क्या आपको लगता है कि बढ़िया प्रोडक्ट बेचकर आप मार्केट के राजा बन जाएंगे। बड़े भाई, अगर आपका कस्टमर आपके शोरूम से निकलते ही आपको गाली दे रहा है, तो आपका बिजनेस नहीं बल्कि आपकी किस्मत का बैंड बज रहा है। आप बस अंधेरे में तीर मार रहे हैं और अपनी मेहनत की कमाई को नाले में बहा रहे हैं।
आज की भागदौड़ भरी लाइफ में हर कोई नंबर वन बनना चाहता है पर कोई यह नहीं समझता कि असली जादू प्रोडक्ट में नहीं बल्कि उसे बेचने के तरीके में है। चलिए जानते हैं गैरी मिलेट की इस बुक के वो 3 लेसन जो आपके बिजनेस की काया पलट देंगे।
लेसन १ : कस्टमर एक्सपीरियंस मैपिंग का असली मतलब
अक्सर हमारे यहाँ बिजनेस करने का मतलब होता है कि दुकान खोलकर बैठ जाओ और ग्राहक का इंतजार करो। सामान बिक गया तो मतलब गंगा नहा लिए। लेकिन गैरी मिलेट कहते हैं कि भाई साहब असल खेल तो सामान बेचने के बाद शुरू होता है। ज्यादातर इंडियन दुकानदार सोचते हैं कि अगर कस्टमर ने पैसा दे दिया तो काम खत्म। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उस बेचारे कस्टमर के दिल पर क्या बीत रही है जब वो आपकी दुकान की सीढ़ियाँ चढ़ रहा होता है।
कस्टमर एक्सपीरियंस मैपिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह तो बस आपके कस्टमर के जूतों में पैर डालकर चलने जैसा है। मान लीजिए आपने एक बहुत महंगा फोन खरीदा। दुकान वाला आपसे ऐसे बात कर रहा था जैसे आप उसके बिछड़े हुए भाई हों। उसने आपको चाय पिलाई और बड़े प्यार से फोन पैक कर दिया। आप खुश होकर घर आए। लेकिन जैसे ही घर आकर फोन का डिब्बा खोला तो पता चला कि चार्जर ही गायब है। अब आप वापस दुकान जाते हैं और वही प्यारा भाई अब आपको ऐसे देख रहा है जैसे आपने उसकी जमीन हड़प ली हो। वो कहता है कि सर यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है आप कंपनी से बात करो।
बस यही वो पॉइंट है जहाँ आपकी मैपिंग फेल हो गई। मैपिंग का मतलब है कस्टमर के साथ पहली मुलाकात से लेकर सामान इस्तेमाल करने तक के हर पल को ट्रैक करना। आपको यह देखना होगा कि जब कस्टमर को कोई परेशानी आती है तब आप उसके साथ कैसा बर्ताव करते हैं। क्या आप उसे वीआईपी फील कराते हैं या फिर उसे दर दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ देते हैं।
आजकल के जमाने में लोग सामान नहीं खरीदते बल्कि वो एक फीलिंग खरीदते हैं। अगर आप सिर्फ सामान बेच रहे हैं तो आप एक वेंडर हैं लेकिन अगर आप एक्सपीरियंस बेच रहे हैं तो आप एक ब्रांड हैं। आपको यह समझना होगा कि कस्टमर आपके पास सिर्फ एक बार आने के लिए नहीं बना है। उसे बार बार वापस बुलाने के लिए आपको उसके हर टचपॉइंट को सुहाना बनाना पड़ेगा। चाहे वो आपकी वेबसाइट का स्लो लोड होना हो या फिर आपके सेल्समैन का अजीब सा चेहरा बनाना हो। हर छोटी चीज मायने रखती है। अगर आपने कस्टमर के सफर का नक्शा नहीं बनाया तो यकीन मानिए आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले नक्शे पर होंगे।
लेसन २ : इमोशनल कनेक्शन की ताकत
क्या आपने कभी सोचा है कि आप उसी पुरानी चाट वाली दुकान पर बार बार क्यों जाते हैं जबकि शहर में उससे कहीं ज्यादा साफ सुथरे रेस्टोरेंट खुल चुके हैं। क्या उस चाट में सोना मिला होता है। बिलकुल नहीं। असलियत यह है कि वो चाट वाला आपको नाम से जानता है और उसे याद है कि आपको तीखा कम और दही ज्यादा पसंद है। इसी को कहते हैं इमोशनल कनेक्शन का जादू। गैरी मिलेट अपनी बुक में साफ कहते हैं कि लोग आपके लॉजिक को भूल सकते हैं पर वो इस बात को कभी नहीं भूलते कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया।
आजकल के बिजनेस में लोग डेटा और नंबर्स के पीछे ऐसे पागल हैं जैसे कोई मजनू अपनी लैला के पीछे होता है। हम भूल जाते हैं कि स्क्रीन के उस पार बैठा इंसान कोई रोबोट नहीं है जिसके सीने में दिल की जगह बैटरी लगी हो। मान लीजिए आप किसी बड़ी एयरलाइंस से सफर कर रहे हैं। प्लेन लेट है और स्टाफ ऐसे चेहरे बनाकर खड़ा है जैसे उनका ब्रेकअप अभी अभी हुआ हो। वो आपको टेक्निकल कारण गिनाएंगे कि हवा का दबाव कम था या इंजन में तेल कम था। क्या आपको उस वक्त उनके लॉजिक से फर्क पड़ता है। नहीं। आपको फर्क पड़ता है कि किसी ने आपसे तमीज से बात की या नहीं।
इमोशनल कनेक्शन बनाने का मतलब यह नहीं है कि आप कस्टमर के गले लगकर रोने लगें। इसका मतलब है उनकी अनकही बातों को समझना। जब एक कस्टमर आपके पास आता है तो वो सिर्फ एक समस्या लेकर नहीं आता बल्कि वो थोड़ा भरोसा भी लेकर आता है। अगर आप उस भरोसे को समझ लेते हैं तो वो कस्टमर जिंदगी भर के लिए आपका हो जाता है। लेकिन हम क्या करते हैं। हम उसे टर्म्स एंड कंडीशन्स के जंगलों में घुमा देते हैं।
सोचिये अगर आप किसी होटल में रुकें और वहां का वेटर आपको यह कहे कि सर हमें पता चला कि कल आपका जन्मदिन है इसलिए हमने आपके लिए एक छोटा सा केक रखा है। अब उस केक की कीमत शायद दो सौ रुपये भी न हो पर उस पल जो खुशी आपको मिलेगी उसकी कीमत लाखों में है। आप दस लोगों को जाकर बताएंगे कि वो होटल कितना कमाल का है। यही वो फ्री की मार्केटिंग है जिसके लिए बड़ी कंपनियाँ करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा देती हैं।
अगर आप अपने बिजनेस में इमोशन्स को शामिल नहीं कर रहे हैं तो आप बस एक जिंदा लाश की तरह काम कर रहे हैं। कस्टमर को लगना चाहिए कि आप उनकी फिक्र करते हैं न कि सिर्फ उनकी जेब साफ करने के चक्कर में हैं। जब आप दिल से जुड़ते हैं तो प्राइस टैग छोटा लगने लगता है। इसलिए अगली बार जब आप किसी कस्टमर से मिलें तो यह न सोचें कि इससे कितना प्रॉफिट होगा बल्कि यह सोचें कि इसके चेहरे पर मुस्कान कैसे आएगी। क्योंकि मुस्कान मुफ्त है पर इसका रिटर्न बहुत तगड़ा मिलता है।
लेसन ३ : हर टचपॉइंट पर ऑसम फील कराना
क्या आपने कभी नोटिस किया है कि कुछ ब्रांड्स के साथ काम करना मक्खन की तरह स्मूथ होता है और कुछ के साथ ऐसा लगता है जैसे आप पहाड़ पर पत्थर खींच रहे हों। गैरी मिलेट कहते हैं कि ऑसम एक्सपीरियंस कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि यह हर छोटी डिटेल पर ध्यान देने का नतीजा है। जिसे हम टचपॉइंट कहते हैं। यह टचपॉइंट कुछ भी हो सकता है। आपकी दुकान के बाहर लगा साइन बोर्ड या आपकी कस्टमर केयर वाली मैडम की आवाज।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि जब कस्टमर पेमेंट करेगा तब हम उसे अच्छी सर्विस देंगे। भाई साहब यह तो वही बात हो गई कि पहले बारिश होगी तब हम छाता खरीदेंगे। तब तक तो कस्टमर भीगकर किसी और की दुकान में घुस चुका होगा। मान लीजिये आप किसी ऑनलाइन वेबसाइट से कपड़े मंगवाते हैं। वेबसाइट बड़ी चकाचक है पर डिलीवरी वाला लड़का आपके घर आकर ऐसे चिल्लाता है जैसे आप उसके उधार के पैसे दबाकर बैठे हों। क्या आप दोबारा वहां से आर्डर करेंगे। कभी नहीं। वह डिलीवरी वाला लड़का उस कंपनी का चेहरा बन गया और उसने पूरा एक्सपीरियंस खराब कर दिया।
हर टचपॉइंट पर ऑसम होने का मतलब है कि आपको कस्टमर को हर कदम पर सरप्राइज करना है। और सरप्राइज का मतलब यह नहीं कि आप उसे महंगी घड़ी गिफ्ट कर दें। कभी कभी बस एक थैंक यू नोट या फिर सामान की डिलीवरी के बाद एक छोटा सा फीडबैक कॉल ही काफी होता है। लेकिन हम तो ठहरे जुगाड़ू लोग। हमें लगता है कि काम चल रहा है तो चलने दो। यही सोच हमारे बिजनेस को दीमक की तरह चाट जाती है।
अगर आप चाहते हैं कि आपका कस्टमर आपका फैन बन जाए तो आपको उन जगहों पर भी सुधार करना होगा जहाँ आपका ध्यान कभी नहीं गया। अपनी वेबसाइट के कांटेक्ट अस पेज को देखिये। क्या वहां सिर्फ एक ईमेल आईडी लिखी है जिस पर रिप्लाई कभी नहीं आता या फिर वहां कोई ऐसा तरीका है जिससे कस्टमर को लगे कि उसकी बात सुनी जा रही है। हर छोटी बातचीत एक मौका है अपना ब्रांड बनाने का। अगर आप इन छोटे मौकों को गँवा रहे हैं तो आप असल में अपना पैसा कूड़ेदान में डाल रहे हैं। कस्टमर को सिर्फ सामान नहीं चाहिए उसे इज्जत और आसानी चाहिए। जिस दिन आपने उसे यह दोनों चीजें दे दीं उस दिन वो आपके लिए खुद ही मार्केटिंग करने लगेगा।
तो दोस्तों, कस्टमर एक्सपीरियंस कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप बस एक बार करके भूल जाएं। यह तो एक ऐसी साधना है जो हर रोज करनी पड़ती है। अगर आप आज भी पुराने ढर्रे पर बिजनेस कर रहे हैं तो जाग जाइये क्योंकि आपका कस्टमर अब स्मार्ट हो गया है। उसे पता है कि कहाँ उसे राजा जैसा फील कराया जा रहा है और कहाँ सिर्फ चूना लगाया जा रहा है।
क्या आप तैयार हैं अपने कस्टमर के लिए कुछ ऑसम करने के लिए। आज ही बैठिये और अपने बिजनेस के हर टचपॉइंट को चेक कीजिये। देखिये कि कहाँ आप अपने कस्टमर को दुखी कर रहे हैं और उसे सुधारिये। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप चाहते हैं कि आपके दोस्त भी अपने बिजनेस को बढ़ाएं तो इसे अभी शेयर कीजिये। नीचे कमेंट में बताइये कि आपने अपनी लाइफ में सबसे खराब कस्टमर सर्विस कहाँ झेली है। चलिए मिलकर इंडिया के हर बिजनेस को ऑसम बनाते हैं।
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