Clued In (Hindi)


क्या आप भी उन महान बिजनेस ओनर्स में से हैं जो नए कस्टमर ढूंढने में अपनी चप्पलें घिस देते हैं पर पुराने कस्टमर का नाम तक भूल जाते हैं। बधाई हो आप अपनी मेहनत की कमाई को कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं क्योंकि बिना कस्टमर लोयल्टी के आपका बिजनेस सिर्फ एक खाली डब्बा है।

आज हम लेविस कार्बोन की किताब क्लाउड इन से सीखेंगे कि कैसे आप अपने कस्टमर के साथ ऐसा रिश्ता बना सकते हैं कि वह आपको छोड़कर जाने का सपना भी न देख सके। चलिए जानते हैं वे तीन बड़े लेसन जो आपके बिजनेस की किस्मत हमेशा के लिए बदल देंगे।


लेसन १ : एक्सपीरियंस ही असली प्रोडक्ट है

दोस्तो, मान लीजिए आप अपनी डेट को किसी बहुत महंगे रेस्टोरेंट में लेकर गए। आपने वहां सबसे महंगा पनीर बटर मसाला ऑर्डर किया पर वेटर ने उसे टेबल पर ऐसे पटका जैसे वह आप पर एहसान कर रहा हो। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे। शायद कभी नहीं। भले ही वह पनीर अमृत जैसा क्यों न रहा हो। लेविस कार्बोन हमें यही समझाते हैं कि कस्टमर कभी भी सिर्फ सामान खरीदने नहीं आता। वह आता है एक अहसास के लिए। अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ अच्छा प्रोडक्ट बेचना काफी है तो यकीन मानिए आप उस फूफी की तरह हैं जो शादी में बढ़िया साड़ी पहनकर तो आई है पर मुंह ऐसा बनाया है कि कोई बात न करना चाहे। इंडिया में हम अक्सर सर्विस को फालतू का काम समझते हैं पर असलियत में सर्विस ही वह असली चीज है जिसके पैसे कस्टमर खुशी खुशी देता है।

हमारे पड़ोस वाले शर्मा जी की किराना दुकान को ही ले लीजिए। वहां शक्कर शायद दो रुपये महंगी मिले पर वह जो हंसकर पूछते हैं कि और बिट्टू के पेपर कैसे गए। बस वही लाइन आपको उनकी दुकान का पक्का गुलाम बना देती है। इसे ही कहते हैं एक्सपीरियंस बनाना। बड़ी बड़ी कंपनियां करोड़ों रुपये खर्च करती हैं यह समझने के लिए कि कस्टमर क्या चाहता है पर वे यह भूल जाती हैं कि कस्टमर सिर्फ इंसान जैसा महसूस करना चाहता है। आप उसे राजा जैसा फील कराइए और वह आपको अपनी पूरी वसीयत तो नहीं पर हां अपनी जेब जरूर खाली करके दे देगा। अगर आपका बिजनेस कस्टमर को वह सुकून या खुशी नहीं दे पा रहा है तो आपका प्रोडक्ट सिर्फ एक कचरा है जो मार्केट की भीड़ में कहीं खो जाएगा।

सोचिए जब आप किसी ऑनलाइन वेबसाइट से कुछ मंगवाते हैं और वह डब्बा फटी हुई हालत में मिलता है तो क्या आपको गुस्सा नहीं आता। भले ही अंदर का सामान ठीक हो पर वह फटा हुआ डब्बा आपके दिमाग में एक नेगेटिव इमेज बना देता है। यही वह पॉइंट है जहां आप अपने कस्टमर को खो देते हैं। हमें यह समझना होगा कि हर टच पॉइंट यानी वह हर पल जब कस्टमर आपके ब्रांड के संपर्क में आता है वह एक मौका है। या तो आप उसे अपना फैन बना लो या फिर उसे हमेशा के लिए टाटा बाय बाय कह दो। चॉइस आपकी है कि आप एक सेल्समैन बनना चाहते हैं या एक एक्सपीरियंस क्रिएटर। और याद रखिए सेल्समैन सिर्फ एक बार सामान बेचता है पर एक्सपीरियंस क्रिएटर एक पूरा साम्राज्य खड़ा करता है।


लेसन २ : क्लूज की जादुई दुनिया और आपकी लापरवाही

दोस्तो, क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप किसी हॉस्पिटल में जाते हैं और वहां की दीवारों पर गंदे दाग देखते हैं, तो आपको अचानक लगने लगता है कि डॉक्टर पक्का अनाड़ी होगा। भले ही उस डॉक्टर ने गोल्ड मेडल जीता हो, पर वह गंदी दीवार आपके दिमाग में खतरे की घंटी बजा देती है। लेविस कार्बोन इसे ही क्लूज कहते हैं। आपके बिजनेस में हर छोटी से छोटी चीज, चाहे वह आपकी वेबसाइट का लोडिंग टाइम हो या आपकी दुकान के बाहर पड़ा हुआ पुराना अखबार, कस्टमर को चिल्ला चिल्ला कर कुछ बता रहा होता है। अगर आप इन क्लूज पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो आप अनजाने में अपने कस्टमर को पड़ोसी की दुकान पर भेज रहे हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप किसी पार्टी में बहुत सूट बूट पहनकर जाएं पर आपके मोजों से बदबू आ रही हो। लोग आपका सूट नहीं, वह बदबू याद रखेंगे।

मान लीजिए आपने एक नई चमचमाती कार खरीदी। शोरूम वाले ने आपको चाबी देते वक्त एक बहुत ही घटिया और सस्ते प्लास्टिक का की चेन थमा दिया। अब करोड़ों की कार के साथ वह दस रुपये वाला की चेन देखकर आपको क्या लगेगा। आपको लगेगा कि कंपनी कितनी कंजूस है। यही वह क्लू है जिसने आपके पूरे उत्साह पर पानी फेर दिया। इंडिया में हम अक्सर इन बारीकियों को छोटा समझकर छोड़ देते हैं। हम सोचते हैं कि यार कस्टमर को तो बस काम से मतलब है। पर सच तो यह है कि कस्टमर का दिमाग एक जासूस की तरह होता है जो हर कोने में कमियां ढूंढता है। अगर आपकी दुकान का पंखा चर्र चर्र की आवाज कर रहा है, तो कस्टमर को लगेगा कि आपका काम भी इतना ही ढीला होगा।

सक्सेसफुल होने का राज यह नहीं है कि आप कुछ बहुत बड़ा और तूफानी करें। राज यह है कि आप उन छोटे छोटे क्लूज को कंट्रोल करें जो कस्टमर के सबकॉन्शियस माइंड से बात करते हैं। जब कोई इंसान आपकी सर्विस का इस्तेमाल करता है, तो उसके पांचों सेंस काम कर रहे होते हैं। वह क्या देख रहा है, क्या सुन रहा है और उसे कैसा महसूस हो रहा है, यह सब मिलकर एक कहानी बनाते हैं। अगर आपकी कहानी में लॉजिक की कमी है, तो कस्टमर आपकी फिल्म बीच में ही छोड़कर भाग जाएगा। इसलिए अपनी आंखों पर चढ़ा हुआ वह महान बिजनेसमैन वाला चश्मा उतारिए और एक चिड़चिड़े कस्टमर की नजर से अपने बिजनेस को देखिए। आपको खुद समझ आ जाएगा कि आप कहां गड़बड़ कर रहे हैं। याद रखिए, छोटे सुराख ही बड़े जहाज को डुबो देते हैं और छोटे क्लूज ही बड़े बिजनेस को बर्बाद कर देते हैं।


लेसन ३ : इमोशनल कनेक्शन और वफादारी का असली सच

दोस्तो, क्या आपने कभी सोचा है कि आप उसी एक नाई के पास बाल कटवाने क्यों जाते हैं जो शायद थोड़ा ज्यादा पैसा लेता है। या फिर उसी चाट वाले के पास क्यों खड़े रहते हैं जहां बहुत भीड़ होती है। इसका जवाब क्वालिटी नहीं बल्कि इमोशन है। लेविस कार्बोन कहते हैं कि अगर आप कस्टमर के दिमाग की जगह उसके दिल में जगह बना लें, तो वह आपका सेल्समैन बन जाता है। जो बिजनेस सिर्फ दिमाग से काम करते हैं, वे डिस्काउंट की लड़ाई में मर जाते हैं। पर जो दिल से जुड़ते हैं, वे लेजेंड बन जाते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप अपनी मम्मी के हाथ के खाने की बुराई नहीं सुन सकते, भले ही उसमें नमक थोड़ा तेज ही क्यों न हो। क्योंकि वहां स्वाद से ज्यादा प्यार का कनेक्शन है।

मान लीजिए आप किसी शोरूम में जूते खरीदने गए। सेल्समैन ने आपको जूते दिखाए और बातों बातों में आपकी पुरानी टूटी हुई चप्पल देख ली। उसने बिना मांगे आपको एक थैली दी और कहा कि सर आप अपनी पुरानी चप्पल इसमें रख लीजिए वरना आपके हाथ गंदे हो जाएंगे। बस। उस एक छोटे से पल में उसने जूते नहीं बेचे, उसने आपका भरोसा जीत लिया। अब अगली बार जब आपको सैंडल भी लेनी होगी, तो आप उसी शोरूम में जाएंगे। इंडिया में हम रिश्तों को बहुत अहमियत देते हैं। अगर आप अपने कस्टमर को सिर्फ एक चलते फिरते एटीएम की तरह देखेंगे, तो वह भी आपको सिर्फ एक लुटेरा समझेगा। लेकिन अगर आप उसकी छोटी छोटी खुशियों का ख्याल रखेंगे, तो वह आपके लिए ब्रांड एम्बेसडर बन जाएगा।

सच्ची वफादारी या लोयल्टी तब पैदा होती है जब कस्टमर को लगता है कि यह ब्रांड मेरे लिए खड़ा है। जब कोई गड़बड़ हो जाए और आप उसे ईमानदारी से मान लें, तो वह इमोशनल टच पॉइंट बन जाता है। मान लीजिए आपने किसी रेस्टोरेंट से खाना मंगवाया और वह ठंडा निकला। अगर मैनेजर ने फोन पर बहस करने के बजाय फौरन नया खाना भेजा और साथ में एक छोटा सा सॉरी नोट लिख दिया, तो आप उसके फैन हो जाएंगे। इसे ही कहते हैं वफादारी का जादू। बिजनेस सिर्फ लेन देन का खेल नहीं है, यह भरोसे का खेल है। अगर आप अपने कस्टमर को बार बार वापस लाना चाहते हैं, तो उन्हें एहसास दिलाइए कि वे आपके लिए स्पेशल हैं। जब तक आप उनके दिल की धड़कन नहीं समझेंगे, तब तक आपकी तिजोरी की धड़कन भी शांत ही रहेगी।


तो दोस्तो, क्लाउड इन हमें सिखाती है कि कस्टमर को वापस लाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह बस छोटे छोटे क्लूज, बेहतरीन एक्सपीरियंस और सच्चे इमोशनल कनेक्शन का मेल है। आज ही अपने बिजनेस को एक कस्टमर की नजर से देखिए और उन कमियों को सुधारिए जो आपके मुनाफे को खा रही हैं।

अगर आपको यह लेख पसंद आया और आप अपने बिजनेस को नेक्स्ट लेवल पर ले जाना चाहते हैं, तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी सिर्फ डिस्काउंट के भरोसे बैठे हैं। कमेंट में बताएं कि आपका सबसे अच्छा या बुरा कस्टमर एक्सपीरियंस क्या रहा है। चलिए मिलकर एक ऐसी कम्युनिटी बनाते हैं जहां हम सिर्फ बेचना नहीं, बल्कि दिल जीतना सीखें।

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