Borrowing Brilliance (Hindi)


क्या आप अभी भी रात भर जागकर कोई ऐसा यूनिक आइडिया खोजने की कोशिश कर रहे हैं जो दुनिया हिला दे। सच तो यह है कि आपका ओरिजिनल आइडिया एक बहुत बड़ा झूठ है। आप बस अपना कीमती समय और बाल बर्बाद कर रहे हैं क्योंकि स्मार्ट लोग दूसरों के आइडिया चुराकर करोड़ों कमा रहे हैं और आप खाली हाथ बैठे हैं।

आज के इस आर्टिकल में हम डेविड कोर्ड मरे की किताब बोरोइंग ब्रिलिएंस से वो ६ सीक्रेट स्टेप्स समझेंगे जो आपको सिखाएंगे कि दूसरों के आइडियाज को सही तरीके से कॉपी करके अपना बड़ा बिजनेस साम्राज्य कैसे खड़ा किया जाता है।


लेसन १ : ओरिजिनलिटी एक धोखा है और आप बेकार में परेशान हैं

आजकल के नए नवेले आंत्रप्रेन्योर्स के साथ एक बड़ी समस्या है। उन्हें लगता है कि जब तक उनके पास कोई ऐसा आइडिया नहीं आएगा जो सीधा मंगल ग्रह से उतरा हो तब तक वो बिजनेस शुरू नहीं कर सकते। भाई साहब अगर आप भी इसी इंतजार में बैठे हैं कि कोई बिजली कड़केगी और आपके दिमाग में एक ऐसा यूनिक आइडिया आएगा जो आज तक किसी इंसान ने नहीं सोचा तो यकीन मानिए आप बस अपनी उम्र बढ़ा रहे हैं और कुछ नहीं। डेविड कोर्ड मरे अपनी किताब में साफ कहते हैं कि यह ओरिजिनलिटी का भूत सिर्फ एक मानसिक बीमारी है। सच तो यह है कि दुनिया में कुछ भी नया नहीं है। हर बड़ा आविष्कार या हर बड़ा बिजनेस असल में पुराने आइडियाज का एक नया खिचड़ी वर्जन ही होता है।

मान लीजिए आप एक नई डिश बनाना चाहते हैं। अब आप यह तो नहीं कहेंगे कि मैं नमक भी खुद बनाऊंगा और आग भी पहली बार मैं ही जलाऊंगा। आप वही पुरानी चीजों को उठाते हैं बस उनका कॉम्बिनेशन बदल देते हैं। स्टीव जॉब्स ने जब आईफोन बनाया था तो उन्होंने कोई नई स्क्रीन या नया सेलुलर नेटवर्क नहीं खोजा था। उन्होंने बस एक म्यूजिक प्लेयर एक फोन और एक इंटरनेट डिवाइस को आपस में चिपका दिया था। लोग इसे जादू समझ रहे थे और वो बस एक अच्छे मैकेनिक की तरह पुराने पुर्जों को जोड़ रहे थे।

अगर आप अपने मोहल्ले के उस शर्मा जी को देखें जिन्होंने अपनी दुकान पर एक नया डिस्काउंट ऑफर निकाला है तो आपको लगेगा कि वाह क्या दिमाग पाया है। लेकिन असलियत यह है कि शर्मा जी ने वो आईडिया पड़ोस वाले शहर के एक बड़े मॉल से उठाया है। और इसमें कोई बुराई नहीं है। बुराई तब होती है जब आप सोचते हैं कि मैं तो अपना अलग ही रास्ता बनाऊंगा भले ही उस रास्ते पर आगे जाकर गड्ढा हो।

भारत में तो हम इसे जुगाड़ कहते हैं। और जुगाड़ क्या है। यह पुराने बेकार पड़े सामान को नए तरीके से इस्तेमाल करने की कला ही तो है। आप फेसबुक को ही देख लीजिए। मार्क जुकरबर्ग से पहले भी सोशल मीडिया साइट्स थीं। लेकिन उन्होंने दूसरों की गलतियों को देखा और उनके आइडिया को उठाकर थोड़ा पॉलिश किया और आज वो पूरी दुनिया के डेटा के मालिक बने बैठे हैं। आप अभी भी अपनी डायरी में वो यूनिक आइडिया लिख रहे हैं जिसे आप किसी को बताना नहीं चाहते क्योंकि आपको डर है कि कोई उसे चुरा लेगा। यकीन मानिए कोई आपका आइडिया नहीं चुराने वाला क्योंकि सबको अपने खुद के ओरिजिनल आइडिया के फ्लॉप होने का डर सता रहा है।

सीधी बात यह है कि अगर आप सफल होना चाहते हैं तो इस ईगो को बाहर फेंक दीजिए कि मुझे कुछ नया करना है। आपको बस कुछ बेहतर करना है। दूसरों के काम को गौर से देखिए। देखिये कि वो कहाँ गलती कर रहे हैं। उस गलती को पकड़िए और उनके ही आइडिया को नए तड़के के साथ पेश कर दीजिए। लोग आपको जीनियस कहेंगे और आप मन ही मन हंसेंगे क्योंकि आपको पता है कि आपने बस सही जगह से सही चीज बोरो की है। याद रखिये अकलमंद लोग आविष्कार करते हैं और समझदार लोग उन आविष्कारों को जोड़कर बिजनेस खड़ा करते हैं। अब तय आपको करना है कि आपको साइंटिस्ट बनना है या एक अमीर बिजनेसमैन।


लेसन २ : सही समस्या को ढूंढना ही असली खजाना है

ज्यादातर लोग बिजनेस में इसलिए फेल नहीं होते कि उनके पास आइडिया नहीं था। वो इसलिए फेल होते हैं क्योंकि उन्होंने गलत समस्या को हल करने में अपनी पूरी जवानी लगा दी। आप एक बहुत ही शानदार छाता बना सकते हैं जो म्यूजिक भी बजाता हो और आपको हवा भी देता हो। लेकिन अगर आप उसे थार रेगिस्तान में बेचने निकलेंगे जहाँ बारिश ही नहीं होती तो भाई साहब आपसे बड़ा बेवकूफ कोई नहीं है। डेविड मरे कहते हैं कि किसी और के आइडिया को बोरो करने से पहले आपको यह पता होना चाहिए कि आप उसे बोरो कर क्यों रहे हैं। क्या आपके पास कोई ऐसी समस्या है जिसका हल बाजार में मौजूद दूसरे आइडियाज दे सकते हैं।

इसे ऐसे समझिये कि आप अपने दोस्त की शादी में जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। अब आप अपने उस दोस्त की अलमारी से कपड़े बोरो करेंगे जो आपकी बॉडी टाइप का हो। आप किसी पहलवान के कपड़े पहनकर तो नहीं जाएंगे ना वरना लोग दूल्हे को छोड़कर आप पर हंसेंगे। बिजनेस में भी यही होता है। आपको पहले अपनी प्रॉब्लम को डिफाइन करना पड़ता है। क्या आपकी समस्या यह है कि प्रोडक्ट महंगा है या यह कि कस्टमर को सर्विस पसंद नहीं आ रही। जब आप समस्या को एकदम साफ कर लेते हैं तब आपको समझ आता है कि किस इंडस्ट्री से कौन सा आइडिया उठाना है।

मान लीजिये आप एक चाय की दुकान खोलना चाहते हैं। अब चाय तो पूरी दुनिया बेच रही है। लेकिन आपकी समस्या यह है कि लोग आपकी दुकान पर रुक क्यों नहीं रहे। अब यहाँ आप अपना दिमाग लगाने के बजाय किसी और इंडस्ट्री को देखिये। जैसे कि एक लाइब्रेरी। लाइब्रेरी में लोग क्यों जाते हैं। शांति के लिए और बैठने के लिए। बस आपने वहां से बैठने वाला आइडिया उठाया और अपनी चाय की दुकान पर लगा दिया। अब आप चाय नहीं बेच रहे बल्कि आप एक बैठने की जगह बेच रहे हैं जहाँ चाय भी मिलती है। देखिये कैसे एक दूसरी इंडस्ट्री के आइडिया ने आपकी समस्या खत्म कर दी।

अक्सर हम अपनी समस्याओं को इतना बड़ा बना देते हैं कि हमें लगता है कि इसका कोई समाधान ही नहीं है। लेकिन यकीन मानिए आपकी समस्या का हल शायद किसी और ने दस साल पहले ही ढूंढ लिया होगा। बस फर्क यह है कि उसने वो हल किसी और चीज के लिए निकाला था। आपको बस उस हल को अपनी समस्या के साथ फिट करना है। भारत में लोग अक्सर दूसरों को देखकर बिजनेस शुरू करते हैं। अगर शर्मा जी की मोबाइल की दुकान चल रही है तो वर्मा जी भी बगल में मोबाइल की दुकान खोल लेंगे। यह बोरोइंग नहीं है यह तो सीधा सीधा अकल का अंधापन है।

सच्चा ब्रिलिएंस तब आता है जब आप देखते हैं कि शर्मा जी के पास मोबाइल तो अच्छे हैं लेकिन वहां पार्किंग की जगह नहीं है। अब आपकी समस्या मिल गई। आप थोड़ा दूर दुकान खोलते हैं जहाँ बड़ी पार्किंग है और आप वहां से शर्मा जी के कस्टमर्स को बोरो कर लेते हैं। समस्या को समझना ही आधी जीत है। अगर आप बिना सोचे समझे बस इधर उधर से आइडिया उठाएंगे तो आपका बिजनेस किसी पुरानी कबाड़ की दुकान जैसा लगेगा जहाँ सब कुछ है पर काम का कुछ नहीं। इसलिए अगली बार जब आप कुछ नया करने की सोचें तो पहले एक कागज पर लिखिये कि आखिर आप किस मुश्किल को आसान कर रहे हैं। बिना समस्या के आइडिया वैसा ही है जैसे बिना दूल्हे की बारात।


लेसन ३ : आइडिया को एडॉप्ट करना और उसे अपना बनाना

अगर आप किसी का मोबाइल फोन चोरी करते हैं तो आप चोर कहलाएंगे। लेकिन अगर आप उस मोबाइल की कमियां निकालकर अपना खुद का एक बेहतर फोन बना देते हैं तो दुनिया आपको एक विजनरी लीडर कहेगी। डेविड कोर्ड मरे यही समझाना चाहते हैं कि किसी आइडिया को सिर्फ कॉपी पेस्ट करना बेवकूफी है। असली कलाकारी तो उसे एडॉप्ट करने में है। एडॉप्ट करने का मतलब है कि आपने किसी और का बढ़िया आईडिया देखा फिर उसे अपने सांचे में ढाला और उसमें अपनी खुद की वैल्यू जोड़ दी। बिना बदलाव के आइडिया उठाना वैसा ही है जैसे किसी और की शादी की शेरवानी पहनकर घूमना। फिटिंग तो खराब होगी ही और लोग आपको पहचान भी लेंगे।

नेटफ्लिक्स को देखिये। उन्होंने क्या किया। उन्होंने बस लाइब्रेरी के पुराने कॉन्सेप्ट को उठाया जहाँ से हम किताबें उधार लेते थे। उन्होंने किताबों की जगह मूवीज रख दीं और उसे घर तक पहुंचाने की सुविधा दे दी। उन्होंने कुछ नया आविष्कार नहीं किया। उन्होंने बस रेंटल के पुराने आइडिया को इंटरनेट और लॉजिस्टिक्स के साथ एडॉप्ट किया। अगर वो सिर्फ दूसरों की तरह डीवीडी की दुकान खोलते तो आज शायद कहीं गुम हो चुके होते। लेकिन उन्होंने उस पुराने आइडिया की धूल झाड़ी और उसे आज की जनरेशन के हिसाब से कस्टमाइज कर दिया।

भारत में अगर आप किसी सफल स्टार्टअप को देखें तो आपको दिखेगा कि उन्होंने ग्लोबल आइडियाज को इंडियन तड़के के साथ एडॉप्ट किया है। अमेज़न अमेरिका में बहुत बड़ा था लेकिन जब इंडिया में फ्लिपकार्ट आया तो उन्होंने देखा कि इंडियन्स को ऑनलाइन पेमेंट पर भरोसा नहीं है। उन्होंने वहां से ई कॉमर्स का आइडिया उठाया और उसमें 'कैश ऑन डिलीवरी' का अपना देसी मसाला डाल दिया। यह होता है असली बोरोइंग ब्रिलिएंस। आइडिया बाहर का था लेकिन दिल पूरी तरह हिंदुस्तानी था। अगर आप भी किसी और का आइडिया देख रहे हैं तो खुद से पूछिये कि आप उसमें ऐसा क्या जोड़ सकते हैं जो आज तक किसी ने नहीं सोचा।

ज्यादातर लोग डरते हैं कि लोग कहेंगे कि इसने तो कॉपी किया है। अरे भाई साहब कहने दीजिये। दुनिया के सबसे बड़े पेंटर पाब्लो पिकासो ने कहा था कि अच्छे कलाकार कॉपी करते हैं और महान कलाकार चोरी करते हैं। यहाँ चोरी का मतलब किसी का माल दबाना नहीं है बल्कि उसके पीछे के थॉट प्रोसेस को चुराकर उसे और ऊंचे लेवल पर ले जाना है। जब आप किसी आइडिया को एडॉप्ट करते हैं तो आप उसकी गलतियों को पहले ही फिल्टर कर देते हैं। आपको पता होता है कि असली मालिक ने कहाँ मात खाई थी। आप उस छेद को भरते हैं और फिर अपना झंडा गाड़ते हैं।

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता लेकिन सफलता का एक नक्शा जरूर होता है जो पिछले सफल लोगों ने छोड़ा है। उस नक्शे को पढ़ना और अपनी मंजिल का रास्ता बनाना ही आपकी असली काबिलियत है। दूसरों के कंधों पर चढ़कर देखिये ताकि आप दुनिया को और बेहतर तरीके से देख सकें। खुद का रास्ता बनाने के चक्कर में पूरी जिंदगी जंगल में भटकने से बेहतर है कि किसी बनी बनाई सड़क पर अपनी सुपरकार दौड़ाई जाए। अब उठिये और देखिये कि आपके आस पास ऐसे कौन से आइडियाज हैं जिन्हें आप एक नई पहचान दे सकते हैं।


तो दोस्तों क्या आप भी अभी तक उस परफेक्ट और यूनिक आइडिया के पीछे भाग रहे थे। अब समय आ गया है कि आप अपनी नजरें बदलें। अपने आस पास की दुनिया को गौर से देखिये। किसी और के फेलियर से सीखिए और उनके सक्सेस को अपना हथियार बनाइये। आज ही कमेंट बॉक्स में लिखकर बताइये कि आप किस सफल बिजनेस से प्रेरणा लेकर अपना नया काम शुरू करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो पिछले पांच साल से सिर्फ आइडिया ही सोच रहा है पर कुछ कर नहीं रहा। आपकी एक शेयरिंग किसी की पूरी सोच बदल सकती है।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#Entrepreneurship #Innovation #BusinessStrategy #BookSummary #SuccessMindset


_

Post a Comment

Previous Post Next Post