अभी भी वही घिसी पिटी सर्विस दे रहे हो और फिर रोते हो कि कस्टमर लौटकर क्यों नहीं आता। सच तो यह है कि आपका कॉम्पिटिटर आपके कस्टमर्स को छीन रहा है क्योंकि आप फेडेक्स जैसे सीक्रेट्स को इग्नोर करने की गलती कर रहे हो।
आज हम माइकल बाश की बेहतरीन किताब कस्टमर कल्चर को डिकोड करेंगे। इस आर्टिकल में आप उन 3 पावरफुल लेसन के बारे में जानेंगे जो आपके छोटे से बिजनेस को एक लेजेंडरी ब्रांड बना सकते हैं।
लेसन १ : एम्प्लॉई को राजा बनाओगे तभी कस्टमर को भगवान मान पाओगे
अगर आप सोचते हैं कि आप अपने ऑफिस में एम्प्लॉई की बेइज्जती करेंगे और वह बाहर जाकर कस्टमर को मलाई जैसी सर्विस देगा तो आप शायद किसी दूसरी ही दुनिया में जी रहे हैं। माइकल बाश अपनी किताब में साफ कहते हैं कि फेडेक्स जैसी कंपनी ने आसमान इसलिए छुआ क्योंकि उन्होंने अपने डिलीवरी बॉय को भी कंपनी का सबसे जरूरी हिस्सा माना। इंडिया में हमारा हाल यह है कि बॉस को लगता है कि एम्प्लॉई को सैलरी दे दी तो बहुत बड़ा एहसान कर दिया। अब वह एम्प्लॉई दुखी मन से आपके कस्टमर का फोन उठाता है और फिर वही होता है जिसकी आपको उम्मीद नहीं थी। कस्टमर को लगता है कि वह किसी इंसान से नहीं बल्कि किसी थके हुए रोबोट से बात कर रहा है।
सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं जहाँ वेटर का चेहरा देखकर ऐसा लगता है जैसे उसका ब्रेकअप अभी पाँच मिनट पहले ही हुआ है। वह टेबल पर पानी का गिलास ऐसे पटकता है जैसे आपने उससे उसकी किडनी मांग ली हो। क्या आप वहाँ दोबारा जाएंगे। बिल्कुल नहीं। अब उस बेचारे वेटर की गलती नहीं है। हो सकता है पीछे किचन में मैनेजर ने उसे गालियां दी हों। फेडेक्स ने सिखाया कि अगर आप अपने एम्प्लॉई को खुश रखते हैं तो वे दिल से काम करते हैं। जब एम्प्लॉई का मूड अच्छा होता है तो वह कस्टमर की छोटी से छोटी समस्या को भी जादू की तरह सुलझा देता है।
अक्सर बिजनेस ओनर सोचते हैं कि कस्टमर को डिस्काउंट दे दो तो वह खुश हो जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि कस्टमर को पैसे से ज्यादा इज्जत की भूख होती है। और वह इज्जत उसे आपका एम्प्लॉई ही दे सकता है। अगर आपका एम्प्लॉई डरा हुआ है या परेशान है तो वह कभी भी कस्टमर के चेहरे पर मुस्कान नहीं ला सकता। आपको अपने ऑफिस का माहौल ऐसा बनाना होगा जहाँ लोग काम करने के लिए तड़पें न कि वहां से भागने के बहाने ढूंढें। जब आपके लोग अपनी कंपनी पर गर्व करेंगे तभी वे आपके ब्रांड को दुनिया का नंबर वन ब्रांड बनाएंगे।
आजकल के दौर में जहाँ हर कोई सोशल मीडिया पर रिव्यु डालने के लिए तैयार बैठा है वहां एक भी नाराज एम्प्लॉई आपके पूरे बिजनेस की लंका लगा सकता है। इसलिए अगली बार जब आप अपने किसी टीम मेंबर पर चिल्लाने वाले हों तो याद रखिएगा कि आप उस पर नहीं बल्कि अपने आने वाले मुनाफे पर चिल्ला रहे हैं। एम्प्लॉई फर्स्ट वाला कल्चर ही असली कस्टमर फर्स्ट कल्चर की नींव है।
लेसन २ : सिस्टम को इतना आसान बनाओ कि एक बच्चा भी आपका सामान खरीद ले
जरा सोचिए कि आपको एक नया फोन खरीदना है और कंपनी आपसे कहती है कि पहले फॉर्म भरो फिर तीन दिन बाद ऑफिस आकर इंटरव्यू दो और फिर अपनी कुंडली दिखाओ। क्या आप वहां से फोन लेंगे। शायद आप उस दुकान से बाहर निकलकर किसी ऐसी जगह जाएंगे जहाँ बस पैसे दो और सामान हाथ में आ जाए। माइकल बाश कहते हैं कि फेडेक्स की सबसे बड़ी ताकत उनका सुपर फास्ट और आसान सिस्टम था। उन्होंने बिजनेस को रॉकेट साइंस नहीं बनाया। लेकिन हमारे यहाँ कुछ लोग अपनी वेबसाइट या दुकान को भूलभुलैया की तरह बना देते हैं। उनको लगता है कि जितना मुश्किल सिस्टम होगा उतना ही प्रोफेशनल लगेगा। जबकि हकीकत में आप अपने कस्टमर को भगा रहे होते हैं।
मान लीजिए आपका कोई ऑनलाइन स्टोर है और चेकआउट करने के लिए कस्टमर को दस पेज से गुजरना पड़ता है। पहले नाम लिखो फिर मम्मी का नाम फिर दादाजी का गांव और फिर जाकर पेमेंट का ऑप्शन आता है। इतने में तो कस्टमर का मूड ही बदल जाता है और वह टैब बंद करके सो जाता है। आप अपना नुकसान खुद कर रहे हैं और आपको पता भी नहीं है। फेडेक्स ने क्या किया। उन्होंने ट्रैकिंग सिस्टम को इतना स्मूथ बनाया कि कस्टमर को एक एक पल की खबर रहती थी। उन्हें कभी पैनिक होने की जरूरत ही नहीं पड़ी। जब आप अपने सिस्टम से कन्फ्यूजन हटा देते हैं तो कस्टमर का भरोसा अपने आप बढ़ जाता है।
इंडिया में अक्सर हम देखते हैं कि सरकारी दफ्तरों जैसी लाइनें अब प्राइवेट बिजनेस में भी दिखने लगी हैं। कॉल सेंटर पर फोन करो तो वह आपको बीस मिनट तक म्यूजिक सुनाते रहते हैं जैसे आप उनकी शादी का गाना सुनने के लिए बैठे हों। उसके बाद जब कोई फोन उठाता है तो वह कहता है कि सर यह मेरा डिपार्टमेंट नहीं है आप दूसरे नंबर पर फोन कीजिए। यह कस्टमर को सर्विस नहीं बल्कि सजा देना है। कस्टमर कल्चर किताब हमें सिखाती है कि अगर आपका प्रोसेस कस्टमर के लिए सिरदर्द बन रहा है तो आपका बिजनेस कभी बड़ा नहीं हो सकता। आपको अपने कस्टमर का वक्त बचाना सीखना होगा क्योंकि आज के जमाने में वक्त ही असली पैसा है।
सिस्टम आसान बनाने का मतलब यह नहीं है कि आप क्वालिटी गिरा दें। इसका मतलब यह है कि कस्टमर का रास्ता साफ करें। उसके रास्ते में जो भी फालतू की बाधाएं हैं उन्हें हटा दें। चाहे वह आपकी दुकान का लेआउट हो या आपकी मोबाइल एप्लीकेशन का इंटरफेस। इसे इतना सिंपल रखिए कि किसी को पूछना न पड़े कि अब आगे क्या करना है। जब कस्टमर को मेहनत कम करनी पड़ती है तो वह आपके पास बार बार आता है। उसे पता होता है कि यहाँ काम चुटकियों में हो जाता है। यही वह जादू है जो एक साधारण कंपनी को फेडेक्स जैसा ब्रांड बना देता है।
लेसन ३ : कस्टमर की शिकायत को डांट नहीं बल्कि फ्री की सलाह मानो
ज्यादातर बिजनेस ओनर का हाल यह होता है कि जैसे ही कोई कस्टमर शिकायत लेकर आता है तो उन्हें लगता है कि सामने वाला उनकी जायदाद हड़पने आया है। वे डिफेंसिव हो जाते हैं और उल्टा कस्टमर को ही गलत साबित करने में अपनी पूरी एनर्जी लगा देते हैं। माइकल बाश कहते हैं कि जो कस्टमर शिकायत कर रहा है वह आपका सबसे बड़ा शुभचिंतक है। क्यों। क्योंकि वह आपको बता रहा है कि आपके बिजनेस में छेद कहाँ है। जो कस्टमर बिना कुछ कहे चुपचाप चला जाता है वह ज्यादा खतरनाक है क्योंकि वह कभी वापस नहीं आएगा और बाहर जाकर दस लोगों को आपके बारे में बुरा भला कहेगा। फेडेक्स ने अपनी गलतियों को कभी छुपाया नहीं बल्कि उन्हें सुधारा और यही उनकी महानता का राज बना।
कल्पना कीजिए कि आपने किसी ऑनलाइन साइट से एक शर्ट मंगवाई और उसका बटन टूटा हुआ निकला। जब आपने कस्टमर केयर को फोन किया तो उन्होंने आपसे ऐसे बात की जैसे बटन आपने खुद जानबूझकर तोड़ा हो। आपको कैसा लगेगा। आप कसम खा लेंगे कि अब इस कंपनी से सुई भी नहीं खरीदनी। वहीं अगर दूसरी तरफ कंपनी तुरंत माफी मांगकर आपको नई शर्ट भेज दे और साथ में एक छोटा सा गिफ्ट कार्ड भी दे दे तो आप उनके फैन बन जाएंगे। शिकायत सुलझाना असल में कस्टमर को अपना पक्का फैन बनाने का सबसे सस्ता और अच्छा तरीका है। लेकिन हमारे यहाँ लोग ईगो पालकर बैठ जाते हैं कि मैं कैसे झुक सकता हूँ।
सच्चाई तो यह है कि मार्केट में परफेक्ट कोई नहीं होता। गलतियां सबसे होती हैं। फेडेक्स से भी पार्सल खोते थे लेकिन वे उसे स्वीकार करना जानते थे। जब आप अपनी गलती मान लेते हैं तो कस्टमर का गुस्सा आधा हो जाता है। और जब आप उस गलती को ठीक कर देते हैं तो वही गुस्सा भरोसे में बदल जाता है। बिजनेस में सार्केस्म यह है कि हम मार्केटिंग और एड्स पर लाखों रुपये फूंक देते हैं लेकिन एक नाराज कस्टमर को सुनने के लिए हमारे पास पांच मिनट नहीं होते। हम नए कस्टमर ढूंढने के चक्कर में पुराने वफादार कस्टमर को कचरे के डिब्बे में डाल देते हैं।
आपको अपने फीडबैक सिस्टम को एक रिवार्ड की तरह देखना चाहिए। अगर कोई कह रहा है कि आपका खाना ठंडा था या आपकी सर्विस धीमी थी तो वह आपको फ्री में कंसल्टेंसी दे रहा है। वह आपको बता रहा है कि अगली बार आपको क्या ठीक करना है ताकि आपका कॉम्पिटिटर आपको पछाड़ न सके। जो कंपनियां कस्टमर की आवाज को अनसुना करती हैं उनका नाम बहुत जल्द इतिहास के पन्नों से मिट जाता है। इसलिए शिकायत करने वाले का हाथ पकड़िए उसे गले लगाइए और सुधार कीजिए। यही वह आखिरी कदम है जो आपको एक लोकल दुकान से उठाकर ग्लोबल ब्रांड बना देता है।
दोस्तों, कस्टमर कल्चर सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि बिजनेस करने का एक नया नजरिया है। आज ही अपने एम्प्लॉई से बात कीजिए अपने सिस्टम की कमियां ढूंढिए और शिकायतों को प्यार से गले लगाइए। अगर आप आज नहीं बदले तो कल आपका कस्टमर किसी और की दुकान पर खड़ा होगा। इस आर्टिकल को उन सभी दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको इन तीन लेसन में से सबसे अच्छा कौन सा लगा।
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