क्या आप भी अपनी कंपनी को कस्टमर के लिए नरक बनाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं? बधाई हो। आपके इग्नोरेंस की वजह से आपके कस्टमर्स खुशी खुशी कॉम्पिटिटर की जेब भर रहे हैं और आप बस खाली ऑफिस में बैठ कर अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। सच तो यह है कि आपको बिजनेस करना आता ही नहीं है।
पर चिंता मत करिए। आज हम केन ब्लैंचर्ड की बुक कस्टमर मेनिया से वो ३ लेसन सीखेंगे जो आपके डूबते हुए बिजनेस को एक कस्टमर मैग्नेट बना देंगे।
लेसन १ : विजन ऐसा हो कि कस्टमर को प्यार हो जाए
ज्यादातर इंडियन बिजनेस मालिक सुबह उठकर क्या सोचते हैं? आज कितनी सेल होगी? आज कितना कैश आएगा? अगर आप भी यही सोच रहे हैं तो यकीन मानिए आप एक बिजनेस नहीं बल्कि एक ऐसी दुकान चला रहे हैं जिसका अंत बहुत करीब है। केन ब्लैंचर्ड कहते हैं कि एक कस्टमर फोकस्ड कंपनी बनाने के लिए सबसे पहले आपको अपना विजन ठीक करना होगा। विजन का मतलब वह बड़ी तस्वीर जो आप दुनिया को दिखाना चाहते हैं। लेकिन असलियत में हमारा विजन क्या होता है? चिप्स के पैकेट में सत्तर परसेंट हवा भर के बेचना और फिर उम्मीद करना कि कस्टमर दोबारा आएगा।
सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और वहां का वेटर आपको ऐसे देखता है जैसे आपने उसकी जायदाद मांग ली हो। आप पानी मांगते हैं और वह पंद्रह मिनट बाद गरम पानी लाता है। क्यों? क्योंकि उस रेस्टोरेंट का विजन सिर्फ बिल फाड़ना है कस्टमर को खिलाना नहीं। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी कंपनी के बारे में सोचिए जो यह कहती है कि हमारा मकसद आपको दुनिया का सबसे अच्छा अनुभव देना है। जब विजन में कस्टमर की खुशी होती है तो सर्विस अपने आप टॉप क्लास हो जाती है।
लोग अक्सर पूछते हैं कि भाई विजन से पैसा कैसे आता है? अब उन्हें कौन समझाए कि जब आप किसी की समस्या हल करते हैं तो पैसा उसका बायप्रोडक्ट होता है। अगर आपका विजन सिर्फ पैसा कमाना है तो आप एक सेल्समैन हैं। लेकिन अगर आपका विजन कस्टमर की लाइफ आसान बनाना है तो आप एक लीडर हैं। यहाँ सार्केज्म यह है कि हम लोग विजन बोर्ड तो बड़े बड़े बनवा लेते हैं लेकिन काम वही पुराने जमाने वाले करते हैं। हम चाहते हैं कि कस्टमर हमें भगवान माने लेकिन हम उसे इंसान तक नहीं समझते।
मान लीजिए आपकी एक कपड़े की दुकान है। एक कस्टमर आता है और कहता है कि मुझे शादी के लिए कुछ अच्छा दिखाइए। आप उसे सबसे महंगा सूट दिखाते हैं जो उस पर बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा। आप उसे मक्खन लगाते हैं कि सर आप तो हीरो लग रहे हैं। उसने सूट ले लिया और शादी में गया। वहां सबने उसका मजाक उड़ाया। क्या वह वापस आपकी दुकान पर आएगा? कभी नहीं। आपका विजन छोटा था इसलिए आपने एक दिन की सेल तो कर ली लेकिन एक उम्र भर का कस्टमर खो दिया।
कस्टमर मेनिया का मतलब है कि आपके दिमाग में कस्टमर की खुशी का भूत सवार होना चाहिए। यह कोई पार्ट टाइम काम नहीं है। यह एक जुनून है। आपको यह तय करना होगा कि आपकी कंपनी किस चीज के लिए जानी जाएगी। क्या आप वह कंपनी बनना चाहते हैं जो सिर्फ घटिया सामान बेचती है या वह जिसे लोग आँख बंद करके ट्रस्ट करते हैं? चॉइस आपकी है। लेकिन याद रखिए अगर आपके पास विजन नहीं है तो आपके पास भविष्य भी नहीं है। विजन वह नींव है जिस पर भरोसे की इमारत खड़ी होती है।
लेसन २ : एम्प्लॉई को राजा बनाओ तभी कस्टमर भगवान बनेगा
अक्सर हमारे यहाँ बॉस लोग एक बड़ी गलतफहमी में जीते हैं। उन्हें लगता है कि अगर वो अपने एम्प्लॉई को सुबह शाम बेइज्जत करेंगे तो काम ज्यादा अच्छा होगा। केन ब्लैंचर्ड कहते हैं कि अगर आपकी कंपनी कस्टमर फोकस्ड होना चाहती है तो सबसे पहले आपको अपने एम्प्लॉई पर फोकस करना होगा। इसे ऐसे समझिये कि अगर आपके घर का रसोइया गुस्से में है तो आपके खाने में नमक नहीं बल्कि उसका गुस्सा ज्यादा दिखेगा। हम चाहते हैं कि हमारा सेल्समैन कस्टमर को दांत दिखाकर स्माइल दे लेकिन ऑफिस के पीछे हम उसी सेल्समैन का खून चूस रहे होते हैं।
सोचिये आप एक कॉल सेंटर में फोन करते हैं। सामने वाला बंदा आपसे ऐसे बात करता है जैसे वह किसी जेल में बैठा हो। उसकी आवाज में कोई जोश नहीं है और वह बस आपकी कॉल काटने की जल्दी में है। क्या यह उसकी गलती है? शायद नहीं। शायद उसके बॉस ने सुबह ही उसे टारगेट के नाम पर बुरी तरह धोया है। जिस एम्प्लॉई को खुद अपनी कंपनी में इज्जत नहीं मिलती वह भला कस्टमर को इज्जत कैसे देगा? हम लोग एम्प्लॉई को मशीन समझते हैं और फिर रोते हैं कि हमारी सर्विस घटिया क्यों है।
हम ट्रेनिंग के नाम पर एम्प्लॉई को एक रटी रटाई स्क्रिप्ट पकड़ा देते हैं। सर क्या मैं आपकी मदद कर सकता हूँ? और जब कस्टमर कोई असली प्रॉब्लम लेकर आता है तो एम्प्लॉई कहता है कि यह हमारे रूल के खिलाफ है। केन ब्लैंचर्ड का लेसन सीधा है कि अपने एम्प्लॉई को पावर दो। उन्हें इतना फ्रीडम दो कि वो कस्टमर की ख़ुशी के लिए कुछ बड़ा फैसला ले सकें। लेकिन नहीं हमें तो हर चीज में अपनी टांग अड़ानी होती है। हम चाहते हैं कि एम्प्लॉई रोबोट की तरह काम करे और कस्टमर को इंसान वाला प्यार दे। यह पॉसिबल ही नहीं है।
मान लीजिये आप एक होटल के मालिक हैं। एक गेस्ट आता है और कहता है कि उसके बच्चे का जन्मदिन है लेकिन उसे केक नहीं मिल रहा। अगर आपका वेटर डरा हुआ है तो वह कहेगा कि सर किचन बंद हो गया है। लेकिन अगर आपने उसे एम्पावर किया है तो वह खुद बाहर जाकर केक लाएगा और गेस्ट को सरप्राइज देगा। वह गेस्ट जिंदगी भर आपके होटल का गुणगान करेगा। आपने क्या खोया? बस थोडा सा कंट्रोल। आपने पाया क्या? एक वफादार कस्टमर और एक गर्व से भरा हुआ एम्प्लॉई।
सच तो यह है कि जो लीडर अपने लोगों का ख्याल रखते हैं उनके लोग उनके बिजनेस का ख्याल रखते हैं। अगर आप अपने ऑफिस का माहौल जहरीला बना कर रखेंगे तो आपकी सर्विस कभी अमृत जैसी नहीं हो सकती। सार्केज्म यह है कि हम करोड़ों रुपये मार्केटिंग पर खर्च करते हैं ताकि कस्टमर हमारी दुकान तक आए लेकिन दुकान के अंदर बैठे स्टाफ को खुश रखने के लिए एक ढंग की चाय तक नहीं पिलाते। यह कैसी समझदारी है? कस्टमर मेनिया का मतलब है कि आपके अंदर से बाहर तक हर इंसान इस जुनून का हिस्सा होना चाहिए। जब आपके लोग खुश होंगे तभी वो खुशियाँ कस्टमर तक पहुँचेंगी।
लेसन ३ : कस्टमर की बात सुनो वरना कॉम्पिटिटर तो तैयार ही है
इंडियन बिजनेस की सबसे बड़ी विडंबना पता है क्या है? हम कस्टमर से फीडबैक फॉर्म तो भरवा लेते हैं, लेकिन उसे पढ़ते तभी हैं जब रद्दी बेचने का टाइम आता है। केन ब्लैंचर्ड कहते हैं कि अगर आप सच में कस्टमर मेनिया का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको कस्टमर की आवाज को भगवान की आवाज समझना होगा। लेकिन हम क्या करते हैं? अगर किसी कस्टमर ने शिकायत कर दी, तो हम उसे ही विलेन मान लेते हैं। हमें लगता है कि यह तो बस हमारी साख खराब करने आया है। सच तो यह है कि वह नाराज कस्टमर आपका सबसे बड़ा गुरु है जो आपको फ्री में बता रहा है कि आप कहाँ गड्ढा खोद रहे हैं।
आजकल के जमाने में डेटा ही सब कुछ है, लेकिन हम उस डेटा का अचार डालते हैं। हम यह तो ट्रैक करते हैं कि कस्टमर ने कितने का सामान खरीदा, पर यह कभी नहीं पूछते कि उसे सामान इस्तेमाल करके कैसा लगा। सार्केज्म देखिये, हम बड़ी-बड़ी मीटिंग्स में बैठकर यह डिस्कस करते हैं कि कस्टमर को क्या चाहिए, जबकि वो कस्टमर बाहर चिल्ला-चिल्ला कर हमें बता रहा होता है। हम अपनी ही ईगो की चादर ओढ़कर सो जाते हैं और फिर एक दिन पता चलता है कि मार्केट में कोई नया लड़का आया और उसने हमारी सारी मार्केट साफ कर दी। क्यों? क्योंकि उसने वो सुना जो हम सुन नहीं रहे थे।
मान लीजिये आप एक टेलर हैं। आपका एक पुराना कस्टमर कहता है कि भाई साहब आजकल लोग फिटिंग थोड़ी अलग पहन रहे हैं। आप उसे डांट देते हैं कि मुझे तीस साल का तजुर्बा है, तुम मुझे मत सिखाओ। नतीजा? वह अगली बार पड़ोस वाली नई दुकान पर जाएगा जो उसकी बात सुनता है। आप अपने तीस साल के तजुर्बे के साथ खाली दुकान में बैठे रहेंगे और वह नया लड़का आपकी पूरी कमाई ले उड़ेगा। फीडबैक को पर्सनली लेना छोड़िये और इसे इम्प्रूवमेंट का जरिया बनाइये।
कस्टमर मेनिया का मतलब है कि आपको कस्टमर के जूतों में पैर डालकर देखना होगा। अगर आप अपनी सर्विस से खुद खुश नहीं हो सकते, तो आप दूसरों से उम्मीद कैसे कर सकते हैं? केन ब्लैंचर्ड समझाते हैं कि कस्टमर सिर्फ एक ट्रांजेक्शन नहीं है, वह एक रिश्ता है। और किसी भी रिश्ते की जान होती है बात सुनना। अगर आप सुनना बंद कर देंगे, तो रिश्ता खत्म होना तय है। इसलिए अपने कान और दिमाग खुले रखिये।
तो दोस्तों, कस्टमर मेनिया कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह बस एक नजरिया है अपने काम को और लोगों को देखने का। अगर आप आज से ही अपने विजन को साफ कर लें, अपने एम्प्लॉई को इज्जत दें और कस्टमर की शिकायतों को लेसन की तरह लें, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। याद रखिये, बिजनेस सिर्फ प्रोडक्ट्स बेचने का नाम नहीं है, बल्कि भरोसे की एक चेन बनाने का नाम है।
आज ही अपनी टीम के साथ बैठिये और पूछिये कि हम कस्टमर की लाइफ में क्या वैल्यू ऐड कर रहे हैं? क्या आप एक कस्टमर फोकस्ड कंपनी बनाने के लिए तैयार हैं या फिर आप भी उसी भीड़ का हिस्सा बने रहना चाहते हैं जो सिर्फ सर्वाइवल के लिए लड़ रही है? कमेंट में जरूर बताएं कि आप अपने बिजनेस में कौन सा लेसन सबसे पहले लागू करेंगे। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना नया स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। आपकी एक छोटी सी शुरुआत एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
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