क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो रिसेशन का रोना रोकर खाली बैठे हैं और अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। मुबारक हो क्योंकि आपकी बोरियत और बेरोजगारी का असली कारण बाहर की मार्केट नहीं बल्कि आपका पुराना और घिसा पिटा एप्रोच है जो अब काम नहीं करता।
इस आर्टिकल में हम फोर्ड आर मायर्स की बुक से वे राज खोलेंगे जो आपको भीड़ से अलग खड़ा कर देंगे। हम उन ३ लेसन पर बात करेंगे जो आपके करियर की गाड़ी को टॉप गियर में डाल देंगे और आपको आपकी मनचाही नौकरी दिलवाएंगे।
लेसन १ : पैसिव कैंडिडेट बनना छोड़ें और शिकार पर निकलें
आजकल के ज्यादातर लोग नौकरी कैसे ढूंढते हैं। सुबह सोकर उठते हैं और चाय की चुस्की के साथ उन एप्स को चेक करते हैं जहां हजारों लोग पहले से ही लाइन में लगे हैं। वे किसी कंपनी के एचआर के ईमेल का ऐसे इंतजार करते हैं जैसे कोई मजनू अपनी लैला के खत का करता है। फोर्ड आर मायर्स कहते हैं कि अगर आप सिर्फ जॉब पोर्टल के भरोसे बैठे हैं तो आप असल में नौकरी नहीं ढूंढ रहे बल्कि अपनी हार का इंतजार कर रहे हैं।
मार्केट में ८० परसेंट नौकरियां तो कभी पब्लिक होती ही नहीं। वे छिपी हुई होती हैं। आप उस शिकारी की तरह बन चुके हैं जो शेर के अपने आप गुफा में आने का इंतजार कर रहा है। भाई साहब शेर तो दूर की बात है चूहा भी खुद चलकर नहीं आएगा।
मान लीजिए मेरा एक दोस्त है चिंटू। चिंटू ने इंजीनियरिंग की और पिछले छह महीने से रिज्यूमे भेज रहा है। वह कहता है कि मार्केट बहुत खराब है और कोई रिस्पांस नहीं आता। चिंटू को लगता है कि रिज्यूमे भेजना एक फुल टाइम जॉब है। लेकिन असलियत यह है कि चिंटू जैसे लाखों चिंटू मार्केट में घूम रहे हैं।
लेखक कहते हैं कि आपको पैसिव से एक्टिव बनना होगा। एक्टिव होने का मतलब है उस दरवाजे को खटखटाना जहां बोर्ड नहीं लगा है। आपको यह नहीं पूछना कि क्या आपके पास वैकेंसी है। आपको यह बताना है कि आप उनकी कंपनी की कौन सी बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व कर सकते हैं।
जब आप यह एप्रोच रखते हैं तो आप एक भिखारी नहीं बल्कि एक सॉल्यूशन प्रोवाइडर बन जाते हैं। कंपनियों को उन लोगों की तलाश नहीं है जो काम मांगते हैं बल्कि उनकी तलाश है जो काम करना जानते हैं। अगर आप अभी भी वही पुराना घिसा पिटा एप्रोच लगा रहे हैं तो यकीन मानिए आप अपनी बेरोजगारी का सेलिब्रेशन मना रहे हैं।
इस लेसन का सीधा सा मतलब है कि अपनी चप्पलें घिसना बंद करें और अपने दिमाग का सही इस्तेमाल करके उन लोगों तक पहुंचें जो फैसले लेते हैं। याद रखिए कि नौकरी मांगने से नहीं बल्कि अपनी वैल्यू दिखाने से मिलती है। जब आप मार्केट में अपनी काबिलियत का शोर मचाते हैं तो नौकरियां खुद आपको ढूंढते हुए आती हैं। अब यह आप पर है कि आप शिकार बनेंगे या शिकारी।
लेसन २ : खुद को एक प्रोडक्ट की तरह बेचें और ब्रांड बनें
ज्यादातर लोग जब इंटरव्यू के लिए जाते हैं तो ऐसे चेहरा बनाकर बैठते हैं जैसे वे कंपनी पर अहसान करने आए हों या फिर बिल्कुल ही डरे हुए होते हैं। वे अपनी स्किल्स को एक लिस्ट की तरह बताते हैं जैसे राशन की पर्ची हो। फोर्ड आर मायर्स कहते हैं कि आप सिर्फ एक एम्प्लॉई नहीं हैं बल्कि आप खुद एक बिजनेस हैं।
अगर आप खुद को एक प्रीमियम प्रोडक्ट की तरह पेश नहीं कर सकते तो कंपनी आपको सेल वाली कीमत पर भी नहीं खरीदेगी। अपनी मार्केटिंग खुद करना सीखिए क्योंकि अगर आप चुप रहेंगे तो दुनिया आपको कचरे के भाव समझेगी। आपको अपनी एक ऐसी प्रोफेशनल पहचान बनानी होगी जिसे देखकर सामने वाला बोले कि भाई बंदे में दम है।
राहुल नाम का एक लड़का है जो खुद को बहुत बड़ा ग्राफिक डिजाइनर समझता है। लेकिन जब कोई उससे पोर्टफोलियो मांगता है तो वह अपने मोबाइल की गैलरी दिखाने लगता है। राहुल को लगता है कि उसकी सादगी ही उसकी खूबसूरती है। लेकिन भाई साहब ये कोई शादी का रिश्ता नहीं है जहां आपकी सादगी काम आएगी।
ये कॉर्पोरेट वर्ल्ड है। यहाँ अगर आपकी पैकिंग अच्छी नहीं है तो अंदर का माल कितना भी सोना हो कोई उसे हाथ नहीं लगाएगा। आपको अपना एक इन्वेंटरी ऑफ एसेट्स तैयार करना चाहिए। इसका मतलब है कि आपके पास आपकी हर बड़ी जीत और प्रोजेक्ट का पक्का सबूत होना चाहिए।
जब आप इंटरव्यू में बैठते हैं तो अपनी कहानी सुनाएं। अपनी जीत का ढिंढोरा ऐसे पीटें कि सामने वाले को लगे कि अगर इसने हमारी कंपनी जॉइन नहीं की तो हमारा करोड़ों का नुकसान हो जाएगा। अपनी वैल्यू को नंबर्स में बताना सीखें। ये मत कहें कि मैंने बहुत मेहनत की। ये कहें कि मैंने कंपनी का खर्चा २० परसेंट कम कर दिया।
जैसे ही आप डेटा और कॉन्फिडेंस का तड़का लगाते हैं आप एक आम कैंडिडेट से खास ब्रांड बन जाते हैं। याद रखिए कि दुनिया उसी को सलाम करती है जो अपनी चमक खुद बिखेरता है। अगर आप खुद को सस्ते में बेचेंगे तो दुनिया आपको डिस्काउंट पर ही खरीदेगी। अपनी कीमत खुद तय करें और फिर देखें कि कैसे बड़ी बड़ी कंपनियां आपके पीछे लाइन लगाती हैं।
लेसन ३ : नेटवर्किंग का असली खेल समझें और रिश्ते भुनाएं
जब भी लोग नेटवर्किंग शब्द सुनते हैं तो उन्हें लगता है कि किसी पार्टी में जाकर जबरदस्ती लोगों से हाथ मिलाना है। फोर्ड आर मायर्स कहते हैं कि नेटवर्किंग कोई चापलूसी नहीं बल्कि एक स्ट्रेटजी है। अगर आप सिर्फ फॉर्म भरने और कॉल आने का इंतजार कर रहे हैं तो आप उस इंसान की तरह हैं जो रेगिस्तान में बारिश की उम्मीद कर रहा है। असल में दुनिया में सबसे अच्छी नौकरियां जान पहचान और भरोसे के दम पर मिलती हैं। आपके पास कितनी डिग्रियां हैं ये बाद की बात है लेकिन आपको कौन जानता है और वो आपके बारे में क्या सोचता है ये सबसे ज्यादा मायने रखता है।
हमारे शर्मा जी का लड़का पप्पू बहुत होशियार है। उसने सारी रात जागकर पढ़ाई की और टॉप किया। लेकिन जब जॉब की बारी आई तो वह अपने कमरे में बंद होकर ऑनलाइन अप्लाई करने लगा। उधर दूसरी तरफ गोलू है जिसने पढ़ाई तो कम की लेकिन उसके पास हर फील्ड के लोगों के फोन नंबर हैं। गोलू ने सिर्फ दो फोन किए और एक हफ्ते में इंटरव्यू सेट कर लिया। पप्पू अब भी अपनी डिग्रियां लेकर कीबोर्ड पर उंगलियां घिस रहा है। गोलू को लोग स्मार्ट कहते हैं और पप्पू को लगता है कि दुनिया जालिम है। सच तो ये है कि गोलू ने रिश्तों की खेती की थी जिसका फल उसे अब मिल रहा है।
नेटवर्किंग का मतलब ये नहीं कि आप लोगों से काम मांगें। इसका मतलब है कि आप लोगों से सलाह मांगें और उनकी मदद करें। जब आप किसी से सलाह मांगते हैं तो आप उन्हें इज्जत दे रहे होते हैं और लोग इज्जत के बदले अक्सर रास्ता दिखा देते हैं। हर वो इंसान जिससे आप मिलते हैं वो आपके लिए एक बंद दरवाजा खोल सकता है। इसलिए शर्माना छोड़ें और लोगों से बात करना शुरू करें। आपकी नेट वर्थ आपकी नेटवर्किंग पर टिकी है। अगर आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सिर्फ वही लोग हैं जो आपके साथ बैठकर खाली चाय पीते हैं तो समझ लीजिए कि आपका करियर भी उस चाय की तरह ही ठंडा होने वाला है।
करियर में सफल होना कोई रॉकेट साइंस नहीं है बल्कि ये सही आदतों का खेल है। फोर्ड आर मायर्स की ये बातें सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि आपकी जिंदगी बदलने का नक्शा हैं। अगर आप अब भी चुपचाप बैठे रहे तो दुनिया आपको कुचलकर आगे निकल जाएगी। आज ही फैसला करें कि आप शिकार बनेंगे या शिकारी। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो नौकरी न मिलने का बहाना बनाते हैं। कमेंट में बताएं कि इन ३ लेसन में से आपको सबसे ज्यादा कौन सा पसंद आया और आप कल से अपनी लाइफ में क्या बदलने वाले हैं। याद रखिए कि आपकी तरक्की सिर्फ आपके हाथों में है।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#CareerGrowth #JobSearchTips #PersonalBranding #SuccessMindset #BookSummaryIndia
_