Getting to Plan B (Hindi)


अगर आप अभी भी अपने उसी घिसे पिटे प्लान ए के भरोसे बैठे हैं जो पिछले छह महीनों से फूटी कौड़ी नहीं कमा कर दे रहा है तो बधाई हो आप बर्बादी के हाईवे पर सबसे आगे खड़े हैं। अपनी जिद्दी ईगो को पालना बंद कीजिये वरना मार्केट आपको कूड़ेदान में फेंकने में जरा भी देर नहीं लगाएगा।

क्या आप जानते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप्स असल में अपने दूसरे या तीसरे प्लान की वजह से आज अरबों की कंपनी बने हैं। आज हम समझेंगे कि कैसे आप अपने फेल होते आइडिया को एक मास्टर क्लास बिजनेस मॉडल में बदल सकते हैं।


लेसन १ : एनालॉग और एंटीलॉग का खतरनाक खेल

ज्यादातर लोग जब बिजनेस शुरू करते हैं तो वो खुद को अगला स्टीव जॉब्स समझने की गलती कर बैठते हैं। उन्हें लगता है कि उनका आइडिया इतना यूनिक है कि पूरी दुनिया उनके कदमों में झुक जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि आपका दिमाग कोई जादुई पिटारा नहीं है। जॉन मुलिन्स कहते हैं कि अगर आप बिना किसी रेफरेंस के मैदान में कूद रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं बल्कि जुआ खेल रहे हैं। यहाँ काम आते हैं दो शब्द एनालॉग और एंटीलॉग।

एनालॉग का मतलब है वो कंपनियां जिन्होंने पहले से ही कुछ ऐसा किया है जो आप करना चाहते हैं। मान लीजिये आप शहर में एक नई कॉफी शॉप खोलना चाहते हैं। अब स्टारबक्स आपके लिए एक परफेक्ट एनालॉग है। उनकी सर्विस उनकी ब्रांडिंग और उनका कस्टमर एक्सपीरियंस कमाल का है। आपको उनसे सीखना चाहिए कि लोग कॉफी के लिए २०० रुपये खुशी खुशी क्यों देते हैं। यह देखना समझदारी है कि दुनिया में क्या काम कर रहा है। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है। अगर आप सिर्फ कॉपी पेस्ट करेंगे तो आप केवल एक सस्ते डुप्लीकेट बनकर रह जाएंगे।

यहीं एंट्री होती है एंटीलॉग की। एंटीलॉग का मतलब है वो चीजें जो आपको बिल्कुल नहीं करनी हैं। शायद आपके शहर की किसी पुरानी दुकान पर कॉफी तो अच्छी मिलती है लेकिन वहां सफाई के नाम पर सिर्फ मक्खियां भिनभिनाती हैं। यह आपका एंटीलॉग है। आपको उनकी क्वालिटी तो लेनी है लेकिन उनकी गंदगी से तौबा करनी है।

हमारे पड़ोस के शर्मा जी को ही ले लीजिये। उन्हें लगा कि वो ऑनलाइन ग्रोसरी का बिजनेस शुरू करेंगे क्योंकि बिग बास्केट बहुत पैसा कमा रही है। उन्होंने बिग बास्केट को अपना एनालॉग बनाया लेकिन एंटीलॉग पर ध्यान देना भूल गए। उन्होंने उन छोटी दुकानों की गलतियों को नहीं देखा जो उधार के चक्कर में बर्बाद हो गईं। शर्मा जी ने सबको उधार बांटना शुरू किया और आज वो खुद उधार मांगते फिर रहे हैं।

सक्सेसफुल होने का मतलब यह नहीं है कि आप पहिये का दोबारा आविष्कार करें। आपको बस यह देखना है कि पिछला पहिया कहाँ जाकर पंक्चर हुआ था। अगर आप दूसरों की गलतियों से नहीं सीख सकते तो अपनी जेब खाली करने के लिए तैयार रहिये। मार्केट को आपकी भावनाओं से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसे सिर्फ इस बात से मतलब है कि क्या आप किसी पुरानी समस्या का नया और बेहतर हल दे रहे हैं या नहीं।

जब आप इन दोनों के बीच का बैलेंस समझ जाते हैं तब जाकर आपका बिजनेस मॉडल एक ठोस जमीन पर खड़ा होता है। बिना एनालॉग के आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं और बिना एंटीलॉग के आप उसी खाई में गिर रहे हैं जिसमें आपके पूर्वज गिरे थे। तो अगली बार जब आप कहें कि मेरा आईडिया दुनिया बदल देगा तो पहले यह देख लीजिये कि दुनिया आपसे पहले किन आइडियाज को कचरे में फेंक चुकी है।


लेसन २ : डैशबोर्ड और हाइपोथेसिस का सच

ज्यादातर देसी फाउंडर्स की सबसे बड़ी बीमारी जानते हैं क्या है। वो डेटा से ज्यादा अपने अंतर्मन की आवाज पर भरोसा करते हैं। उनको लगता है कि अगर उनके मामा के लड़के को उनका आईडिया पसंद आ गया है तो समझो पूरा इंडिया लाइन लगा लेगा। जॉन मुलिन्स कहते हैं कि यह कॉन्फिडेंस नहीं बल्कि खुदकुशी का निमंत्रण है। बिजनेस में इमोशंस की उतनी ही जगह है जितनी एक समोसे में पनीर की यानी ना के बराबर। अगर आप अपने बिजनेस को सच में बड़ा करना चाहते हैं तो आपको एक डैशबोर्ड और कुछ कड़वे हाइपोथेसिस की जरूरत पड़ेगी।

हाइपोथेसिस का आसान मतलब है एक ऐसा अंदाजा जिसे साबित करना अभी बाकी है। जैसे आपको लगता है कि लोग आपकी बनाई हुई हर्बल चाय के लिए ५०० रुपये देंगे। यह आपका विश्वास है लेकिन बिजनेस की भाषा में यह सिर्फ एक हाइपोथेसिस है। जब तक १० अनजान लोग अपनी जेब से पैसे निकालकर आपको न दे दें तब तक इसे सच मत मानिये। दिक्कत तब आती है जब हम अपनी ही कल्पनाओं से प्यार कर बैठते हैं। हम अपनी पूरी सेविंग्स उस आईडिया में झोंक देते हैं जिसे मार्केट ने अभी तक हरी झंडी भी नहीं दिखाई है।

यहीं पर काम आता है आपका डैशबोर्ड। एक ऐसा सिस्टम जो आपको हर पल बताता रहे कि आप सही दिशा में जा रहे हैं या गड्ढे की तरफ। मान लीजिये आपने एक नया जिम खोला है। आपका डैशबोर्ड आपको बताएगा कि कितने लोग इंक्वायरी के लिए आए और उनमें से कितनों ने सच में मेंबरशिप ली। अगर १०० लोग आए और सिर्फ २ ने पैसे दिए तो इसका मतलब है कि आपकी बातों में दम नहीं है या आपका ऑफर बेकार है। लेकिन हमारे यहाँ लोग क्या करते हैं। वो सोचते हैं कि शायद आज शुभ मुहूर्त नहीं था या लोगों को फिटनेस की समझ नहीं है।

मेरे एक दोस्त ने फैंसी टीशर्ट का बिजनेस शुरू किया था। उसको लगा कि टीशर्ट पर भारी भरकम शायरी लिखकर वो रातों रात अमीर बन जाएगा। उसने हजारों टीशर्ट्स छपवा लीं। जब माल नहीं बिका तो उसने कहा कि लोग आजकल पढ़ना भूल गए हैं। सच तो यह था कि उसका डैशबोर्ड चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था कि भाई तेरी शायरी सिर्फ तुझे ही पसंद आ रही है। अगर उसने पहले सिर्फ १० टीशर्ट्स के साथ अपना हाइपोथेसिस टेस्ट किया होता तो आज उसे अपनी टीशर्ट्स पोछा लगाने के लिए इस्तेमाल नहीं करनी पड़तीं।

बिना डेटा के बिजनेस चलाना वैसा ही है जैसे आप आंखें बंद करके दिल्ली की सड़कों पर गाड़ी चला रहे हों। एक्सीडेंट तो होना ही है बस समय की बात है। अगर आप अपने बिजनेस के नंबर्स से डरते हैं तो यकीन मानिये आप कभी सफल नहीं हो पाएंगे। सक्सेस का रास्ता एक्सेल शीट्स और कड़वे सच से होकर गुजरता है न कि सुहाने सपनों से। तो अपने आप से पूछिये कि क्या आपके पास कोई ठोस सबूत है कि आपका बिजनेस चलेगा या आप सिर्फ हवा में महल बना रहे हैं।

डेटा के साथ दोस्ती कीजिये क्योंकि यह अकेला ऐसा दोस्त है जो आपको कभी धोखा नहीं देगा और आपकी चापलूसी भी नहीं करेगा। जब आप अपने आइडियाज को नंबर्स की कसौटी पर कसना शुरू करते हैं तब आप एक नौसिखिए से एक मंझे हुए खिलाड़ी बन जाते हैं।


लेसन ३ : पिवट करने की ताकत और प्लान बी का जादू

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो दीवार से टकराने के बाद दीवार तोड़ने की कोशिश करते हैं और दूसरे वो जो दीवार देखकर अपना रास्ता बदल लेते हैं। बिजनेस की दुनिया में पहली कैटेगरी वाले लोग अक्सर दिवालिया होकर घर बैठते हैं। जॉन मुलिन्स और रैंडी कोमिसार हमें समझाते हैं कि आपका प्लान ए सिर्फ एक शुरुआत है मंजिल नहीं। हकीकत यह है कि शायद ही दुनिया की कोई बड़ी कंपनी वैसी है जैसी वो शुरू हुई थी। इसे कहते हैं पिवट करना यानी अपनी दिशा को वक्त रहते बदल लेना।

पिवट करना कोई हार नहीं है बल्कि यह तो इस बात का सबूत है कि आप गधे नहीं हैं। अगर आप एक रेस्टोरेंट चलाते हैं और लोग वहां खाना खाने के बजाय सिर्फ आपकी स्पेशल चटनी पैक करवा कर ले जा रहे हैं तो जिद्द छोड़िये। टेबल कुर्सियां बेचिए और चटनी की फैक्ट्री डाल लीजिये। लेकिन नहीं हमें तो अपनी ईगो प्यारी होती है। हम सोचते हैं कि हमने इतना बड़ा हॉल रेंट पर लिया है तो लोग यहाँ बैठकर खाना क्यों नहीं खा रहे। मार्केट को इससे कोई मतलब नहीं है कि आपने कितनी मेहनत की है उसे सिर्फ अपनी जरूरत से मतलब है।

जरा यूट्यूब के बारे में सोचिये। क्या आपको पता है कि शुरू में यह एक डेटिंग साइट थी। लोग वहां अपनी वीडियो प्रोफाइल डालते थे ताकि उन्हें पार्टनर मिल सके। जब कोई डेटिंग के लिए नहीं आया तो उन्होंने पिवट किया और इसे वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म बना दिया। अगर वो अपनी डेटिंग वाली जिद्द पर अड़े रहते तो आज आप यह ब्लॉग नहीं पढ़ रहे होते बल्कि शायद किसी और ऐप पर अपना टाइम बर्बाद कर रहे होते।

मेरे एक कजिन ने बच्चों के खिलौनों की दुकान खोली थी। दुकान पर बच्चे तो नहीं आए लेकिन मोहल्ले की आंटियां आकर गिफ्ट रैपिंग पेपर मांगने लगीं। भाई साहब ने तीन महीने तक आंटियों को भगाया कि यह खिलौनों की दुकान है स्टेशनरी की नहीं। आखिर में जब दुकान बंद होने की नौबत आई तब उन्हें अक्ल आई। आज वो शहर के सबसे बड़े गिफ्ट पैकेजिंग एक्सपर्ट हैं। इसे कहते हैं प्लान बी को गले लगाना। आपका ओरिजिनल आईडिया फ्लॉप हो सकता है लेकिन आपकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी अगर आप अपनी आंखों को खुला रखें।

प्लान बी का मतलब यह नहीं है कि आप मैदान छोड़कर भाग रहे हैं। इसका मतलब है कि आप स्मार्ट हैं और आप जानते हैं कि बहती गंगा में हाथ कैसे धोना है। अगर आप एक ही जगह खड़े होकर पिटते रहेंगे तो लोग आपको सिर्फ सहानुभूति देंगे पैसे नहीं। सफल बिजनेसमैन वही है जो गिरते हुए मलबे से भी अपने लिए एक नया घर खड़ा कर ले। तो अपनी आंखों से वो पट्टी हटाइए और देखिये कि आपका कस्टमर आपसे असल में क्या मांग रहा है। हो सकता है कि आपका असली खजाना उसी दिशा में हो जहाँ आप देख भी नहीं रहे हैं।

याद रखिये जिद्दी होना अच्छी बात है लेकिन अंधे होना बर्बादी की निशानी है। अपने आईडिया से नहीं बल्कि अपने लक्ष्य से प्यार कीजिये। अगर लक्ष्य तक पहुँचने वाला रास्ता बंद है तो रास्ता बदलिये लक्ष्य नहीं।


बिजनेस करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है लेकिन यह कोई बच्चों का खेल भी नहीं है। गेट्टिंग टू प्लान बी हमें सिखाती है कि असफलता सिर्फ एक फीडबैक है। अगर आपका आज का प्लान काम नहीं कर रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप एक खराब एंटरप्रेन्योर हैं। इसका मतलब बस इतना है कि मार्केट आपसे कुछ और बेहतर चाह रहा है।

आज ही बैठिये और अपनी प्रोग्रेस को ठंडे दिमाग से देखिये। क्या आप वही पुरानी गलतियां दोहरा रहे हैं या आप बदलाव के लिए तैयार हैं। कमेंट्स में हमें बताइये कि क्या आपके पास भी कोई ऐसा आईडिया है जिसे अब पिवट करने का समय आ गया है। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो पिछले दो साल से एक ही फ्लॉप आईडिया को घसीट रहा है। जागने का समय आ गया है।

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