Dot.bomb (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो बिना किसी प्लान के हवा में महल बना रहे हैं। मुबारक हो। आप अपनी बर्बादी की ओर बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ जोश और भारी फंडिंग से आप गूगल बन जाएंगे तो आप डॉट बॉम की इस कहानी को मिस करके अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी और महंगी गलती कर रहे हैं।

आज हम जे डेविड कुओ की आंखों देखी कहानी से समझेंगे कि कैसे एक बड़ी इंटरनेट कंपनी अपने ही ईगो और पागलपन वाले जोश की वजह से मिट्टी में मिल गई। चलिए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन जो आपको फेल होने से बचाएंगे।


Lesson : लुनाटिक ऑप्टिमिज्म और पैसों की बर्बादी का चस्का।

आज के दौर में हर दूसरा इंसान अपने आप को अगला मार्क जुकरबर्ग समझ रहा है। जोश होना अच्छी बात है लेकिन जब यह जोश अंधा हो जाता है तो इसे लेखक जे डेविड कुओ लुनाटिक ऑप्टिमिज्म कहते हैं। वैल्यू एवेन्यू जैसी कंपनी ने यही गलती की थी। उनके पास आइडिया था विजन था लेकिन जेब में आने वाले पैसे का कोई अता पता नहीं था। बस बाहर से आने वाली फंडिंग को देख कर वो ऐसे नाच रहे थे जैसे उनकी लॉटरी लग गई हो।

आजकल के कई स्टार्टअप्स को देख लीजिए। ऑफिस में बीन बैग्स होंगे सबसे महंगा कॉफी मेकर होगा और एम्प्लॉइज के लिए मसाज चेयर भी होगी। लेकिन अगर उनसे पूछो कि भाई पैसा कहां से कमाओगे तो वो कहते हैं कि पहले यूजर बढ़ाएंगे फिर देखेंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक बहुत आलीशान शादी की तैयारी करें और एंड में पता चले कि दूल्हा ही गायब है। वैल्यू एवेन्यू में भी यही हुआ। पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा था। बड़े बड़े सेलिब्रिटीज को बुलाकर पार्टियां दी जा रही थीं। विज्ञापन पर करोड़ों खर्च हो रहे थे ताकि दुनिया को लगे कि हम बहुत बड़े हैं।

जब आप दूसरों के पैसे पर ऐश करते हैं तो आपको लगता है कि आप राजा हैं। लेकिन असलियत में आप उस गुब्बारे की तरह होते हैं जो बस एक पिन का इंतज़ार कर रहा होता है। अगर आपका बिजनेस मॉडल सिर्फ इस बात पर टिका है कि कोई और इन्वेस्टर आकर आपको बचा लेगा तो आप बिजनेस नहीं बल्कि जुआ खेल रहे हैं। बिना प्रॉफिट की चिंता किए खर्चा करना एक मीठा जहर है। शुरुआत में बहुत मजा आता है लेकिन जब क्रैश होता है तो हड्डियां तक नहीं मिलतीं।

याद रखिए जोश के साथ होश का होना बहुत जरूरी है। अगर आपकी सेल्स जीरो है और आपके खर्चे आसमान पर हैं तो आप एंटरप्रेन्योर नहीं बल्कि एक बहुत महंगे शौकीन इंसान हैं। डॉट बॉम की कहानी हमें सिखाती है कि अपने ऑप्टिमिज्म को जमीन पर रखिए। मार्केट की हवा कभी भी बदल सकती है और जब हवा बदलती है तो सबसे पहले वही पतंग कटती है जो बहुत ऊंची और कमजोर धागे से उड़ रही होती है। अपने खर्चों पर लगाम लगाइए और पहले यह सोचिए कि एक रुपया खर्च करके दो रुपये वापस कैसे आएंगे।


Lesson : रियल वैल्यू वर्सेस खोखली हाइप।

आजकल की दुनिया में जो दिखता है वही बिकता है। लेकिन समस्या यह है कि कई बार जो दिखता है उसके पीछे कुछ होता ही नहीं है। वैल्यू एवेन्यू ने एक ऐसा मायाजाल बुना था जिसे देखकर बड़े बड़े इन्वेस्टर्स की आंखें चौंधिया गई थीं। कंपनी ने अपना पूरा ध्यान इस बात पर लगा दिया कि लोग हमारे बारे में क्या बातें कर रहे हैं बजाए इसके कि हम लोगों के लिए क्या कर रहे हैं। इसे ही कहते हैं खोखली हाइप का गुब्बारा।

सोचिए आप एक ऐसे रेस्टोरेंट में जाते हैं जिसकी इंस्टाग्राम प्रोफाइल बहुत शानदार है। वहां की लाइटिंग बढ़िया है और वेटर भी टाई पहनकर घूम रहे हैं। लेकिन जैसे ही आप खाना चखते हैं तो पता चलता है कि नमक ही गायब है। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे। बिल्कुल नहीं। डॉट बॉम की इस कहानी में कंपनी ने भी यही किया। उन्होंने टेक्नोलॉजी और सर्विस को बेहतर बनाने के बजाय पीआर (PR) और मार्केटिंग पर करोड़ों उड़ा दिए। उन्हें लगा कि अगर हम टीवी पर दिख रहे हैं और अखबारों में हमारी तारीफ हो रही है तो हम सक्सेसफुल हैं।

कंपनी के लीडर्स को लगने लगा था कि वो इंटरनेट के भगवान हैं। वो कस्टमर की असली जरूरत को भूलकर सिर्फ अपनी इमेज बनाने में लग गए। अगर आपका प्रोडक्ट दम नहीं रखता तो दुनिया की सबसे महंगी मार्केटिंग भी आपको नहीं बचा सकती। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक फटी हुई पुरानी कार पर नया पेंट कर दें। बाहर से तो चमकेगी लेकिन जैसे ही आप हाईवे पर रेस लगाएंगे इंजन धुआं छोड़ देगा। वैल्यू एवेन्यू का इंजन भी इसी तरह धुआं छोड़ने लगा था क्योंकि उनकी सर्विस में वो दम ही नहीं था जिसकी वो हाइप बना रहे थे।

एक सफल बिजनेस वही है जो अपने कस्टमर की कोई बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व करे। अगर आप सिर्फ लोगों का ध्यान खींचना चाहते हैं तो आप एक मदारी हैं और मदारी का खेल खत्म होते ही भीड़ गायब हो जाती है। असली वैल्यू वो होती है जो कस्टमर के दिल और दिमाग में जगह बनाए। हाइप आपको कुछ समय के लिए ऊपर ले जा सकती है लेकिन वहां टिके रहने के लिए आपको क्वालिटी और ईमानदारी की जरूरत होती है। इसलिए दिखावे की दौड़ से बाहर निकलिए और अपनी नींव मजबूत कीजिए वरना जब डॉट कॉम जैसा बबल फूटेगा तो आपके पास छिपने की जगह भी नहीं बचेगी।


Lesson : पैनिक मैनेजमेंट और ईगो का विनाशकारी मेल।

जब जहाज डूबने लगता है तो सबसे पहले चूहे भागते हैं। लेकिन डॉट बॉम की इस कहानी में तो जहाज के कप्तान ही आपस में लड़ रहे थे। जब मार्केट गिरा और डॉट कॉम बबल फूटा तो वैल्यू एवेन्यू में अफरा तफरी मच गई। ऐसे वक्त में एक लीडर को ठंडे दिमाग से काम लेना चाहिए। लेकिन यहाँ तो ईगो का पहाड़ खड़ा था। कंपनी के बड़े अधिकारियों को अपनी गलती मानने में शर्म आ रही थी। उन्हें लग रहा था कि हम तो महान हैं हम कैसे गलत हो सकते हैं।

जब कंपनी के पास सैलरी देने के पैसे नहीं बचे थे तब भी कुछ लोग अपनी आलीशान सुख सुविधाओं को छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे। यह वैसा ही है जैसे घर में आग लगी हो और आप बैठकर सोच रहे हों कि कौन से रंग का पर्दा आग पर अच्छा लगेगा। जब पैनिक फैलता है तो इंसान का दिमाग काम करना बंद कर देता है और वो एक के बाद एक गलत फैसले लेता है। वैल्यू एवेन्यू के लीडर्स ने भी यही किया। उन्होंने उन लोगों को निकाल दिया जो सच बोल रहे थे और उन चापलूसों को साथ रखा जो कह रहे थे कि सब ठीक हो जाएगा।

जो लोग कल तक एक दूसरे की पीठ थपथपा रहे थे वो अब एक दूसरे की जड़ें काटने में लग गए। ईगो एक ऐसी बीमारी है जो आपको हकीकत देखने से रोक देती है। अगर आप वक्त रहते अपनी गलती मान लेते और छोटे बदलाव कर लेते तो शायद कंपनी बच जाती। लेकिन नहीं उन्हें तो अपनी इमेज की चिंता थी। मुश्किल वक्त में अगर आप अपने ईगो को साइड में रखकर टीम के साथ खड़े नहीं होते तो आप एक अच्छे लीडर कभी नहीं बन सकते।

अंत में जब सब कुछ खत्म हो गया तो सिर्फ पछतावा बचा। यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे बिजनेस हो या लाइफ कभी भी अपने आप को इतना बड़ा मत समझो कि आपको अपनी गलतियां दिखना बंद हो जाएं। पैनिक में हमेशा रुक कर सोचिए और ईगो को दरवाजे के बाहर छोड़कर फैसला लीजिए। अगर आप खुद को नहीं बदलेंगे तो समय आपको बदल देगा और वो बदलाव बहुत दर्दनाक होगा।


दोस्तों, डॉट बॉम की यह कहानी सिर्फ एक कंपनी के गिरने की दास्तान नहीं है बल्कि हम सबके लिए एक चेतावनी है। क्या आप भी अपनी लाइफ में दिखावे की हाइप में जी रहे हैं या कुछ असलियत में वैल्यू क्रिएट कर रहे हैं। अपनी सोच को बदलिए इससे पहले कि आपका बबल फूट जाए। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो नए स्टार्टअप का सपना देख रहे हैं ताकि वो इन गलतियों से बच सकें। कमेंट में बताएं कि आपको कौन सा लेसन सबसे ज्यादा टच कर गया।

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