अगर आप अभी भी कस्टमर के एक बार मना करने पर घर बैठ जाते हैं तो बधाई हो। आप अपनी मेहनत की कमाई और करियर की ग्रोथ अपने कॉम्पिटिटर को गिफ्ट में दे रहे हैं। आपकी इसी डरपोक सेल्स अप्रोच की वजह से आपके सपने और बैंक बैलेंस दोनों ही कुपोषण का शिकार हैं।
लेकिन घबराइए मत। जेफ शोर की यह किताब आपकी इस आदत को जड़ से बदल देगी। आज हम उन ३ बेहतरीन लेसन के बारे में जानेंगे जो आपको एक डरपोक सेल्समैन से एक प्रोफेशनल क्लोजर बना देंगे।
लेसन १ : रिजेक्शन का डर और फॉलो अप की असली सच्चाई
क्या आपको भी कस्टमर को फोन करने से पहले ऐसा लगता है जैसे आप किसी गुंडे से उधार मांगने जा रहे हैं। सेल्स की दुनिया में अधिकतर लोग इसी 'फोन फोबिया' के शिकार होते हैं। जेफ शोर कहते हैं कि जब आप फॉलो अप नहीं करते हैं तो आप असल में खुद को बचा नहीं रहे होते बल्कि अपने करियर की कब्र खोद रहे होते हैं। लोग अक्सर सोचते हैं कि अगर मैंने दोबारा कॉल किया तो कस्टमर सोचेगा कि मैं बहुत ज्यादा डेस्परेट हूँ। या फिर शायद वह फोन उठा कर मुझे सुना देगा। भाई साहब आप सेल्स में हैं कोई गुप्त जासूस नहीं जो छुप कर काम करेंगे।
मान लीजिए आप एक जिम के सेल्स पर्सन हैं। एक मोटा आदमी आपके पास आता है और कहता है कि उसे वजन कम करना है। वह सारी डिटेल्स लेता है लेकिन कहता है कि मैं सोच कर बताऊंगा। अब आप अगले दिन उसे कॉल नहीं करते क्योंकि आपको लगता है कि उसे बुरा लगेगा। यहाँ आप गलती कर रहे हैं। उस आदमी को आपके जिम की नहीं बल्कि एक फिट शरीर की जरूरत है। आपका फॉलो अप उसे यह याद दिलाता है कि उसने खुद से एक वादा किया था। जब आप कॉल नहीं करते तो आप उसे वापस उसी समोसे और कोल्ड ड्रिंक वाली लाइफ में छोड़ देते हैं। क्या यह उसकी मदद करना हुआ। बिल्कुल नहीं। यह तो आपने उसके साथ धोखा कर दिया।
सच्चाई तो यह है कि कस्टमर को आपकी याद नहीं आती। उनकी अपनी लाइफ है और उनके पास हजार काम हैं। आपका प्रोडक्ट उनकी लिस्ट में शायद १०वें नंबर पर आता होगा। जब आप फॉलो अप करते हैं तो आप उन्हें यह बताते हैं कि उनका लक्ष्य आपके लिए इम्पोर्टेंट है। जेफ शोर का मानना है कि रिजेक्शन पर्सनल नहीं होता। अगर किसी ने कहा कि 'अभी नहीं' तो इसका मतलब 'कभी नहीं' नहीं होता। इसका मतलब बस इतना है कि अभी उसकी लाइफ में कोई दूसरी प्रायोरिटी चल रही है।
सोचिए अगर थॉमस एडिसन ने पहले बल्ब के फेल होने के बाद फॉलो अप करना छोड़ दिया होता तो हम आज भी मोमबत्ती जला रहे होते। सेल्स में फॉलो अप करना एक सर्विस है। आप कस्टमर का काम आसान कर रहे हैं। आप उसे कन्फ्यूजन से बाहर निकाल रहे हैं। लेकिन हम में से ज्यादातर लोग इसे एक बोझ की तरह देखते हैं। हमें लगता है कि हम भीख मांग रहे हैं। यह माइंडसेट ही सबसे बड़ा विलेन है। अगर आप अपने प्रोडक्ट पर यकीन रखते हैं तो आपको उसे बेचने में शर्म नहीं आनी चाहिए।
अगर आप फॉलो अप नहीं कर रहे हैं तो आप अपने कॉम्पिटिटर के लिए रास्ता साफ कर रहे हैं। आपका कॉम्पिटिटर जो शायद आपसे खराब प्रोडक्ट बेच रहा है वह सिर्फ इसलिए जीत जाएगा क्योंकि उसने कस्टमर का दरवाजा खटखटाया। सेल्स की रेस में तेज दौड़ना जरूरी नहीं है बल्कि ट्रैक पर बने रहना जरूरी है। फॉलो अप ही वह फेविकोल है जो आपको कस्टमर के दिमाग से चिपकाए रखता है। तो अगली बार जब फोन उठाने में हाथ कांपे तो याद रखिएगा कि आप किसी को परेशान नहीं कर रहे बल्कि आप अपना काम ईमानदारी से कर रहे हैं। बिना फॉलो अप के सेल्स क्लोज करना वैसा ही है जैसे बिना पढ़ाई किए एग्जाम में टॉप करने का सपना देखना। थोडा फनी लगता है ना। लेकिन हकीकत यही है।
लेसन २ : वैल्यू बेस्ड क्लोजिंग और कस्टमर का फायदा
अक्सर सेल्स वाले लोग एक गलती करते हैं। वे तोते की तरह अपने प्रोडक्ट के फीचर्स रटना शुरू कर देते हैं। हमारे पास ये है, हमारे पास वो है, हम दुनिया के सबसे बेस्ट हैं। भाई साहब, कस्टमर को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने बेस्ट हैं। उसे सिर्फ एक बात से मतलब है कि 'मेरा इसमें क्या फायदा है'। जेफ शोर कहते हैं कि जब तक आप कस्टमर की लाइफ में वैल्यू नहीं जोड़ते, तब तक आपकी क्लोजिंग सिर्फ एक तुक्का है। क्लोजिंग का मतलब किसी को फंसाना नहीं है, बल्कि उसे एक सही फैसले तक पहुँचाना है।
मान लीजिए आप एक मिडिल क्लास आदमी को एक महँगा वॉटर प्यूरीफायर बेच रहे हैं। आप उसे बता रहे हैं कि इसमें ४ लेयर की फिल्टरेशन है, इसमें जापानी टेक्नोलॉजी है, इसका डिजाइन इटली से आया है। वह आदमी मन ही मन सोच रहा है कि भाई मुझे प्यास लगी है, मुझे ये इंजीनियरिंग का लेक्चर क्यों दे रहे हो। लेकिन वहीं अगर आप उसे कहें कि सर, इस प्यूरीफायर से आपके बच्चों को कभी पेट की बीमारी नहीं होगी और डॉक्टर के चक्कर काटने का आपका हजारों का खर्चा बच जाएगा। अब आपने उसे मशीन नहीं बेची, आपने उसे उसके परिवार की हेल्थ और उसके पैसे की बचत बेची है। इसे कहते हैं वैल्यू बेस्ड क्लोजिंग।
ज्यादातर लोग डिस्काउंट के पीछे भागते हैं। उन्हें लगता है कि १० परसेंट कम कर दिया तो सेल हो जाएगी। लेकिन डिस्काउंट सिर्फ आलसी सेल्स वालों का हथियार है। अगर आप अपने प्रोडक्ट की वैल्यू सही से नहीं समझा पा रहे, तभी आपको कीमत कम करनी पड़ती है। जेफ शोर बड़े मजे से समझाते हैं कि कस्टमर हमेशा दर्द से भागता है और खुशी की तरफ जाता है। आपको बस यह दिखाना है कि आपका प्रोडक्ट उसका कौन सा दर्द दूर कर रहा है। अगर आप किसी को स्वर्ग का रास्ता दिखा रहे हैं, तो वह जूते की कीमत नहीं पूछेगा।
क्लोजिंग के समय हम अक्सर बहुत ज्यादा नर्वस हो जाते हैं। हमें लगता है कि अगर हमने पैसे मांगे तो रिश्ता खराब हो जाएगा। अरे भाई, आप बिजनेस कर रहे हैं, सत्संग नहीं। अगर आपने अपना समय दिया है और कस्टमर की समस्या का समाधान निकाला है, तो पेमेंट मांगना आपका हक है। कई बार सेल्स वाले पूरी रामायण सुना देते हैं लेकिन अंत में यह पूछना भूल जाते हैं कि 'सर, तो फिर आर्डर कब फाइनल करें'। यह वैसा ही है जैसे ९० मिनट तक फुटबॉल मैच खेलना और गोल पोस्ट के सामने आकर गेंद छोड़ देना। फिर आप घर आकर रोते हैं कि किस्मत खराब थी। किस्मत नहीं, आपकी क्लोजिंग स्किल्स खराब थी।
वैल्यू का मतलब सिर्फ पैसा नहीं होता। इसमें समय की बचत, मानसिक शांति और स्टेटस भी आता है। आपको बस कस्टमर की नस पकड़नी है। अगर वह अपनी ईगो के लिए चीजें खरीदता है, तो उसे बताइए कि यह प्रोडक्ट उसे पड़ोसियों से अलग कैसे दिखाएगा। अगर वह डरपोक है, तो उसे सिक्योरिटी का भरोसा दिलाइये। जब आप कस्टमर की भाषा में बात करते हैं, तो उसे लगता है कि आप उसके दुश्मन नहीं बल्कि उसके सबसे बड़े शुभचिंतक हैं। और लोग हमेशा अपनों से ही सामान खरीदना पसंद करते हैं। तो अगली बार जब क्लोजिंग टेबल पर बैठें, तो फीचर्स की लिस्ट घर छोड़ कर आएं और वैल्यू का झंडा गाड़ दें।
लेसन ३ : कंसिस्टेंसी का पावर और सही टाइमिंग का जादू
सेल्स की दुनिया में एक बहुत कड़वा सच है कि ८० परसेंट सेल्स ५वें से १२वें फॉलो अप के बीच होती हैं। लेकिन मजे की बात देखिए कि ४४ परसेंट सेल्स वाले लोग सिर्फ एक बार मना सुनने के बाद ही हार मान लेते हैं। जेफ शोर कहते हैं कि सेल्स कोई स्प्रिंट रेस नहीं है बल्कि यह एक मैराथन है। यहाँ वह नहीं जीतता जो सबसे तेज भागता है बल्कि वह जीतता है जो आखिरी तक मैदान में टिका रहता है। लोग अक्सर इसे 'परेशान करना' समझते हैं लेकिन असल में यह आपकी 'प्रोफेशनलिज्म' को दिखाता है।
मान लीजिए आप किसी लड़की को पसंद करते हैं और उसे कॉफी के लिए पूछते हैं। उसने कहा कि आज वह बिजी है। अब अगर आप अगले ३ साल तक उसे दोबारा कभी नहीं पूछेंगे तो क्या आपको लगता है कि वह खुद चलकर आपके पास आएगी और कहेगी कि चलो अब मैं फ्री हूँ। बिल्कुल नहीं। वह तो आपका नाम तक भूल जाएगी। लेकिन अगर आप सही अंतराल पर उसे याद दिलाते रहेंगे कि आप अभी भी इंटरेस्टेड हैं तो एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब वह फ्री होगी और आपके साथ कॉफी पर जाएगी। सेल्स भी बिल्कुल ऐसी ही है। आपको बस कस्टमर के रडार पर बने रहना है।
कंसिस्टेंसी का मतलब यह नहीं है कि आप हर आधे घंटे में उसे कॉल करके उसका जीना हराम कर दें। इसे जेफ शोर 'वैल्यू एडेड टच पॉइंट्स' कहते हैं। हर बार कॉल करके यह मत पूछिए कि 'सर क्या सोचा'। इसकी जगह उसे कोई काम की जानकारी भेजिए। उसे बताइए कि कैसे आपके किसी दूसरे क्लाइंट ने आपके प्रोडक्ट से फायदा उठाया। जब आप बिना किसी स्वार्थ के कस्टमर की मदद करते हैं तो उसके दिमाग में आपकी एक एक्सपर्ट वाली इमेज बन जाती है। फिर जब भी उसे उस प्रोडक्ट की जरूरत पड़ती है तो उसके दिमाग में सबसे पहला नाम आपका ही आता है।
ज्यादातर लोग फॉलो अप इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें बोरियत होने लगती है। उन्हें लगता है कि एक ही काम बार बार कौन करे। लेकिन दोस्त अमीर बनने का रास्ता अक्सर बोरियत से ही होकर गुजरता है। वही कॉल वही मैसेज और वही प्रेजेंटेशन जब आप हजार बार पूरी शिद्दत से करते हैं तब जाकर आप एक मास्टर क्लोजर बनते हैं। सेल्स में किस्मत सिर्फ उन्हीं का साथ देती है जो हर रिजेक्शन के बाद अपने कपड़े झाड़कर खड़े होते हैं और अगले दरवाजे पर दस्तक देते हैं।
याद रखिए फॉलो अप करना आपकी चॉइस नहीं बल्कि आपकी जिम्मेदारी है। अगर आप बीच में ही छोड़ देते हैं तो आपने उस कस्टमर का जो समय पहले लिया था वह भी बर्बाद हो गया। एक प्रोफेशनल की पहचान यही है कि वह तब तक नहीं रुकता जब तक उसे एक साफ 'हां' या 'ना' नहीं मिल जाती। बीच की जो स्थिति होती है जिसे हम 'कन्फ्यूजन' कहते हैं वह सेल्स का सबसे बड़ा दुश्मन है। अपनी कंसिस्टेंसी से उस कन्फ्यूजन को खत्म कीजिए। जब आप बार बार सामने आते हैं तो कस्टमर को यकीन हो जाता है कि यह बंदा कहीं भागने वाला नहीं है और इस पर भरोसा किया जा सकता है। बस यही भरोसा आपकी डील क्लोज करवाता है।
तो दोस्तों, जेफ शोर की यह किताब हमें सिखाती है कि सेल्स कोई जादू टोना नहीं है बल्कि यह सही माइंडसेट और लगातार मेहनत का नतीजा है। फॉलो अप करना छोड़िए मत और वैल्यू देने से पीछे हटिए मत। अगर आप आज से ही अपने फॉलो अप करने के तरीके को बदल लेते हैं तो यकीन मानिए साल के अंत तक आपका बैंक बैलेंस और आपका कॉन्फिडेंस दोनों सातवें आसमान पर होंगे।
अब आपकी बारी है। नीचे कमेंट में बताइए कि आप एक सेल क्लोज करने के लिए ज्यादा से ज्यादा कितने फॉलो अप करते हैं। क्या आप उन ४४ परसेंट लोगों में से हैं जो एक बार में हार मान लेते हैं या आप उस विनर टीम में हैं जो अंत तक डटी रहती है। इस आर्टिकल को अपने उस सेल्स वाले दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो रिजेक्शन से डरता है।
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