Future Focus (Hindi)


अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो हर चमकती हुई चीज के पीछे भागते हैं और सोचते हैं कि सब कुछ बेचकर अमीर बन जाएंगे तो मुबारक हो आप बहुत जल्दी सड़क पर आने वाले हैं। मार्केट बदल चुका है और आपकी पुरानी घिसी पिटी स्ट्रेटेजी अब कचरे के डिब्बे में जाने के लायक ही बची है।

क्या आप जानते हैं कि दुनिया की 21 सबसे सफल कंपनियां भविष्य को कैसे देख रही हैं और आप अपनी पुरानी सोच की वजह से क्या खो रहे हैं। चलिए आज अल रीस की इस शानदार किताब से वह 3 सीक्रेट लेसन्स समझते हैं जो आपके डूबते हुए बिजनेस या करियर को बचा सकते हैं।


Lesson : फोकस को नैरो करना ही असली पावर है

क्या आपको वह पड़ोस वाली दुकान याद है जो समोसे भी बेचती है, मोबाइल रिचार्ज भी करती है, फोटोकॉपी भी निकालती है और कभी कभी तो पंडित जी बनकर कुंडली भी देख लेती है। सुनने में तो बड़ा आल राउंडर लगता है ना। लेकिन क्या आपने कभी वहां से दुनिया का सबसे बेस्ट समोसा खाया है। जवाब है बिलकुल नहीं। अल रीस अपनी किताब फ्यूचर फोकस में सबसे पहला और सबसे कड़वा सच यही बताते हैं कि जो कंपनी सब कुछ बनने की कोशिश करती है वह असल में कुछ भी नहीं बन पाती।

आज के इस 21वी सदी वाले दौर में अगर आप सोच रहे हैं कि आप अपनी दुकान या ब्रांड पर हर एक चीज सजा देंगे तो आप कस्टमर के दिमाग में सिर्फ एक कचरा पेटी बन रहे हैं। लोग ब्रांड्स के पास तब जाते हैं जब उन्हें किसी एक खास चीज में एक्सपर्ट की तलाश होती है। अगर मुझे सर में दर्द है तो मैं स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास जाऊंगा ना कि उस झोलाछाप के पास जो भैंस का इलाज भी करता है और इंसान का भी। फोकस को नैरो करने का मतलब है अपनी बाउंड्री छोटी करना ताकि आपकी ताकत बढ़ सके।

मान लीजिए आप एक नई टेक कंपनी शुरू करते हैं। अब आप जोश में आकर कहते हैं कि हम तो लैपटॉप भी बनाएंगे, फोन भी बेचेंगे, सॉफ्टवेयर भी देंगे और साथ में चाय पत्ती का बिजनेस भी करेंगे। बधाई हो। आपने अपने डूबने का इंतजाम खुद ही कर लिया है। अल रीस कहते हैं कि जब आप अपना फोकस फैलाते हैं तो आपकी ब्रांड वैल्यू पतली दाल जैसी हो जाती है जिसमें पनीर के टुकड़े ढूंढना मुश्किल होता है।

सफलता का असली राज यह नहीं है कि आप क्या क्या कर सकते हैं बल्कि इसमें है कि आप क्या क्या नहीं करेंगे। एक सफल कंपनी वह है जो डंके की चोट पर कहती है कि हम सिर्फ यह एक काम करते हैं और हमसे बेहतर यह कोई नहीं कर सकता। जब आप अपना फोकस छोटा करते हैं तो आप मार्केट के उस छोटे हिस्से के राजा बन जाते हैं। जैसे स्टारबक्स ने सिर्फ कॉफी पर फोकस किया। उन्होंने यह नहीं सोचा कि चलो साथ में छोले भटूरे भी बेचना शुरू कर देते हैं वरना कस्टमर भाग जाएगा।

लेकिन आज के हमारे देसी स्टार्टअप्स को लगता है कि जितना ज्यादा सामान उतना ज्यादा पैसा। भाई साहब यह किराने की दुकान नहीं है जहां नमक से लेकर झाड़ू तक सब रखना जरूरी है। यह ब्रांड बिल्डिंग का गेम है। अगर आप खुद को हर जगह फिट करने की कोशिश करेंगे तो आप कहीं के नहीं रहेंगे। फोकस को छोटा करना रिस्क नहीं है बल्कि यह सबसे बड़ी सिक्योरिटी है। जब आपका नाम किसी एक खास चीज के साथ जुड़ जाता है तो लोग आपको ढूंढते हुए आते हैं।

तो क्या आप तैयार हैं अपने उस लालच को छोड़ने के लिए जो आपको हर गली में टांग अड़ाने को मजबूर करता है। याद रखिए फोकस जितना शार्प होगा आपकी कामयाबी का रास्ता उतना ही साफ होगा। अगर आप अभी भी सोच रहे हैं कि वैरायटी ही लाइफ का असली मजा है तो शायद आप अपनी बर्बादी की वैरायटी तैयार कर रहे हैं।


Lesson : पुरानी भीड़ छोड़ो अपनी नई कैटेगरी बनाओ

क्या आपने कभी उस बेचारे दूल्हे को देखा है जो अपनी ही शादी में पंद्रह दोस्तों के साथ बिल्कुल एक जैसा शेरवानी पहनकर खड़ा होता है। कोई पहचान ही नहीं पाता कि असली शिकार कौन है। बिजनेस की दुनिया में भी यही हाल है। अगर आप वही कर रहे हैं जो बाकी सब कर रहे हैं तो आप सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा हैं जिसका कोई चेहरा नहीं है। अल रीस अपनी किताब फ्यूचर फोकस में एक बहुत ही कड़वा लेकिन जरूरी सच बताते हैं। वह कहते हैं कि अगर आप नंबर वन नहीं बन सकते तो अपनी एक नई कैटेगरी बना लो जहां आप इकलौते राजा हों।

आजकल के जोश से भरे एंटरप्रेन्योर्स को लगता है कि मार्केट में जो चीज चल रही है बस उसमें कूद जाओ। अगर शर्मा जी का बेटा मोमोज की दुकान खोलकर पैसे छाप रहा है तो हम भी मोमोज की दुकान खोलेंगे। भाई साहब शर्मा जी के पास पहले से कस्टमर हैं। आप वहां जाकर सिर्फ उनके बचे हुए टुकड़े बटोरेंगे। असली खेल तो तब होता है जब आप कुछ ऐसा पेश करें जो पहले था ही नहीं। इसे ही कहते हैं कैटेगरी क्रिएशन।

मान लीजिए आप एक नई कोल्ड ड्रिंक लॉन्च करते हैं। अब अगर आप उसे कोका कोला या पेप्सी से बेहतर बताने की कोशिश करेंगे तो आप दुनिया के सबसे बड़े बेवकूफ हैं। क्यों। क्योंकि उन दिग्गजों के पास अरबों डॉलर का बजट है और सालों का भरोसा। आप उनसे लड़कर कभी नहीं जीत सकते। लेकिन अगर आप कहें कि मेरी ड्रिंक कोल्ड ड्रिंक नहीं है बल्कि यह तो दिमाग को शांत करने वाली रिलैक्सेशन ड्रिंक है। तो बधाई हो। आपने एक नई कैटेगरी बना ली है। अब आप कोका कोला के दुश्मन नहीं बल्कि अपनी कैटेगरी के भगवान हैं।

अल रीस समझाते हैं कि इंसानी दिमाग बहुत आलसी होता है। वह हर कैटेगरी के लिए सिर्फ एक या दो नाम याद रख सकता है। टूथपेस्ट मतलब कोलगेट। नूडल्स मतलब मैगी। अब अगर आप मैगी से बेहतर नूडल्स बनाने का दावा करेंगे तो लोग कहेंगे कि रहने दो भाई मैगी ही ठीक है। लेकिन अगर आप कहें कि हम तो आटा नूडल्स लाए हैं जो हेल्दी हैं तो लोग आपकी बात सुनेंगे क्योंकि आपने एक नया रास्ता खोल दिया है।

अक्सर हमें सिखाया जाता है कि बेहतर बनो। लेकिन फ्यूचर फोकस कहता है कि बेहतर मत बनो अलग बनो। जब आप अलग होते हैं तो कॉम्पिटिशन खुद ब खुद खत्म हो जाता है। आप किसी से लड़ नहीं रहे होते बल्कि आप अपना खुद का साम्राज्य बना रहे होते हैं। हमारे यहाँ इंडिया में लोग कॉपी पेस्ट करने में माहिर हैं। किसी ने ई कॉमर्स वेबसाइट बनाई तो दस लोग और वही बनाने लगे। किसी ने एड टेक शुरू किया तो पूरी लाइन लग गई। नतीजा क्या हुआ। सब एक दूसरे का गला काट रहे हैं और प्रॉफिट के नाम पर सिर्फ जीरो बचा है।

सच्चाई तो यह है कि दुनिया को एक और बेहतर बर्गर या एक और बेहतर फोन नहीं चाहिए। दुनिया को वह चाहिए जो उनकी किसी खास जरूरत को एक अलग नजरिए से पूरा करे। अगर आप अपनी पुरानी घिसी पिटी सोच के साथ मार्केट में उतरेंगे तो आप बस एक और गुमनाम नाम बनकर रह जाएंगे। क्या आप तैयार हैं उस भीड़ से बाहर निकलने के लिए जो एक ही कुएं में गिर रही है। अपनी खुद की कैटेगरी बनाइए वरना दूसरों की बनाई हुई कैटेगरी में आप सिर्फ एक मजदूर बनकर रह जाएंगे।


Lesson : कुएं के मेंढक मत बनो ग्लोबल सोचो

क्या आपने कभी उस लोकल हलवाई को देखा है जिसकी दुकान पर भीड़ तो बहुत होती है, लेकिन बेचारा पूरी जिंदगी उसी एक गंदी गली में कड़ाही चलाकर गुजार देता है। क्यों। क्योंकि उसे लगता है कि उसके मोहल्ले के बाहर दुनिया खत्म हो जाती है। अल रीस अपनी किताब फ्यूचर फोकस में साफ कहते हैं कि 21वी सदी में अगर आपका ब्रांड सिर्फ लोकल है, तो समझो आपका डेथ वारंट साइन हो चुका है। आज इंटरनेट का जमाना है बॉस, और अगर आप अपनी पहुंच को ग्लोबल लेवल पर नहीं ले जा रहे, तो आप अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं।

पुराने जमाने में लोग सोचते थे कि पहले शहर जीतेंगे, फिर राज्य और फिर देश। लेकिन आज की दुनिया में एक क्लिक पर आपका प्रोडक्ट न्यूयॉर्क से लेकर नैरोबी तक पहुंच सकता है। अल रीस समझाते हैं कि ग्लोबल होने का मतलब यह नहीं कि आप हर देश में अपनी दुकान खोलें। इसका मतलब है कि आपके ब्रांड का नाम और उसकी पहचान ग्लोबल होनी चाहिए। अगर आप एक छोटा सा सॉफ्टवेयर भी बना रहे हैं, तो उसे सिर्फ अपने गांव के लिए मत बनाइए। उसे ऐसे डिजाइन कीजिए कि दुनिया का हर इंसान उसे इस्तेमाल करना चाहे।

मान लीजिए आप एक योगा मैट बेचते हैं। अब आप एड्स चला रहे हैं सिर्फ अपने पड़ोस के पार्क के पास। वहीं दूसरी तरफ एक लड़का है जो बेंगलुरु में बैठकर अपने मैट को दुनिया का सबसे ऑथेंटिक इंडियन योगा एक्सपीरियंस बताकर अमेरिका में बेच रहा है। अब आप बताइए, किसका बिजनेस लंबे समय तक टिकेगा। अल रीस कहते हैं कि जब आप ग्लोबल सोचते हैं, तो आपकी ब्रांड वैल्यू दस गुना बढ़ जाती है। लोग उस चीज के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार होते हैं जिसकी पहचान इंटरनेशनल हो।

लेकिन हमारे यहाँ बहुत से लोग अपनी उसी पुरानी सोच में अटके हुए हैं। उन्हें लगता है कि इंडिया का मार्केट इतना बड़ा है कि बाहर जाने की क्या जरूरत है। भाई साहब, अगर आप बाहर नहीं जाएंगे, तो बाहर वाले यहाँ आकर आपका मार्केट खा जाएंगे। अमेज़न और नेटफ्लिक्स इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने कभी नहीं सोचा कि हम सिर्फ अमेरिका में रहेंगे। उन्होंने पूरी दुनिया को अपना घर बनाया। अगर आप ग्लोबल लेवल पर नहीं खेलेंगे, तो आप अपने ही घर में किसी विदेशी कंपनी के सेल्समैन बनकर रह जाएंगे।

ग्लोबल थिंकिंग का मतलब यह भी है कि आप अपनी क्वालिटी और मार्केटिंग को वर्ल्ड क्लास बनाएं। अगर आप वही काम चलाऊ रवैया रखेंगे कि चलो थोड़ा जुगाड़ कर लेते हैं, तो आप कभी बड़े खिलाड़ी नहीं बन पाएंगे। अल रीस की यह किताब हमें याद दिलाती है कि 21वी सदी में बाउंड्री सिर्फ नक्शों पर होती हैं, दिमाग में नहीं। अगर आपका विजन बड़ा है, तो पूरी दुनिया आपकी मार्केट है।


तो दोस्तों, अल रीस की यह बातें सुनकर क्या आपको भी लगा कि आप अब तक कितनी छोटी सोच लेकर चल रहे थे। क्या आप अब भी वही सब कुछ बेचने वाले जनरल स्टोर बनना चाहते हैं, या फिर अपनी एक नई कैटेगरी बनाकर दुनिया पर राज करना चाहते हैं।

याद रखिए, भविष्य उन्हीं का है जो आज बदलने की हिम्मत रखते हैं। अगर आप अभी नहीं बदले, तो कल इतिहास के पन्नों में एक और नाकाम स्टार्टअप का नाम बनकर रह जाएंगे। उठिए, अपना फोकस नैरो कीजिए, अपनी नई कैटेगरी बनाइए और पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने के लिए निकल पड़िए। आज ही फैसला कीजिए कि आप एक भीड़ का हिस्सा बनेंगे या खुद एक मिसाल।

कमेंट में बताइए कि आप इन 3 लेसन्स में से सबसे पहले किसे अपनी लाइफ में अपनाएंगे। और हां, अगर आपको अपनी कामयाबी प्यारी है, तो इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो अभी भी नींद में सो रहे हैं।

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