अगर आपको लगता है कि आपकी टीम सिर्फ इसलिए काम नहीं कर रही क्योंकि सब आलसी हैं तो मुबारक हो आप अंधेरे में तीर चला रहे हैं। अपनी ईगो और पुराने घिसे पिटे मैनेजमेंट स्टाइल को पकड़े रहिए और अपनी कंपनी को डूबते हुए देखते रहिए क्योंकि आप महान टीम बनाने का ए बी सी डी भी नहीं जानते।
सच तो यह है कि टीम वर्क के नाम पर आप सिर्फ भीड़ जमा कर रहे हैं। आज हम डॉन येजर की किताब से वो ३ सीक्रेट लेसन जानेंगे जो एक साधारण टीम को चैंपियन बना देते हैं। चलिए समझते हैं कि असली लीडरशिप और टीम बिल्डिंग का खेल आखिर होता कैसे है।
लेसन १ : टैलेंट का अचार मत डालिए कैरेक्टर पर दांव लगाइए
क्या आपको भी लगता है कि अगर आप अपनी टीम में दुनिया भर के टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट भर लेंगे तो आपकी कंपनी रातों रात गूगल और एप्पल को पीछे छोड़ देगी। अगर हाँ तो आप शायद किसी ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहाँ लॉजिक का नामो निशान नहीं है। डॉन येजर अपनी किताब में साफ कहते हैं कि एक महान टीम बनाने के लिए डिग्री से ज्यादा इंसान का कैरेक्टर मायने रखता है।
सोचिए आपने अपनी टीम में एक ऐसे बंदे को रख लिया जिसकी कोडिंग स्किल्स तो एकदम चीते जैसी है लेकिन उसका एटीट्यूड किसी सड़े हुए करेले जैसा है। वह ऑफिस आता है और सबको नीचा दिखाता है। उसे लगता है कि उसके बिना तो कंपनी का पत्ता भी नहीं हिलेगा। ऐसे लोग टीम के लिए एसेट नहीं बल्कि वो वायरस हैं जो पूरी टीम के मोटिवेशन का सिस्टम क्रैश कर देते हैं।
महान टीमें उन लोगों को ढूंढती हैं जो हार नहीं मानते और जो दूसरों की मदद करना जानते हैं। मान लीजिए आपकी गली की क्रिकेट टीम है। एक तरफ वो लड़का है जो सेंचुरी तो मारता है लेकिन आउट होने पर बल्ला पटक देता है और दूसरों को गाली देता है। दूसरी तरफ वो लड़का है जो भले ही १० रन बनाए लेकिन जब दूसरा खिलाड़ी कैच पकड़ता है तो सबसे पहले ताली बजाता है। आप अपनी टीम में किसे चाहेंगे। जाहिर है उस दूसरे लड़के को क्योंकि मैच स्किल्स से जीते जाते हैं लेकिन टूर्नामेंट कैरेक्टर और बॉन्डिंग से जीते जाते हैं।
कंपनियां अक्सर इंटरव्यू में ये चेक करती हैं कि आपको कितनी कोडिंग आती है या आपने कितनी सेल्स की है। लेकिन वो ये देखना भूल जाती हैं कि मुश्किल समय में ये बंदा अपने साथी का साथ देगा या उसे बीच मझधार में छोड़कर भाग जाएगा। एक हाई परफॉर्मिंग टीम में अगर एक इंसान गिरता है तो बाकी चार उसे उठाने के लिए दौड़ते हैं। और ये चीज किसी कॉलेज में नहीं सिखाई जाती ये इंसान के अंदर पैदाइशी या उसके संस्कारों में होती है।
अगर आपकी टीम का कोई मेंबर बहुत टैलेंटेड है लेकिन वो टीम मीटिंग में सबको इग्नोर करता है या हमेशा मैं मैं करता रहता है तो समझ जाइए कि आपने अपनी टीम में एक टाइम बम पाल लिया है। स्किल तो सिखाई जा सकती है। आप किसी को भी एक्सेल चलाना या ईमेल लिखना सिखा सकते हैं। लेकिन आप किसी को 'अच्छा इंसान' बनना नहीं सिखा सकते।
इसीलिए अगर आप एक लीडर हैं या खुद अपनी टीम बना रहे हैं तो डिग्री की चमक धमक में अंधे मत बनिए। ऐसे लोगों को चुनिए जो हंबल हों और जिनमें सीखने की भूख हो। क्योंकि जब प्रेशर बढ़ता है और डेडलाइन सिर पर नाचती है तब आपका किताबी ज्ञान काम नहीं आता बल्कि आपका धैर्य और टीम के प्रति आपकी वफादारी काम आती है।
सर्कस में शेर भी करतब दिखाता है लेकिन जंगल का राजा वही रहता है जिसके पास एटीट्यूड होता है। अपनी टीम को सर्कस मत बनाइए। इसे एक ऐसा कुनबा बनाइए जहाँ लोग एक दूसरे के लिए जान देने को तैयार हों। जब टीम का हर मेंबर एक दूसरे पर भरोसा करता है तभी असली जादू होता है।
लेसन २ : विजन ऐसा हो कि सबको नींद ना आए
ज्यादातर कंपनियों में टीम को ये तो पता होता है कि उन्हें क्या करना है लेकिन उन्हें ये कभी समझ नहीं आता कि वो ये काम कर क्यों रहे हैं। अगर आपकी टीम को लगता है कि वो सिर्फ सुबह नौ से शाम छह बजे तक अपनी कुर्सी तोड़ने और महीने के आखिर में सैलरी पाने के लिए काम कर रहे हैं तो यकीन मानिए आपकी टीम बस एक आईसीयू पेशेंट की तरह है जो वेंटीलेटर पर सांस ले रही है। डॉन येजर कहते हैं कि महान टीमों के पास एक ऐसा 'पर्पस' होता है जो उन्हें बिस्तर से उछलकर बाहर आने पर मजबूर कर देता है।
मान लीजिए आप दो मजदूरों से पूछते हैं कि वो क्या कर रहे हैं। पहला मजदूर चिड़चिड़ा होकर कहता है कि अंधा है क्या भाई पत्थर तोड़ रहा हूँ। वहीं दूसरा मजदूर चमकती आँखों से कहता है कि मै इस शहर का सबसे भव्य मंदिर बना रहा हूँ। काम दोनों एक ही कर रहे हैं लेकिन दूसरे वाले का विजन उसे एक मजदूर से कलाकार बना देता है। आपकी टीम के साथ भी यही दिक्कत है। उन्हें लगता है कि वो सिर्फ एक्सेल शीट भर रहे हैं जबकि असल में वो किसी की लाइफ आसान बना रहे हो सकते हैं।
जब विजन क्लियर नहीं होता तो टीम के लोग छोटी-छोटी बातों पर आपस में भिड़ जाते हैं। जैसे सास-बहू के सीरियल में नमक कम होने पर महाभारत हो जाती है वैसे ही ऑफिस में भी 'उसने मुझे ईमेल में सीसी क्यों नहीं किया' जैसी फालतू बातों पर कोल्ड वॉर शुरू हो जाता है। लेकिन जब सामने एक बड़ा लक्ष्य होता है तो ये छोटी बातें खुद-ब-खुद गायब हो जाती हैं।
हैरानी की बात ये है कि कई लीडर्स को लगता है कि बस दीवार पर 'मिशन स्टेटमेंट' चिपका देने से काम हो जाएगा। भाई साहब वो पेंटिंग नहीं है जिसे लोग देखकर वाह-वाह करेंगे। वो जज्बा होना चाहिए जो टीम के हर मेंबर के खून में दौड़ना चाहिए। अगर आपकी टीम का चपरासी भी ये जानता है कि उसके सही से फाइल रखने से कंपनी का कितना बड़ा फायदा हो सकता है तो समझ लीजिए आपने जंग जीत ली।
बिना विजन की टीम उस बिना एड्रेस वाले लिफाफे जैसी है जो इधर-उधर भटकता तो बहुत है लेकिन कहीं पहुँचता नहीं है। लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि उनकी टीम में जोश नहीं है। जोश मार्केट में मिलने वाली कोई कोल्ड ड्रिंक नहीं है जो आप उन्हें पिला देंगे। जोश आता है जब इंसान को लगता है कि वो किसी बड़ी और खास चीज का हिस्सा है।
अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम संडे की रात को मंडे के गम में ना रोए बल्कि मंडे सुबह ऑफिस आने के लिए एक्साइटेड रहे तो उन्हें एक कारण दीजिए। उन्हें बताइए कि उनका छोटा सा योगदान दुनिया में क्या बदलाव ला रहा है। जब मकसद बड़ा होता है तो थकान भी कम लगती है और रास्ते की मुश्किलें भी छोटी लगने लगती हैं। वरना बिना विजन के तो लोग अपनी परछाई से भी डरने लगते हैं और काम चोरी के नए-नए बहाने ढूंढते रहते हैं।
लेसन ३ : लीडर वो नहीं जो हुक्म चलाए बल्कि वो जो रास्ता साफ करे
अगर आपको लगता है कि सिर पर सफेद बाल होना या हाथ में एक बड़ा सा डंडा लेकर चिल्लाना ही लीडरशिप है तो भाई साहब आप अभी भी १९वीं सदी के किसी कारखाने में जी रहे हैं। डॉन येजर कहते हैं कि एक महान टीम का लीडर 'सर्वेंट लीडर' होता है। अब इसका मतलब ये नहीं कि लीडर सबके लिए चाय बनाकर लाएगा। इसका मतलब ये है कि लीडर का असली काम अपनी टीम के रास्ते से पत्थर हटाना है ताकि वो सरपट दौड़ सकें।
दुनिया में दो तरह के बॉस होते हैं। एक वो जो अपनी केबिन में बैठकर ऐसे आर्डर देते हैं जैसे वो खुद भगवान के अवतार हों। उन्हें अपनी टीम की मुश्किलों से कोई मतलब नहीं होता। बस उन्हें रिजल्ट चाहिए होता है। और दूसरे वो लीडर्स होते हैं जो युद्ध के मैदान में सबसे आगे खड़े होते हैं। अगर कंप्यूटर खराब है तो वो आईटी वाले के पीछे पड़ जाएंगे। अगर किसी एम्प्लॉई के घर में कोई परेशानी है तो वो उसे छुट्टी देकर खुद उसका काम संभाल लेंगे।
मान लीजिए आपका ऑफिस एक बस की तरह है। एक आम बॉस बस की छत पर बैठकर सबको बताता है कि बस कहाँ ले जानी है और ड्राइवर को डांटता रहता है। लेकिन एक असली लीडर वो है जो बस के टायर के नीचे आए पत्थर को हटाने के लिए नीचे उतरता है और जरूरत पड़ने पर खुद धक्का भी लगाता है। जब टीम देखती है कि उनका लीडर उनके लिए हाथ गंदे करने को तैयार है तो टीम के लोग उसके लिए अपनी जान लगा देते हैं।
अक्सर लीडर्स को ये गलतफहमी हो जाती है कि अगर वो अपनी टीम की मदद करेंगे तो लोग उनकी इज्जत कम करेंगे। अरे भाई इज्जत आर्डर देने से नहीं बल्कि भरोसा जीतने से मिलती है। अगर आप अपनी टीम को ये एहसास दिला देते हैं कि आप उनके साथ हैं तो वो आपके लिए वो कर दिखाएंगे जो आपने कभी सोचा भी नहीं होगा।
एक और बड़ी बीमारी है क्रेडिट खाने की। कई लीडर्स अपनी टीम की मेहनत का फल खुद डकार जाते हैं। जब क्लाइंट तारीफ करता है तो वो कहते हैं कि ये सब मैंने किया है और जब गलती होती है तो वो टीम के किसी जूनियर को सूली पर चढ़ा देते हैं। एक महान टीम का लीडर इसके बिल्कुल उल्टा करता है। वो जीत का सारा क्रेडिट अपनी टीम को बांट देता है और हार की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेता है। इसे कहते हैं जिगरा।
याद रखिए आपकी टीम आपके लिए काम नहीं करती। वो आपके साथ काम करती है। अगर आप उन्हें एक टूल की तरह इस्तेमाल करेंगे तो वो भी आपको एक एटीएम मशीन की तरह समझेंगे। लेकिन अगर आप उनकी परवाह करेंगे तो वो आपकी कंपनी को अपनी कंपनी समझेंगे। लीडरशिप कोई पोजीशन नहीं है ये एक जिम्मेदारी है।
तो क्या आप अपनी टीम के लिए वो छाता बनने को तैयार हैं जो उन्हें बारिश में भीगने से बचाए। क्या आप अपनी ईगो को अलमारी में बंद करके अपनी टीम की सेवा करने के लिए तैयार हैं। क्योंकि जब लीडर अपनी टीम का ख्याल रखता है तो टीम अपने आप कंपनी का ख्याल रखने लगती है। यही वो सीक्रेट सॉस है जो एक साधारण ग्रुप को दुनिया की महानतम टीम में बदल देता है।
महान टीम बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है लेकिन ये दिल और दिमाग का सही बैलेंस जरूर है। कैरेक्टर वाले लोग चुनिए उन्हें एक बड़ा विजन दीजिए और उनकी राह के कांटे हटाते रहिए। क्या आप भी किसी ऐसी टीम का हिस्सा रहे हैं जहाँ आपको लगता था कि आप कुछ बड़ा कर रहे हैं या फिर आप अभी भी उस 'बॉस' के नीचे दबे हुए हैं जो सिर्फ हुक्म चलाना जानता है। कमेंट में अपनी कहानी बताएं और इस आर्टिकल को अपने उस टीम मेंबर के साथ शेयर करें जिसे आपको आज थैंक्यू बोलना है।
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