Getting Everything You Can Out of All You've Got (Hindi)


सच बताना क्या आप भी उसी पुरानी घिसी पिटी मेहनत के भरोसे अमीर बनने का सपना देख रहे हैं। अफसोस की बात है कि आप अपनी आंखों के सामने पड़ी सोने की खदान को नजरअंदाज करके खाली हाथ घर लौट रहे हैं। जे अब्राहम की यह बातें आपके कॉम्पिटिशन को तो अमीर बना रही हैं पर आप अभी भी वही पुराने तरीके पकड़कर बैठे हैं। चलिए अब इस नुकसान को रोकते हैं और जानते हैं वह 3 सीक्रेट लेसंस जो आपकी किस्मत बदल देंगे।


Lesson : अपनी छिपी हुई संपत्तियों को पहचानें (Recognize Your Hidden Assets)

जरा सोचिए आप एक ऐसे टापू पर फंसे हैं जहाँ चारों तरफ रेत ही रेत है। आप प्यास से तड़प रहे हैं और खुदाई कर रहे हैं पानी के लिए। आप पागलों की तरह पांच फीट दस फीट बीस फीट गड्ढा खोद देते हैं पर पानी का नामोनिशान नहीं मिलता। आप पसीने से लथपथ होकर किस्मत को कोसते हैं। तभी एक बूढ़ा आदमी आता है और कहता है कि बेटा बगल वाले नारियल के पेड़ पर चढ़कर देखो वहां मीठा पानी भरा पड़ा है। बस यही हाल हमारे इंडियन बिजनेस ऑनर्स और यंग प्रोफेशनल्स का है। हम सब नए कस्टमर्स की तलाश में और नए प्रोजेक्ट्स के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कोई कुत्ता चलती गाड़ी के पीछे भागता है। मिल गई तो ठीक वरना थक कर जीभ बाहर निकाल कर बैठ जाते हैं। जे अब्राहम कहते हैं कि आप वह सब कुछ पा सकते हैं जो आप चाहते हैं अगर आप सिर्फ उन चीजों का सही इस्तेमाल करना सीख जाएं जो आपके पास पहले से मौजूद हैं। इसे वह हिडन एसेट्स कहते हैं।

जरा अपने पुराने कस्टमर्स की लिस्ट उठाकर देखिए। वह लोग जिन्होंने आपसे एक बार सामान खरीदा और फिर आप उन्हें भूल गए जैसे कोई अपनी पुरानी वाली को भूल जाता है। लेकिन फर्क यह है कि पुरानी वाली शायद वापस न आए पर पुराना कस्टमर आपके पास दोबारा जरूर आ सकता है। आपने कभी सोचा है कि उन लोगों को दोबारा कॉल करना या एक मैसेज करना कितना आसान है। मार्केटिंग की दुनिया में नए कस्टमर को ढूंढना पुराने को वापस बुलाने से सात गुना ज्यादा महंगा पड़ता है। पर हम इंडियंस को क्या है हमें तो बस नया जोश चाहिए। हम अपनी दुकान में पड़े उस पुराने स्टॉक को नहीं देखते जो कैश में बदल सकता है। हम उन रिश्तों को नहीं देखते जो हमें नए क्लाइंट्स दिला सकते हैं।

जे अब्राहम एक मजेदार उदाहरण देते हैं। एक बार एक दुकानदार परेशान था कि उसकी सेल नहीं बढ़ रही। जे ने उससे पूछा कि भाई तुम्हारे पास कितने लोगों का डेटा है। दुकानदार ने बड़े गर्व से कहा कि मेरे पास पिछले पांच साल का डेटा है। जे ने पूछा कि क्या तुमने कभी उन्हें वापस बुलाया। दुकानदार ऐसे चुप हो गया जैसे शादी में फूफा जी नाराज होकर बैठ जाते हैं। जे ने उसे सिर्फ एक छोटा सा काम दिया। उन सभी पुराने ग्राहकों को एक प्यार भरा लेटर या मैसेज भेजो कि हम आपको मिस कर रहे हैं और आपके लिए एक खास ऑफर है। नतीजा यह हुआ कि अगले सात दिनों में उस दुकान पर इतनी भीड़ बढ़ गई जितनी फ्री के लंगर में भी नहीं होती।

यह लेसन हमें सिखाता है कि अपने रिसोर्सेज को कम मत आंकिए। आपके पास जो मोबाइल में कॉन्टैक्ट्स हैं जो आपके पास पुराना एक्सपीरियंस है और जो आपके पास खाली समय है वह सब आपकी छिपी हुई संपत्ति है। हम अक्सर दूसरों की थाली में ज्यादा घी देखते हैं और अपनी थाली की रोटी को सूखा समझकर छोड़ देते हैं। बिजनेस और करियर में आगे बढ़ने का पहला रूल यही है कि जो हाथ में है पहले उसका पूरा रस निकाल लो। जब आप अपने मौजूदा ग्राहकों और संसाधनों से पूरा फायदा उठाना शुरू करेंगे तब आपको अहसास होगा कि आप तो असल में एक खजाने पर बैठे थे और फालतू में बाहर दर दर भटक रहे थे। यह सिर्फ पैसे बचाने की बात नहीं है बल्कि यह स्मार्ट बनने की बात है। अगर आप अपने छिपे हुए टैलेंट और नेटवर्क को पहचान लेते हैं तो यकीन मानिए आप कॉम्पिटिशन को ऐसे पीछे छोड़ देंगे जैसे बुलेट ट्रेन के सामने बैलगाड़ी।


Lesson : यूएसपी और वैल्यू एडिशन (USP and Value Addition)

कभी सोचा है कि आपके मोहल्ले की उस चाट वाली दुकान पर इतनी भीड़ क्यों होती है, जबकि बगल वाला मक्खियाँ मार रहा होता है। क्या उसके पास कोई जादुई मसाला है। शायद नहीं। असल में उसके पास एक यूएसपी यानी यूनिक सेलिंग प्रोपोज़िशन है। जे अब्राहम कहते हैं कि अगर आप दुनिया की भीड़ में एक और चेहरा बनकर रह गए, तो लोग आपको वैसे ही भूल जाएंगे जैसे कल रात का डिनर। मार्केट में अगर आपको टिकना है और दूसरों से ज्यादा कमाना है, तो आपको यह साफ करना होगा कि आखिर लोग आपसे ही क्यों खरीदें। क्या आप सबसे सस्ते हैं। क्या आप सबसे तेज हैं। या फिर क्या आप सबसे ज्यादा इज्जत देते हैं।

हमारे इंडिया में तो बस एक ही यूएसपी चलती है और वह है डिस्काउंट। भाई थोड़ा कम कर लो ना। लेकिन जे कहते हैं कि डिस्काउंट देना कोई बहादुरी नहीं है, असली खेल तो वैल्यू एडिशन में है। वैल्यू एडिशन का मतलब है कि कस्टमर को वह देना जिसकी उसने उम्मीद भी नहीं की थी। मान लीजिए आप एक मोबाइल फोन बेच रहे हैं। अब हर कोई वही फोन उसी दाम पर बेच रहा है। लेकिन अगर आप उस फोन के साथ एक फ्री टेम्पर्ड ग्लास और एक महीने की एक्स्ट्रा सर्विस गारंटी दे दें, तो कस्टमर आपके पास ऐसे खिंचा चला आएगा जैसे लोहा चुंबक की तरफ।

इसे एक मजेदार मिसाल से समझते हैं। एक बार एक डेंटिस्ट बहुत परेशान था क्योंकि उसके क्लिनिक पर मरीज कम आ रहे थे। जे अब्राहम ने उसे एक कमाल की सलाह दी। जे ने कहा कि तुम अपने हर मरीज को इलाज के बाद एक छोटा सा गिफ्ट हैंपर दो, जिसमें एक बढ़िया टूथब्रश, फ्लॉस और एक छोटा सा थैंक यू नोट हो। डेंटिस्ट हँसने लगा और बोला कि भाई मैं डॉक्टर हूँ या दुकानदार। लेकिन जब उसने यह करना शुरू किया, तो चमत्कार हो गया। मरीज न सिर्फ दोबारा आए, बल्कि उन्होंने अपने पूरे खानदान को वहीं भेजना शुरू कर दिया। क्यों। क्योंकि अब वह सिर्फ एक डेंटिस्ट नहीं था, वह वह डेंटिस्ट था जो सच में फिक्र करता है।

हम लोग अक्सर सोचते हैं कि बिजनेस मतलब बस सामान बेचना और पैसे लेना। लेकिन असली बिजनेस रिश्तों और वैल्यू पर टिका होता है। अगर आप अपने क्लाइंट को यह यकीन दिला दें कि आप उनका फायदा अपने फायदे से ज्यादा चाहते हैं, तो आप मार्केट के बेताज बादशाह बन जाएंगे। इसे जे अब्राहम स्ट्रेटजी ऑफ प्रीयमिनेस कहते हैं। इसका मतलब है कि आप अपने कस्टमर के लिए एक भरोसेमंद सलाहकार बन जाएं, न कि सिर्फ एक सेल्समैन।

जरा सोचिए, जब आप किसी को सलाह देते हैं, तो वह आपकी इज्जत करता है। और जब आप किसी को कुछ बेचने की कोशिश करते हैं, तो वह अपना बटुआ छुपा लेता है। तो आज से ही अपनी एक ऐसी यूएसपी बनाइए जो आपके कॉम्पिटिशन के पास न हो। चाहे वह आपकी सर्विस की स्पीड हो, आपकी मुस्कुराहट हो या फिर आपकी ईमानदारी। जब आप वैल्यू देना शुरू करते हैं, तो पैसा आपके पीछे ऐसे भागता है जैसे थ्री इडियट्स का चतुर्लिंगम सक्सेस के पीछे भागता था। बिना यूएसपी के बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना दूल्हे के बारात ले जाना। शोर तो बहुत होगा, पर शादी किसी की नहीं होगी।


Lesson : पार्टनरशिप और जॉइंट वेंचर्स (Host-Beneficiary Relationships)

क्या आपने कभी सोचा है कि शोले फिल्म में जय और वीरू की जोड़ी इतनी हिट क्यों थी। क्योंकि जय के पास दिमाग था और वीरू के पास ताकत। अकेले गब्बर को मारना मुश्किल था, पर साथ मिलकर उन्होंने रामगढ़ बचा लिया। जे अब्राहम कहते हैं कि बिजनेस और लाइफ में भी अगर आप अकेले सब कुछ करने की कोशिश करेंगे, तो आप बस पसीना बहाएंगे, पैसा नहीं कमाएंगे। इसे वह होस्ट बेनिफिशियरी रिलेशनशिप कहते हैं। मतलब दूसरों के नेटवर्क, दूसरों के भरोसे और दूसरों के कस्टमर्स का इस्तेमाल करके अपना फायदा करना। और यकीन मानिए, इसमें सामने वाले का भी फायदा होता है।

हमारे इंडिया में लोग पार्टनरशिप के नाम से ऐसे डरते हैं जैसे बचपन में होमवर्क से डरते थे। हमें लगता है कि कोई हमारा आईडिया चुरा लेगा या हमारा पैसा लेकर भाग जाएगा। लेकिन जे कहते हैं कि दुनिया में लाखों ऐसे लोग हैं जिन्होंने करोड़ों रुपये खर्च करके पहले से ही एक बड़ा कस्टमर बेस बना रखा है। अब आप या तो अपनी पूरी जिंदगी लगा दो उतने कस्टमर बनाने में, या फिर उनके साथ हाथ मिला लो। इसे एक मजेदार मिसाल से समझते हैं। मान लीजिए आप एक नई जिम खोलते हैं। अब आप सड़कों पर पर्चे बांट रहे हैं और लोग उन्हें समोसे रखने के काम में ले रहे हैं।

जे अब्राहम की सलाह यहाँ यह होगी: पास वाले सप्लीमेंट स्टोर या हेल्दी डाइट शॉप के पास जाओ। उनसे कहो कि भाई, जो भी आपसे एक महीने का प्रोटीन पाउडर खरीदेगा, उसे मेरे जिम में 3 दिन की फ्री ट्रेनिंग मिलेगी। अब सोचिए, सप्लीमेंट वाले को क्या मिला। उसके कस्टमर को एक फ्री गिफ्ट मिल गया, जिससे उसकी इज्जत बढ़ गई। और आपको क्या मिला। आपको वही लोग मिले जो सच में जिम जाना चाहते हैं। यह है बिना एक रुपया विज्ञापन पर खर्च किए अपनी सेल बढ़ाना। इसे ही असली दिमाग वाला बिजनेस कहते हैं।

जे एक बार एक कारपेट क्लीनर से मिले जो बहुत परेशान था। जे ने उसे कहा कि तुम पास के रियल एस्टेट एजेंट के पास जाओ। जो भी घर खरीदे, उसे एजेंट की तरफ से एक फ्री कारपेट क्लीनिंग का कूपन मिले। एजेंट खुश क्योंकि वह अपने क्लाइंट को कुछ एक्स्ट्रा दे रहा है, और कारपेट क्लीनर खुश क्योंकि उसे नए क्लाइंट्स का घर मिल गया जहाँ वह अपनी बाकी सर्विस भी बेच सकता है।

हम अक्सर सोचते हैं कि कॉम्पिटिशन मतलब दुश्मनी। पर जे कहते हैं कि अगर आप समझदार हैं, तो आपका कॉम्पिटिटर भी आपका पार्टनर बन सकता है। इसे कहते हैं आउट थिंक करना। जब आप दूसरों की मेहनत का सही इस्तेमाल करते हैं, तो आप अपनी ग्रोथ को रॉकेट की रफ़्तार दे देते हैं। अगर आप अभी भी अकेले सब कुछ करने की जिद्द पर अड़े हैं, तो आप बस वही पुराने तरीके अपना रहे हैं जो सालों पहले फेल हो चुके हैं। याद रखिये, अकेले आप बस चल सकते हैं, पर साथ मिलकर आप उड़ सकते हैं।

तो दोस्तों, आज से ही ढूंढिए वह जय जो आपके वीरू के साथ मिलकर गब्बर यानी आपके कॉम्पिटिशन को धूल चटा सके। यह दुनिया बहुत बड़ी है और यहाँ हर किसी के लिए जगह है, बस आपको हाथ मिलाना आना चाहिए।


जे अब्राहम की यह किताब हमें बस एक ही बात सिखाती है: आप जितना सोच रहे हैं, आप उससे कहीं ज्यादा के हकदार हैं। बस जरूरत है अपनी नजरिया बदलने की। क्या आप अब भी वही पुरानी लकीर के फकीर बने रहेंगे, या आज से अपनी छिपी हुई संपत्तियों को पहचान कर एक नई शुरुआत करेंगे। नीचे कमेंट्स में बताएं कि इन 3 लेसंस में से कौन सा लेसन आपकी लाइफ की सिचुएशन पर एकदम फिट बैठता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो दिन रात मेहनत तो करता है पर रिजल्ट नहीं मिल पा रहा। चलिए साथ मिलकर ग्रो करते हैं।

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