Don't Just Relate – Advocate (Hindi)


अगर आप अभी भी पुराने स्टाइल में कस्टमर को केवल माल चिपका रहे हैं तो मुबारक हो। आप अपने कॉम्पिटिटर को खुद अमीर बना रहे हैं। बिना ट्रस्ट के बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल की गाड़ी को धक्का मारना। जितना मर्जी पसीना बहा लो, आप कहीं नहीं पहुंचेंगे।

आज के दौर में कस्टमर के पास गूगल की पावर है। अगर आपने उसे बेवकूफ समझा तो समझो आपका धंधा गया। ग्लेन अर्बन की यह बुक हमें सिखाती है कि कैसे केवल माल बेचना छोड़कर कस्टमर का एडवोकेट बनकर मोटा प्रॉफिट कमाया जाता है।


लेसन १ : ट्रस्ट ही नया प्रॉफिट है - पुराने सेल्समैन बनना छोड़ो

आज के जमाने में अगर आप किसी को कुछ बेचने की कोशिश करेंगे, तो वह आपसे ऐसे भागेगा जैसे पड़ोस का बच्चा आपकी क्रिकेट बॉल लेकर भागता है। सच तो यह है कि इंटरनेट ने हर कस्टमर को एक जासूस बना दिया है। आप उसे 'बेस्ट क्वालिटी' और 'लोएस्ट प्राइस' का झांसा देकर ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकते। ग्लेन अर्बन अपनी बुक में एक कड़वा सच बताते हैं। अगर आपका कस्टमर आप पर भरोसा नहीं करता, तो आपकी बैलेंस शीट सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है।

मान लीजिए आप एक मोबाइल फोन की दुकान पर जाते हैं। आप एक महंगा फोन देख रहे हैं क्योंकि उसका कैमरा आपको पसंद आया है। अब एक नॉर्मल सेल्समैन क्या करेगा? वह तुरंत अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से आपको वही फोन चिपका देगा क्योंकि उसमें उसका तगड़ा कमीशन है। चाहे वह फोन आपके बजट के बाहर हो या उसकी बैटरी लाइफ कचरा हो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अब सोचिए एक एडवोकेट सेल्समैन के बारे में। वह आपसे कहेगा कि भाई, यह फोन दिखने में तो हीरो है, लेकिन इसका प्रोसेसर आपके काम के हिसाब से स्लो है। इसकी जगह आप यह दूसरा मॉडल लीजिए जो सस्ता भी है और आपकी जरूरतों को भी पूरा करेगा।

क्या हुआ? उस दुकानदार ने अपना ज्यादा कमीशन खो दिया। शायद आपको लगा होगा कि वह पागल है। लेकिन असल में उसने वह कमा लिया है जो करोड़ों के विज्ञापन भी नहीं खरीद सकते और वह है आपका भरोसा। अब अगली बार जब आपके घर में किसी को भी फोन लेना होगा, तो आप सीधा उसी की दुकान पर जाएंगे। इतना ही नहीं, आप मोहल्ले के हर व्हाट्सएप ग्रुप में उसकी तारीफों के पुल बांधेंगे। यही तो असली एडवोकेसी है।

ज्यादातर बिजनेस मालिक केवल आज की सेल देखते हैं। वे सोचते हैं कि एक बार कस्टमर की जेब काट ली तो जंग जीत ली। लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि कटा हुआ कस्टमर दोबारा कभी वापस नहीं आता। वह अपने साथ दस और लोगों को ले डूबता है। ग्लेन अर्बन कहते हैं कि जब आप कस्टमर के फायदे को अपने फायदे से ऊपर रखते हैं, तो आप उसे अपना गुलाम नहीं बल्कि अपना ब्रांड एम्बेसेडर बना लेते हैं। वह आपके लिए फ्री में मार्केटिंग करता है।

आज के डिजिटल युग में तो यह और भी जरूरी है। एक नेगेटिव रिव्यु आपकी बरसों की मेहनत पर पानी फेर सकता है। इसलिए अब वह समय चला गया जब आप अंधेरे में तीर मारते थे। अब आपको आईने की तरह साफ होना पड़ेगा। अगर आपके प्रोडक्ट में कोई कमी है, तो उसे खुद बताएं। अगर कॉम्पिटिटर का प्रोडक्ट किसी मामले में आपसे बेहतर है, तो उसे स्वीकार करें। जब आप कस्टमर के सामने इतने ईमानदार होते हैं, तो वह डरना बंद कर देता है। उसे लगता है कि कम से कम यह बंदा मुझे लूटने के चक्कर में नहीं है। और यही वह पॉइंट है जहां से असली प्रॉफिट की शुरुआत होती है।

याद रखिए, सेल एक बार का ट्रांजेक्शन है, लेकिन ट्रस्ट एक लाइफटाइम इनकम का जरिया है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस लंबे समय तक चले और खूब नोट छापे, तो सेल्समैन की टोपी उतारिए और कस्टमर के एडवोकेट बन जाइए।


लेसन २ : कस्टमर को पावर दो - कंट्रोल का रिमोट उसे पकड़ा दो

पुराने जमाने के बिजनेस का एक ही मंत्र था कि कस्टमर को उतनी ही जानकारी दो जितनी उसे चाहिए। बाकी सब पर्दे के पीछे रखो। लेकिन अब वह पर्दा फट चुका है। आज का कस्टमर अपने हाथ में फोन लेकर पैदा हुआ है। उसे सब पता है कि कौन सा माल कहां से आ रहा है और उसकी असली कीमत क्या है। ग्लेन अर्बन कहते हैं कि अगर आप कस्टमर को कंट्रोल नहीं देंगे, तो वह आपको अपनी लाइफ से कंट्रोल-अल्ट-डिलीट कर देगा। आपको उसे यह महसूस कराना होगा कि वह इस डील का असली राजा है।

इस बात को समझने के लिए हमारी प्यारी पुरानी शादी की खरीदारी को याद कीजिए। आप एक कपड़े के शोरूम में जाते हैं। वहां का सेल्समैन आपको ऐसे घेर लेता है जैसे पुलिस किसी चोर को घेरती है। वह आपको वही दिखाएगा जो वह बेचना चाहता है। आप पूछते हैं कि क्या यह कपड़ा धुलाई के बाद सिकुड़ेगा? वह पूरे खानदान की कसम खाकर कहेगा कि बिल्कुल नहीं। लेकिन जब घर आकर पहली बार धुलाई होती है, तो शर्ट बच्चे के रुमाल जितनी रह जाती है। यहां क्या हुआ? कंट्रोल सेल्समैन के हाथ में था। आपने वह खरीदा जो उसने बेचा, वह नहीं जो आप चाहते थे।

अब जरा सोचिए एक नए जमाने की ई-कॉमर्स वेबसाइट के बारे में। वहां आपको हजारों रिव्यु मिलते हैं। लोग फोटो डालकर बताते हैं कि शर्ट सिकुड़ी या नहीं। वेबसाइट आपको यह भी बताती है कि अगर पसंद न आए तो सात दिन में वापस कर दो। यहां कंट्रोल किसके हाथ में है? बिल्कुल सही, आपके हाथ में। अब आप दुकानदार पर निर्भर नहीं हैं। ग्लेन अर्बन के अनुसार, जब आप कस्टमर को पूरी इन्फॉर्मेशन देते हैं और उसे खुद फैसला लेने की आजादी देते हैं, तो उसका डर खत्म हो जाता है। उसे लगता है कि उसके पास भागने का रास्ता खुला है। और मजे की बात यह है कि जब भागने का रास्ता खुला होता है, तो कस्टमर भागता नहीं है, बल्कि वहीं रुक कर शॉपिंग करता है।

कई बिजनेस इस बात से डरते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने कस्टमर को बहुत ज्यादा जानकारी दे दी, तो वह दूसरे के पास चला जाएगा। भाई, वह वैसे भी जाएगा अगर आप उसे अंधेरे में रखेंगे। लेकिन अगर आप उसे कंपैरिजन करने का मौका देते हैं, उसे सही टूल्स देते हैं कि वह खुद अपनी जरूरत तय कर सके, तो आप उसकी नजर में एक भगवान बन जाते हैं। आप उसे केवल एक प्रोडक्ट नहीं बेच रहे, आप उसे 'कॉन्फिडेंस' बेच रहे हैं। वह कॉन्फिडेंस जो उसे बताता है कि उसने सही फैसला लिया है।

आजकल के दौर में तो लोग खुद ही अपनी चॉइस बनाना पसंद करते हैं। उन्हें धक्का देने वाले सेल्समैन नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म जहां वे अपनी मर्जी से चीजें कस्टमाइज कर सकें। जब आप कस्टमर को अपनी कंपनी के फैसलों में शामिल करते हैं, उसकी फीडबैक को सच में लागू करते हैं, तो उसे लगता है कि वह आपका पार्टनर है। और कौन अपना पार्टनर छोड़कर जाना चाहता है? कोई नहीं। इसलिए कस्टमर को डराना या उसे अपनी बातों में उलझाना बंद कीजिए। उसे पावर दीजिए, उसे सच बताइए और उसे खुद अपनी किस्मत का मालिक बनने दीजिए। जब वह जीतेगा, तो वह आपको भी जिताएगा।


लेसन ३ : ट्रांसपेरेंसी का जादू - अपनी कमियां बताओ और नोट कमाओ

शायद आपको यह सुनकर लगे कि मेरा दिमाग चकरा गया है। आप सोचेंगे कि भला अपनी बुराई करके कोई बिजनेस कैसे बढ़ा सकता है? लेकिन ग्लेन अर्बन की पूरी फिलॉसफी इसी एक बात पर टिकी है। इसे कहते हैं 'रेडिकल ट्रांसपेरेंसी'। मतलब इतने ईमानदार बन जाओ कि सामने वाले को शक करने की गुंजाइश ही न रहे। हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां हर कोई खुद को दूध का धुला बताता है। हर विज्ञापन में दिखाया जाता है कि उनका साबुन लगाने से आप रातों-रात फिल्म स्टार बन जाएंगे। ऐसे में अगर कोई आकर सच बोल दे, तो वह भीड़ में अलग चमकने लगता है।

मान लीजिए आप एक सेकंड हैंड कार खरीदने जाते हैं। एक डीलर आपको चमकती हुई कार दिखाता है और कहता है कि यह तो बस शोरूम से घर तक ही चली है। लेकिन आप जानते हैं कि वह झूठ बोल रहा है। अब दूसरा डीलर आता है। वह कार का बोनट खोलता है और आपको खुद दिखाता है कि देखिए भाई, इसके इंजन में थोड़ा शोर है और पिछले दरवाजे पर डेंट था जिसे हमने अभी ठीक किया है। वह आपको गाड़ी की सारी कमियां पहले ही बता देता है। अब आप खुद सोचिए, आप किस पर भरोसा करेंगे? जाहिर है दूसरे वाले पर। क्योंकि उसने आपको वह बता दिया जो आप शायद कभी पकड़ भी नहीं पाते। उसने अपनी कमियां बताकर आपके मन का सारा डर ही खत्म कर दिया।

बिजनेस में भी यही लॉजिक काम करता है। अगर आपका कोई प्रोडक्ट किसी खास मामले में कमजोर है, तो उसे छुपाने के लिए हजारों के विज्ञापन मत चलाइए। बल्कि खुद आगे बढ़कर कहिए कि हमारा यह प्रोडक्ट बजट फ्रेंडली है, इसलिए इसमें फलां फीचर नहीं मिलेगा। जब आप ऐसा करते हैं, तो कस्टमर को लगता है कि आप उसे ठगने की कोशिश नहीं कर रहे। आप उसकी परवाह करते हैं। यही वह पॉइंट है जहां आप एक मामूली सेलर से उठकर उसके 'एडवोकेट' बन जाते हैं।

आजकल की दुनिया में इंटरनेट के कारण आप कुछ भी छुपा नहीं सकते। अगर आपने कोई गलती की, तो वह सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल जाएगी। इसलिए होशियारी इसी में है कि गलती होने पर उसे तुरंत मान लिया जाए। अगर डिलीवरी में देरी हुई है, तो कस्टमर को बहाने मत बनाइए कि रास्ता जाम था। उसे सच बताइए और शायद एक छोटा सा डिस्काउंट कूपन दे दीजिए। आपकी यह छोटी सी ईमानदारी उस कस्टमर को हमेशा के लिए आपका मुरीद बना देगी।

ग्लेन अर्बन समझाते हैं कि एडवोकेसी का मतलब केवल अच्छी बातें करना नहीं है। इसका मतलब है कस्टमर के साथ एक सच्चा रिश्ता बनाना। और रिश्ता कभी भी झूठ की बुनियाद पर खड़ा नहीं हो सकता। जब आप ट्रांसपेरेंट होते हैं, तो आप अपना मार्केटिंग बजट बचा रहे होते हैं। क्योंकि आपको अपनी गलतियों को छुपाने के लिए पीआर एजेंसियों को पैसे नहीं देने पड़ते। आपका सच ही आपकी सबसे बड़ी मार्केटिंग बन जाता है।

तो अब से अपनी कमियों को छुपाना बंद कीजिए। उन्हें गर्व से बताइए और देखिए कैसे लोग आप पर भरोसा करने के लिए कतार लगा लेते हैं। याद रखिए, एक परफेक्ट कंपनी से ज्यादा लोग एक ईमानदार कंपनी को पसंद करते हैं। जब आप कस्टमर के लिए खड़े होते हैं, तो पूरी मार्केट आपके लिए खड़ी हो जाती है। यही असली कामयाबी का ब्लूप्रिंट है।


तो दोस्तों, क्या आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चलकर केवल अपनी जेब भरने की सोच रहे हैं या फिर अपने कस्टमर का सच्चा साथी बनने के लिए तैयार हैं? याद रखिए, प्रॉफिट केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि उस भरोसे का इनाम है जो आपने मार्केट में कमाया है। आज ही अपने बिजनेस में 'एडवोकेसी' को जगह दें। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो बिजनेस में स्ट्रगल कर रहे हैं और नीचे कमेंट में बताएं कि ईमानदारी की वह कौन सी बात है जिसने आपका दिल जीत लिया।

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