Deliver! (Hindi)


क्या आप भी अपने बिज़नेस को कछुए की चाल पर चलाकर खुश हैं। मुबारक हो, आप बहुत जल्द मार्केट से बाहर होने वाले हैं और आपके कॉम्पिटिटर आपकी बर्बादी पर पार्टी करेंगे। अगर आपको लगता है कि बिना सिस्टम के आप तरक्की करेंगे, तो यह आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है।

जिम चैम्पी की किताब डिलीवर हमें सिखाती है कि आज के दौर में सिर्फ काम करना काफी नहीं है। इस आर्टिकल में हम उन ३ पावरफुल लेसन को समझेंगे जो आपके काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे और आपको एक प्रो लीडर बनाएंगे।


लेसन १ : स्पीड ही असली पावर है

आज के जमाने में अगर आप धीरे चल रहे हैं तो समझो आप पीछे नहीं बल्कि खत्म हो रहे हैं। जिम चैम्पी कहते हैं कि कस्टमर को कल नहीं बल्कि अभी सर्विस चाहिए। मार्केट में सर्वाइवल का गेम अब सिर्फ क्वालिटी पर नहीं बल्कि इस बात पर टिका है कि आप कितनी तेजी से रिस्पॉन्स देते हैं। इमेजिन करिए कि आप भूखे हैं और आपने पिज्जा आर्डर किया। अगर वो दो घंटे बाद आए तो क्या आप उसे खुशी से लेंगे। बिल्कुल नहीं। तब तक आपका मूड और भूख दोनों मर चुके होंगे। बिज़नेस में भी यही होता है। जब आप डिसीजन लेने में महीनों लगा देते हैं या डिलीवरी में हफ़्तों बर्बाद करते हैं तो आपका कस्टमर दूसरे दरवाजे पर खड़ा मिलता है।

स्पीड का मतलब यह नहीं है कि आप पागलों की तरह बिना सोचे समझे भागें। इसका मतलब है अपने सिस्टम से उन फालतू की चीजों को हटा देना जो आपके काम को रोकती हैं। बहुत सी कंपनियों में एक फाइल को आगे बढ़ाने के लिए दस लोगों के साइन चाहिए होते हैं। यह मैनेजमेंट नहीं बल्कि अपनी ही कब्र खोदने जैसा है। जिम चैम्पी के हिसाब से आपको अपनी प्रोसेस को इतना स्मूथ बनाना चाहिए कि काम मक्खन की तरह हो। जैसे इंडिया में लोग अपनी शादी के कार्ड बांटने के लिए महीनों पहले प्लानिंग करते हैं लेकिन एंड टाइम पर भी कोई न कोई रह ही जाता है। अगर वही सिस्टम एक ऑटोमेटेड लिस्ट और डिजिटल इनवाइट पर होता तो काम मिनटों में खत्म हो जाता।

स्लो होना असल में एक बीमारी है जो आपके मुनाफे को खा जाती है। अगर आप एक छोटा सा स्टार्टअप चला रहे हैं और बड़े कॉर्पोरेट की तरह सुस्त डिसीजन ले रहे हैं तो आप अपनी हार की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। अपनी टीम को इतनी पावर दें कि उन्हें हर छोटी चीज के लिए आपकी परमिशन का इन्तजार न करना पड़े। जब लोग खुद फैसले लेते हैं तो काम की रफ़्तार अपने आप बढ़ जाती है। याद रखिए मार्केट में बड़ा मछली छोटी मछली को नहीं खाती बल्कि तेज मछली धीरे चलने वाली मछली को खा जाती है।

आपकी सर्विस की रफ़्तार ही आपकी ब्रांड वैल्यू तय करती है। अगर लोग आपके बारे में यह कहें कि वहां काम बहुत जल्दी होता है तो समझ लीजिए आपने आधी जंग जीत ली है। लेकिन अगर आपकी पहचान एक सरकारी दफ्तर जैसी बन गई है जहां लंच ब्रेक कभी खत्म ही नहीं होता तो फिर भगवान ही आपका मालिक है। अपने ऑपरेशंस को इतना तेज करिए कि आपके कॉम्पिटिटर को समझ ही न आए कि आपने यह सब इतनी जल्दी कैसे कर दिया। रफ़्तार सिर्फ जोश नहीं बल्कि एक सोची समझी रणनीति है जिसे आपको आज ही अपनाना होगा।


लेसन २ : कम खर्चे में बड़ा धमाका करिए

अक्सर लोगों को लगता है कि बिज़नेस बड़ा करने के लिए तिजोरी में करोड़ों रुपये होने चाहिए। जिम चैम्पी इस सोच पर जोर का तमाचा मारते हैं। वह कहते हैं कि असली खिलाड़ी वो है जो कम पैसों में सबसे ज्यादा वैल्यू क्रिएट करे। इसे ही फ्रूगल इनोवेशन कहते हैं। हमारे यहाँ इंडिया में इसे जुगाड़ कहा जाता है लेकिन यह जुगाड़ से कहीं ऊपर की सोच है। बहुत से लोग दिखावे के चक्कर में इतना बड़ा ऑफिस ले लेते हैं जैसे उन्हें वहां पूरा शहर बसाना हो। फिर महीने के अंत में जब बिल आता है तो चेहरे की हवाइयां उड़ जाती हैं। यह कोई समझदारी नहीं बल्कि अपनी ईगो को पालने का एक महंगा तरीका है।

पैसा बचाना और कंजूसी करना दो अलग बातें हैं। कंजूस इंसान क्वालिटी गिरा देता है लेकिन एक फ्रूगल लीडर फालतू के खर्चों को काटकर उसे सही जगह इनवेस्ट करता है। इमेजिन करिए आप एक ऐसी शादी में गए हैं जहाँ सजावट पर लाखों खर्च हुए हैं लेकिन खाने में नमक ही गायब है। क्या आप वहां खुश होंगे। बिल्कुल नहीं। बिज़नेस में भी यही होता है। आप अपनी वेबसाइट पर दुनिया भर के फीचर्स डाल देते हैं लेकिन अगर कस्टमर को चेकआउट करने में पसीने आ रहे हैं तो वो सारा खर्च बेकार है। जिम चैम्पी का मानना है कि आपको अपनी प्रोसेस से हर उस चवन्नी को बचाना चाहिए जो कस्टमर को कोई एक्स्ट्रा खुशी नहीं दे रही है।

मार्केट में टिकने के लिए आपको अपने ऑपरेशंस को हल्का रखना होगा। जैसे एक जिम जाने वाला बंदा अपनी बॉडी से एक्स्ट्रा फैट हटाता है वैसे ही आपको अपनी कंपनी से एक्स्ट्रा खर्चे हटाने होंगे। अगर आप डिजिटल मार्केटिंग से काम चला सकते हैं तो महंगे अखबारों में विज्ञापन देना बंद करिए। अगर मीटिंग्स वीडियो कॉल पर हो सकती हैं तो बिजनेस क्लास में ट्रेवल करके पैसा फूंकना बंद करिए। बहुत से स्टार्टअप्स इसलिए डूब जाते हैं क्योंकि उनके पास आईडिया तो जबरदस्त होता है लेकिन उनका बर्न रेट यानी पैसे जलाने की रफ़्तार रॉकेट जैसी होती है।

असली सक्सेस तब मिलती है जब आपकी सर्विस सबसे सस्ती और सबसे बेहतरीन हो। लोग आपको आपकी अमीरी के लिए नहीं बल्कि आपके काम के लिए पैसे देते हैं। अगर आप अपने रिसोर्सेज का सही इस्तेमाल करना सीख गए तो आपको फंडिंग की लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। याद रखिए जो पैसा आपने बचाया है वही असली मुनाफा है। अपने हर एक रुपये को ऐसे खर्च करिए जैसे वो आपकी आखिरी उम्मीद हो। जब आप पैसों की कद्र करते हैं तो पैसा भी आपकी तरफ खींचा चला आता है।


लेसन ३ : बिना गलती के काम करने की आदत डालिए

स्पीड और कम खर्चा अपनी जगह ठीक है लेकिन अगर आपकी सर्विस में गलतियां भरी हैं तो सब बेकार है। जिम चैम्पी कहते हैं कि फ्लॉलेस होना कोई चॉइस नहीं बल्कि मजबूरी है। इमेजिन करिए आपने एक नया महंगा फोन ख़रीदा और घर जाकर देखा कि उसका कैमरा ही काम नहीं कर रहा। आप कितने भी कूल बनने की कोशिश करें पर आप उस कंपनी को गालियां ही देंगे। आप यह नहीं कहेंगे कि चलो कम से कम फोन जल्दी तो मिल गया। बिज़नेस में एक छोटी सी गलती आपकी सालों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। हम इंडियंस अक्सर चलता है वाला एटीट्यूड रखते हैं लेकिन ग्लोबल मार्केट में यह एटीट्यूड आपको सड़क पर ला सकता है।

परफेक्ट होना बोरिंग लग सकता है लेकिन यह प्रॉफिटेबल होता है। जब आप पहली बार में ही काम सही करते हैं तो आपका दोबारा मेहनत करने का समय और पैसा दोनों बचता है। बहुत सी कंपनियां अपनी गलतियां सुधारने में इतना पैसा खर्च कर देती हैं जितना उन्होंने ओरिजिनल प्रोडक्ट बनाने में नहीं किया होता। यह वैसा ही है जैसे हलवाई पहले नमक ज्यादा डाल दे और फिर उसे बैलेंस करने के लिए पूरी दुकान की चीनी डाल दे। अंत में स्वाद तो बिगड़ता ही है और खर्चा भी डबल हो जाता है। आपको अपनी प्रोसेस को इतना पुख्ता बनाना होगा कि गलती की गुंजाइश ही न रहे।

डिलीवर करने का मतलब सिर्फ सामान पहुंचाना नहीं बल्कि वादे को पूरा करना है। अगर आपने कहा है कि सर्विस दस बजे मिलेगी तो वो दस बजकर एक मिनट पर नहीं होनी चाहिए। जिम चैम्पी के अनुसार क्वालिटी का मतलब सिर्फ महंगा होना नहीं है बल्कि भरोसेमंद होना है। लोग उन ब्रांड्स के पास बार बार जाते हैं जहाँ उन्हें पता होता है कि उन्हें धोखा नहीं मिलेगा। अगर आप अपनी टीम को सिर्फ काम खत्म करने के लिए कहेंगे तो वो कचरा ही बना कर देंगे। उन्हें क्वालिटी के लिए जिम्मेदार बनाइए। जब हर इंसान अपने काम को एक आर्ट की तरह देखेगा तब आपकी कंपनी फ्लॉलेस बनेगी।

दुनिया सिर्फ उन्हीं को याद रखती है जो अपने वादे पर खरे उतरते हैं। रफ़्तार और कम खर्च के साथ जब आप अपनी सर्विस में परफेक्शन का तड़का लगाते हैं तो आप एक अनबीटेबल ब्रांड बन जाते हैं। अब वक्त आ गया है कि आप अपने बिज़नेस के हर कोने को चेक करें और उन गलतियों को जड़ से उखाड़ फेंकें जो आपके और सक्सेस के बीच खड़ी हैं।


तो क्या आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चलकर अपनी बर्बादी का इन्तजार करेंगे या आज ही अपने काम करने के तरीके को फ़ास्ट और फ्लॉलेस बनाएंगे। जिम चैम्पी के ये लेसन सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बल्कि अपनी लाइफ और बिज़नेस में उतारने के लिए हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको अपने काम में सबसे ज्यादा सुधार किस लेसन की मदद से करना है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो बिज़नेस में आगे बढ़ना चाहते हैं।

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