अगर आपको लगता है कि किसी भी घटिया प्रोडक्ट को बस गुलाबी रंग में लपेटकर आप औरतों को बेच देंगे तो बधाई हो आप बिजनेस की दुनिया के सबसे बड़े बेवकूफ हैं। असलियत यह है कि आपकी यह छोटी सोच आपकी तिजोरी खाली कर रही है और आपका ब्रांड एक जोक बनकर रह गया है।
आज के इस दौर में महिलाएं सिर्फ शॉपिंग नहीं करतीं बल्कि वो पूरे मार्केट को कंट्रोल करती हैं। अगर आप अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं तो आप एक बहुत बड़ा प्रॉफिट छोड़ रहे हैं। चलिए जानते हैं उन ३ बड़े लेसन्स के बारे में जो आपके बिजनेस का नजरिया पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : पिंक और स्टीरियोटाइप से आगे बढ़ें
अगर आप एक बिजनेसमैन हैं और आपको लगता है कि औरतों की पसंद समझना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है तो शायद आप गलत जगह देख रहे हैं। असल में दिक्कत औरतों में नहीं बल्कि आपकी उस मार्केटिंग टीम में है जो आज भी १९९० के दौर में जी रही है। बुक डोंट थिंक पिंक का सबसे पहला और बड़ा लेसन यही है कि औरतों को बेवकूफ समझना बंद करो। ज्यादातर ब्रांड्स क्या करते हैं। वो एक नॉर्मल सा रेजर या पेन उठाते हैं और उस पर गुलाबी रंग चढ़ा देते हैं और सोचते हैं कि अब तो लड़कियां इसे देखते ही अपनी जेबें खाली कर देंगी। भाई साहब यह मार्केटिंग नहीं है बल्कि यह तो आपकी क्रिएटिविटी का दिवालियापन है। महिलाएं अब इस पिंक टैक्स और स्टीरियोटाइप से ऊब चुकी हैं। उन्हें सिर्फ गुलाबी रंग का डिब्बा नहीं चाहिए बल्कि उन्हें एक ऐसा प्रोडक्ट चाहिए जो उनके हाथ की बनावट या उनकी लाइफस्टाइल के हिसाब से डिजाइन किया गया हो।
मान लीजिए आप एक मोबाइल कंपनी चला रहे हैं। अगर आप फोन का सिर्फ कलर बदलकर उसे वीमेन स्पेशल कहेंगे तो वो उसे कभी नहीं खरीदेंगी। इसके बजाय अगर आप उन्हें यह दिखाएं कि इस फोन का कैमरा उनकी स्किन टोन को नेचुरल दिखाता है या इसमें ऐसी सिक्योरिटी फीचर्स हैं जो उन्हें देर रात बाहर जाते समय सेफ फील कराते हैं तो बात बनेगी। असल में महिलाएं यह देख रही हैं कि आप उनकी रिस्पेक्ट कितनी करते हैं। अगर आप उन्हें सिर्फ एक हाउसवाइफ या सिर्फ एक फैशन क्वीन की तरह देखेंगे तो आप कभी उनके दिल तक नहीं पहुँच पाएंगे। आपको यह समझना होगा कि आज की महिला एक सीईओ भी है और एक मां भी है और साथ ही वो एक एडवेंचर लवर भी हो सकती है।
अक्सर विज्ञापनों में दिखाया जाता है कि औरतें सिर्फ वाशिंग पाउडर या डिश सोप को लेकर ही एक्साइटेड रहती हैं। सच तो यह है कि उन्हें भी गाड़ियों और गैजेट्स में उतना ही इंटरेस्ट है जितना किसी पुरुष को होता है। बस फर्क यह है कि वो गाड़ी के इंजन के सीसी से ज्यादा इस बात पर ध्यान देती हैं कि उस गाड़ी की सीट उनके बच्चों के लिए कितनी कम्फर्टेबल है। अगर आपकी मार्केटिंग में आज भी वही पुराने घिसे पिटे आइडियाज हैं तो यकीन मानिए आप अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। औरतों को यह एहसास दिलाना बंद कीजिए कि वो कुछ अलग प्रजाति हैं। उन्हें एक समझदार और पावरफुल कंज्यूमर की तरह ट्रीट कीजिए। जब आप अपनी मार्केटिंग से यह पिंक वाला चश्मा हटा देंगे तब आपको असली सेल्स नंबर्स दिखना शुरू होंगे। याद रखिए कि गुलाबी रंग बुरा नहीं है लेकिन गुलाबी सोच बहुत बुरी है जो आपके ब्रांड को एक दायरे में कैद कर देती है। इसलिए अब थोडा ऊपर उठिए और असली जरूरतों पर ध्यान दीजिए।
लेसन २ : महिलाएं सॉल्यूशन ओरिएंटेड होती हैं
अगर आप सोच रहे हैं कि महिलाएं बस इमोशनल होकर शॉपिंग कर लेती हैं, तो आप अपनी नादानी का सबूत दे रहे हैं। असलियत यह है कि एक महिला जब भी कोई सामान खरीदती है, तो उसके दिमाग में एक पूरा का पूरा लॉजिक और कैलकुलेशन चल रहा होता है। वो केवल एक प्रोडक्ट नहीं खरीदती, बल्कि वो एक सॉल्यूशन खरीदती है। बुक का यह लेसन हमें सिखाता है कि औरतों के लिए खरीदारी करना उनकी जिंदगी की उलझनों को सुलझाने का एक तरीका है। अगर आपका प्रोडक्ट उनकी किसी बड़ी प्रॉब्लम को खत्म नहीं कर रहा, तो चाहे आप उस पर हीरा ही क्यों न जड़ दें, वो उसे घास तक नहीं डालेंगी। पुरुष अक्सर फीचर्स और टेक्निकल स्पेसिफिकेशन्स के पीछे भागते हैं, जैसे कि इस फोन में कितना रैम है या इस गाड़ी की टॉप स्पीड क्या है। लेकिन एक महिला यह देखती है कि क्या यह चीज उसकी मल्टीटास्किंग लाइफ में फिट बैठती है।
सोचिए एक वर्किंग मां के बारे में जिसे ऑफिस का काम भी देखना है और घर की जिम्मेदारियां भी। उसे एक ऐसा लैपटॉप नहीं चाहिए जो सिर्फ तेज चलता हो, बल्कि उसे एक ऐसा लैपटॉप चाहिए जो हल्का हो ताकि वो उसे बैग में डालकर भाग सके और जिसकी बैटरी इतनी चले कि उसे बार-बार चार्जर न ढूँढना पड़े। यहाँ पर ह्युमर की बात यह है कि सेल्समेन अक्सर उन्हें यह समझाने बैठ जाते हैं कि इसमें कौन सा ग्राफ़िक्स कार्ड लगा है, जबकि उसे बस इस बात से मतलब है कि क्या इस पर ज़ूम कॉल बिना रुके चलेगी। आप उन्हें फीचर्स बेच रहे हैं जबकि उन्हें सुकून चाहिए। अगर आप एक वैक्यूम क्लीनर बेच रहे हैं, तो उन्हें यह मत बताइए कि उसकी मोटर कितनी ताकतवर है। उन्हें यह दिखाइए कि कैसे यह मशीन सोफे के नीचे छिपे उस कचरे को दो मिनट में साफ कर देगी जिसे साफ करने में उनकी कमर टूट जाती थी।
महिलाएं हमेशा बड़ी पिक्चर देखती हैं। वो यह सोचती हैं कि अगर मैं यह चीज आज खरीदूँगी, तो अगले एक साल तक मेरी लाइफ कितनी आसान होगी। अगर आप एक स्किनकेयर ब्रांड हैं, तो सिर्फ गोरा करने का दावा मत कीजिए। उन्हें यह बताइए कि यह क्रीम उनके दस मिनट बचाएगी क्योंकि इसमें सनस्क्रीन और मॉइस्चराइजर दोनों हैं। उनकी लाइफ पहले से ही बहुत सारी जिम्मेदारियों से भरी हुई है। वो हर दिन एक साथ दस काम निपटाती हैं। आपका काम उनकी लाइफ में एक और सरदर्द बढ़ाना नहीं, बल्कि एक सरदर्द कम करना है। मार्केटिंग में जो लोग औरतों को सिर्फ एक टार्गेट समझते हैं, वो अक्सर फेल हो जाते हैं। लेकिन जो लोग उन्हें एक प्रॉब्लम सॉल्वर की तरह देखते हैं, वो करोड़ों कमाते हैं। इसलिए अगली बार जब आप अपना मार्केटिंग प्लान बनाएं, तो खुद से पूछिए कि क्या आपका प्रोडक्ट किसी औरत की लाइफ का बोझ कम कर रहा है। अगर जवाब ना है, तो अपना पैकअप करने की तैयारी कर लीजिए।
लेसन ३ : कम्युनिटी और ट्रस्ट की पावर
मार्केटिंग की दुनिया में एक बहुत पुरानी कहावत है कि अगर आप एक आदमी को कुछ बेचते हैं तो आप एक कस्टमर बनाते हैं। लेकिन अगर आप एक औरत को कुछ बेचते हैं तो आप एक पूरा नेटवर्क खड़ा कर देते हैं। बुक का यह तीसरा लेसन बिजनेस के लिए सोने की खान जैसा है। महिलाएं कुदरती तौर पर कम्युनिकेटर होती हैं। उन्हें चीजें शेयर करना पसंद है। अगर उन्हें आपका प्रोडक्ट अच्छा लगा तो वो सिर्फ खुद तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि अपनी सहेलियों, अपनी मां, अपनी पड़ोसन और यहाँ तक कि अपने सोशल मीडिया ग्रुप्स पर भी उसका ढिंढोरा पीट देंगी। लेकिन यहाँ सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि उनका भरोसा जीतना हिमालय चढ़ने जैसा मुश्किल है और उसे खोना दो मिनट का काम है।
महिलाएं उन ब्रांड्स के पास जाना पसंद करती हैं जो उन्हें एक कम्युनिटी वाली फीलिंग देते हैं। उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि आप सिर्फ उनके बैंक बैलेंस पर नजर नहीं गड़ाए बैठे हैं बल्कि आप उनकी इज्जत भी करते हैं। अक्सर देखा गया है कि कंपनियाँ बड़े-बड़े वादे तो कर देती हैं लेकिन जब सर्विस की बात आती है तो गायब हो जाती हैं। एक महिला के लिए उसका समय और उसका पैसा बहुत कीमती है। अगर आपने एक बार भी उसे घटिया सर्विस दी तो वो आपके ब्रांड को ऐसे ब्लॉक करेगी जैसे वो अपने किसी जिद्दी एक्स को करती है। ह्युमर की बात तो यह है कि पुरुष अक्सर खराब सामान मिलने पर चुपचाप बैठ जाते हैं या बस रेटिंग देकर छोड़ देते हैं। लेकिन एक औरत तब तक चैन से नहीं बैठती जब तक वो उस कंपनी के कस्टमर केयर वाले की नाक में दम न कर दे।
सक्सेसफुल ब्रांड्स वो होते हैं जो महिलाओं के बीच एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ वो अपनी बात कह सकें। मान लीजिए आप एक फिटनेस ब्रांड हैं। अगर आप सिर्फ पतली मॉडल्स की फोटो दिखाएंगे तो महिलाएं आपसे नफरत करेंगी। लेकिन अगर आप एक ऐसा ग्रुप बनाएंगे जहाँ असली औरतें अपनी फिटनेस की जर्नी शेयर करें और एक दूसरे का हौसला बढ़ाएं तो वो ब्रांड रातों-रात हिट हो जाएगा। ट्रस्ट का मतलब यह भी है कि आप अपनी मार्केटिंग में ईमानदारी बरतें। अगर आपके शैम्पू से बाल झड़ना बंद नहीं होते तो फालतू के दावे मत कीजिए। उन्हें सच्चाई पसंद है। वो चाहती हैं कि आप उन्हें एक पार्टनर की तरह देखें जो उनकी लाइफ को बेहतर बनाने में उनकी मदद कर रहा है।
जब एक महिला किसी ब्रांड पर भरोसा करती है तो वो उसकी सबसे बड़ी एडवोकेट बन जाती है। वो आपकी मार्केटिंग टीम से भी ज्यादा अच्छी मार्केटिंग फ्री में कर देगी। इसलिए विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च करने से पहले अपनी सर्विस और अपने व्यवहार को सुधारिए। औरतों के लिए रिश्ता सबसे ऊपर होता है और बिजनेस भी तो एक रिश्ता ही है। अगर आप उनके दिल में जगह बना लेंगे तो आपकी सेल्स की चिंता अपने आप खत्म हो जाएगी। यह सिर्फ सामान बेचने की बात नहीं है बल्कि एक ऐसा ब्रांड बनने की बात है जो उनके जीवन का हिस्सा बन सके।
तो दोस्तों, यह थे वो ३ बड़े लेसन्स जो हमें सिखाते हैं कि महिलाओं को समझना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस अपनी सोच से उस पुराने धूल भरे पर्दे को हटाइए। औरतों को सिर्फ एक टार्गेट ऑडियंस समझना बंद कीजिए और उन्हें वो सम्मान और सॉल्यूशन दीजिए जिसकी वो हकदार हैं। याद रखिए कि मार्केट का असली राजा कोई भी हो लेकिन उसकी रानी हमेशा एक महिला कंज्यूमर ही होती है।
अब आपकी बारी है। क्या आपने कभी कोई ऐसा प्रोडक्ट खरीदा है जो सिर्फ ऊपर से सुंदर था लेकिन अंदर से बेकार। या फिर कोई ऐसा ब्रांड जिसने आपका दिल जीत लिया। नीचे कमेंट में अपनी कहानी जरूर शेयर करें। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना बिजनेस बढ़ाना चाहते हैं। चलिए मिलकर एक बेहतर और ईमानदार मार्केट बनाते हैं।
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