क्या आपको सच में लगता है कि नया आइडिया लाकर आप अंबानी बन जाएंगे। अगर ऐसा है तो मुबारक हो आप अपनी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद करने की राह पर हैं। जब स्मार्ट कंपनीज दूसरों का पका पकाया माल खाकर करोड़ों कमा रही हैं तब आप ओरिजिनल बनने के चक्कर में अपनी लुटिया डुबो रहे हैं।
आज हम ओडेड शेनकर की बुक कॉपीकैट्स से वो तरीके सीखेंगे जो आपको बताएंगे कि नक़ल करना भी एक अकल का काम है। चलिए उन तीन बड़े लेसन पर नजर डालते हैं जो आपके बिज़नेस देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल देंगे और आपको एक स्मार्ट इमिटेटर बनाएंगे।
लेसन १ : इनोवेटर नहीं स्मार्ट इमिटेटर बनिए
क्या आपको लगता है कि दुनिया बदलने वाला आइडिया सिर्फ आपके दिमाग की उपज होना चाहिए। अगर हाँ तो आप शायद उन लोगों में से हैं जो पहिये का आविष्कार फिर से करने की कोशिश कर रहे हैं जबकि दुनिया उस पहिये पर फरारी दौड़ा रही है। ओडेड शेनकर अपनी बुक में साफ कहते हैं कि इतिहास गवाह है कि पहला कदम उठाने वाले अक्सर गड्ढे में गिरते हैं और पीछे आने वाले उन गड्ढों को देखकर अपना रास्ता बदल लेते हैं।
सोचिए आपने एक बहुत ही क्रांतिकारी रेस्टोरेंट खोला जिसमें खाना रोबोट परोसते हैं। आपने करोड़ों रुपये रिसर्च और उन नखरे दिखाने वाली मशीनों पर खर्च कर दिए। अब आपका पड़ोसी आता है और देखता है कि आपके रोबोट बार बार दाल गिरा रहे हैं और लोग परेशान हैं। वह चुपके से एक ऐसा ही रेस्टोरेंट खोलता है लेकिन रोबोट की जगह स्मार्ट और तेज तर्रार लड़कों को रख लेता है जो रोबोट जैसी ड्रेस पहनते हैं। उसने आपकी पूरी मेहनत मुफ्त में देख ली और आपकी सबसे बड़ी कमजोरी को सुधार कर अपना धंधा चमका लिया। अब आप अपनी टूटी हुई मशीनों के साथ बैठे रहिए और वह सारा मुनाफा बटोर ले गया।
यह बात सुनने में थोड़ी कड़वी लग सकती है लेकिन कड़वी चीजें ही सेहत के लिए अच्छी होती हैं। एप्पल का नाम तो सुना ही होगा। क्या आपको लगता है कि पहला स्मार्टफोन उन्होंने बनाया था। बिल्कुल नहीं। आईबीएम और नोकिया पहले ही यह खेल खेल रहे थे। लेकिन स्टीव जॉब्स ने क्या किया। उन्होंने देखा कि बाकी सब लोग क्या गलत कर रहे हैं और फिर उस कचरे को हटाकर एक ऐसा हीरा पेश किया जिसे देखकर दुनिया पागल हो गई। उन्होंने पहिया नहीं बनाया बल्कि पहिये को चमकाना सीखा।
आज के इस दौर में अगर आप जीरो से कुछ शुरू करने की जिद पर अड़े हैं तो आप सिर्फ अपना समय और पैसा जला रहे हैं। जब आपके सामने किसी और ने पहले ही रास्ता साफ कर दिया है तो आप उसी रास्ते पर अपनी तेज गाड़ी क्यों नहीं चलाते। स्मार्ट लोग दूसरों की गलतियों पर पीएचडी करते हैं और फिर वही काम करते हैं लेकिन थोड़े बेहतर तरीके से।
अगर आप एक मिडिल क्लास लड़के हैं जो अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है तो मेरी बात कान खोलकर सुन लीजिए। ओरिजिनल बनने के चक्कर में घर के बर्तन बेचने की नौबत मत लाइए। देखिए कि मार्केट में क्या चल रहा है और कौन सा मॉडल लोगों की जेब ढीली कर रहा है। फिर बस उसमें एक छोटा सा ट्विस्ट डालिए और मार्केट के राजा बन जाइए। याद रखिए कि दुनिया पहले आने वाले को मेडल देती है लेकिन पैसे हमेशा अंत तक टिकने वाले और बेहतर सर्विस देने वाले को ही मिलते हैं।
इमिटेशन कोई पाप नहीं है बल्कि यह एक बहुत ही बड़ी स्ट्रेटजी है जिसे दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां अपनाती हैं और हमें पता भी नहीं चलता। तो अपनी अकल लड़ाइए और नक़ल के खेल में माहिर बनिए।
लेसन २ : अकल लगाइए और नक़ल में माहिर बनिए
क्या आपको लगता है कि किसी का आइडिया चुराना बहुत आसान है। अगर आप सोच रहे हैं कि बस किसी की दुकान देखी और वैसी ही खोल दी तो आप भी उन्हीं नौसिखियों में से एक हैं जो अपनी सेविंग्स को आग लगाने के लिए बेताब हैं। ओडेड शेनकर अपनी बुक में साफ कहते हैं कि स्मार्ट इमिटेशन कोई फोटोकॉपी मशीन का काम नहीं है। यह एक ऐसी कला है जिसमें आपको ओरिजिनल वाले से भी ज्यादा दिमाग दौड़ाना पड़ता है।
सोचिए आपके मोहल्ले में एक शर्मा जी हैं जिन्होंने एक बहुत ही शानदार चाट की दुकान खोली। उनकी चटनी के लोग दीवाने हैं और शाम होते ही वहां मेले जैसा माहौल हो जाता है। अब आप जोश में आते हैं और ठीक उनके सामने एक वैसी ही दुकान खोल लेते हैं। आपने उनके जैसा ही बोर्ड लगाया और वही चाट बेचना शुरू कर दिया। लेकिन महीने भर बाद आप मक्खियां मार रहे हैं और शर्मा जी के यहाँ अभी भी वही भीड़ है। क्यों। क्योंकि आपने सिर्फ ऊपर ऊपर से नक़ल की। आपने यह नहीं देखा कि शर्मा जी अपनी चटनी में वो कौन सा गुप्त मसाला डालते हैं या वो अपने ग्राहकों से कैसे मीठी बातें करते हैं।
स्मार्ट इमिटेशन का मतलब है कि आप प्रोडक्ट को टुकड़ों में बांटें और देखें कि उसमें क्या खास है और क्या बेकार। मान लीजिए आपने एक ऑनलाइन ग्रॉसरी ऐप बनाई। आपने देखा कि जेप्टो और ब्लिंकिट 10 मिनट में सामान दे रहे हैं। आपने सोचा कि मैं भी यही करूंगा। लेकिन आपने ये नहीं सोचा कि उन 10 मिनट के पीछे कितनी बड़ी लॉजिस्टिक्स और डार्क स्टोर्स की फौज खड़ी है। आप बिना तैयारी के मैदान में उतरे और आपका डिलीवरी बॉय ट्रैफिक में फंसकर 10 मिनट की जगह 10 घंटे लगा रहा है।
यहाँ ओडेड शेनकर हमें 'क्रिएटिव इमिटेशन' का मंत्र देते हैं। इसका मतलब है कि आप ओरिजिनल को लें और उसमें अपनी एक ऐसी यूनीक वैल्यू जोड़ दें जो ग्राहकों को मजबूर कर दे आपकी तरफ आने के लिए। जैसे फेसबुक ने मायस्पेस को देखा और समझा कि वहां बहुत ज्यादा कचरा और शोर है। उन्होंने बस उसे साफ़ सुथरा बनाया और कॉलेज के छात्रों के लिए एक्सक्लूसिव कर दिया। उन्होंने पहिया नहीं बनाया बल्कि पहिये को अलाइनमेंट दे दी।
अगर आप एक मिडिल क्लास फैमिली से हैं और अपना करियर बनाना चाहते हैं तो याद रखिए कि आपको दुनिया का सबसे बड़ा जीनियस बनने की जरूरत नहीं है। बस उस इंसान को ढूंढिए जो वह काम कर रहा है जो आप करना चाहते हैं। उसकी हर चाल को गौर से देखिए। देखिए कि वो ग्राहकों को कैसे फंसा रहा है और कहाँ वो ढीला पड़ रहा है। जहाँ वो ढीला पड़ रहा है बस वहीं अपना चौका मार दीजिए।
स्मार्ट इमिटेशन में आपको वो कमियां ढूंढनी होती हैं जो बड़े प्लेयर्स नजरअंदाज कर देते हैं। बड़ी कंपनियां हाथी जैसी होती हैं जो मुड़ने में समय लेती हैं। आप एक फुर्तीले खरगोश बनिए जो उनकी नकल भी करे और उनसे तेज भागकर गाजर भी ले उड़े। तो अगली बार जब आप किसी का आइडिया देखें तो उसे नफरत से नहीं बल्कि एक स्टूडेंट की नजर से देखें। देखिए कि आप उस आइडिया को अपनी देसी तड़के के साथ कैसे पेश कर सकते हैं।
अकल के बिना नक़ल करना सिर्फ बेवकूफी है लेकिन अकल के साथ की गई नक़ल ही असली कामयाबी की चाबी है।
लेसन ३ : रिस्क कम करिए और प्रॉफिट बढ़ाइए
क्या आपको एड्रेनालिन का बहुत शौक है। क्या आपको लगता है कि बिज़नेस में जब तक आप अपनी पूरी जायदाद दांव पर न लगा दें तब तक असली मजा नहीं आता। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो मुबारक हो आप एक बहुत ही महंगे जुए की तरफ बढ़ रहे हैं। ओडेड शेनकर हमें समझाते हैं कि स्मार्ट इमिटेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपके फेलियर के चांस को लगभग खत्म कर देता है। जब कोई और पहले ही उस रास्ते पर चलकर कांटे हटा चुका है तो आप नंगे पैर कंकड़ों पर क्यों चलना चाहते हैं।
सोचिए एक नया जिम खुला है जिसने बहुत शोर मचाया कि वो हवा में लटककर कसरत करवाएंगे। उन्होंने लाखों रुपये की विदेशी मशीनें मंगवाई और ट्रेनर्स को ट्रेनिंग दी। छह महीने बाद पता चला कि मोहल्ले के लोगों को तो सिर्फ सादा वजन उठाना और ट्रेडमिल पर भागना पसंद है। अब वो जिम बंद होने की कगार पर है। अब आप आते हैं और देखते हैं कि लोग वहां जाकर सिर्फ एक ही मशीन के पीछे भाग रहे थे। आप अपना नया जिम खोलते हैं और बिना किसी फालतू एक्सपेरिमेंट के सिर्फ वही मशीनें रखते हैं जो लोग सच में पसंद करते हैं। आपने अपना रिस्क जीरो कर दिया क्योंकि मार्केट रिसर्च तो आपके पड़ोसी ने अपनी जेब जलाकर पहले ही कर दी थी।
मार्केट में पहला होने का मतलब है कि आपको लोगों को समझाना पड़ेगा कि आपका प्रोडक्ट क्या है। इसमें करोड़ों का मार्केटिंग बजट चाहिए। लेकिन अगर आप दूसरे या तीसरे नंबर पर आते हैं तो लोगों को पहले से ही पता है कि प्रोडक्ट क्या है। आपको बस उन्हें यह बताना है कि आप दूसरों से बेहतर या सस्ते क्यों हैं। यह एक बहुत ही प्रैक्टिकल अप्रोच है जो आपको रातों रात सड़क पर आने से बचाती है।
आज के इस दौर में जहाँ हर कोई स्टार्टअप का चश्मा पहनकर घूम रहा है वहां सबसे बड़ी गलती है बिना सोचे समझे कुछ नया करने की खुजली। अगर आप किसी को देख रहे हैं कि वह एक पर्टिकुलर मॉडल से पैसे बना रहा है तो उसकी नक़ल करने में शर्माना कैसा। क्या आपको लगता है कि गूगल दुनिया का पहला सर्च इंजन था। क्या आपको लगता है कि नेटफ्लिक्स पहली कंपनी थी जो फिल्में दिखाती थी। बिल्कुल नहीं। इन्होंने बस दूसरों के फेलियर से सीखा और अपना दांव तब लगाया जब रिस्क कम हो गया था।
असली समझदारी इसी में है कि आप दूसरों के कंधों पर चढ़कर दुनिया देखें। जब आप किसी का सफल मॉडल कॉपी करते हैं तो आप उन हजार गलतियों से बच जाते हैं जो उस इंसान ने की होंगी। आपके पास बना बनाया डेटा है और आपको पता है कि ग्राहक किस बात पर चिल्लाता है और किस बात पर खुश होता है। बस उस खुशी को अपनी यूएसपी बना लीजिए और रिस्क को टाटा बाय बाय कह दीजिए।
बिज़नेस कोई वीरता दिखाने का अखाड़ा नहीं है जहाँ आपको शहीद होना है। यह एक दिमाग का खेल है जहाँ अंत में वही जीतता है जिसकी जेब में ज्यादा मुनाफा होता है। तो अपनी ईगो को साइड में रखिए और एक चतुर कॉपीकैट बनकर अपने बैंक बैलेंस को बढ़ता हुआ देखिए।
कॉपीकैट्स बुक हमें यह सिखाती है कि दुनिया में कुछ भी पूरी तरह से नया नहीं है। हर महान चीज किसी न किसी पुराने आइडिया का बेहतर वर्जन है। अगर आप भी अपनी लाइफ या बिज़नेस में अटके हुए हैं तो दूसरों को देखना शुरू करिए। उनकी सफलताओं को नहीं बल्कि उनकी प्रोसेस को कॉपी करिए और उसमें अपना टैलेंट जोड़ दीजिए।
आज ही अपने आसपास के किसी ऐसे बिज़नेस या इंसान को चुनिए जिसे आप एडमायर करते हैं। देखिए कि वो क्या कर रहे हैं और आप उसे कैसे बेहतर तरीके से पेश कर सकते हैं। नीचे कमेंट्स में मुझे बताइए कि ऐसा कौन सा ब्रांड है जो आपको लगता है कि एक बहुत ही बड़ा कॉपीकैट है पर फिर भी आज टॉप पर है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करिए जो हमेशा ओरिजिनल आइडिया के चक्कर में कुछ शुरू ही नहीं कर पाता। याद रखिए कि शुरुआत करने के लिए ओरिजिनल होना जरूरी नहीं है बस स्मार्ट होना जरूरी है।
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