Flawless Execution (Hindi)


क्या आप अब भी वही पुराने घिसे पिटे आइडियाज से अपना बिजनेस चला रहे हैं। मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का टिकट खुद काट रहे हैं। जब आपके कॉम्पिटिटर फाइटर जेट की स्पीड से आगे निकल रहे हैं तब आप बैलगाड़ी लेकर जीतने का सपना देख रहे हैं। यह आर्टिकल छोड़िए और फेलियर का जश्न मनाइये।

पर अगर आप सच में जीतना चाहते हैं तो जेम्स मर्फी की यह किताब आपको वह सीक्रेट सिस्टम सिखाएगी जो अमेरिका के टॉप फाइटर पायलट्स इस्तेमाल करते हैं। चलिए जानते हैं वह ३ लेसन जो आपके काम करने का तरीका बदल देंगे।


लेसन १ : मिशन की प्लानिंग ऐसी हो कि दुश्मन भी सलाम करे

दोस्तो, अगर आप सोचते हैं कि बिजनेस शुरू करना या कोई प्रोजेक्ट हैंडल करना सिर्फ एक 'गुड आइडिया' और थोड़े से जोश का काम है तो आप उस पायलट की तरह हैं जो बिना पैराशूट के प्लेन से कूद गया और सोच रहा है कि हवा में उड़ते उड़ते पंख निकल आएँगे। जेम्स मर्फी कहते हैं कि फाइटर पायलट कभी भी 'किस्मत' के भरोसे मिशन पर नहीं जाते। उनके लिए प्लानिंग का मतलब सिर्फ डायरी में गोल लिखना नहीं होता। उनके लिए प्लानिंग का मतलब होता है हर उस चीज को पहले से देख लेना जो गलत हो सकती है। इसे वे 'थ्रेट असेसमेंट' कहते हैं।

अब आप कहेंगे कि भाई हम तो ऑफिस में बैठते हैं हमें कौन सा मिसाइल लगने वाली है। लेकिन सच तो यह है कि आपके ऑफिस की राजनीति आपके क्लाइंट का मूड और अचानक गिरती हुई मार्केट किसी मिसाइल से कम नहीं है। क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आपका सबसे बड़ा क्लाइंट कल सुबह फोन करके कह दे कि 'टाटा बाय बाय' तो आप क्या करेंगे। अगर आपके पास इसका जवाब नहीं है तो आपकी प्लानिंग जीरो है।

ज्यादातर लोग अपनी लाइफ और बिजनेस में 'विशिंग मोड' में रहते हैं। 'काश' सेल्स बढ़ जाए। 'काश' बॉस आज खुश रहे। फाइटर पायलट 'काश' पर नहीं 'कॉन्टिंजेंसी' पर जीते हैं। अगर प्लान ए फेल हुआ तो बी क्या है। अगर बी फेल हुआ तो सी क्या है। वे मिशन पर जाने से पहले घंटों तक सिर्फ इस बात पर बहस करते हैं कि अगर प्लेन का इंजन फेल हुआ तो कहाँ उतरेंगे और अगर रडार ने काम करना बंद किया तो घर कैसे वापस आएँगे।

मान लीजिए आप एक नई दुकान खोल रहे हैं। आप सोच रहे हैं कि ओपनिंग डे पर भीड़ उमड़ पड़ेगी। आपने ढोल वाले बुला लिए और मिठाइयाँ बाँटने की तैयारी कर ली। यह आपकी बेस्ट केस प्लानिंग है। लेकिन एक फाइटर पायलट सोचेगा कि अगर उस दिन भारी बारिश हो गई तो क्या होगा। अगर बिजली कट गई तो क्या होगा। अगर पड़ोस वाली दुकान ने उसी दिन सेल लगा दी तो क्या होगा।

हम लोग शादी की प्लानिंग में जितना दिमाग लगाते हैं उतना अपने करियर या बिजनेस की प्लानिंग में नहीं लगाते। शादी में हमें पता होता है कि अगर पनीर खत्म हो गया तो हलवाई क्या एक्स्ट्रा बनाएगा लेकिन बिजनेस में हम बस अँधेरे में तीर मारते रहते हैं और जब तीर वापस आकर अपनी ही आँख में लगता है तब हम कहते हैं कि किस्मत खराब थी।

फ्लोलेस एक्जीक्यूशन का पहला रूल है कि अपने ईगो को घर पर छोड़कर टेबल पर बैठें। अपनी टीम के साथ मिलकर हर उस खतरे की लिस्ट बनाएँ जो आपके मिशन को बर्बाद कर सकता है। जब आप हर खतरे का जवाब तैयार कर लेते हैं तब आप डरे हुए नहीं बल्कि कॉन्फिडेंट होते हैं। फाइटर पायलट इसलिए निडर नहीं होते कि उन्हें डर नहीं लगता बल्कि इसलिए होते हैं क्योंकि उन्होंने हर डर का इलाज पहले ही ढूंढ लिया होता है।

अगली बार जब आप कोई नया काम शुरू करें तो सिर्फ यह मत सोचिए कि क्या सही होगा। यह भी सोचिए कि क्या गलत हो सकता है और आप उसे कैसे संभालेंगे। बिना तैयारी के मैदान में उतरना बहादुरी नहीं बल्कि बेवकूफी है। और यकीन मानिए मार्केट बेवकूफों को कभी माफ नहीं करता। वह उन्हें कच्चा चबा जाता है।


लेसन २ : चेकलिस्ट का जादू और एक्जीक्यूशन की पावर

फाइटर पायलट जब आसमान में ३०००० फीट की ऊँचाई पर होता है और दुश्मन के दो जेट उसके पीछे लगे होते हैं तब उसके पास बैठकर 'सोचने' का टाइम नहीं होता। उस समय अगर वह यह सोचने बैठ जाए कि 'अरे यार मिसाइल छोड़ने वाला बटन लाल था या नीला' तो समझो उसका काम तमाम। यहाँ काम आता है सिस्टम और चेकलिस्ट। जेम्स मर्फी कहते हैं कि इंसान का दिमाग प्रेशर में फेल हो सकता है लेकिन एक अच्छी तरह बनाई गई चेकलिस्ट कभी फेल नहीं होती।

हमारे साथ दिक्कत यह है कि हमें लगता है हम बहुत स्मार्ट हैं। हमें सब याद रहता है। हम सुपरमैन के दूर के रिश्तेदार हैं जिन्हें डायरी या चेकलिस्ट की जरूरत नहीं है। लेकिन असलियत यह है कि जब ऑफिस में काम का बोझ बढ़ता है या क्लाइंट सामने बैठा होता है तो हमारा स्मार्ट दिमाग किसी पुराने हैंग होने वाले कंप्यूटर की तरह बर्ताव करने लगता है। हम सबसे बेसिक चीजें भूल जाते हैं। फाइटर पायलट अपनी जिंदगी एक चेकलिस्ट के भरोसे जीते हैं। टेक ऑफ करने से पहले वे हर स्विच और हर मीटर को चेक करते हैं भले ही उन्होंने वह काम १००० बार पहले किया हो।

मान लीजिए आप एक बहुत इम्पोर्टेन्ट प्रेजेंटेशन देने जा रहे हैं। आप पूरे कॉन्फिडेंस में हैं कि आपने सब तैयार कर लिया है। आप मीटिंग रूम में पहुँचते हैं और पता चलता है कि आप लैपटॉप का चार्जर घर भूल आए हैं या जिस पेन ड्राइव में फाइल थी वह काम ही नहीं कर रही। अब वहाँ बैठकर पसीने पोंछने के अलावा आपके पास कोई चारा नहीं है। एक फाइटर पायलट माइंडसेट वाला इंसान अपनी चेकलिस्ट में पहले ही लिख चुका होता कि उसे चार्जर पेन ड्राइव और फाइल का बैकअप क्लाउड पर रखना है।

हम लोग अक्सर 'मल्टीटास्किंग' के चक्कर में रायता फैला देते हैं। हम सोचते हैं कि एक साथ दस काम करेंगे तो जल्दी फ्री हो जाएँगे। लेकिन सच तो यह है कि मल्टीटास्किंग सिर्फ आपके काम की क्वालिटी खराब करती है और गलतियों का चांस बढ़ा देती है। फाइटर पायलट एक समय में एक ही चीज पर फोकस करते हैं जिसे वे 'चैनलइज्ड अटेंशन' कहते हैं। जब वे निशाना लगा रहे होते हैं तब वे घर के राशन या बच्चों के स्कूल की फीस के बारे में नहीं सोच रहे होते।

हम लोग रोजमर्रा के कामों में तो बहुत सिस्टमैटिक होने का नाटक करते हैं लेकिन जब असली काम की बारी आती है तो हम 'देख लेंगे' वाले मोड में चले जाते हैं। यह 'देख लेंगे' वाला एटीट्यूड ही बिजनेस और करियर का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर आपको लगता है कि चेकलिस्ट बनाना छोटे बच्चों का काम है तो आप अपनी लाइफ को खतरे में डाल रहे हैं।

एक्जीक्यूशन का मतलब है कि जो प्लान आपने पेपर पर बनाया है उसे बिना किसी गलती के जमीन पर उतारना। इसके लिए आपको अपनी टीम को ट्रेन करना होगा कि वे भी सिस्टम को फॉलो करें। अगर आपकी टीम में हर कोई अपनी मर्जी का मालिक है तो आप कभी भी 'फ्लोलेस' यानी बिना गलती वाला काम नहीं कर पाएंगे। एक फाइटर पायलट की टीम में जमीन पर काम करने वाले मैकेनिक से लेकर ऊपर उड़ने वाले पायलट तक सब एक ही बुक और एक ही सिस्टम को फॉलो करते हैं।

इसलिए अपनी लाइफ और बिजनेस में चेकलिस्ट को शामिल कीजिए। चाहे वह सुबह उठकर काम की लिस्ट बनाना हो या किसी बड़े प्रोजेक्ट को डिलीवर करने से पहले की फाइनल चेकिंग। जब आप सिस्टम पर भरोसा करते हैं तो आपका दिमाग शांत रहता है और आप उस पीक परफॉरमेंस को छू पाते हैं जिसका सपना हर कोई देखता है। याद रखिये आसमान में उड़ने के लिए सिर्फ पंख नहीं बल्कि एक सही नेविगेशन सिस्टम की भी जरूरत होती है।


लेसन ३ : डिब्रीफिंग की ताकत और ईगो का अंत

कल्पना कीजिये कि आप एक फाइटर पायलट हैं और आप अभी-अभी एक खतरनाक मिशन से वापस आए हैं। आपके प्लेन पर गोलियों के निशान हैं और आप बाल-बाल बचे हैं। अब आप क्या करेंगे। क्या आप जाकर अपनी बहादुरी के किस्से सुनाएंगे या सीधे सो जाएंगे। जेम्स मर्फी कहते हैं कि एक असली प्रोफेशनल वही है जो मिशन खत्म होने के बाद 'डिब्रीफिंग' के लिए बैठता है। फाइटर पायलट्स की दुनिया में डिब्रीफिंग का मतलब है एक बंद कमरे में पूरी टीम के साथ बैठना और यह देखना कि क्या सही हुआ और क्या बहुत गंदा फेल हुआ।

यहाँ सबसे बड़ा रूल यह है कि कमरे में घुसते ही आप अपनी वर्दी से अपनी रैंक और अपना ईगो उतारकर बाहर टांग देते हैं। वहाँ कोई सीनियर नहीं होता और कोई जूनियर नहीं होता। वहाँ सिर्फ 'सच' होता है। अगर जूनियर ने देखा कि सीनियर पायलट ने गलती की है तो वह डंके की चोट पर बोलेगा और सीनियर को उसे मानना पड़ेगा। हमारे कॉर्पोरेट जगत में क्या होता है। अगर बॉस ने कोई गलत फैसला ले लिया तो सब 'जी हुजूर' करते रहते हैं और जब कंपनी डूब जाती है तो सब एक-दूसरे का मुंह ताकते हैं।

हम अपनी गलतियों को छुपाने में पीएचडी कर चुके हैं। ऑफिस में अगर कोई प्रोजेक्ट फेल हो जाए तो हम सबसे पहले यह ढूंढते हैं कि बलि का बकरा कौन बनेगा। हम अपनी गलती मानने के बजाय मार्केट की हालत या किस्मत को दोष देने लगते हैं। फाइटर पायलट जानते हैं कि अगर आज उन्होंने अपनी गलती नहीं मानी तो कल वही गलती उनकी जान ले लेगी। बिजनेस में भी यही सच है। अगर आप अपनी गलती से नहीं सीखेंगे तो आपका कॉम्पिटिटर आपको मार्केट से बाहर फेंक देगा।

मान लीजिए आपकी सेल्स टीम ने एक बहुत बड़ी डील खो दी। आमतौर पर क्या होता है। सेल्स मैनेजर सेल्स टीम को डांटता है और टीम कहती है कि प्रोडक्ट ही खराब था। बस बात खत्म। लेकिन एक फाइटर पायलट माइंडसेट वाला मैनेजर डिब्रीफिंग करेगा। वह पूछेगा कि प्रेजेंटेशन के किस मिनट पर क्लाइंट का मूड बदला। हमने कौन सा ऐसा शब्द कहा जो उसे बुरा लगा। क्या हमारी तैयारी में कोई कमी थी। यह चर्चा बिना किसी को नीचा दिखाए सिर्फ इसलिए की जाती है ताकि अगली डील हाथ से न जाए।

हम लोग अपनी पिछली गलतियों को याद करके दुखी तो बहुत होते हैं लेकिन उन्हें सुधारने का सिस्टम कभी नहीं बनाते। हम सोचते हैं कि अगली बार अपने आप सब ठीक हो जाएगा। भाई अपने आप तो सिर्फ घास उगती है सफलता के लिए सिस्टम बनाना पड़ता है। डिब्रीफिंग का असली मकसद ही यही है कि 'सीख' को 'सिस्टम' में बदल दिया जाए।

जब तक आप अपनी टीम में एक ऐसा माहौल नहीं बनाएंगे जहाँ लोग अपनी गलती बिना डरे बता सकें तब तक आप ग्रो नहीं कर पाएंगे। डिब्रीफिंग सिर्फ हार के बाद नहीं बल्कि जीत के बाद भी होनी चाहिए। अगर आप जीत गए तो यह जानना भी जरूरी है कि आप तुक्के से जीते या आपकी स्ट्रेटेजी काम कर गई। जेम्स मर्फी कहते हैं कि जो अपनी जीत का डिब्रीफ नहीं करता वह अगली बार हारने की तैयारी कर रहा होता है।

तो दोस्तो, अगर आप वाकई अपने फील्ड के फाइटर पायलट बनना चाहते हैं तो अपनी गलतियों से प्यार करना सीखिए। उन्हें ढूंढिए उन्हें डिस्कस कीजिये और उन्हें जड़ से खत्म कीजिये। याद रखिये गलतियाँ करना बुरी बात नहीं है लेकिन एक ही गलती को बार-बार करना बेवकूफी की निशानी है। फाइटर पायलट आसमान में इसलिए राज करते हैं क्योंकि वे जमीन पर अपनी गलतियों का हिसाब बड़ी बेबाकी से करते हैं।


दोस्तो, 'फ्लोलेस एक्जीक्यूशन' सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि यह एक रिमाइंडर है कि आप एक एवरेज लाइफ जीने के लिए नहीं बने हैं। आपके अंदर भी एक फाइटर पायलट छुपा है बस जरूरत है एक सही सिस्टम की। आज ही तय कीजिये कि क्या आप अपनी लाइफ को किस्मत के भरोसे छोड़ेंगे या खुद अपनी जीत का सिस्टम बनाएंगे। अपने ईगो को छोड़िए प्लानिंग को मजबूत कीजिये और हर काम के बाद खुद से पूछिए कि 'मैने क्या सीखा'।

उठिए और अपने अगले मिशन की तैयारी कीजिये। क्योंकि जीत उन्हीं की होती है जो उड़ने से पहले अपनी जमीन पक्की कर लेते हैं।

इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा किस्मत का रोना रोता रहता है। उसे बताइए कि अब बहाने नहीं फाइटर पायलट वाला एक्शन चाहिए।

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