Hundred Percenters (Hindi)


क्या आप भी अपनी टीम को बच्चों की तरह पैम्पर कर रहे हैं और फिर भी रिजल्ट्स जीरो हैं। मुबारक हो, आप एक फेल लीडर बनने की राह पर हैं और आपकी कंपनी डूबेगी ही। अगर आपको लगता है कि सिर्फ मीठी बातें करने से काम होगा, तो आप बहुत बड़े धोखे में जी रहे हैं।

आज हम मार्क मर्फी की किताब हंड्रेड परसेंटर्स से वे राज खोलेंगे, जो आपको एक सॉफ्ट और कमजोर बॉस से बदलकर एक ऐसा लीडर बना देंगे जिसके लिए लोग अपना बेस्ट देने को तरसेंगे। चलिए, इन ३ जरूरी लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : चेलेंज ही असली फ्यूल है

क्या आपको लगता है कि आपकी टीम को आसान काम देकर आप उन पर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हैं। अगर हाँ, तो सच मानिए आप अपनी टीम के सबसे बड़े दुश्मन हैं। मार्क मर्फी अपनी किताब में साफ कहते हैं कि लोग आसान काम से नहीं, बल्कि चेलेंज से प्यार करते हैं। सोचिए, अगर आपको दिन भर सिर्फ कागज पर स्टैम्प लगाने का काम दिया जाए, तो क्या आप ऑफिस जाने के लिए एक्साइटेड होंगे। बिलकुल नहीं। आप शायद लंच ब्रेक का इंतजार करते हुए अपनी जिंदगी को कोसेंगे। हंड्रेड परसेंटर्स वे लोग होते हैं जो मुश्किलों को देखकर डरते नहीं, बल्कि उनका शिकार करते हैं।

जरा अपने ऑफिस के उस शर्मा जी को देखिए। वे पिछले दस साल से वही एक काम कर रहे हैं जो एक पांच साल का बच्चा भी कर सकता है। क्या वे खुश हैं। नहीं, वे बस एक जिंदा लाश की तरह ऑफिस आते हैं और समोसे खाकर घर चले जाते हैं। असल में इंसानी दिमाग एक अजीब मशीन है। इसे जितना आराम दोगे, यह उतना ही जंग खाएगा। जब आप अपने एम्प्लोयी को ऐसे टास्क देते हैं जो उनकी पहुंच से थोड़े बाहर हों, तब उनका असली टैलेंट बाहर आता है। इसे मर्फी चेलेंजिंग गोल्स कहते हैं। यह वैसा ही है जैसे जिम में भारी वजन उठाना। शुरू में दर्द होता है, लेकिन मसल्स तभी बनते हैं।

अगर आप अपनी टीम को सिर्फ वही काम दे रहे हैं जो वे आसानी से कर सकते हैं, तो आप उन्हें एवरेज रहने का लाइसेंस दे रहे हैं। और याद रखिए, एवरेज लोग एवरेज रिजल्ट ही देते हैं। एक असली लीडर वह नहीं है जो रास्ता आसान बना दे, बल्कि वह है जो अपनी टीम को उस रास्ते पर दौड़ने के लायक बना दे। अपनी टीम को कंफर्ट जोन की मखमली रजाई से बाहर खींचिए। उन्हें वह काम दीजिए जिसे करने में उनकी पसीने छूट जाएं, लेकिन जब वे उसे पूरा करें, तो उनके चेहरे पर वह जीत वाली स्माइल हो।

कुछ मैनेजर्स को लगता है कि एम्प्लोयी को खुश रखने का मतलब है उन्हें कम काम देना। भाई, आप ऑफिस चला रहे हैं या कोई चैरिटी संस्था। लोग काम करने के पैसे लेते हैं, और काम तभी होता है जब वहां कोई गोल हो। जब आप गोल को ऊंचा रखते हैं, तो जो लोग सच में कुछ करना चाहते हैं, वे आपके साथ रुकेंगे। और जो सिर्फ सैलरी के लिए आते हैं, वे खुद ही रास्ता नाप लेंगे। यह एक तरह का फिल्टर है जो कचरे को साफ कर देता है और आपके पास बचते हैं असली हीरे।

इसलिए अगली बार जब आप मीटिंग में हों, तो यह मत पूछिए कि काम कितना आसान है। बल्कि यह देखिए कि क्या यह काम आपकी टीम को कुछ नया सिखा रहा है। क्या यह उन्हें उनके डर से लड़ना सिखा रहा है। अगर जवाब ना है, तो समझ जाइए कि आप एक फेल टीम तैयार कर रहे हैं। हंड्रेड परसेंटर बनने के लिए मेहनत की आग में तपना पड़ता है, और एक लीडर के तौर पर आपका काम उस आग को जलाए रखना है।


लेसन २ : सच बोलने की हिम्मत जुटाओ

क्या आप भी उन मैनेजर्स में से हैं जो अपने एम्प्लोयी की गलती देखकर भी मुस्कुराते रहते हैं और पीठ पीछे उनकी बुराई करते हैं। मार्क मर्फी इसे सॉफ्ट सोपिंग कहते हैं। हम इंडियंस की सबसे बड़ी बीमारी यही है कि हम किसी का दिल नहीं दुखाना चाहते। लेकिन भाई, यह बिजनेस है, कोई फैमिली ड्रामा नहीं। अगर आपका एम्प्लोयी कचरा काम कर रहा है और आप उसे कह रहे हैं कि बेटा कोई बात नहीं अगली बार अच्छा करना, तो आप खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। सच तो यह है कि उस एम्प्लोयी को भी पता है कि उसने काम खराब किया है, लेकिन आपकी चुप्पी उसे और आलसी बना रही है।

सोचिए, अगर आपका डॉक्टर आपको यह न बताए कि आपको शुगर है क्योंकि वह आपको दुखी नहीं करना चाहता, तो क्या वह अच्छा डॉक्टर है। बिलकुल नहीं, वह एक कातिल है। ठीक वैसे ही, एक लीडर जो सीधा फीडबैक नहीं देता, वह अपनी टीम के करियर का कत्ल कर रहा है। हंड्रेड परसेंटर्स को मीठी गोलियां नहीं, बल्कि कड़वा सच चाहिए होता है। उन्हें पता होना चाहिए कि वे कहाँ खड़े हैं। अगर वे फेल हो रहे हैं, तो उन्हें यह बात साफ शब्दों में पता होनी चाहिए। बिना किसी लाग लपेट के। बिना किसी शुगर कोटिंग के।

हमारे यहाँ फीडबैक का मतलब होता है सैंडविच मेथड। पहले तारीफ करो, फिर बीच में थोड़ी बुराई घुसाओ और फिर तारीफ के साथ खत्म करो। रिजल्ट क्या निकलता है। एम्प्लोयी सिर्फ तारीफें लेकर घर जाता है और जो जरूरी बात थी, वह तो ऑफिस के एयर कंडीशनर की हवा में कहीं खो जाती है। मार्क मर्फी कहते हैं कि इस नाटक को बंद करो। अगर काम बुरा है, तो बोलो कि काम बुरा है। इसमें एम्प्लोयी की बेइज्जती नहीं है, बल्कि यह उसे बेहतर बनने का एक मौका देना है।

अक्सर मैनेजर्स को डर लगता है कि कहीं एम्प्लोयी बुरा न मान जाए या नौकरी न छोड़ दे। अरे भाई, जो सच सुनने की हिम्मत नहीं रखता, वह आपकी टीम में होना ही नहीं चाहिए। जो हंड्रेड परसेंटर होगा, वह आपकी बात को समझेगा और उसे सुधारने के लिए जी जान लगा देगा। और जो कमजोर होगा, वह रोएगा और चला जाएगा। आपका काम रोने वालों को चुप कराना नहीं, बल्कि जीतने वालों को तैयार करना है। जब आप अपनी टीम में सच बोलने का कल्चर बनाते हैं, तो वहां पॉलिटिक्स खत्म हो जाती है और सिर्फ परफॉरमेंस बचती है।

याद रखिए, इमानदारी से दिया गया फीडबैक एक गिफ्ट की तरह होता है। इसे देने में कंजूसी मत कीजिए। जब आप किसी को बताते हैं कि उसकी गलती कहाँ है, तो आप उसे ग्रो करने का रास्ता दिखा रहे होते हैं। तो अगली बार जब कोई फाइल आपके डेस्क पर आए जो आपके स्टैंडर्ड के हिसाब से न हो, तो उसे रिजेक्ट करने से डरो मत। उसे बताओ कि इसमें क्या कमी है और उसे फिर से करने को कहो। यही एक असली लीडर की पहचान है जो अपनी टीम को एवरेज से ऊपर उठाकर एक्सीलेंस की तरफ ले जाता है।


लेसन ३ : विजन के बिना सब बेकार है

क्या आपको लगता है कि आपकी टीम सिर्फ इसलिए काम करती है क्योंकि आप उन्हें महीने के आखिर में सैलरी देते हैं। अगर आपका जवाब हाँ है, तो आप दुनिया के सबसे बड़े मुगालते में जी रहे हैं। मार्क मर्फी कहते हैं कि लोग पैसों के लिए नौकरी जॉइन करते हैं, लेकिन अपना हंड्रेड परसेंट वे सिर्फ एक विजन के लिए देते हैं। अगर आपकी टीम को यही नहीं पता कि वे जो एक्सेल शीट भर रहे हैं या जो कोडिंग कर रहे हैं, उसका बड़े लेवल पर क्या असर होने वाला है, तो वे बस घड़ी की सुइयां देखेंगे। वे ऑफिस सिर्फ हाजिरी लगाने आएंगे, अपना दिमाग और दिल घर छोड़कर।

जरा सोचिए, एक ईंट ढोने वाले से पूछो कि तुम क्या कर रहे हो। पहला कहेगा कि मै ईंटें उठा रहा हूँ क्योंकि मुझे दिहाड़ी चाहिए। दूसरा कहेगा कि मै एक दीवार बना रहा हूँ। लेकिन तीसरा, जिसके पास विजन है, वह कहेगा कि मै एक भव्य मंदिर बना रहा हूँ जहाँ हजारों लोग शांति पाएंगे। अब आप ही बताइए, सबसे ज्यादा मेहनत और लगन से काम कौन करेगा। जाहिर है तीसरा वाला। हंड्रेड परसेंटर्स को वह मंदिर दिखाना एक लीडर का काम है। अगर आप उन्हें सिर्फ ईंटें गिनवाते रहेंगे, तो वे जल्दी ही बोर हो जाएंगे और फिर आपको दोष देंगे कि टीम मोटिवेटेड नहीं है।

ज्यादातर कंपनियों का विजन क्या होता है। अगले साल तक हमें अपना प्रॉफिट बीस परसेंट बढ़ाना है। वाह। क्या क्रांतिकारी बात कही है आपने। क्या आपको सच में लगता है कि एक एम्प्लोयी सुबह सात बजे इसलिए उठेगा ताकि आपके बैंक बैलेंस में कुछ एक्स्ट्रा जीरो जुड़ सकें। उसे घंटा फर्क नहीं पड़ता कि आपका प्रॉफिट कितना बढ़ा। उसे फर्क पड़ता है इस बात से कि उसका काम दुनिया में क्या बदलाव ला रहा है। अगर आप उसे यह महसूस नहीं करा सकते कि वह एक बड़े मिशन का हिस्सा है, तो आप एक लीडर नहीं, सिर्फ एक मुनीम हैं।

हंड्रेड परसेंटर बनने का मतलब है अपने काम में मतलब ढूंढना। जब एक एम्प्लोयी को लगता है कि उसकी वजह से किसी कस्टमर की लाइफ आसान हो रही है, या वह किसी बड़ी प्रॉब्लम को सॉल्व कर रहा है, तो उसकी एनर्जी का लेवल ही बदल जाता है। तब उसे धक्का देने की जरूरत नहीं पड़ती, वह खुद इंजन बन जाता है। लीडर के तौर पर आपकी जिम्मेदारी है कि आप उस विजन को बार बार दोहराएं। उसे मीटिंग्स के बोरिंग पीपीटी से निकालकर असलियत में लाएं। हर काम को बड़े मकसद से जोड़िए।

बात बस इतनी सी है कि एक लीडर तभी सफल होता है जब उसकी टीम उसे फॉलो नहीं, बल्कि उसके विजन को ओन करती है। जब लोग आपके लिए नहीं, बल्कि खुद के लिए और उस बड़े गोल के लिए काम करने लगें, तब समझ लेना कि आपने हंड्रेड परसेंटर्स की फौज तैयार कर ली है। अब फैसला आपके हाथ में है। आप एक ऐसी टीम चाहते हैं जो सिर्फ हुक्म का इंतजार करे, या ऐसी टीम जो दुनिया बदलने का दम रखे। अपनी टीम को वह विजन दीजिए जिसके लिए वे अपनी पूरी ताकत झोंक दें।


मार्क मर्फी की यह किताब हमें सिखाती है कि लीडरशिप कोई ओहदा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। जिम्मेदारी अपनी टीम को उनकी लिमिट से आगे ले जाने की। अगर आप आज भी पुराने घिसे पिटे तरीकों से मैनेज कर रहे हैं, तो रुकिए और सोचिए। क्या आप अपनी टीम को ग्रो कर रहे हैं या उन्हें अपाहिज बना रहे हैं। उठिए, उन्हें चेलेंज दीजिए, सच बोलिए और एक बड़ा विजन दिखाइए। तभी आप और आपकी टीम हंड्रेड परसेंटर्स बन पाएंगे।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#Leadership #SuccessMindset #TeamManagement #BookSummary #DYBooks


_

Post a Comment

Previous Post Next Post