Keep Your Customers (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो नए कस्टमर ढूंढने में अपनी पूरी किडनी बेचने को तैयार हैं पर जो पुराने कस्टमर आपके भरोसे पर आए थे उन्हें आप कचरा समझकर भूल चुके हैं। मुबारक हो आप अपने बिजनेस को धीरे धीरे शमशान की ओर ले जा रहे हैं जहाँ सिर्फ सन्नाटा और घाटा होगा।

अली कडबी की शानदार किताब कीप योर कस्टमर्स हमें सिखाती है कि कैसे अपनी ईगो को साइड में रखकर उन लोगों की कद्र करें जो आपकी जेब भर रहे हैं वरना कॉम्पिटिशन आपको कच्चा चबा जाएगा। आइए जानते हैं वह ३ लेसन जो आपके डूबते बिजनेस को बचा सकते हैं।


लेसन १ : कस्टमर एक्सपीरियंस ही असली भगवान है

ज्यादातर बिजनेस मालिक इस गलतफहमी में जीते हैं कि उन्होंने एक बार बढ़िया प्रोडक्ट बना दिया तो अब दुनिया उनके कदमों में गिर जाएगी। भाई साहब यह आपकी कोई पुरानी बॉलीवुड फिल्म नहीं है जहाँ हीरो ने एक बार डायलॉग मारा और विलेन का दिल पिघल गया। असल दुनिया में आपका प्रोडक्ट सिर्फ एक चाबी है पर उस चाबी से जो दरवाजा खुलता है उसे कहते हैं कस्टमर एक्सपीरियंस। अली कडबी अपनी किताब कीप योर कस्टमर्स में बहुत साफ शब्दों में कहती हैं कि अगर आपका कस्टमर आपके साथ डील करते वक्त खुद को किसी सरकारी दफ्तर के धक्के खाता हुआ इंसान महसूस कर रहा है तो समझ लीजिए कि वह अपनी विदाई की तैयारी कर चुका है।

मान लीजिए आप एक बहुत महंगे रेस्टोरेंट में जाते हैं क्योंकि आपने सुना है कि वहां का पनीर बटर मसाला एकदम जन्नत जैसा है। आप पूरे उत्साह के साथ वहां पहुँचते हैं और देखते हैं कि वेटर आपको ऐसे घूर रहा है जैसे आपने उसकी जायदाद अपने नाम करवा ली हो। आप टेबल पर बैठते हैं जो चिपचिपी है और आपको पानी के लिए भी पंद्रह मिनट इंतज़ार करना पड़ता है। अंत में जब खाना आता है तो वह वाकई में बहुत स्वादिष्ट होता है। अब खुद से एक सवाल पूछिए। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे। बिल्कुल नहीं। क्यों। क्योंकि उस पनीर के टुकड़े ने आपकी भूख तो मिटा दी पर उस वेटर के एटीट्यूड और वहां की गंदगी ने आपके मूड का कबाड़ा कर दिया। यही वह पॉइंट है जहाँ बिजनेस फेल हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि खाना अच्छा था तो कस्टमर तो वापस आएगा ही। पर सच तो यह है कि कस्टमर अब उस पड़ोस वाले ढाबे पर जाएगा जहाँ खाना भले ही एवरेज हो पर वहां का मालिक उसे देखते ही मुस्कुराकर राम राम कहता है।

बिजनेस में एक्सपीरियंस का मतलब है कस्टमर के साथ होने वाली हर छोटी बातचीत। चाहे वह आपके सेल्स वाले बंदे का बात करने का तरीका हो या आपकी वेबसाइट का लोडिंग टाइम। अली कडबी कहती हैं कि आपको अपने कस्टमर की जर्नी के हर मोड़ पर गुलाब के फूल बिछाने होंगे वरना वह कांटों से डरकर किसी और के बगीचे में चला जाएगा। लोग अक्सर भूल जाते हैं कि कस्टमर कोई एटीएम मशीन नहीं है जिसमें से जब चाहे पैसे निकाल लिए। वह एक जीता जागता इंसान है जिसे इज्जत और आसानी पसंद है। अगर आप उसे यह महसूस करा पाए कि वह स्पेशल है तो वह न केवल खुद वापस आएगा बल्कि चार और लोगों को कान पकड़कर आपके पास लाएगा।

आजकल के दौर में जहाँ हर चीज ऑनलाइन बिक रही है वहां एक्सपीरियंस ही एकमात्र ऐसी चीज है जो आपको अमेज़न या फ्लिपकार्ट जैसे दिग्गजों से अलग खड़ा कर सकती है। अगर आप एक छोटी दुकान चलाते हैं और आपका कस्टमर आपसे बात करके खुश होता है तो वह दो रुपये महंगा सामान भी आपसे ही खरीदेगा। इसे ही हम इमोशनल कनेक्ट कहते हैं। लेकिन अगर आपकी सर्विस ऐसी है कि कस्टमर को अपनी समस्या बताने के लिए दस बार फोन करना पड़े और हर बार उसे एक ही बात दोहरानी पड़े तो यकीन मानिए आप उसे खुद जहर पिला रहे हैं। अली कडबी का यह पहला लेसन बहुत गहरा है। अपने प्रोडक्ट की पूजा करना बंद कीजिए और अपने कस्टमर के उस सफर को बेहतर बनाइए जो वह आपके साथ तय करता है। जब तक आप उसे राजा जैसा महसूस नहीं कराएंगे तब तक वह आपको अपना कीमती पैसा टैक्स की तरह नहीं बल्कि तोहफे की तरह कभी नहीं देगा।


लेसन २ : पुराने कस्टमर्स को संभालना नए ढूंढने से कहीं ज्यादा सस्ता है

बिजनेस की दुनिया में एक बहुत बड़ा मानसिक रोग फैला हुआ है जिसे मैं नया नया सिंड्रोम कहता हूँ। हर दूसरे स्टार्टअप और पुराने लाला जी को बस नए कस्टमर्स की प्यास लगी रहती है। उन्हें लगता है कि जितने ज्यादा नए लोग जुड़ेंगे उतना ज्यादा पैसा बरसेगा। पर भाई साहब यह सोच वैसी ही है जैसे आप एक ऐसी बाल्टी में पानी भर रहे हों जिसमें नीचे बड़े बड़े छेद हों। आप ऊपर से नए कस्टमर्स का नल तो फुल स्पीड में खोल देते हैं पर पुराने कस्टमर्स उन छेदों से चुपचाप बाहर निकल रहे होते हैं। अली कडबी यहाँ हमें एक बहुत कड़वी हकीकत बताती हैं कि एक नए कस्टमर को पटाने में जो खर्चा आता है वह पुराने कस्टमर को रोक कर रखने के खर्चे से पांच से सात गुना ज्यादा होता है। अब आप खुद सोचिए कि आप समझदार बिजनेसमैन हैं या बस मार्केटिंग की आग में नोट जला रहे हैं।

आप किसी मोबाइल नेटवर्क कंपनी को ही ले लीजिए। जब आप नए कस्टमर होते हैं तो आपको डिस्काउंट भी मिलता है और कस्टमर केयर वाले भी आपकी ऐसे सेवा करते हैं जैसे आप उनके दामाद हों। लेकिन जैसे ही आप पुराने हो जाते हैं और आपके नेटवर्क में दिक्कत आती है तो वही कंपनी आपको ऐसे इग्नोर करती है जैसे ब्रेकअप के बाद एक्स करती है। नतीजा क्या होता है। आप अपनी सिम पोर्ट करा लेते हैं। अब उस कंपनी को आपको वापस लाने के लिए या आपकी जगह नया कस्टमर लाने के लिए फिर से करोड़ों के विज्ञापन देने पड़ेंगे। अगर उन्होंने सिर्फ आपके एक फोन पर सही से बात कर ली होती और आपकी समस्या सुलझा दी होती तो उनका वह करोड़ों का खर्चा बच जाता। अली कडबी कहती हैं कि जो कस्टमर आपके पास पहले से है वह आपका सबसे बड़ा एसेट है क्योंकि उसका भरोसा आप जीत चुके हैं। उसे दोबारा कुछ बेचने के लिए आपको उसे यह साबित नहीं करना पड़ेगा कि आप चोर नहीं हैं।

ज्यादातर लोग लॉयल्टी का मतलब समझते हैं डिस्काउंट कूपन देना। नहीं भाई साहब। लॉयल्टी कूपन से नहीं कद्र से आती है। अगर आपके रेगुलर कस्टमर को यह महसूस हो जाए कि उसकी वफादारी की आपको कोई वैल्यू नहीं है तो वह तुरंत दूसरी दुकान पकड़ लेगा। पुराने कस्टमर्स के साथ रिश्ता बनाना एक निवेश की तरह है। जब आप अपने पुराने ग्राहकों का ख्याल रखते हैं तो वे आपके ब्रांड एम्बेसेडर बन जाते हैं। वे फ्री में आपकी मार्केटिंग करते हैं और वह भी ऐसी मार्केटिंग जिस पर लोग यकीन करते हैं। विज्ञापन पर खर्च किया गया पैसा सिर्फ ध्यान खींचता है पर एक खुश कस्टमर का रिव्यू भरोसा पैदा करता है।

अगर आप आज भी सिर्फ नए ग्राहकों के पीछे भाग रहे हैं और पुराने लोगों के फोन उठाना बंद कर चुके हैं तो आप अपनी कब्र खुद खोद रहे हैं। अली कडबी का यह लेसन हमें याद दिलाता है कि बिजनेस प्रॉफिट से नहीं बल्कि उन लोगों से चलता है जो बार बार आपकी दुकान का दरवाजा खटखटाते हैं। नए लोग तो बस भीड़ बढ़ाते हैं पर पुराने लोग ही आपका साम्राज्य खड़ा करते हैं। इसलिए अपनी मार्केटिंग टीम को थोड़ा आराम दीजिए और अपनी सपोर्ट टीम को जरा टाइट कीजिए। क्योंकि अगर पुरानी बाल्टी के छेद बंद नहीं किए तो आप चाहे समंदर भी उसमें उड़ेल दें बाल्टी हमेशा खाली ही रहेगी।


लेसन ३ : कस्टमर छोड़कर क्यों जा रहा है उस सच का सामना कीजिए

ज्यादातर बिजनेसमैन की सबसे बड़ी कमजोरी यह होती है कि वे आलोचना सुनना पसंद नहीं करते। अगर कोई कस्टमर शिकायत करता है तो उसे ऐसे देखते हैं जैसे उसने उनकी खानदानी जायदाद मांग ली हो। अली कडबी कहती हैं कि जब कोई कस्टमर आपको छोड़कर जाता है तो वह आपको एक बहुत बड़ा मौका देकर जाता है अपनी गलती सुधारने का। लेकिन हम क्या करते हैं। हम ईगो में आकर कहते हैं कि एक गया तो क्या हुआ हजार और आएंगे। भाई साहब यही एटीट्यूड आपके बिजनेस का दीवाला निकाल देगा। कस्टमर टर्नओवर यानी ग्राहकों का टूटकर जाना कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि एक सिग्नल है कि आपके सिस्टम में कहीं कोई बहुत बड़ी खराबी है जिसे आप नजरअंदाज कर रहे हैं।

एक किस्सा सुनिए। एक साहब की कपड़े की दुकान थी। उनके पास एक बहुत पुराना ग्राहक आता था जो हर महीने हजारों की शॉपिंग करता था। अचानक उसने आना बंद कर दिया। दुकान के मालिक को लगा कि शायद वह शहर छोड़कर चला गया होगा। छह महीने बाद वह ग्राहक उन्हें बाजार में मिला तो मालिक ने तंज कसते हुए पूछा कि अब आप हमें भूल गए क्या। ग्राहक ने बहुत शांति से जवाब दिया कि भाई साहब पिछली बार जो शर्ट मैंने ली थी उसका बटन पहले ही दिन टूट गया था और जब मैं उसे ठीक कराने आया तो आपके लड़के ने मुझसे ऐसे बात की जैसे मैं भीख मांग रहा हूँ। अब सोचिए एक पांच रुपये के बटन और एक बदतमीज सेल्समैन की वजह से उस दुकान ने लाखों का टर्नओवर खो दिया। अगर मालिक ने उसी वक्त फीडबैक लिया होता या उस ग्राहक के जाने का कारण पूछा होता तो शायद वह नुकसान नहीं होता। अली कडबी का कहना है कि टर्नओवर को रोकने का पहला कदम है उस कड़वे सच को स्वीकार करना कि आप परफेक्ट नहीं हैं।

बिजनेस में डेटा से ज्यादा जज्बात मायने रखते हैं। आपको यह पता होना चाहिए कि आपके कस्टमर के मन में क्या चल रहा है। क्या उसे आपकी सर्विस महंगी लग रही है। क्या आपका व्यवहार बदल गया है। या फिर आपका कॉम्पिटिटर उसे कुछ ऐसा दे रहा है जो आप नहीं दे पा रहे। अली कडबी यहाँ सुझाव देती हैं कि अपनी गलतियों को पहचानने के लिए जासूस बनने की जरूरत नहीं है बस अपने ग्राहकों से बात करने की जरूरत है। एक छोटा सा फीडबैक फॉर्म या एक पर्सनल फोन कॉल भी कमाल कर सकता है। जब आप किसी दुखी कस्टमर को फोन करके उसकी समस्या सुनते हैं तो आप उसे यह अहसास दिलाते हैं कि वह आपके लिए सिर्फ एक नंबर नहीं है। यही वह पॉइंट है जहाँ से आप उसे वापस अपनी तरफ खींच सकते हैं।

जो कस्टमर शिकायत कर रहा है वह अभी भी आपसे प्यार करता है और चाहता है कि आप सुधर जाएं। असली खतरा उस खामोश कस्टमर से है जो बिना कुछ कहे दुकान बदल लेता है। वह साइलेंट किलर की तरह होता है। अली कडबी की यह पूरी किताब हमें यही सिखाती है कि नए शिकार खोजने से बेहतर है कि अपने पुराने रिश्तों की नींव को मजबूत करें। अगर आप अपने ग्राहकों को रोकने में कामयाब हो गए तो आपकी सफलता को कोई नहीं रोक पाएगा। बिजनेस सिर्फ मुनाफे का खेल नहीं है यह लोगों के दिल में जगह बनाने की कला है। अगर आपने उनका दिल जीत लिया तो उनकी जेब की चाबी हमेशा आपके पास ही रहेगी।


अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बिजनेस सिर्फ एक ट्रांजेक्शन न बनकर एक मजबूत कम्युनिटी बने तो आज ही अपने सबसे पुराने १० ग्राहकों को फोन कीजिए और उनसे पूछिए कि आप और बेहतर क्या कर सकते हैं। यकीन मानिए यह एक छोटा सा कदम आपके प्रॉफिट में चार चाँद लगा देगा। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अपनी दुकान पर ग्राहकों के इंतजार में खाली बैठे रहते हैं।

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