क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो मार्केट में सेकंड आकर मेडल जीतने की खुशी मनाते हैं। बधाई हो आप अपनी बर्बादी का जश्न बहुत शानदार तरीके से मना रहे हैं। अगर आप नंबर वन नहीं हैं तो आप बस भीड़ का हिस्सा हैं जो बची हुई रोटियों के लिए लड़ रहे हैं।
आज के इस आर्टिकल में हम ग्रैंट कारडोन की पावरफुल बुक के उन सीक्रेट्स को समझेंगे जो आपको एवरेज लाइफ की कैद से आजाद करेंगे। तैयार हो जाइये उन ३ बड़े लेसन को सीखने के लिए जो आपके बिजनेस और सेल्स करने के नजरिए को हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : डोमिनेट करो कॉम्पिटिशन के चक्कर में मत पड़ो
अगर आप अभी भी यह सोचते हैं कि बिजनेस में कॉम्पिटिशन करना अच्छी बात है तो यकीन मानिए आप उस भोले बच्चे की तरह हैं जो मेलोडी चॉकलेट में रसीलापन ढूँढ रहा है। ग्रैंट कारडोन सीधा कहते हैं कि कॉम्पिटिशन तो उन लोगों के लिए है जिनके पास कोई नया आईडिया या दम नहीं है। अगर आप अपने पड़ोसी की दुकान से १० रुपये सस्ता बेचकर खुद को बड़ा बिजनेसमैन समझ रहे हैं तो आप सिर्फ अपनी कब्र खोद रहे हैं। असल खिलाड़ी वह होता है जो मार्केट में कदम रखते ही बाकी सबको अदृश्य कर देता है। इसे कहते हैं डोमिनेशन। सोचिए अगर आप किसी शहर में पिज्जा बेच रहे हैं और लोग पिज्जा का नाम लेते ही सिर्फ आपकी दुकान का नाम लें तो क्या वहां कोई और टिक पाएगा। नहीं ना। लेकिन आप तो ठहरे शरीफ इंसान। आप सोचते हैं कि सबको साथ लेकर चलना चाहिए। भाई साहब यह बिजनेस है कोई सत्संग नहीं जहाँ आखिर में सबको बराबर का प्रसाद मिलेगा।
डोमिनेशन का मतलब है कि आपके कस्टमर के दिमाग में आपके अलावा कोई दूसरा ऑप्शन बचे ही न। जब लोग फोन खरीदने की सोचते हैं तो आईफोन उनके दिमाग पर उसी तरह राज करता है जैसे मोहल्ले की आंटी सबके पर्सनल मामलों पर राज करती हैं। आईफोन कॉम्पिटिशन नहीं करता वह डोमिनेट करता है। वह नहीं देखता कि सैमसंग क्या कर रहा है या शाओमी कितने फ्री इयरफोन दे रहा है। ग्रैंट कहते हैं कि आपको अपने फील्ड का इतना बड़ा नाम बनना है कि लोग आपको गूगल करना छोड़ दें और सीधे आपके पास आएं। लेकिन आप तो अभी भी इस बात पर खुश हो रहे हैं कि आज कल वाले से एक सेल ज्यादा हो गई। अरे भाई अगर आप नंबर वन नहीं हैं तो आप बस उन लोगों में शामिल हैं जो टॉप पर बैठे लोगों का बचा हुआ खाना खा रहे हैं।
मान लीजिए आप एक जिम खोलते हैं। अब आप क्या करेंगे। अपने आसपास के जिम वालों के रेट देखेंगे और उनसे ५०० रुपये कम कर देंगे। वाह क्या मास्टरप्लान है। कुछ ही दिनों में आपके पास भीड़ तो होगी लेकिन प्रॉफिट के नाम पर सिर्फ पसीना बचेगा। वहीं अगर आप डोमिनेशन वाली सोच रखते तो आप रेट कम नहीं करते बल्कि अपनी मार्केटिंग इतनी आक्रामक करते कि शहर के हर खम्भे और हर मोबाइल स्क्रीन पर सिर्फ आपका जिम दिखता। आप ऐसी सर्विस देते जो कोई और सोच भी नहीं सकता था। आप कॉम्पिटिशन को खत्म कर देते क्योंकि आपके सामने कोई खड़ा होने की हिम्मत ही नहीं करता। लोग कॉम्पिटिशन इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें डर लगता है। और डर उन्हें लगता है जिनके पास स्किल्स और मेहनत की कमी होती है।
ग्रैंट कारडोन के हिसाब से अगर आप अपने कॉम्पिटिटर की इज्जत कर रहे हैं तो आप खुद की बेइज्जती कर रहे हैं। आपको अपने काम में इतना डूब जाना चाहिए और इतनी ज्यादा एक्टिविटी करनी चाहिए कि सामने वाला खुद ही दुकान बढ़ाकर हिमालय चला जाए। यह सुनकर शायद आपको लग रहा होगा कि यह तो बहुत मतलबी बात है। पर जरा सोचिए जब मंदी आएगी और आपके पास पैसे नहीं होंगे तब क्या आपका वो कॉम्पिटिटर आपके घर का बिजली का बिल भरेगा। बिल्कुल नहीं। इसलिए यह मासूमियत छोड़िये और शेर की तरह अपने इलाके पर कब्जा करना सीखिए। अगर आप नंबर वन नहीं हैं तो मार्केट आपको वैसे ही भूल जाएगा जैसे लोग अपनी पुरानी फेसबुक आईडी का पासवर्ड भूल जाते हैं।
लेसन २ : अनरीजनेबल बनो क्योंकि शरीफों को सिर्फ धक्का मिलता है
अगर आप अब भी यह सोच रहे हैं कि दुनिया बहुत अच्छी है और लोग आपकी मेहनत देखकर खुद आपके पास पैसे लेकर आएंगे तो आप वाकई बहुत मासूम हैं। ग्रैंट कारडोन कहते हैं कि इस दुनिया में अगर कुछ बड़ा करना है तो आपको अनरीजनेबल यानी जिद्दी और तार्किक रूप से पागल बनना पड़ेगा। समाज आपको सिखाता है कि बेटा पैर उतने ही पसारो जितनी लंबी चादर हो। लेकिन ग्रैंट कहते हैं कि चादर छोटी है तो नई और बड़ी चादर खरीदो ना। आप क्यों उस छोटी फटी हुई चादर में खुद को सिकोड़ कर बैठे हैं। दरअसल हम सबको बचपन से रीजनेबल होना सिखाया गया है। यानी सिचुएशन के हिसाब से एडजस्ट करना। लेकिन एडजस्टमेंट करने वाले लोग कभी इतिहास नहीं रचते वे बस इतिहास पढ़ते हैं।
सोचिए अगर आप किसी सेल्स कॉल पर हैं और कस्टमर कहता है कि भाई साहब अभी बजट नहीं है बाद में बात करेंगे। एक रीजनेबल इंसान कहेगा कि ठीक है सर आप आराम से सोच लीजिए। और वो कस्टमर कभी वापस नहीं आएगा। लेकिन एक अनरीजनेबल इंसान कहेगा कि सर बजट तो कभी सही नहीं होता लेकिन यह डील आपके बिजनेस को जो फायदा देगी वो बजट से कहीं बड़ा है। वह तब तक नहीं रुकता जब तक डील क्लोज न हो जाए। लोग आपको बुरा कहेंगे आपको पागल कहेंगे और शायद आपको घमंडी भी समझें। पर यकीन मानिए जब आपके पास बैंक बैलेंस होगा तब वही लोग आपको अपना गुरु मानकर आपके पैर छुएंगे। यह दुनिया सिर्फ उन्हीं की सुनती है जो अपनी बात मनवाना जानते हैं।
मान लीजिए आप अपनी क्रश को डेट पर ले जाना चाहते हैं। अब आप रीजनेबल बनकर उसे एक मैसेज करते हैं और वह रिप्लाई नहीं करती। आप हार मान लेते हैं कि शायद वह बिजी है। यह है हारने वालों की निशानी। लेकिन अनरीजनेबल इंसान तब तक नए तरीके ढूँढेगा जब तक उसे हां न सुनाई दे। ठीक यही चीज बिजनेस में लागू होती है। आपको अपने गोल्स के लिए इतना अनरीजनेबल होना पड़ेगा कि लोग कहें कि भाई तू तो पीछे ही पड़ गया है। हां भाई पीछे पड़ना ही पड़ता है। अगर आप अपने प्रोडक्ट और खुद पर विश्वास करते हैं तो पीछे पड़ना आपकी जिम्मेदारी है।
सफलता कभी भी मांगकर नहीं मिलती उसे छीनना पड़ता है। और छीनने के लिए आपको अपने कंफर्ट जोन की ऐसी की तैसी करनी होगी। आप सुबह १० बजे ऑफिस आकर और शाम ६ बजे घर जाकर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि आप एलन मस्क को टक्कर देंगे। आपको वह काम करने होंगे जो बाकी लोग करने से डरते हैं या जिन्हें करने में उन्हें शर्म आती है। अगर आपको दिन में १०० कॉल करने हैं तो १०० ही करने हैं चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए। जो लोग रीजनेबल होते हैं वे हमेशा बहाने ढूँढते हैं जैसे कि आज मौसम खराब है या आज तो छुट्टी है। लेकिन अनरीजनेबल इंसान के लिए हर दिन नोट छापने का दिन होता है।
ग्रैंट कारडोन का यह लेसन हमें सिखाता है कि अपनी लिमिट्स खुद मत तय करो। लोग आपको टोकेंगे कि इतना काम क्यों कर रहे हो थोड़ा रेस्ट कर लो। ऐसे लोगों से दूर रहिए क्योंकि वे खुद तो कुछ कर नहीं रहे और आपको भी अपने जैसा आलसी बनाना चाहते हैं। याद रखिए अगर आप अपने सपनों के लिए अनरीजनेबल नहीं हैं तो आप दूसरों के सपनों को पूरा करने के लिए रीजनेबल बनकर पूरी जिंदगी काम करते रहेंगे। चुनाव आपका है कि आपको खुद का साम्राज्य बनाना है या किसी और के महल में ईंटें ढोनी हैं।
लेसन ३ : एडवांस और कॉन्कर करो जब बाकी सब डर के मारे दुबक जाएं
इकोनॉमी खराब है। मार्केट डाउन है। लोग पैसे खर्च नहीं कर रहे हैं। यह वो डायलॉग हैं जो आपको हर उस इंसान के मुँह से सुनने को मिलेंगे जो अपनी नाकामी का ठीकरा किस्मत पर फोड़ना चाहता है। ग्रैंट कारडोन कहते हैं कि जब बाकी दुनिया मंदी के डर से अपने खर्चे कम कर रही हो और एडवर्टाइजमेंट बंद कर रही हो ठीक उसी वक्त आपको अपनी पूरी ताकत झोंक देनी चाहिए। इसे कहते हैं एडवांस एंड कॉन्कर। यानी आगे बढ़ो और कब्जा करो। जब दूसरे मैदान छोड़कर भाग रहे हों तब पूरा मैदान आपका होता है। लेकिन ज्यादातर लोग क्या करते हैं। वे भी उसी भेड़चाल का हिस्सा बन जाते हैं और अपने ऑपरेशन्स समेटने लगते हैं।
जरा सोचिए अगर आपके मोहल्ले की सारी दुकानें मंदी की वजह से बंद हो जाएं और सिर्फ आपकी दुकान खुली रहे तो ग्राहक कहाँ जाएगा। जाहिर है आपके पास। ग्रैंट का मानना है कि मुश्किल वक्त दरअसल एक मौका होता है मार्केट शेयर हथियाने का। जब आपके कॉम्पिटिटर डर के मारे बिल में घुस जाएं तब आपको अपनी मार्केटिंग १० गुना बढ़ा देनी चाहिए। लोग कहेंगे कि आप पागल हो गए हैं। इतनी मंदी में इतना पैसा क्यों फूंक रहे हो। पर असल में आप पैसा फूंक नहीं रहे बल्कि उस खाली पड़े मार्केट पर अपना झंडा गाड़ रहे हैं। जब मार्केट वापस ठीक होगा तब आप इतने आगे निकल चुके होंगे कि बाकी लोग आपको दूरबीन से भी नहीं देख पाएंगे।
मान लीजिए बारिश हो रही है और सड़कों पर कोई ऑटो नहीं मिल रहा है। ज्यादातर ऑटो वाले घर पर चाय पी रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि सवारी नहीं मिलेगी। लेकिन एक ऑटो वाला ऐसा है जो अपनी रेनकोट पहनकर बाहर निकलता है। अब उस वक्त सड़क पर खड़ा हर इंसान उसे भगवान की तरह देखेगा और वह जो किराया मांगेगा लोग खुशी-खुशी देंगे। यह होता है एडवांस करना जब बाकी सब रुक गए हों। बिजनेस में भी यही लॉजिक काम करता है। आपको मंदी का रोना नहीं रोना है बल्कि उसे एक डिस्काउंट सेल की तरह देखना है जहाँ कॉम्पिटिशन कम कीमत पर खत्म किया जा सकता है।
ज्यादातर लोग अपनी लाइफ में डिफेंसिव खेलते हैं। वे बस उतना ही करना चाहते हैं जिससे उनका गुजारा हो जाए। लेकिन गुजारा तो जानवरों का भी हो जाता है। अगर आप इंसान हैं और वो भी बिजनेस में हैं तो आपको हमेशा अटैक मोड में रहना चाहिए। ग्रैंट कहते हैं कि रुकना मतलब मरना है। अगर आप अपनी सेल्स को बढ़ा नहीं रहे हैं तो यकीन मानिए वह कम हो रही है। स्टेबल जैसा कुछ नहीं होता। या तो आप ऊपर जा रहे हैं या आप नीचे गिर रहे हैं। इसलिए जब भी आपको लगे कि चीजें मुश्किल हो रही हैं अपनी एक्टिविटी को दोगुना कर दीजिए। ज्यादा कॉल कीजिए ज्यादा ईमेल भेजिए और ज्यादा लोगों से मिलिए।
सफलता आपकी ड्यूटी और जिम्मेदारी है। यह कोई ऑप्शन नहीं है जिसे आप अपनी सुविधा के हिसाब से चुनें। अगर आप अपनी फैमिली को वो लाइफ नहीं दे पा रहे जिसके वे हकदार हैं तो आप अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। ग्रैंट कारडोन की यह किताब हमें यह नहीं सिखाती कि अमीर कैसे बनें बल्कि यह सिखाती है कि डोमिनेट कैसे करें। और जो डोमिनेट करता है पैसा उसके पीछे खुद खिंचा चला आता है। अब उठिए और अपने मार्केट को बताना शुरू कीजिए कि असली राजा कौन है। क्योंकि अगर आप फर्स्ट नहीं हैं तो आप लास्ट हैं और लास्ट आने वालों को दुनिया कभी याद नहीं रखती।
अगर आप भी अपनी लाइफ में उस एवरेज वाली लाइन को पार करके नंबर वन बनना चाहते हैं तो आज ही अपनी मेहनत को १० गुना बढ़ा दीजिये। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जो मंदी का बहाना बनाकर सो रहा है। कमेंट में लिखें मैं नंबर वन बनूँगा और खुद से यह वादा करें।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#SalesStrategy #GrantCardone #BusinessGrowth #MotivationHindi #SuccessMindset
_