Doing Both (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो आज का बिल भरने और कल के सपने देखने के बीच हर रोज कुचले जा रहे हैं। अगर आप सिर्फ आज के प्रॉफिट के पीछे भाग रहे हैं तो बधाई हो आप बहुत जल्द इतिहास बनने वाले हैं। आपकी किस्मत और बिजनेस दोनों ही उस पुरानी एम्बेसडर कार जैसे हो जाएंगे जो दिखती तो शान से है पर चलती कहीं नहीं है। कल की ग्रोथ के चक्कर में आज का चूल्हा मत बुझा देना वरना म्यूजियम में जगह पक्की समझिए।

इस आर्टिकल में हम सिस्को के पूर्व एग्जीक्यूटिव इंदर सिद्धू की किताब डुइंग बोथ से वो सीक्रेट्स जानेंगे जो आपको आज का प्रॉफिट और कल की बड़ी ग्रोथ दोनों एक साथ हासिल करने में मदद करेंगे। आइए इन ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : या तो यह या वह वाले जाल से बाहर निकलें

दोस्तो, लाइफ और बिजनेस में हमें हमेशा सिखाया जाता है कि एक बार में एक ही चीज चुनो। अगर आप पैसे बचा रहे हो तो आप कंजूस हो और अगर आप खर्च कर रहे हो तो आप अय्याश हो। अगर आप आज के काम पर ध्यान दे रहे हो तो आप विजनरी नहीं हो और अगर आप कल के सपने देख रहे हो तो आप हवा में महल बना रहे हो। इंदर सिद्धू कहते हैं कि यह या तो यह या वह वाली सोच ही आपकी सबसे बड़ी दुश्मन है। सफल लोग और कंपनियां कभी भी एक चीज को नहीं चुनतीं बल्कि वो दोनों को एक साथ मैनेज करती हैं। इसे कहते हैं डुइंग बोथ का असली जादू।

मान लीजिए आपका एक छोटा सा रेस्टोरेंट है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला यह कि आप वही पुराना समोसा और चाय बेचते रहें जो सालों से चल रहा है क्योंकि उससे आज का गल्ला भर रहा है। दूसरा यह कि आप मेन्यू पूरी तरह बदल दें और कुछ नया ट्राई करें जिसमें रिस्क है। आम आदमी सोचेगा कि यार अगर नया ट्राई किया और पुराना कस्टमर भाग गया तो क्या होगा। लेकिन एक स्मार्ट बिजनेसमैन कहेगा कि मैं अपना पुराना हिट समोसा भी बेचूंगा और साथ ही एक नया डिश भी टेस्ट करूंगा। अगर आप सिर्फ पुराने पर टिके रहे तो आप नोकिया बन जाएंगे जिसकी रिंगटोन आज सिर्फ यादों में बजती है। और अगर सिर्फ नए के पीछे भागे तो आप उन स्टार्टअप्स जैसे बन जाएंगे जिनके पास आईडिया तो करोड़ का है पर ऑफिस का किराया देने के पैसे नहीं हैं।

सिस्को ने यही किया। उन्होंने अपने पुराने नेटवर्किंग बिजनेस से खूब पैसा कमाया और उसी पैसे को नए मार्केट्स जैसे वीडियो और कोलाबोरेशन टूल्स में लगाया। उन्होंने यह नहीं कहा कि हम अब पुराने राउटर बेचना बंद कर देंगे। उन्होंने पुराने से प्रॉफिट निकाला और नए से ग्रोथ पकड़ी। हमारे समाज में अक्सर लोग कहते हैं कि भाई एक नाव में पैर रखो वरना डूब जाओगे। पर भाई अगर नाव ही छेद वाली निकली तो क्या करोगे। असल में आपको दो नावों पर पैर नहीं रखना है बल्कि आपको एक ऐसी बड़ी जहाज बनानी है जिसमें आज का खाना भी हो और कल के सफर का फ्यूल भी।

कई बार लोग सोचते हैं कि अगर मैं ऑफिस के काम में बिजी हूं तो मैं अपनी हेल्थ पर ध्यान नहीं दे सकता। यह वही घिसी पिटी सोच है जो आपको अस्पताल के बेड तक ले जाएगी। आप काम भी कर सकते हैं और जिम भी जा सकते हैं। आप एक अच्छे पिता भी बन सकते हैं और एक सख्त बॉस भी। यह सब आपके माइंडसेट का खेल है। जब आप अपनी डिक्शनरी से और शब्द हटाकर और शब्द जोड़ लेते हैं तो आपकी लाइफ की ग्रोथ डबल हो जाती है। प्रॉफिट कमाना आपकी मजबूरी नहीं बल्कि आपकी जरूरत है और ग्रोथ करना आपकी चॉइस नहीं बल्कि आपका भविष्य है। जो लोग आज को कल के लिए कुर्बान कर देते हैं वो अक्सर कल तक पहुंच ही नहीं पाते। और जो कल को भूलकर सिर्फ आज में जीते हैं उनका आज बहुत छोटा हो जाता है। इसलिए अपनी सोच को बड़ा कीजिए और दोनों चीजों को एक साथ पकड़ने की हिम्मत जुटाइए।


लेसन २ : इनोवेशन और एग्जीक्यूशन का परफेक्ट बैलेंस

दोस्तो, दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो जो सिर्फ ख्याली पुलाव पकाते हैं और दूसरे वो जो बस कोल्हू के बैल की तरह काम में लगे रहते हैं। इंदर सिद्धू हमें समझाते हैं कि अगर आपको लंबी रेस का घोड़ा बनना है तो आपको एक ही समय पर एक क्रिएटर और एक मजदूर दोनों बनना पड़ेगा। इसे कहते हैं इनोवेशन और एग्जीक्यूशन का मेल। अगर आप सिर्फ नए आइडियाज के बारे में सोचते रहेंगे तो लोग आपको एक फिलोसॉफर समझकर छोड़ देंगे। और अगर आप सिर्फ पुराने घिसे पिटे तरीके से काम करते रहेंगे तो कल कोई नया लड़का आकर आपका पूरा मार्केट साफ कर देगा।

मान लीजिए आप एक कंटेंट क्रिएटर हैं। आप वही पुराने घिसे पिटे टॉपिक पर वीडियो बना रहे हैं क्योंकि उन पर व्यूज आ रहे हैं। यह आपका एग्जीक्यूशन है जिससे आज का घर चल रहा है। लेकिन अगर आप कुछ नया ट्राई नहीं करेंगे तो लोग आपसे बोर हो जाएंगे। वहीं दूसरी तरफ अगर आप हर दिन कुछ ऐसा एक्सपेरिमेंट करें जो किसी को समझ ही न आए तो आपका चैनल बंद हो जाएगा। असली खिलाड़ी वो है जो अपने हिट कंटेंट को भी बनाता रहे और साथ ही साइड में एक नया फॉर्मेट भी टेस्ट करता रहे। सिस्को ने यही किया। उन्होंने अपने कोर प्रोडक्ट्स को इतनी बखूबी से मैनेज किया कि वहां से पैसा आता रहा और उसी पैसे से उन्होंने उन बड़ी कंपनियों को खरीदा जो भविष्य की टेक्नोलॉजी बना रही थीं।

अक्सर देखा जाता है कि जब कोई कंपनी या इंसान बहुत सक्सेसफुल हो जाता है तो उसके अंदर एक अजीब सा आलस आ जाता है। उसे लगता है कि अब तो सब सेट है। यह वही समय होता है जब बर्बादी का बीज बोया जाता है। इंदर सिद्धू कहते हैं कि जब आपकी जेब भरी हो तभी आपको सबसे ज्यादा इनोवेशन करना चाहिए। क्योंकि जब जेब खाली होगी तब आपके पास रिस्क लेने की हिम्मत नहीं होगी। लोग अक्सर कहते हैं कि सर मैं तो बहुत बिजी हूं नया सीखने का टाइम ही नहीं मिलता। भाई अगर आप इतने बिजी हैं कि आप अपने कुल्हाड़ी की धार तेज नहीं कर सकते तो यकीन मानिए आप बहुत जल्द जंगल से बाहर होने वाले हैं।

जिंदगी में भी यही रूल अप्लाई होता है। आप अपनी नौकरी कर रहे हैं वह आपका एग्जीक्यूशन है। लेकिन क्या आप शाम को कोई नई स्किल सीख रहे हैं। वह आपका इनोवेशन है। अगर आप सिर्फ नौकरी के भरोसे बैठे हैं तो आप एक रिस्क पर जी रहे हैं। और अगर आप सिर्फ स्किल्स ही सीख रहे हैं और पैसा नहीं कमा रहे तो आप भूखे मरेंगे। आपको दोनों चाहिए। आपको आज के काम में मास्टर बनना है ताकि पैसा आए और कल की तैयारी में स्टूडेंट बनना है ताकि आप आउटडेटेड न हो जाएं। याद रखिए दुनिया उन्हीं को सलाम करती है जो बदलते वक्त के साथ खुद को बदल लेते हैं और साथ ही अपनी जड़ों को भी मजबूत रखते हैं।


लेसन ३ : लीडरशिप का मतलब है कल को आज में जीना

दोस्तो, बहुत से लोग समझते हैं कि लीडर वो है जो सबसे आगे खड़ा होकर झंडा लहराता है। लेकिन इंदर सिद्धू हमें एक अलग ही नजरिया देते हैं। उनके हिसाब से एक असली लीडर वो है जो अपनी टीम को आज की जरूरतों के लिए तैयार रखता है और साथ ही उनके दिमाग में कल की जीत का बीज भी बो देता है। इसे कहते हैं डुइंग बोथ इन लीडरशिप। अगर आप एक मैनेजर हैं या अपने घर के मुखिया हैं तो आपको एक ही समय पर एक सख्त कोच और एक हमदर्द दोस्त दोनों बनना पड़ेगा। अगर आप सिर्फ सख्त बनेंगे तो लोग आपका साथ छोड़ देंगे और अगर सिर्फ दोस्त बनेंगे तो काम कभी पूरा नहीं होगा।

मान लीजिए आप एक टीम लीडर हैं और आपकी टीम एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। अब डेडलाइन सिर पर है और सब लोग पसीने से तर-बतर हैं। यहाँ आपका आज का काम है उस डेडलाइन को हर हाल में पूरा करना जिसे हम एग्जीक्यूशन कहते हैं। लेकिन एक दूरदर्शी लीडर वही है जो उस प्रेशर के बीच भी अपनी टीम से पूछे कि भाई इस काम के बाद हम नया क्या सीखने वाले हैं। अगर आप अपनी टीम को सिर्फ कोल्हू का बैल बना देंगे तो वो एक दिन थक कर बैठ जाएंगे। सिस्को में यही कल्चर था। वहां लोगों को आज के टारगेट पूरे करने के लिए इनाम तो मिलता ही था पर जो लोग भविष्य के लिए नए आइडियाज लाते थे उन्हें असल हीरो माना जाता था।

अक्सर देखा गया है कि जब किसी इंसान के पास थोड़ी सी पावर आ जाती है तो उसका ईगो सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। उसे लगता है कि जो मैंने कह दिया वही पत्थर की लकीर है। यह वही माइंडसेट है जो बड़े-बड़े साम्राज्यों को मिट्टी में मिला देता है। इंदर सिद्धू कहते हैं कि एक लीडर को हमेशा अपनी गलतियों को मानने के लिए तैयार रहना चाहिए और साथ ही अपनी सफलता का जश्न भी मनाना चाहिए। आपको आज की जीत पर अपनी पीठ थपथपानी है लेकिन अगले ही पल यह भी सोचना है कि कल की लड़ाई के लिए आपके हथियार कितने तैयार हैं।

लाइफ में भी हम अक्सर यही गलती करते हैं। हम सोचते हैं कि जब रिटायर होंगे तब लाइफ जियेंगे। भाई किसने देखा है कल। आपको आज अपनी जिम्मेदारियां भी पूरी करनी हैं और साथ ही उन छोटे-छोटे पलों को भी जीना है जो आपको खुशी देते हैं। जो लीडर आज के प्रॉफिट की वेदी पर कल की खुशियों की बलि चढ़ा देता है उसके पास अंत में सिर्फ पैसा बचता है सुख नहीं। इसलिए अपनी लीडरशिप में बैलेंस लाइए। आज के रिजल्ट्स पर पैनी नजर रखिए और भविष्य की संभावनाओं पर अपनी नजरें टिकाए रखिए। जब आप इन दोनों को मिला देते हैं तब आप सिर्फ एक बॉस नहीं बल्कि एक लेजेंड बन जाते हैं।


दोस्तो, लाइफ में या तो यह या वह के चक्कर में पड़ना छोड़िए। आज का प्रॉफिट कमाइए ताकि आप टिके रहें और कल की ग्रोथ पर काम कीजिए ताकि आप जीतें। अगर आपको आज का यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी अपनी लाइफ में डुइंग बोथ का फार्मूला अपनाना चाहते हैं तो हमें कमेंट्स में जरूर बताएं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अक्सर आज और कल की उलझन में फंसे रहते हैं। याद रखिए आपकी एक छोटी सी शुरुआत ही आपको एक बड़े भविष्य की ओर ले जाएगी।

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