Inbound Marketing (Hindi)


क्या आप अभी भी पुराने जमाने के सेल्समैन की तरह लोगों को कॉल करके परेशान कर रहे हैं। सच तो यह है कि लोग आपसे नफरत करते हैं और आपकी मार्केटिंग कचरे के डिब्बे में जा रही है। अगर आप खुद को गूगल पर नहीं ला पाए तो आपका बिजनेस जल्दी ही गायब होने वाला है।

इस आर्टिकल में हम ब्रायन हॉलिगन और धर्मेश शाह की बुक से सीखेंगे कि कैसे मॉडर्न दुनिया में बिना किसी को परेशान किए आप अपने बिजनेस को टॉप पर ले जा सकते हैं। चलिए जानते हैं वह 3 लेसन जो आपकी ग्रोथ बदल देंगे।


लेसन १ : डिस्टर्ब मत करो अट्रैक्ट करो

आज के टाइम में अगर आप किसी को अनजान नंबर से कॉल करते हैं तो वह आपको दुआएं नहीं देता। बल्कि वह मन ही मन आपको और आपकी कंपनी को कोसता है। पुराने जमाने की मार्केटिंग ऐसी ही थी। टीवी पर एड्स चलाकर लोगों का कीमती शो खराब करना। या फिर अखबार के बीच में पम्फलेट्स ठूस देना जिसे लोग बिना पढ़े समोसे रखने के काम में लाते हैं। ब्रायन हॉलिगन और धर्मेश शाह कहते हैं कि यह आउटबाउंड मार्केटिंग अब आईसीयू में है। लोग अब उन चीजों को ब्लॉक कर देते हैं जो उन्हें डिस्टर्ब करती हैं।

सोचिए आप अपने घर में शांति से डिनर कर रहे हैं। तभी फोन बजता है और कोई आपको पर्सनल लोन चिपकाने की कोशिश करता है। आपको कैसा लगता है। यकीनन आप उसे फोन पर ही सुना देते होंगे। यही हाल आपके कस्टमर्स का भी है। इनबाउंड मार्केटिंग का असली मतलब है कि आप लोगों के पीछे मत भागिए। बल्कि कुछ ऐसा कमाल का बनाइए कि लोग खुद आपको ढूंढते हुए आएं। जैसे एक फूल कभी मधुमक्खी को कॉल नहीं करता। वह बस अपनी खुशबू फैलाता है और मधुमक्खियां खुद दौड़ी चली आती हैं। आपको भी अपने बिजनेस के लिए वही खुशबू यानी कीमती कंटेंट तैयार करना है।

आजकल का कस्टमर बहुत स्मार्ट हो गया है। उसे अगर जूता भी खरीदना होता है तो वह पहले गूगल पर सर्च करता है। वह रिव्यूज पढ़ता है और वीडियो देखता है। अगर आप उस वक्त उसे सही जानकारी दे देते हैं तो आप उसकी नजर में हीरो बन जाते हैं। इसे ही कहते हैं अट्रैक्ट करना। जब आप लोगों की लाइफ में वैल्यू ऐड करते हैं तो वे आप पर भरोसा करने लगते हैं। यह भरोसा ही आगे चलकर सेल में बदलता है।

मान लीजिए आपकी एक जिम है। आप सड़कों पर पर्चे बंटवाते हैं जिसे लोग डस्टबिन में डाल देते हैं। यह हुआ डिस्टर्ब करना। अब इसकी जगह आप इंस्टाग्राम पर वीडियो डालते हैं कि घर पर बिना मशीन के वजन कैसे घटाएं। लोग आपकी टिप्स को फॉलो करते हैं और उन्हें रिजल्ट मिलता है। अब जब उन्हें जिम ज्वाइन करना होगा तो वे किसके पास जाएंगे। जाहिर है आपके पास। क्योंकि आपने उन्हें पहले ही कुछ अच्छा सिखाया है। आपने उनका दिल जीता है ना कि उनका मूड खराब किया है।

इसलिए अपनी मार्केटिंग को ऐसा बनाइए कि लोग उसे खुद देखना चाहें। जब आप लोगों को परेशान करना बंद कर देते हैं और उनकी मदद करना शुरू करते हैं तब असली इनबाउंड मार्केटिंग शुरू होती है। याद रखिए कि सेल्स एक शादी की तरह है। आप पहले दिन ही किसी को प्रपोज नहीं कर सकते। पहले आपको दोस्ती करनी पड़ती है और भरोसा जीतना पड़ता है।


लेसन २ : सर्च इंजन और सोशल मीडिया का जादू

अगर आपकी दुकान शहर के सबसे मशहूर चौक पर है पर वहां तक पहुंचने का रास्ता किसी को नहीं पता तो उस दुकान का क्या फायदा। इंटरनेट की दुनिया में गूगल वह रास्ता है जो कस्टमर को आपकी दुकान तक लाता है। ब्रायन और धर्मेश समझाते हैं कि आज के दौर में अगर आप गूगल के पहले पेज पर नहीं हैं तो आप असल में एग्जिस्ट ही नहीं करते। लोग गूगल पर अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढते हैं। कोई यह नहीं सर्च करता कि मुझे आज पैसे बर्बाद करने हैं। बल्कि वह सर्च करता है कि बेस्ट बजट फोन कौन सा है। अगर आपकी वेबसाइट वहां दिख गई तो समझिए आपकी लॉटरी लग गई।

गूगल एक ऐसा जिन्न है जो सिर्फ उन्हीं को इनाम देता है जो क्वालिटी कंटेंट बनाते हैं। लोग अक्सर कीवर्ड्स के पीछे पागलों की तरह भागते हैं। वे सोचते हैं कि बार बार एक ही शब्द लिखने से उनकी वेबसाइट टॉप पर आ जाएगी। पर गूगल अब बहुत होशियार हो चुका है। वह समझ जाता है कि आप उसे बेवकूफ बना रहे हैं। वह सिर्फ उन्हें पसंद करता है जो असली जानकारी देते हैं। सोशल मीडिया भी कुछ ऐसा ही है। यह सिर्फ फोटो डालने की जगह नहीं है बल्कि यह एक बहुत बड़ी महफिल है। अगर आप वहां जाकर सिर्फ चिल्लाएंगे कि मेरा सामान खरीद लो तो लोग आपको अनफॉलो कर देंगे।

इमेजिन करिए कि आप एक पार्टी में गए हैं। वहां एक बंदा है जो सिर्फ अपने बारे में बात कर रहा है और जबरदस्ती सबको अपना बिजनेस कार्ड बांट रहा है। आप उससे दूर भागेंगे। वहीं दूसरा बंदा है जो सबकी बातें सुन रहा है और अच्छी सलाह दे रहा है। आप उससे बात करना चाहेंगे। सोशल मीडिया पर आपका ब्रांड वही दूसरा बंदा होना चाहिए। जब आप फेसबुक या इंस्टाग्राम पर लोगों के सवालों के जवाब देते हैं या उन्हें कुछ नया सिखाते हैं तो आप एक कम्युनिटी बनाते हैं। यह कम्युनिटी ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।

मान लीजिए आप एक इंटीरियर डिजाइनर हैं। आप हर रोज अपनी साइट पर ब्लॉग लिखते हैं कि छोटे कमरों को बड़ा कैसे दिखाएं। गूगल को लगता है कि आप इस विषय के डॉक्टर हैं। जब भी कोई दिल्ली में बेस्ट डिजाइनर सर्च करेगा तो गूगल आपका नाम सबसे ऊपर रखेगा। उधर सोशल मीडिया पर आप सुंदर कमरों के वीडियो डालते हैं। लोग उसे शेयर करते हैं और अपने दोस्तों को टैग करते हैं। अब आपको एड्स पर पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है। गूगल और सोशल मीडिया आपके लिए फ्री में मार्केटिंग कर रहे हैं।

आजकल के जमाने में अटेंशन ही असली पैसा है। अगर आप लोगों का ध्यान खींचना चाहते हैं तो आपको उनके काम का बनना होगा। जब आप सर्च इंजन और सोशल मीडिया को सही से इस्तेमाल करते हैं तो आप एक मैग्नेट बन जाते हैं। लोग खुद आपको खोजते हुए आते हैं और पूछते हैं कि क्या हम आपके साथ काम कर सकते हैं। यह पावर है इनबाउंड मार्केटिंग की जो आपको एक गुमनाम ब्रांड से एक सेलिब्रिटी ब्रांड बना देती है।


लेसन ३ : रिलेशन्स बनाओ सिर्फ सेल्स नहीं

ज्यादातर बिजनेस की सबसे बड़ी गलती यह है कि वे कस्टमर को सिर्फ एक चलते फिरते बटुए की तरह देखते हैं। जैसे ही पैसा हाथ में आया वह कस्टमर को भूल जाते हैं। लेकिन इनबाउंड मार्केटिंग कहती है कि सेल तो सिर्फ एक शुरुआत है। असली खेल तो उसके बाद शुरू होता है। ब्रायन और धर्मेश का मानना है कि आपको अपने कस्टमर का हाथ तब तक नहीं छोड़ना चाहिए जब तक वह आपका पक्का फैन न बन जाए। एक खुश कस्टमर दस नए कस्टमर्स लेकर आता है पर एक नाराज कस्टमर आपके बिजनेस के सत्तर दरवाजे बंद कर सकता है।

सोचिए आप किसी रेस्टोरेंट में गए और खाना बहुत ही शानदार था। लेकिन जब बिल देने की बारी आई तो वेटर ने आपके साथ बदतमीजी की। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे। कभी नहीं। मार्केटिंग में भी यही होता है। आप बड़े बड़े वादे करके कस्टमर को बुला तो लेते हैं पर अगर आपका व्यवहार और सर्विस अच्छी नहीं है तो वह दोबारा मुड़कर नहीं देखेगा। आपको अपने कस्टमर्स के साथ एक गहरा रिश्ता बनाना होगा। उन्हें लगना चाहिए कि आप सिर्फ उनका फायदा नहीं देख रहे बल्कि आप सच में उनकी परवाह करते हैं।

मान लीजिए आपकी एक सॉफ्टवेयर कंपनी है। आपने एक क्लाइंट को अपना प्रोडक्ट बेच दिया। अब आप उसे हर हफ्ते ईमेल भेजकर पूछते हैं कि क्या उसे कोई दिक्कत तो नहीं आ रही। आप उसे फ्री में टिप्स भेजते हैं कि वह आपके सॉफ्टवेयर से अपना काम और आसान कैसे कर सकता है। यह देखकर क्लाइंट गदगद हो जाएगा। वह सोचेगा कि यह बंदा सिर्फ पैसे के पीछे नहीं है। अब जब भी उसके किसी दोस्त को सॉफ्टवेयर की जरूरत होगी तो वह सबसे पहले आपका नाम लेगा।

आज के सोशल मीडिया वाले युग में लोग रिव्यूज पढ़कर चीजें खरीदते हैं। अगर आपने अपने पुराने कस्टमर्स का दिल जीता है तो वे आपके लिए इंटरनेट पर अच्छे रिव्यूज की फौज खड़ी कर देंगे। यह फ्री की मार्केटिंग करोड़ों के विज्ञापनों से ज्यादा असरदार होती है। याद रखिए कि लोग सामान नहीं खरीदते बल्कि वे एहसास और भरोसा खरीदते हैं। जब आप लोगों की मदद करते हैं और उन्हें स्पेशल महसूस कराते हैं तो वे आपके ब्रांड के साथ इमोशनली जुड़ जाते हैं।

सबसे जरूरी बात यही है कि मार्केटिंग सिर्फ दिमाग का नहीं बल्कि दिल का खेल भी है। आप जितने ज्यादा लोगों की निस्वार्थ भाव से मदद करेंगे आपका बिजनेस उतना ही बड़ा होता जाएगा। इनबाउंड मार्केटिंग कोई जादुई छड़ी नहीं है जिसे घुमाया और सब ठीक हो गया। यह एक पौधा लगाने जैसा है जिसे हर रोज भरोसे और प्यार के पानी से सींचना पड़ता है। जब यह पेड़ बड़ा होता है तो यह आपको जिंदगी भर मीठे फल देता रहता है।


इनबाउंड मार्केटिंग का यह सफर हमें सिखाता है कि शोर मचाने से ज्यादा जरूरी है सही बात कहना। जब आप लोगों को डिस्टर्ब करना बंद करके उन्हें अट्रैक्ट करना शुरू करते हैं तो कामयाबी खुद आपके कदम चूमती है। अपनी मार्केटिंग में ईमानदारी लाइए और लोगों की समस्याओं का असली समाधान बनिए।

क्या आप अभी भी पुरानी मार्केटिंग के पीछे भाग रहे हैं या आपने अपनी खुशबू फैलाना शुरू कर दिया है। नीचे कमेंट्स में बताएं कि इनबाउंड मार्केटिंग का कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा पसंद आया और आप इसे अपने बिजनेस में कैसे इस्तेमाल करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपने बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं।

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