It's Not the Big That Eat the Small It's the Fast That Eat the Slow (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बड़ी कंपनी और मोटा पैसा ही मार्केट में टिकने का एकमात्र रास्ता है। अगर हाँ तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का इंतजार कर रहे हैं। जबकि आप अपनी पुरानी और भारी भरकम प्लानिंग में उलझे हैं तब तक कोई छोटा खिलाडी आकर आपकी पूरी दुकान समेट कर ले जाएगा और आप बस हाथ मलते रह जाएंगे।

आज के दौर में जीत उसकी नहीं होती जिसके पास सबसे ज्यादा पावर है बल्कि उसकी होती है जिसके पैरों में सबसे ज्यादा बिजली है। अगर आप भी धीमी रफ्तार के साथ खुद को सेफ समझ रहे हैं तो यह गलतफहमी आपको बहुत महंगी पड़ने वाली है। चलिए देखते हैं इस किताब के वो ३ कीमती लेसन जो आपको स्लो मोशन से बाहर निकालकर सुपरफास्ट बना देंगे।


Lesson : फैसले लेने की रफ्तार ही असली ताकत है

दोस्तो, अगर आपको लगता है कि किसी बड़े फैसले को लेने के लिए दस मीटिंग्स, पचास ईमेल और एक पूरी कमेटी की मंजूरी चाहिए, तो समझ लीजिए कि आपने अपनी हार के पेपर पर साइन कर दिए हैं। जेसन जेनिंग्स इस किताब में एक बहुत कड़वा सच बताते हैं। मार्केट में अब वो जमाना चला गया जब बड़ी मछलियां छोटी मछलियों को खा जाती थीं। अब जमाना उनका है जो तेज हैं। जो कंपनी या इंसान बिजली की तेजी से फैसला लेता है, वही असली बाजी मारता है।

अब अपने शर्मा जी को ही देख लीजिए। शर्मा जी ने सोचा कि वो अपनी मिठाई की दुकान का एक ऐप बनवाएंगे। अब इस नेक काम के लिए उन्होंने पहले पंडित जी से मूहूर्त निकलवाया। फिर तीन महीने तक इस बात पर रिसर्च की कि ऐप का रंग नीला होना चाहिए या गुलाबी। जब तक शर्मा जी रंग और मूहूर्त के चक्कर में उलझे रहे, तब तक पड़ोस के चिंटू ने एक सिंपल सा व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर आधे शहर को अपनी दुकान से जोड़ लिया। अब शर्मा जी हाथ में नीले रंग का चार्ट लिए बैठे हैं और चिंटू धड़ाधड़ समोसे बेच रहा है। यही फर्क है एक स्लो दिग्गज और एक फास्ट खिलाडी में।

आज के दौर में परफेक्शन से ज्यादा जरूरी है प्रोग्रेस। बहुत से लोग इस डर में बैठे रहते हैं कि अगर फैसला गलत हो गया तो क्या होगा। भाई साहब, गलत फैसला लेकर उसे सुधारना फिर भी मुमकिन है, लेकिन फैसला ही न लेना सीधे सुसाइड करने जैसा है। जो कंपनियां बड़ी होती हैं, वो अक्सर अपनी ही लेयर्स में दब जाती हैं। एक फाइल को आगे बढ़ाने के लिए दस टेबल पार करनी पड़ती हैं। इतने में तो दुनिया बदल जाती है।

अगर आप एक लीडर बनना चाहते हैं, तो अपनी टीम को यह पावर दीजिए कि वो छोटे फैसले खुद ले सकें। हर बात के लिए बॉस की परमिशन का इंतजार करना मतलब अपनी रफ्तार को ब्रेक लगाना है। जिस दिन आपने सोचने और करने के बीच का समय कम कर दिया, समझ लीजिए कि आपने आधी लड़ाई जीत ली। स्पीड कोई जादू नहीं है, यह एक माइंडसेट है। यह वो हिम्मत है जो आपसे कहती है कि अभी करो, अभी शुरू करो। याद रखिए, दुनिया उन लोगों के लिए नहीं रुकती जो बेस्ट होने का इंतजार करते हैं, बल्कि उनके पीछे भागती है जो सबसे पहले मैदान में उतरते हैं।

अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे फालतू के तामझाम को हटाकर आप अपने काम को रॉकेट की तरह उड़ा सकते हैं।


Lesson : फालतू का रायता समेटो और सिस्टम को सिंपल बनाओ

अगर आपके ऑफिस में एक पेन खरीदने के लिए भी तीन फॉर्म भरने पड़ते हैं और चार मैनेजरों की जी-हजुरी करनी पड़ती है, तो बधाई हो, आप एक स्लो कछुए की सवारी कर रहे हैं। जेसन जेनिंग्स कहते हैं कि अक्सर कंपनियां खुद को इतना कॉम्प्लिकेटेड बना लेती हैं कि उनका दम ही निकल जाता है। काम को बड़ा दिखाने के चक्कर में लोग उसे इतना उलझा देते हैं कि असली मकसद ही पीछे छूट जाता है। स्पीड का सबसे बड़ा दुश्मन है कॉम्प्लेक्सिटी यानी कि फालतू का तामझाम।

इसे ऐसे समझिए जैसे हमारे प्यारे चड्ढा साहब की कंपनी। चड्ढा साहब को लगता है कि जितनी लंबी मीटिंग होगी, काम उतना ही सॉलिड होगा। उनके यहाँ एक छोटी सी प्रॉब्लम डिस्कस करने के लिए लंच से लेकर डिनर तक का समय लग जाता है। लोग काम की बात कम और समोसे की चटनी पर ज्यादा चर्चा करते हैं। अंत में नतीजा क्या निकलता है? जीरो। चड्ढा साहब को लगता है कि वो बहुत बिजी हैं, लेकिन असल में वो बस गोल-गोल घूम रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ एक स्मार्ट स्टार्टअप वाला बंदा आता है, दो मिनट का कॉल करता है, बात खत्म करता है और काम शुरू कर देता है।

स्पीड बढ़ाने का सीक्रेट यह नहीं है कि आप पागलों की तरह भागें, बल्कि सीक्रेट यह है कि आप उन रुकावटों को हटा दें जो आपको रोक रही हैं। फालतू की रिपोर्टिंग, लंबी चौड़ी ईमेल की चैन और वो मीटिंग्स जिनका कोई अंत नहीं है, ये सब आपके बिजनेस के लिए स्लो पॉइजन हैं। अगर कोई काम दो स्टेप में हो सकता है, तो उसके लिए पांच स्टेप क्यों बनाना? क्या आप कोई सरकारी दफ्तर खोलकर बैठे हैं?

जब आप सिस्टम को सिंपल रखते हैं, तो जानकारी ऊपर से नीचे तक बिजली की तरह पहुंचती है। हर इंसान को पता होता है कि उसे क्या करना है। वहां कन्फ्यूजन की कोई जगह नहीं होती। याद रखिए, दुनिया में सादगी से ज्यादा पावरफुल कुछ नहीं है। अगर आपका प्रोसेस इतना आसान है कि एक बच्चा भी उसे समझ ले, तो समझ लीजिए कि आपकी रफ्तार को अब कोई नहीं रोक सकता। सादगी का मतलब आलस नहीं है, बल्कि यह फालतू के शोर को कम करके काम पर फोकस करना है।

अब जब आप अपने सिस्टम को हल्का कर चुके हैं, तो अगले लेसन में हम बात करेंगे कि कैसे आने वाले कल पर नजर रखकर आप दूसरों से दस कदम आगे रह सकते हैं।


Lesson : कल की आहट को आज ही पहचानो और दौड़ पड़ो

अगर आप इस इंतजार में बैठे हैं कि जब मार्केट बदलेगा तब हम भी बदल जाएंगे, तो दोस्त आप उस ड्राइवर की तरह हैं जो एक्सीडेंट होने के बाद ब्रेक मारता है। जेसन जेनिंग्स का तीसरा सबसे बड़ा लेसन है - एंटिसिपेशन यानी आने वाले कल का अंदाजा लगाना। जो कंपनियां सिर्फ आज के मुनाफे में खोई रहती हैं, वो कल के इतिहास के पन्नों में खो जाती हैं। तेजी का मतलब सिर्फ हाथ-पैर जल्दी चलाना नहीं है, बल्कि अपनी आंखों को भविष्य पर टिकाए रखना है।

मान लीजिए हमारे वर्मा जी की एक बहुत बड़ी वीडियो कैसेट की दुकान थी। वर्मा जी को लगता था कि लोग हमेशा उनके पास आकर कैसेट ही मांगेंगे। जब सीडी और डीवीडी का जमाना आया, वर्मा जी बोले - अरे छोडो, यह सब तो बस शौक है, असली मजा तो कैसेट में ही है। फिर आया नेटफ्लिक्स और यूट्यूब का दौर। अब वर्मा जी अपनी दुकान के बाहर बैठकर पुरानी यादों के कैसेट खुद ही देख रहे हैं, क्योंकि ग्राहक तो अब बिजली की तेजी से डिजिटल हो चुके हैं। वर्मा जी ने बदलाव को देखा तो सही, लेकिन बहुत देर से पहचाना।

सक्सेसफुल होने के लिए आपको उन बदलावों को भांपना होगा जो अभी तक आए भी नहीं हैं। अगर आप अपनी पुरानी जीत का जश्न मनाते रहेंगे, तो कोई नया खिलाड़ी आकर आपका सारा खेल बिगाड़ देगा। मार्केट में टिकने के लिए आपको हर वक्त यह सवाल पूछना होगा - इसके बाद क्या? क्या कस्टमर को कल भी यही चाहिए होगा जो आज चाहिए? अगर जवाब नहीं है, तो आज से ही बदलना शुरू कर दीजिए।

स्पीड का असली फायदा वही उठाता है जो फिनिश लाइन को दूसरों से पहले देख लेता है। कल जो होने वाला है, उसकी तैयारी आज ही करना ही आपको सबसे तेज बनाता है। डरो मत कि आप गलत हो सकते हो, बस इस बात से डरो कि आप पीछे छूट सकते हो। अपनी टीम को ऐसे तैयार करो कि वो आने वाली चुनौतियों को देखकर घबराएं नहीं, बल्कि उन्हें एक मौके की तरह लपक लें। याद रखिए, समय किसी का सगा नहीं होता, यह सिर्फ उनका साथ देता है जो इसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं, या फिर इससे भी दो कदम आगे रहते हैं।


तो दोस्तो, अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप एक भारी भरकम हाथी बनकर धीरे-धीरे लुप्त होना चाहते हैं, या एक चीते की तरह तेज रफ्तार पकड़कर मार्केट पर राज करना चाहते हैं? याद रखिए, आपकी डिग्री, आपका पैसा और आपका तजुर्बा धरा का धरा रह जाएगा अगर आपके पास रफ्तार नहीं है। आज ही अपने काम करने के तरीके को देखिए, फालतू की कड़ियों को तोड़िए और बिजली की तेजी से फैसले लेना शुरू कीजिए। क्योंकि इस दुनिया में अब सिर्फ वही टिकेगा जो सबसे तेज दौड़ेगा।

अगर आपको आज का यह लेसन पावरफुल लगा हो, तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो अब भी स्लो मोशन में जी रहा है। कमेंट में बताइए कि आप अपने बिजनेस या लाइफ में कौन सा एक बदलाव आज से ही शुरू करने वाले हैं। चलिए, साथ मिलकर रफ्तार पकड़ते हैं।

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