I'll Make You an Offer You Can't Refuse (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि एक बिजनेस डिग्री आपको अमीर बना देगी। वाह भाई क्या मासूमियत है। सच तो यह है कि जब तक आप कॉर्पोरेट के चूहे बने रहेंगे असली पैसा और पावर आपसे कोसों दूर रहेगी और आप बस खाली सपने ही देखते रह जाएंगे।

इस ब्लॉग में हम माइकल फ्रान्जीस की लाइफ से वो सीक्रेट्स निकालेंगे जो हार्वर्ड में नहीं बल्कि माफिया की सिट डाउन मीटिंग्स में सिखाए जाते हैं। चलिए जानते हैं वो ३ पावरफुल लेसन जो आपकी लाइफ और बिजनेस को पूरी तरह बदल कर रख देंगे।


लेसन १ : सिट डाउन की पावर और बिजनेस नेगोशिएशन

इमेजिन करिए कि आप एक अंधेरे कमरे में बैठे हैं और आपके सामने एक ऐसा इंसान है जिसकी एक हां या ना आपकी पूरी किस्मत बदल सकती है। माइकल फ्रान्जीस इसे सिट डाउन कहते हैं। हमारे कॉर्पोरेट जगत में हम इसे मीटिंग कहते हैं पर सच तो यह है कि आपकी ज्यादातर मीटिंग्स सिर्फ चाय और बिस्कुट तक सीमित रह जाती हैं। माइकल बताते हैं कि अगर आप नेगोशिएशन की टेबल पर अपनी बात नहीं मनवा पा रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं कर रहे हैं बल्कि आप बस भीख मांग रहे हैं।

असली नेगोशिएशन तब शुरू नहीं होता जब आप बोलना शुरू करते हैं बल्कि तब शुरू होता है जब आप चुपचाप सामने वाले को पढ़ना शुरू करते हैं। माइकल फ्रान्जीस की दुनिया में अगर आप सिट डाउन में बिना तैयारी के गए तो आप सिर्फ डील नहीं खोएंगे बल्कि आप अपनी इज्जत भी खो देंगे। आज के दौर में बहुत से यंग फाउंडर्स को लगता है कि एक बढ़िया प्रेजेंटेशन और कुछ फैंसी इंग्लिश वर्ड्स बोलकर वो इन्वेस्टर को इम्प्रेस कर लेंगे। अरे भाई इन्वेस्टर को आपकी स्लाइड्स में नहीं बल्कि आपके कॉन्फिडेंस और आपकी क्लैरिटी में इंटरेस्ट है।

एक बार की बात है एक नया बिजनेस ओनर बड़े जोश में एक बड़ी डील के लिए गया। उसने इतनी लंबी बातें की जैसे वह कोई ऑस्कर की स्पीच दे रहा हो। नतीजा क्या हुआ। सामने वाले ने उसे सिर्फ इसलिए मना कर दिया क्योंकि उसने अपनी बात में वजन ही नहीं रखा था। माइकल कहते हैं कि सिट डाउन का मतलब है सीधा मुद्दे पर आना। अगर आप एक करोड़ की डील मांग रहे हैं तो आपके चेहरे पर वो पावर दिखनी चाहिए कि आप उस पैसे को संभाल सकते हैं।

नेगोशिएशन में सबसे बड़ी गलती यह है कि लोग बहुत ज्यादा बोल जाते हैं। माइकल का मानना है कि जो पहले अपनी सारी कार्ड्स टेबल पर रख देता है वह हार जाता है। आपको एक ऐसा ऑफर बनाना आना चाहिए जिसे सामने वाला ठुकरा ही न सके। और यह ऑफर केवल पैसे का नहीं होता यह भरोसे का होता है। अगर आप किसी को यह यकीन दिला दें कि आपके साथ जुड़ने में उसका फायदा ही फायदा है और न जुड़ने में बहुत बड़ा नुकसान तो समझ लीजिए कि सिट डाउन सफल रहा।

सोचिए अगर आप किसी दुकान पर जाएं और दुकानदार आपसे कहे कि सर यह सामान ले लीजिए बहुत अच्छा है तो शायद आप न लें। लेकिन अगर वह कहे कि सर यह आखिरी पीस है और कल इसकी कीमत डबल होने वाली है तो आपके दिमाग में तुरंत हलचल मच जाएगी। इसे ही कहते हैं फोमो क्रिएट करना। माइकल ने यही तरीका माफिया की गलियों से लेकर लीगल बिजनेस तक में आजमाया। सिट डाउन में आपकी बॉडी लैंग्वेज और आपकी आवाज की टोन ही सब कुछ है। अगर आप डर रहे हैं तो सामने वाला आपको कच्चा चबा जाएगा। इसलिए जब भी किसी डील के लिए जाएं तो याद रखें कि आप वहां भीख मांगने नहीं बल्कि एक ऑफर देने गए हैं। एक ऐसा ऑफर जिसे रिफ्यूज करना सामने वाले के लिए बेवकूफी होगी।


लेसन २ : टीम की वफादारी और डिसिप्लिन

क्या आपको लगता है कि आपकी टीम आपके लिए इसलिए काम करती है क्योंकि उन्हें आपसे बहुत प्यार है। अगर हां तो मुबारक हो आप दुनिया के सबसे बड़े मुगालते में जी रहे हैं। माइकल फ्रान्जीस कहते हैं कि माफिया की दुनिया में वफादारी यानी लॉयल्टी ही सब कुछ होती है। वहां अगर कोई धोखा देता है तो उसे रेजिग्नेशन लेटर नहीं बल्कि सीधा ऊपर का टिकट थमाया जाता है। अब जाहिर है कि आप अपने एम्प्लॉई के साथ ऐसा नहीं करेंगे पर क्या आपकी टीम में वो डिसिप्लिन है कि वो आपके पीठ पीछे भी आपके विजन के लिए जान लगा दें।

आजकल के मॉडर्न ऑफिस में लोग सोचते हैं कि एक बीन बैग चेयर और हफ्ते में एक बार पिज्जा पार्टी देने से टीम वफादार बन जाएगी। वाह क्या लॉजिक है। माइकल के हिसाब से वफादारी खरीदी नहीं जाती बल्कि कमाई जाती है। जब माइकल मॉब बॉस थे तब उनके अंडर काम करने वाले लोग जानते थे कि अगर वो मुश्किल में फंसे तो उनका बॉस उनके पीछे खड़ा होगा। क्या आपके एम्प्लॉई को यह यकीन है कि जब क्लाइंट उन पर चिल्लाएगा तो आप उनका साथ देंगे या आप उन्हें बस एक बलि का बकरा बना देंगे।

डिसिप्लिन की बात करें तो हम इंडियंस को 'चलता है' एटीट्यूड से बड़ा लगाव है। मीटिंग ९ बजे की है तो हम ९:३० तक पहुंच ही जाते हैं। पर माफिया की दुनिया में टाइम और रूल्स का मतलब पत्थर की लकीर होता था। अगर माइकल ने किसी को एक काम दिया है तो वो होना ही चाहिए। बिजनेस में भी यही चीज लागू होती है। अगर आपका मैनेजर अपनी डेडलाइन मिस कर रहा है और आप उसे बस हंसकर छोड़ रहे हैं तो आप अपनी कंपनी नहीं बल्कि एक चैरिटी चला रहे हैं। और यकीन मानिए चैरिटी से घर नहीं चलता।

एक साहब ने अपनी कंपनी शुरू की और अपने सारे दोस्तों को भर्ती कर लिया। उन्हें लगा कि दोस्ती है तो काम तो हो ही जाएगा। नतीजा यह हुआ कि ऑफिस कम और पिकनिक स्पॉट ज्यादा लगने लगा। जब काम बिगड़ा तो दोस्त ने कहा कि अरे भाई इतना क्यों गुस्सा हो रहे हो। यहां माइकल का वो उसूल काम आता है कि बिजनेस को कभी पर्सनल भावनाओं से मत चलाओ। अगर कोई आपकी टीम की चेन की कमजोर कड़ी है तो उसे हटाना ही समझदारी है वरना वो पूरी चेन को तोड़ देगा।

सच्ची वफादारी तब आती है जब आपकी टीम को पता हो कि उनके एफर्ट्स की वैल्यू है। माइकल फ्रान्जीस अपनी टीम को वो इज्जत और रिवॉर्ड देते थे जिसके वो हकदार थे। अगर आप चाहते हैं कि आपका स्टाफ रात के २ बजे भी आपके एक कॉल पर काम के लिए खड़ा हो जाए तो आपको पहले खुद को एक लीडर के रूप में साबित करना होगा। लीडर वो नहीं जो एडाप्टर और केबल मांगता फिरे बल्कि वो जो अपनी टीम को रास्ता दिखाए और उन्हें प्रोटेक्ट करे। जब डिसिप्लिन और लॉयल्टी का कॉम्बिनेशन मिलता है तभी एक छोटा सा स्टार्टअप एक बड़ा अंपायर बनता है।


लेसन ३ : फेलियर से बाउंस बैक करना

जिंदगी में कभी न कभी ऐसा मोड़ आता है जब आपको लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है। माइकल फ्रान्जीस के लिए वो मोड़ तब आया जब उनके अपने ही लोग उनके खिलाफ हो गए और उन्हें जेल जाना पड़ा। सोचिए एक आदमी जो हर हफ्ते करोड़ों रुपये कमा रहा था और जिसकी एक आवाज पर शहर कांपता था वो अचानक एक छोटी सी कोठरी में बंद हो गया। ज्यादातर लोग ऐसी सिचुएशन में टूट जाते हैं और अपनी किस्मत को कोसने लगते हैं। पर माइकल ने वहां से बाउंस बैक किया।

आजकल के इन्फ्लुएंसर्स को देखिए। अगर उनके एक पोस्ट पर लाइक्स कम आ जाएं तो वो डिप्रेशन में चले जाते हैं। माइकल कहते हैं कि असली मर्द वो नहीं जो कभी गिरता नहीं बल्कि वो है जो गिरने के बाद धूल झाड़कर दोबारा खड़ा होता है और पहले से ज्यादा ताकतवर बनकर उभरता है। जब वो जेल से बाहर आए तो उनके पास दो रास्ते थे। या तो वो पुराने क्राइम की दुनिया में वापस चले जाते या फिर एक बिल्कुल नई और लीगल शुरुआत करते। उन्होंने दूसरा रास्ता चुना जो कि सबसे मुश्किल था।

बिजनेस में फेलियर का मतलब यह नहीं है कि आपका आईडिया खराब था। कभी-कभी मार्केट की सिचुएशन या आपकी टाइमिंग गलत हो सकती है। लोग अक्सर फेल होने के बाद हार मान लेते हैं क्योंकि उन्हें डर लगता है कि दुनिया क्या कहेगी। अरे भाई दुनिया तो तब भी कहेगी जब आप सफल हो जाओगे। माइकल ने अपनी पास्ट की गलतियों से सीखा और उन्हें अपनी ताकत बनाया। उन्होंने अपनी मॉब लाइफ की स्ट्रेटेजी को कॉर्पोरेट वर्ल्ड में सिखाना शुरू किया। इसे ही कहते हैं आपदा को अवसर में बदलना।

एक बार एक यंग लड़के ने अपना पूरा पैसा एक स्टार्टअप में लगा दिया और वो डूब गया। उसने मुझसे कहा कि भाई अब तो सब खत्म हो गया। मैंने उससे बस एक ही सवाल पूछा कि क्या तुम्हारे पास वो दिमाग और वो तजुर्बा अभी भी है जिससे तुमने वो पैसे कमाए थे। उसने कहा हां। तो फिर डर कैसा। पैसा तो फिर से कमाया जा सकता है पर अगर आप अपनी हिम्मत हार गए तो वो वापस नहीं आएगी। माइकल फ्रान्जीस आज एक सक्सेसफुल स्पीकर और ऑथर हैं क्योंकि उन्होंने अपनी हार को अपना लेसन बनाया न कि अपना अंत।

बाउंस बैक करने के लिए आपको अपने ईगो को साइड में रखना पड़ता है। माइकल जैसे बड़े बॉस के लिए दूसरों से सलाह लेना या जीरो से शुरुआत करना आसान नहीं था। पर उन्होंने यह किया। अगर आप भी किसी बिजनेस में फेल हुए हैं तो यह मत सोचिए कि आप लूजर हैं। बस यह सोचिए कि आपने अभी एक बहुत महंगी ट्यूशन फीस भरी है जिससे आपको वो सबक मिला है जो किसी कॉलेज में नहीं मिलता। याद रखिए कि शेर जब दो कदम पीछे हटता है तो वो डरता नहीं है बल्कि वो एक लंबी छलांग की तैयारी कर रहा होता है। अपनी छलांग की तैयारी करिए और दुनिया को दिखा दीजिए कि आप किस मिट्टी के बने हैं।


तो दोस्तों, क्या आप भी अपनी लाइफ में एक ऐसा ऑफर तैयार करने के लिए तैयार हैं जिसे कोई मना न कर सके। माइकल फ्रान्जीस की यह कहानी हमें सिखाती है कि चाहे बैकग्राउंड कैसा भी हो अगर आपमें डिसिप्लिन और बाउंस बैक करने का जज्बा है तो आप आसमान छू सकते हैं। नीचे कमेंट्स में मुझे बताइए कि इन ३ लेसन्स में से कौन सा लेसन आपकी लाइफ की सिचुएशन से सबसे ज्यादा मैच करता है। इस ब्लॉग को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो लाइफ में एक बड़ा कमबैक करना चाहते हैं।

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