमाल करें और जब बहुत सारे लोग कार्ड लेने लगते हैं तो दुकानदार अपने आप कार्ड मशीन लगाने के लिए तैयार हो जाते हैं। अगर आप इस खेल को समझ गए तो आप भी एक ऐसा प्लेटफॉर्म खड़ा कर सकते हैं जिसे गिराना किसी भी कॉम्पिटिटर के लिए नामुमकिन हो जाएगा।
लेसन ३ : प्राइसिंग और बैलेंस की आर्ट
अगर आपने दो तरफ के लोगों को एक साथ खड़ा भी कर दिया तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी तिजोरी भर जाएगी। असली सिरदर्द तब शुरू होता है जब आपको यह तय करना पड़ता है कि पैसे किससे वसूलने हैं। कैथलिस्ट कोड का यह लेसन आपको बताता है कि प्राइसिंग का मतलब सिर्फ प्रॉफिट कमाना नहीं है बल्कि प्लेटफॉर्म का बैलेंस बनाए रखना है। कई बार आपको एक ग्रुप को फ्री में सर्विस देनी पड़ती है ताकि दूसरा ग्रुप वहां आने के लिए पैसे देने को तैयार हो जाए। इसे कहते हैं सब्सिडी मॉडल। जैसे नाइट क्लब वाले लड़कियों की एंट्री फ्री रखते हैं ताकि भीड़ देखकर लड़के अपनी जेब खाली करने को तैयार हो जाएं। अब अगर क्लब वाला लड़कियों से भी पैसे मांगने लगे तो क्लब में सिर्फ बाउंसर ही नजर आएंगे और धंधा ठप हो जाएगा।
बिजनेस की दुनिया में भी यही होता है। गूगल सर्च इंजन हमारे लिए बिल्कुल फ्री है लेकिन वह एडवरटाइजर्स से तगड़े पैसे वसूलता है। अगर गूगल आपसे हर सर्च के 5 रुपये लेने लगे तो आप अगले ही पल किसी दूसरे फ्री सर्च इंजन पर शिफ्ट हो जाएंगे। कैथलिस्ट बिजनेस में आपको यह पहचानना होता है कि आपका मनी साइड कौन है और आपका सब्सिडी साइड कौन है। अगर आप गलत इंसान की गर्दन पकड़ लेंगे तो आपका पूरा इकोसिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। यह किसी सर्कस के कलाकार जैसा काम है जिसे एक ही रस्सी पर चलते हुए दो अलग अलग वजन के पत्थरों को बैलेंस करना पड़ता है। एक भी चूका तो सीधा जमीन पर।
ज्यादातर देसी बिजनेसमैन यहीं गलती करते हैं। वो सोचते हैं कि अगर मैं वैल्यू दे रहा हूँ तो मुझे सबसे पैसे लेने चाहिए। भाई साहब दुनिया इतनी शरीफ नहीं है। आपको अपनी ईगो साइड में रखकर यह देखना होगा कि आपके प्लेटफॉर्म की जान किस ग्रुप में बसती है। जैसे वीडियो गेम कंसोल बनाने वाली कंपनियां अक्सर अपना कंसोल घाटे में बेचती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा गेमर्स उसे खरीद सकें। असली कमाई वो उन गेम डेवलपर्स से करती हैं जो उस कंसोल के लिए गेम बनाते हैं। अगर कंसोल ही महंगा होगा तो कोई खरीदेगा नहीं और अगर कोई खरीदेगा नहीं तो डेवलपर्स गेम क्यों बनाएंगे। यह एक ऐसा चक्र है जिसे आपको बहुत ही चालाकी से घुमाना पड़ता है।
बैलेंस का मतलब सिर्फ पैसा नहीं है बल्कि क्वालिटी भी है। अगर आपके प्लेटफॉर्म पर एक साइड बहुत ज्यादा हावी हो गई तो दूसरी साइड दम तोड़ देगी। जैसे अगर किसी डेटिंग ऐप पर 90 परसेंट लड़के हों और सिर्फ 10 परसेंट लड़कियां तो वो ऐप कुछ ही दिनों में डिलीट हो जाएगा। आपको लगातार मॉनिटर करना पड़ता है कि दोनों तरफ का अनुपात सही बना रहे। कैथलिस्ट कोड हमें सिखाता है कि एक महान कंपनी वही है जो अपने फायदे से पहले अपने नेटवर्क की सेहत का ख्याल रखती है। जब आप लोगों के लिए वैल्यू क्रिएट करते हैं और उसे सही तरीके से बैलेंस करते हैं तो कामयाबी आपके पीछे भागती है।
तो दोस्तों, क्या आप भी अपनी पुरानी सोच की जंजीरों को तोड़कर एक मॉडर्न कैथलिस्ट बनने के लिए तैयार हैं। याद रखिए आज के दौर में सिर्फ वही जीतता है जो दूसरों को जिताने का रास्ता बनाता है। इस आर्टिकल ने अगर आपकी सोच में 1 परसेंट भी बदलाव किया है तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपना नया स्टार्टअप शुरू करने की प्लानिंग कर रहा है। नीचे कमेंट में बताएं कि आपके नजरिए से भारत का सबसे बड़ा कैथलिस्ट बिजनेस कौन सा है। चलिए मिलकर एक ऐसा नेटवर्क बनाते हैं जहाँ हर कोई आगे बढ़े।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#BusinessStrategy #StartupIndia #Entrepreneurship #Marketplace #GrowthHacking
_