क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बिजनेस में 2% की ग्रोथ मतलब बहुत बड़ी जीत है? अगर हां तो मुबारक हो आप अपनी कंपनी को धीरे धीरे कब्र की तरफ ले जा रहे हैं। जब पूरी दुनिया रॉकेट की स्पीड से भाग रही है तब आप बैलगाड़ी चलाकर खुद को विनर समझ रहे हैं। सच तो यह है कि बिना डबल डिजिट ग्रोथ के आपका बिजनेस सिर्फ एक महंगा शौक बनकर रह जाएगा।
माइकल ट्रेसी की किताब डबल डिजिट ग्रोथ हमें सिखाती है कि कैसे मुश्किल वक्त में भी अपनी कंपनी को एक पैसा छापने वाली मशीन बनाया जा सकता है। आज हम इस किताब के वो 3 लेसन देखेंगे जो आपके डूबते हुए बिजनेस में जान फूंक देंगे।
लेसन १ : सही कस्टमर को पकड़ना और फालतू को छोड़ना
आज के टाइम पर सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि हर दुकानदार और बिजनेस ओनर चाहता है कि पूरी दुनिया उसकी कस्टमर बन जाए। आपको लगता है कि अगर कोई राह चलता इंसान भी आपकी दुकान में झांक ले तो वह आपका भगवान है। लेकिन माइकल ट्रेसी कहते हैं कि यह आपकी सबसे बड़ी बेवकूफी है। अगर आप हर किसी को खुश करने की कोशिश करेंगे तो आप किसी को भी खुश नहीं कर पाएंगे। असल में डबल डिजिट ग्रोथ का पहला सीक्रेट यही है कि आप अपने लिए सही कस्टमर चुनें। इसे कहते हैं सिलेक्टिव एक्विजिशन। अब आप पूछेंगे कि भाई यह क्या बला है? तो इसे एक सिंपल से उदाहरण से समझते हैं।
मान लीजिए आपने एक बहुत ही शानदार जिम खोला है। वहां आपने बढ़िया म्यूजिक लगाया है और लेटेस्ट मशीनें रखी हैं। अब आपके पास दो तरह के लोग आते हैं। पहले वो जो सच में अपनी बॉडी बनाना चाहते हैं और साल भर की फीस एडवांस देने को तैयार हैं। दूसरे वो लोग जो सिर्फ एसी की हवा खाने आते हैं और हर दूसरे दिन पूछते हैं कि भाई डिस्काउंट कितना मिलेगा? अगर आप इन दूसरे वाले चवन्नी छाप कस्टमर्स के पीछे भागेंगे तो आप अपना सुकून और अपनी ग्रोथ दोनों खो देंगे। यह लोग आपका खून पिएंगे और जब इनके पास जाने का वक्त आएगा तो यह आपको एक फूटी कौड़ी भी नहीं देंगे। माइकल ट्रेसी समझाते हैं कि जो कंपनियां रॉकेट की तरह ऊपर जाती हैं वो उन कस्टमर्स पर फोकस करती हैं जो उनकी वैल्यू समझते हैं।
आपको समझना होगा कि हर कस्टमर आपके लिए प्रॉफिटेबल नहीं होता। कुछ कस्टमर्स तो ऐसे होते हैं जो आपके बिजनेस के लिए दीमक की तरह काम करते हैं। वो आपसे सर्विस पूरी लेंगे लेकिन पैसे देते वक्त उन्हें सांप सूंघ जाएगा। अगर आप ऐसी जनता को पाल रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं बल्कि चैरिटी चला रहे हैं। और चैरिटी से कभी भी डबल डिजिट ग्रोथ नहीं आती। आपको अपनी एनर्जी उन लोगों पर लगानी चाहिए जो आपके प्रीमियम सर्विस की कद्र करें। जब आप कचरा साफ कर देते हैं तो आपके पास सिर्फ वो हीरा बचता है जो चमकता है।
अक्सर हमें डर लगता है कि अगर हमने 'ना' बोल दिया तो हमारा नुकसान हो जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि गलत इंसान को 'ना' बोलना ही सबसे बड़ा प्रॉफिट है। अपनी टारगेट ऑडियंस को पहचानो। उनके साथ रिश्ता बनाओ। उन्हें वो दो जो कोई और नहीं दे सकता। जब आप ऐसा करते हैं तो वो कस्टमर आपके ब्रांड के पक्के चेले बन जाते हैं। फिर चाहे आप अपनी फीस बढ़ाएं या कोई नया प्रोडक्ट लाएं वो खुशी खुशी आपके पास आएंगे। यह वैसी ही बात है जैसे एक अच्छे रेस्टोरेंट में लोग लाइन लगाकर इंतजार करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वहां का स्वाद और कहीं नहीं मिलेगा।
लेकिन याद रखिये सिर्फ कस्टमर चुनना काफी नहीं है। आपको अपनी सर्विस को इतना स्मूथ बनाना होगा कि कोई चाहकर भी आपको छोड़ न पाए। इसी कड़ी को जोड़ता है हमारा अगला पॉइंट जहाँ हम सीखेंगे कि अपने काम करने के तरीके में कैसे उस्ताद बनना है। बिना सिस्टम के ग्रोथ सिर्फ एक सपना है और सिस्टम कैसे बनता है यह जानना और भी मजेदार है।
लेसन २ : अपने काम को इतना आसान बनाओ कि कॉम्पिटिटर रोने लगे
पहले लेसन में हमने समझा कि हर ऐरे गैरे नत्थू खैरे को अपना कस्टमर नहीं बनाना है। लेकिन जब आपने सही वीआईपी (VIP) कस्टमर्स को चुन लिया है तो अब बारी है उन्हें ऐसी सर्विस देने की कि उनकी रूह खुश हो जाए। इसे माइकल ट्रेसी कहते हैं ऑपरेशनल एक्सीलेंस। इसका सीधा सा मतलब है कि आपका काम करने का तरीका इतना स्मूथ और तेज होना चाहिए कि सामने वाला सोचे कि भाई ये लोग इंसान हैं या रोबोट? अगर आपके ऑफिस में एक फाइल को साइन होने में तीन जन्म लग जाते हैं तो समझ लीजिये कि आप ग्रोथ नहीं बल्कि कछुआ रेस की तैयारी कर रहे हैं।
आपने अपने मोहल्ले की वो चाट वाली दुकान तो देखी होगी जहाँ शाम को मेला लगा रहता है। वहां दुकानदार का हाथ इतनी तेज चलता है कि आपको लगता है उसने हाथों में मोटर लगा रखी है। एक तरफ वो पापड़ी तोड़ रहा है दूसरी तरफ दही डाल रहा है और तीसरी तरफ पैसे भी गिन रहा है। उसके पास कोई फालतू का ड्रामा नहीं है। उसका सिस्टम सेट है। अब दूसरी तरफ एक बड़ा सा रेस्टोरेंट है जहाँ आप वेटर को पानी के लिए बुलाते हैं और वो ऐसे देखता है जैसे आपने उसकी किडनी मांग ली हो। वहां आपको बिल मंगवाने के लिए भी धरना देना पड़ता है। अब आप खुद सोचिये कि पैसा कहाँ ज्यादा छपेगा? जाहिर है उस चाट वाले के पास क्योंकि उसका ऑपरेशनल सिस्टम बिजली से भी तेज है।
मार्केट में अगर आपको राज करना है तो आपको अपनी कॉस्ट (Cost) कम और अपनी स्पीड (Speed) ज्यादा करनी पड़ेगी। इसका यह मतलब नहीं है कि आप कंजूसी करें। इसका मतलब यह है कि आप फालतू के स्टेप्स को कचरे के डिब्बे में डाल दें। अगर कोई काम दो स्टेप्स में हो सकता है तो उसके लिए पांच लोगों की मीटिंग बुलाना सिर्फ बेवकूफी है। बड़ी कंपनियां जैसे अमेजॉन (Amazon) इसलिए आज टॉप पर हैं क्योंकि उनका डिलीवरी सिस्टम इतना खतरनाक है कि शायद आप अभी आर्डर करें और अगले पल डोरबेल बज जाए। वो अपने काम को इतना आसान बना देते हैं कि कस्टमर को दिमाग ही नहीं लगाना पड़ता।
ज्यादातर लोग अपने बिजनेस को इतना कॉम्प्लिकेटेड बना देते हैं कि वो खुद ही उसमें उलझ कर रह जाते हैं। आपको अपने काम में डिसिप्लिन लाना होगा। जब आपका प्रोसेस एकदम क्लियर होता है तो गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है। जब गलतियां नहीं होतीं तो पैसा बचता है और जब पैसा और समय बचता है तो वही असली प्रॉफिट होता है। माइकल ट्रेसी कहते हैं कि आपको अपनी फील्ड का सबसे सस्ता और सबसे अच्छा प्रोवाइडर बनना होगा। लोग उन्हीं के पास जाना पसंद करते हैं जहाँ उन्हें कम मेहनत में सबसे बेस्ट रिजल्ट मिले।
लेकिन याद रखियेगा ऑपरेशनल एक्सीलेंस का मतलब सिर्फ तेज काम करना नहीं है। इसका मतलब है अपने काम को हर दिन और बेहतर बनाना। अगर आप आज भी वही घिसे पिटे तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं जो आपके दादा जी के जमाने में चलते थे तो आप ग्रोथ की उम्मीद छोड़ दीजिये। आपको अपने सिस्टम को लगातार अपडेट करना होगा। और जब आपका सिस्टम सेट हो जाता है तब आपको जरूरत पड़ती है कुछ ऐसा करने की जो पूरी मार्केट में किसी ने न किया हो। यहीं से शुरू होता है हमारा तीसरा और सबसे जरूरी हिस्सा जहाँ हम पुरानी खाल उतारकर नई जान फूंकने की बात करेंगे।
लेसन ३ : पुराने को छोड़ो और हर बार कुछ नया फोड़ो
पिछले दो लेसन में हमने सही कस्टमर चुनना और अपना सिस्टम लोहे जैसा मजबूत बनाना सीख लिया। लेकिन माइकल ट्रेसी एक बहुत कड़वी बात कहते हैं। वो कहते हैं कि अगर आप आज दुनिया के राजा हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि कल भी रहेंगे। मार्केट एक ऐसी बेवफा चीज है जो पलक झपकते ही बदल जाती है। अगर आप वही घिसा पिटा सामान बेचते रहेंगे जो आप दस साल पहले बेच रहे थे तो लोग आपको वैसे ही भूल जाएंगे जैसे लोग नोकिया के फोन भूल गए। डबल डिजिट ग्रोथ का तीसरा और सबसे बड़ा पिलर है इनोवेशन और रिन्यूअल। यानी खुद को हर बार नया अवतार देना।
आपने अपने शहर का वो पुराना सिनेमा हॉल तो देखा होगा जहाँ की कुर्सियों से खटमल निकलते थे और पंखा ऐसे आवाज करता था जैसे कोई जनरेटर चल रहा हो। वो मालिक सोचता था कि लोग तो फिल्म देखने आते हैं कुर्सी से क्या लेना देना। फिर अचानक से शहर में पीवीआर (PVR) और आइनॉक्स (INOX) जैसे मल्टिप्लेक्स आ गए। वहां सोफे जैसी सीटें मिलीं और पॉपकॉर्न के साथ एयर कंडीशनर की ठंडी हवा। अब वो पुराना सिनेमा हॉल वाला मालिक हाथ पर हाथ धरे बैठा है और सोच रहा है कि पब्लिक बेवफा हो गई। पब्लिक बेवफा नहीं हुई भाई साहब आपने खुद को रिन्यू (Renew) नहीं किया। आपने वक्त के साथ अपनी खाल नहीं बदली।
इनोवेशन का मतलब यह नहीं है कि आप कोई रॉकेट साइंस बना दें। इसका सीधा सा मतलब है अपने कस्टमर की वो प्रॉब्लम ढूंढना जिसका हल किसी के पास नहीं है। अगर आप अपने प्रोडक्ट में छोटी सी भी ऐसी चीज जोड़ देते हैं जो किसी और के पास नहीं है तो आप मार्केट के बेताज बादशाह बन जाते हैं। डबल डिजिट ग्रोथ उन्हीं कंपनियों को मिलती है जो रिस्क लेने से नहीं डरतीं। आपको हर थोड़े दिन में अपने काम को आईने में देखना होगा और खुद से पूछना होगा कि क्या मैं आज भी रिलेवेंट हूँ? अगर जवाब 'ना' है तो समझ लीजिये कि आपकी उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
अक्सर लोग डरते हैं कि अगर हमने कुछ नया ट्राई किया और वो फेल हो गया तो क्या होगा? अरे भाई फेल हो जाओगे तो कम से कम कुछ सीखोगे तो सही। लेकिन अगर कुछ नया नहीं किया तो फेल होना पक्का है। माइकल ट्रेसी समझाते हैं कि ग्रोथ एक ऐसी भूख है जो कभी शांत नहीं होनी चाहिए। आपको अपने पुराने सक्सेसफुल आईडिया को भी मारना पड़ सकता है ताकि आप एक नया और बड़ा आईडिया पैदा कर सकें। जब आप अपने काम में हर बार कुछ नया और एक्साइटिंग जोड़ते हैं तो लोग आपके दीवाने हो जाते हैं। उन्हें पता होता है कि आपके पास हमेशा कुछ न कुछ सरप्राइजिंग मिलेगा।
तो दोस्तों, बात बड़ी सिंपल है। अगर आप वाकई अपने बिजनेस को उस मुकाम पर ले जाना चाहते हैं जहाँ दुनिया आपको सलाम करे तो आपको इन तीनों लेसन को अपनी नस नस में उतारना होगा। सही कस्टमर चुनो अपना सिस्टम बिजली जैसा तेज करो और हर बार कुछ नया धमाका करो। बिना इसके आप सिर्फ भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे और भीड़ की कोई पहचान नहीं होती।
तो क्या आप तैयार हैं अपने बिजनेस को डबल डिजिट ग्रोथ की राह पर ले जाने के लिए? याद रखिये कामयाबी रातों रात नहीं मिलती लेकिन अगर आप सही रास्ते पर चल रहे हैं तो उसे मिलने से कोई रोक भी नहीं सकता। आज ही बैठिये और देखिये कि आपके बिजनेस में वो कौन से 'खटमल' हैं जिन्हें बाहर निकालना जरूरी है। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो बिजनेस में संघर्ष कर रहे हैं। शायद आपका एक शेयर किसी की डूबती नैया पार लगा दे। नीचे कमेंट में लिखिये कि आपको इन तीनों में से कौन सा लेसन सबसे ज्यादा पसंद आया। चलिए मिलकर इंडिया के हर बिजनेस को ग्लोबल बनाते हैं।
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