अगर आप अभी भी घटिया कस्टमर सर्विस और दुखी एम्प्लॉई के साथ करोड़ों कमाने का सपना देख रहे हैं तो बधाई हो। आप अपनी बर्बादी का टिकट खुद काट रहे हैं। टोनी हेश की यह बुक न पढ़कर आप अपनी कंपनी और करियर को गड्ढे में धकेलने का पूरा चांस ले रहे हैं।
आज के कॉम्पिटिशन में सिर्फ माल बेचना काफी नहीं है। अगर आप जानना चाहते हैं कि कैसे एक छोटी सी कंपनी जैपोस ने सिर्फ खुशियाँ बेचकर अरबों का बिजनेस खड़ा किया तो यह आर्टिकल आपके लिए गेम चेंजर साबित होने वाला है। चलिए देखते हैं इसके ३ पावरफुल लेसन।
लेसन १ : कस्टमर सर्विस का असली जादू और आपका ईगो
अगर आपको लगता है कि कस्टमर को सामान बेचकर आपका काम खत्म हो गया तो भाई साहब आप अभी भी पत्थर के जमाने में जी रहे हैं। टोनी हेश ने अपनी लाइफ में एक बहुत ही सिंपल बात सीखी थी कि लोग यह भूल सकते हैं कि आपने उन्हें क्या बेचा लेकिन वे यह कभी नहीं भूलते कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया। अब जरा अपनी लाइफ की तरफ देखिए। आप किसी दुकान पर जाते हैं और वहाँ का दुकानदार आपको ऐसे देखता है जैसे आपने उसकी जायदाद मांग ली हो। क्या आप वहाँ दोबारा जाएंगे? बिल्कुल नहीं। टोनी हेश ने जैपोस में कस्टमर सर्विस को केवल एक डिपार्टमेंट नहीं बल्कि पूरी कंपनी का मिशन बना दिया था।
ज्यादातर बिजनेसमैन को लगता है कि मार्केटिंग का मतलब है बड़े बड़े होर्डिंग्स लगाना या टीवी पर चिल्लाना। लेकिन असलियत में असली मार्केटिंग वह है जो आपके कस्टमर के दिल से निकलती है। जैपोस में एक बार एक कस्टमर ने जूते वापस करने के लिए फोन किया क्योंकि उसके घर में किसी की डेथ हो गई थी। अब अगर कोई नॉर्मल कंपनी होती तो वह शायद रिफंड के फॉर्म भरवाती। लेकिन जैपोस के एम्प्लॉई ने न केवल जूते वापस लिए बल्कि उस कस्टमर को फूलों का एक गुलदस्ता भी भेजा। इसे कहते हैं खुशियाँ बांटना। क्या आपको लगता है कि वह कस्टमर कभी किसी और कंपनी के पास जाएगा? वह तो अब फ्री में जैपोस का विज्ञापन करेगा।
हम इंडियंस की एक आदत है कि हम थोड़े से पैसे बचाने के चक्कर में क्वालिटी और सर्विस से समझौता कर लेते हैं। हम सोचते हैं कि अगर एक कॉल सेंटर का एम्प्लॉई जल्दी फोन काट देगा तो कंपनी का पैसा बचेगा। टोनी हेश इसके बिल्कुल खिलाफ थे। उन्होंने अपने एम्प्लॉई को छूट दे रखी थी कि वे घंटों तक कस्टमर से बात करें जब तक कस्टमर खुश न हो जाए। एक बार तो एक कॉल दस घंटे से भी ज्यादा चली थी। अब कुछ लोग इसे बेवकूफी कहेंगे लेकिन टोनी के लिए यह लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट था।
सच्चाई तो यह है कि आपका कस्टमर ही आपका सबसे बड़ा ब्रांड एम्बेसडर है। अगर आप उसे सिर्फ एक नंबर की तरह ट्रीट करेंगे तो वह भी आपको सिर्फ एक ऑप्शन की तरह देखेगा। जिस दिन आप अपने कस्टमर की प्रॉब्लम को अपनी प्रॉब्लम समझने लगेंगे उस दिन आपको करोड़ों के विज्ञापन की जरूरत नहीं पड़ेगी। आप बस अपनी सर्विस पर फोकस करिए और पैसा खुद ब खुद आपके पीछे आएगा। याद रखिए कि एक खुश कस्टमर दस नए कस्टमर लाता है लेकिन एक दुखी कस्टमर आपकी पूरी मार्केट वैल्यू मिट्टी में मिला सकता है। तो क्या आप तैयार हैं अपने ईगो को साइड में रखकर अपने कस्टमर के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए?
लेसन २ : कंपनी कल्चर ही असली ब्रांड है
अगर आप सोचते हैं कि ऑफिस में बस एक टेबल और कुर्सी लगा देने से काम हो जाता है तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। टोनी हेश का मानना था कि अगर आपके ऑफिस का कल्चर खराब है तो आपका बिजनेस कभी भी आसमान नहीं छू सकता। ज्यादातर इंडियन बॉस अपने एम्प्लॉई को ऐसे देखते हैं जैसे वे कोई मशीन हों जिनका काम सिर्फ बटन दबाना है। सुबह नौ बजे का टाइम है और अगर आप नौ बजकर दो मिनट पर आए तो ऐसे देखा जाता है जैसे आपने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो। लेकिन टोनी ने जैपोस में एक ऐसी दुनिया बनाई जहाँ लोग काम पर आने के लिए एक्साइटेड रहते थे।
टोनी ने एक बहुत ही अजीब लेकिन जीनियस काम किया। जब भी कोई नया एम्प्लॉई जैपोस में ट्रेनिंग पूरी करता था तो टोनी उसे दो हजार डॉलर यानी करीब डेढ़ लाख रुपये ऑफर करते थे कि भाई यह पैसे लो और अभी नौकरी छोड़ दो। अब आप सोचेंगे कि यह कैसी पागलपंती है? कौन अपनी कंपनी से लोगों को भगाने के लिए पैसे देता है? लेकिन टोनी जानते थे कि जो इंसान थोड़े से पैसों के लिए कंपनी छोड़ सकता है वह जैपोस के कल्चर के लिए फिट नहीं है। उन्हें ऐसे लोग चाहिए थे जो पैसे के लिए नहीं बल्कि जुनून के लिए साथ जुड़ें।
आजकल के स्टार्टअप्स को देखिए। वे सोचते हैं कि ऑफिस में एक टेबल टेनिस की टेबल रख दी या फ्री में कॉफी पिला दी तो कल्चर बन गया। कल्चर टेबल टेनिस से नहीं बल्कि भरोसे से बनता है। अगर आपके एम्प्लॉई ऑफिस की गॉसिप में बिजी हैं और एक दूसरे की टांग खींच रहे हैं तो समझ लीजिए आपका जहाज डूबने वाला है। टोनी ने सिखाया कि कल्चर का मतलब है कि जब कोई बॉस आसपास न हो तब भी एम्प्लॉई उसी ईमानदारी से काम करें।
जैपोस में हर किसी को अपनी राय रखने की आजादी थी। वहाँ कोई बड़ा या छोटा नहीं था। अगर एक नया एम्प्लॉई भी कोई अच्छा आइडिया देता था तो उसे लागू किया जाता था। हम इंडियंस अक्सर अपने बॉस के सामने हाँ में हाँ मिलाते हैं चाहे वह गलत ही क्यों न हो। इसे चमचागिरी कहते हैं कल्चर नहीं। टोनी हेश ने इस डर को खत्म किया। उन्होंने समझा कि जब लोग खुद को कंपनी का हिस्सा समझने लगते हैं तो वे उसे बढ़ाने के लिए अपनी जान लगा देते हैं।
जब आपकी कंपनी का कल्चर स्ट्रॉन्ग होता है तो ब्रांड खुद ब खुद बन जाता है। आपको बाहर जाकर यह चिल्लाने की जरूरत नहीं पड़ती कि हम सबसे अच्छे हैं। आपके एम्प्लॉई की खुशी उनकी आवाज में और उनके काम में झलकती है। अगर आप अपने एम्प्लॉई का ख्याल रखेंगे तो वे आपके कस्टमर का ख्याल रखेंगे। यह एक ऐसा सर्कल है जो कभी नहीं टूटता। तो अपने ऑफिस के माहौल को ऐसा बनाइए कि लोग मंडे का इंतजार करें न कि संडे के खत्म होने का गम मनाएं।
लेसन ३ : लर्निंग और ग्रोथ की आदत और आपकी लाइफ का पर्पस
अगर आपको लगता है कि कॉलेज की डिग्री मिल गई और अब सब सीख लिया तो मुबारक हो आप अपनी ग्रोथ का गला खुद घोंट रहे हैं। टोनी हेश का कहना था कि जिस दिन आपने सीखना बंद कर दिया उस दिन से आप पीछे जाना शुरू हो जाते हैं। बिजनेस हो या लाइफ यहाँ कोई भी चीज रुकी हुई नहीं है। जैपोस में एक 'लर्निंग लाइब्रेरी' थी जहाँ कोई भी एम्प्लॉई जाकर बुक्स पढ़ सकता था और अपनी स्किल्स बढ़ा सकता था। हमारे यहाँ क्या होता है? ऑफिस के बाद लोग वेब सीरीज देखने में या फालतू की रील्स स्क्रॉल करने में घंटों बर्बाद कर देते हैं लेकिन एक नई स्किल सीखने के नाम पर उन्हें बुखार आ जाता है।
टोनी हेश ने सिखाया कि पैसा कमाना सिर्फ एक जरिया है मंजिल नहीं। असली मंजिल है आपका पर्पस यानी आपका उद्देश्य। उन्होंने लिंकवाइल्ड जैसी बड़ी कंपनी सिर्फ इसलिए नहीं बनाई थी कि उन्हें करोड़पति बनना था बल्कि इसलिए बनाई थी कि वे लोगों की लाइफ में बदलाव लाना चाहते थे। हम लोग अक्सर दूसरों को देखकर अपना गोल डिसाइड करते हैं। पड़ोसी ने नई कार ली तो हमें भी चाहिए चाहे उसके लिए हम कितना ही स्ट्रेस क्यों न पाल लें। इसे लाइफ जीना नहीं बल्कि रेस में दौड़ना कहते हैं। टोनी ने समझाया कि जब आपका काम आपके पैशन और पर्पस से जुड़ जाता है तो थकान नहीं बल्कि खुशी महसूस होती है।
ग्रोथ का मतलब सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं है। इसका मतलब है हर दिन कल से थोड़ा बेहतर इंसान बनना। टोनी ने अपनी लाइफ में बहुत सारे रिस्क लिए। उन्होंने अपनी पूरी जमापूंजी जैपोस में लगा दी थी जब कंपनी डूबने वाली थी। क्यों? क्योंकि उन्हें अपनी विजन पर भरोसा था। हम इंडियंस थोड़े से रिस्क के नाम पर कांपने लगते हैं। हमें लगता है कि जो चल रहा है उसे ही चलने दो। लेकिन बिना बदलाव के प्रोग्रेस मुमकिन ही नहीं है। टोनी का पूरा जीवन एक एक्सपेरिमेंट की तरह था जहाँ उन्होंने बार बार फेल होकर भी खुशियाँ बांटना नहीं छोड़ा।
आज की भागदौड़ वाली लाइफ में हम भूल जाते हैं कि हम यह सब कर क्यों रहे हैं। अंत में क्या बचेगा? आपकी यादें और वह असर जो आपने दुनिया पर छोड़ा है। टोनी हेश ने अरबों की कंपनी बनाई लेकिन उनकी असली पहचान वह खुशियाँ थीं जो उन्होंने अपने एम्प्लॉई और कस्टमर को दीं। अगर आप भी सफल होना चाहते हैं तो पहले खुद से यह सवाल पूछिए कि आपका पर्पस क्या है? क्या आप सिर्फ सर्वाइव कर रहे हैं या आप वाकई में कुछ बड़ा बिल्ड कर रहे हैं? सीखना जारी रखिए खुद को बदलते रहिए और याद रखिए कि सफलता का असली रास्ता खुशियों की गली से होकर ही गुजरता है।
टोनी हेश की यह कहानी हमें सिखाती है कि बिजनेस और लाइफ को सिर्फ दिमाग से नहीं बल्कि दिल से भी चलाया जा सकता है। अगर आप अपने काम में खुशियाँ ढूंढ लेंगे तो प्रॉफिट खुद ही आपके दरवाजे पर दस्तक देगा।
अब आपकी बारी है। क्या आप आज से ही अपने काम करने के तरीके को बदलने के लिए तैयार हैं? नीचे कमेंट में बताइए कि टोनी हेश का कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा टच कर गया। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो सिर्फ पैसों के पीछे भाग रहे हैं और उन्हें बताएं कि असली दौलत तो खुशियाँ बांटने में है।
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