क्या आप भी अपनी टीम को घिसी पिटी मोटिवेशनल स्पीच देकर बोर कर रहे हैं और फिर भी रिजल्ट जीरो है। बधाई हो आप अपनी ऑर्गनाइजेशन को धीरे धीरे खत्म कर रहे हैं और आपको पता भी नहीं है। जबकि आपके कॉम्पिटिटर्स चुपचाप हाई परफॉरमेंस का वायरस फैलाकर आपसे कोसों आगे निकल रहे हैं।
आज हम सुजैन अन्नुनजियो की बेहतरीन किताब कोंटाजियस सक्सेस से वो सीक्रेट्स समझेंगे जो आपकी टीम की सुस्ती को रॉकेट जैसी रफ़्तार में बदल देंगे। आइये जानते हैं वो ३ कमाल के लेसन जो आपका काम करने का तरीका हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : हाई परफॉरमेंस का वातावरण बनाना
सोचिये, आप एक ऐसे ऑफिस में काम करते हैं जहाँ सुबह घुसते ही ऐसा लगता है जैसे किसी के मातम में आए हों। हर कोई बस घडी देख रहा है कि कब पांच बजेंगे और कब वो इस जेल से भागेगा। अगर आपकी टीम का भी यही हाल है तो समझ जाइये कि आपने काम का नहीं बल्कि डिप्रेशन का माहौल बनाया हुआ है। सुजैन अन्नुनजियो कहती हैं कि सक्सेस कोई जादू नहीं है जो अचानक हो जाएगा। यह उस मिट्टी की तरह है जिसे आपको पहले उपजाऊ बनाना पड़ता है। अगर आपकी कंपनी की मिट्टी ही बंजर है तो आप चाहे कितना भी महंगा बीज यानी टैलेंटेड एम्प्लॉई ले आएं वह मुरझा ही जाएगा।
ज्यादातर बॉस को लगता है कि चिल्लाने से या डराने से काम बढ़िया होता है। भाई साहब आप अपनी टीम चला रहे हैं या स्कूल के बच्चों को मुर्गा बना रहे हैं। डराकर आप केवल काम करवा सकते हैं लेकिन एक्सीलेंस कभी हासिल नहीं कर सकते। हाई परफॉरमेंस तब आती है जब लोग सुरक्षित महसूस करते हैं। जब उन्हें पता होता है कि अगर उन्होंने कुछ नया ट्राई किया और वो फेल हो गए तो उन्हें फांसी पर नहीं चढ़ाया जाएगा। आज के दौर में लोग सैलरी से ज्यादा इज्जत और ग्रोथ के भूखे हैं। अगर आप उन्हें बस एक मशीन का पुर्जा समझेंगे तो वो भी आपको बस एक एटीएम मशीन समझेंगे जिससे महीने के आखिर में पैसा निकालना है।
मान लीजिये आपके घर में एक पौधा है जो सूख रहा है। अब आप उस पौधे पर चिल्लाएंगे तो नहीं कि तू बढ़ता क्यों नहीं है। या उसे ये धमकी तो नहीं देंगे कि अगर कल तक फूल नहीं आए तो तुझे डस्टबिन में डाल दूंगा। आप उसकी मिट्टी बदलेंगे उसे पानी देंगे और धूप में रखेंगे। ऑफिस का कल्चर भी बिल्कुल वैसा ही है। आपको एक ऐसा ईकोसिस्टम तैयार करना होगा जहाँ लोग खुद से मेहनत करना चाहें। जब एम्प्लॉई को लगता है कि उसकी राय की वैल्यू है तो वो ऑफिस केवल हाजिरी लगाने नहीं बल्कि वैल्यू क्रिएट करने आता है।
सक्सेसफुल ऑर्गनाइजेशन में लीडर्स माइक्रो मैनेजमेंट नहीं करते। वो ये नहीं देखते कि कौन कितने बजे लंच पर गया या किसने कितनी बार चाय पी। वो ये देखते हैं कि क्या टीम को अपना लक्ष्य पता है और क्या उनके पास वो टूल्स हैं जिससे वो उसे हासिल कर सकें। अगर आप अपनी टीम के हर छोटे काम में टांग अड़ाएंगे तो यकीन मानिए आप उन्हें पंगु बना रहे हैं। वो अपनी बुद्धि चलाना बंद कर देंगे क्योंकि उन्हें पता है कि आखिर में तो साहब को अपनी ही चलानी है। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम में हाई परफॉरमेंस का वायरस फैले तो सबसे पहले अपनी ईगो की खिड़की खोलिये और ताजी हवा यानी नए आइडियाज को अंदर आने दीजिये।
लेसन २ : पॉजिटिविटी को फैलाना
अक्सर ऑफिस में एक ऐसा इंसान जरूर होता है जो सुबह सुबह आकर बस रोना शुरू कर देता है। कभी उसे सैलरी से दिक्कत है तो कभी उसे ऑफिस की चाय पसंद नहीं आती। ऐसे लोग साक्षात नेगेटिविटी के चलते फिरते वाईफाई हॉटस्पॉट होते हैं। अगर आप उनके पास खड़े हो गए तो आपकी एनर्जी भी डाउनलोड होना शुरू हो जाएगी। सुजैन अन्नुनजियो कहती हैं कि जिस तरह एक सड़ा हुआ आम पूरी टोकरी खराब कर देता है वैसे ही एक नेगेटिव इंसान पूरी टीम की परफॉरमेंस को दीमक की तरह चाट जाता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि सक्सेस और पॉजिटिविटी भी बिल्कुल वैसे ही फैलती है जैसे सोशल मीडिया पर कोई फालतू का मीम वायरल होता है।
पॉजिटिविटी फैलाने का मतलब यह नहीं है कि आप ऑफिस में जोकर बनकर सबको हंसाते फिरें। इसका असली मतलब है अपनी टीम की छोटी से छोटी जीत को सेलिब्रेट करना। हमारे यहाँ बॉस का एटीट्यूड अक्सर ऐसा होता है कि अगर किसी ने अच्छा काम किया तो वो सोचते हैं कि इसमें क्या बड़ी बात है इसे तो इसी काम के पैसे मिलते हैं। लेकिन अगर किसी से छोटी सी गलती हो गई तो वो ऐसे रिएक्ट करते हैं जैसे उसने देश का गुप्त डेटा दुश्मन को बेच दिया हो। भाई साहब तारीफ करने में कोई जीएसटी नहीं लगता। जब आप किसी की मेहनत को सबके सामने सराहते हैं तो उसे जो डोपामाइन मिलता है वह किसी बोनस चेक से कम नहीं होता।
आपने वो जिम वाले लड़के देखे होंगे जो एक बाइसेप का सेट मारकर शीशे के सामने खड़े हो जाते हैं। वो अपने आप को देखकर खुश होते हैं और यही खुशी उन्हें अगले दिन फिर जिम आने के लिए मोटिवेट करती है। आपकी टीम को भी उसी शीशे की जरूरत है। जब उन्हें दिखता है कि उनके काम से इम्पैक्ट पड़ रहा है और उनके लीडर उस इम्पैक्ट को देख रहे हैं तो उनकी परफॉरमेंस अपने आप बढ़ने लगती है। फिर आपको उन्हें काम करने के लिए धक्का नहीं देना पड़ता बल्कि वो खुद अपनी लिमिट्स पुश करते हैं।
सक्सेसफुल होने का भूत जब एक बार पूरी टीम के सर पर चढ़ जाता है तो फिर चमत्कार होने लगते हैं। लोग एक दूसरे की टांग खींचने के बजाय एक दूसरे का हाथ पकड़कर ऊपर चढ़ने लगते हैं। यहाँ लीडर का रोल एक माली जैसा है जो खराब झाड़ियों को काटता है और फूलों को खिलने के लिए जगह देता है। आपको अपनी टीम में ऐसे इन्फ्लुएंसर पैदा करने होंगे जो मुश्किल समय में भी कहें कि कोई बात नहीं हम मिलकर इसे सुलझा लेंगे। जब यह सोच एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुँचती है तो समझ जाइये कि आपकी ऑर्गनाइजेशन में कामयाबी का संक्रमण यानी इन्फेक्शन शुरू हो चुका है। अब इसे दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती।
लेसन ३ : बाधाओं को हटाना
इमेजिन कीजिये कि आप एक स्पोर्ट्स कार चला रहे हैं लेकिन आपने हैंडब्रेक ऊपर खींचा हुआ है। आप कितना भी एक्सीलरेटर दबा लें गाड़ी बस शोर मचाएगी पर आगे नहीं बढ़ेगी। ऑफिस में भी यही होता है। कई बार आपकी टीम बहुत टैलेंटेड होती है लेकिन आपके पुराने नियम और फालतू की कागजी कार्रवाई उनके पैरों की बेड़ियाँ बन जाती हैं। सुजैन अन्नुनजियो के अनुसार एक लीडर का सबसे बड़ा काम रास्ता दिखाना नहीं बल्कि रास्ते में पड़े पत्थरों को हटाना है। अगर आपके एम्प्लॉई को एक छोटा सा फैसला लेने के लिए दस ईमेल भेजने पड़ते हैं और पांच मैनेजरों के साइन लेने पड़ते हैं तो बधाई हो आपने खुद ही अपनी सफलता का गला घोंट दिया है।
बाधाएं सिर्फ कागजों पर नहीं होतीं वे लोगों के दिमाग में भी होती हैं। कुछ कंपनियों में ऐसा माहौल होता है जहाँ लोग अपनी राय देने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बात कोई सुनेगा ही नहीं। यह सबसे बड़ी रुकावट है। जब एक फ्रेशर के पास कोई क्रांतिकारी आइडिया होता है लेकिन वह डर के मारे चुप रहता है तो नुकसान कंपनी का होता है। आपको ऐसे अनचाहे डर और ईगो की बाधाओं को जड़ से उखाड़ना होगा। कई बार तो बॉस खुद ही सबसे बड़ी बाधा बन जाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें सब कुछ पता है। भाई साहब अगर आपको सब पता है तो फिर इतनी बड़ी टीम क्यों रखी है। खुद ही सारा काम कर लीजिये और संडे को भी ऑफिस की सफाई कर लिया कीजिये।
मान लीजिये आप एक मैराथन दौड़ रहे हैं और आपके जूतों में कंकड़ गिर गया है। अब आप चाहे कितने भी बड़े एथलीट क्यों न हों वह छोटा सा कंकड़ आपको जीतने नहीं देगा। ऑफिस के वो पुराने बेकार के नियम और मीटिंग्स जो घंटों चलती हैं पर नतीजा कुछ नहीं निकलता वे उसी कंकड़ की तरह हैं। एक समझदार लीडर वही है जो अपनी टीम से पूछे कि तुम्हें काम करने में सबसे ज्यादा दिक्कत कहाँ आ रही है और फिर उस दिक्कत को चुटकी बजाते ही खत्म कर दे। जब आप लोगों का काम आसान बनाते हैं तो वे अपनी पूरी एनर्जी काम को बेहतर बनाने में लगा देते हैं।
अंत में याद रखिये कि कोंटाजियस सक्सेस का मतलब सिर्फ प्रॉफिट कमाना नहीं है। इसका मतलब है एक ऐसी विरासत छोड़ना जहाँ लोग गर्व से कहें कि मैं इस ऑर्गनाइजेशन का हिस्सा हूँ। सफलता का यह वायरस तब फैलता है जब आप बाधाओं को हटाकर अपने लोगों को उड़ने के लिए खुला आसमान देते हैं। तो क्या आप तैयार हैं अपनी टीम के हैंडब्रेक को नीचे करने के लिए और सफलता की रफ़्तार पकड़ने के लिए। आज ही कदम उठाइये और देखिये कैसे आपकी कंपनी एक हाई परफॉर्मिंग मशीन बन जाती है।
अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी अपनी टीम में बदलाव लाना चाहते हैं तो इसे अपने उन दोस्तों और कलीग्स के साथ जरूर शेयर करें जो ऑफिस की पॉलिटिक्स और सुस्ती से परेशान हैं। कमेंट्स में बताइये कि आपकी ऑर्गनाइजेशन में सबसे बड़ी बाधा क्या है और आप उसे कैसे दूर करेंगे। आइये मिलकर एक पॉजिटिव वर्क कल्चर की शुरुआत करते हैं।
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