आप अभी भी घंटों बैठकर दुनिया की सबसे बेहतरीन स्ट्रेटेजी बना रहे हैं और सोच रहे हैं कि आप अगले अंबानी बन जाएंगे? बहुत बड़े धोखे में हैं आप। आपकी ये कीमती प्लानिंग कचरे के डिब्बे में जाएगी क्योंकि आपको इसे लागू करना ही नहीं आता। क्या आपको फेल होने का शौक है?
आज हम लॉरेंस ह्रेबिनियाक की मशहूर किताब मेकिंग स्ट्रेटेजी वर्क से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपके किताबी प्लान को हकीकत में बदल देंगे। ये तीन लेसन आपके काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल देंगे और आपको एक असली लीडर बनाएंगे।
लेसन १ : एक्सेक्यूशन ही असली किंग है
ज्यादातर लोग लाइफ में सिर्फ खयाली पुलाव पकाते हैं। उनके पास एक ऐसी जादुई स्ट्रेटेजी होती है जो रातों रात उनकी कंपनी को चाँद पर पहुँचा देगी। लेकिन हकीकत यह है कि जब सुबह ऑफिस की घंटी बजती है तो उन्हें समझ ही नहीं आता कि पहला कदम कहाँ रखना है। लॉरेंस ह्रेबिनियाक अपनी इस किताब में एक बहुत बड़ी कड़वी सच्चाई बताते हैं। वह कहते हैं कि दुनिया के सबसे शानदार आइडियाज भी तब तक रद्दी हैं जब तक उनका एक्सेक्यूशन यानी उन्हें लागू करने का तरीका दमदार न हो। हम में से बहुत से लोग प्लानिंग के तो उस्ताद होते हैं। हम सुंदर स्लाइड्स बनाते हैं। बढ़िया प्रेजेंटेशन देते हैं। मीटिंग्स में बड़ी बड़ी बातें करते हैं। लेकिन जब बात आती है काम को ज़मीन पर उतारने की तो सबकी हवा निकल जाती है। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे आप एक जिम की मेंबरशिप लें और पहले दिन ही प्रोटीन पाउडर का डिब्बा खरीद लें पर कसरत के नाम पर आपसे एक पुशअप भी न लगे।
स्ट्रेटेजी बनाना आसान है क्योंकि वह दिमाग का खेल है। लेकिन उसे चलाना मुश्किल है क्योंकि वह डिसिप्लिन और एक्शन का खेल है। सोचिये आपके पास एक बहुत ही महंगी और चमकदार स्पोर्ट्स कार है। उसका इंजन टॉप क्लास है और लुक ऐसा कि पड़ोसी जल भुन जाएं। लेकिन अगर उस कार के पहिये ही नहीं हैं या आपको उसे चलाना ही नहीं आता तो वह आपके गैराज में खड़ी धूल ही फाँटेगी। यही हाल आपकी उन भारी भरकम स्ट्रेटेजीज का होता है जो फाइलों में बंद होकर अलमारी की शोभा बढ़ाती हैं। लोग सोचते हैं कि अगर प्लान अच्छा है तो वह अपने आप काम करेगा। भाई साहब यहाँ कोई जादू की छड़ी नहीं चल रही है।
अक्सर लीडर्स को लगता है कि उनका काम सिर्फ आर्डर देना है। उन्हें लगता है कि एक बार बोर्डरूम में तालियाँ बज गईं तो समझो जंग जीत ली। पर असली जंग तो तब शुरू होती है जब आपकी टीम उस प्लान को लेकर मार्केट में उतरती है। वहां रोज़ नयी मुश्किलें आती हैं और रोज़ पसीना बहता है। अगर आप सिर्फ ऊपर बैठकर हुकुम चला रहे हैं और आपको यह नहीं पता कि ग्राउंड पर क्या चल रहा है तो आपकी स्ट्रेटेजी फेल होने के लिए ही बनी है। एक्सेक्यूशन का मतलब है हर उस छोटी बाधा को हटाना जो आपके गोल के बीच में आ रही है। यह कोई एक दिन का इवेंट नहीं है बल्कि यह एक लगातार चलने वाली प्रोसेस है।
मान लीजिये आपने एक नया रेस्टोरेंट खोला। आपने शेफ बहुत महंगा रखा और इंटीरियर पर करोड़ों खर्च किये। यह आपकी स्ट्रेटेजी थी। लेकिन अगर वेटर कस्टमर को पानी देना भूल जाए या खाना आने में एक घंटा लग जाए तो आपका सारा खर्चा बेकार है। वह वेटर जो कस्टमर के सामने खड़ा है वही आपकी स्ट्रेटेजी का असली चेहरा है। अगर वह अपना काम ठीक से नहीं कर रहा तो आपकी बड़ी बड़ी प्लानिंग सिर्फ कागज़ पर ही अच्छी लगेगी। एक्सेक्यूशन वह पुल है जो आपके विजन और आपके रिजल्ट्स को आपस में जोड़ता है। बिना इस पुल के आप सिर्फ किनारे पर बैठकर लहरें गिनते रह जाएंगे।
ह्रेबिनियाक हमें याद दिलाते हैं कि एक औसत दर्जे की स्ट्रेटेजी अगर बेहतरीन तरीके से लागू की जाए तो वह उस शानदार स्ट्रेटेजी से कहीं ज्यादा बेहतर है जो कभी लागू ही नहीं हुई। अपनी ईगो को साइड में रखिये और यह मानना शुरू कीजिये कि असली हीरो प्लान नहीं बल्कि वह इंसान है जो उस प्लान को पूरा करता है। आपको एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ काम करने वालों को सिर्फ यह न पता हो कि क्या करना है बल्कि यह भी पता हो कि उसे कैसे करना है। जब तक आप एक्सेक्यूशन को अपनी पूजा नहीं बनाएंगे तब तक आप सिर्फ एक एवरेज लीडर ही बने रहेंगे।
लेसन २ : आर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर और पावर
जब आप पहला लेसन समझकर एक्सेक्यूशन के लिए मैदान में उतरते हैं तो आपका सामना एक बहुत बड़ी दीवार से होता है और वह है आपकी कंपनी का ढांचा। लॉरेंस ह्रेबिनियाक कहते हैं कि अगर आपकी स्ट्रेटेजी नयी है लेकिन आपका काम करने का तरीका वही पुराना और सड़ा हुआ है तो भूल जाइए कि कुछ बदलेगा। लोग अक्सर सोचते हैं कि सिर्फ जोश भरने से काम हो जाएगा। लेकिन भाई साहब अगर आपने एक रेसिंग कार के इंजन को बैलगाड़ी के ढांचे में फिट कर दिया है तो वह कार तेज़ नहीं भागेगी बल्कि बीच रास्ते में टूट जाएगी। स्ट्रक्चर का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि कौन किसको रिपोर्ट करेगा। इसका असली मतलब यह है कि क्या आपके लोग उस नए लक्ष्य को पाने के लिए आज़ाद हैं?
अक्सर कंपनियों में 'पावर' कुछ गिने चुने लोगों के हाथों में बंद होती है। ये वो लोग होते हैं जिन्हें बदलाव से डर लगता है क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी कुर्सी हिल जाएगी। अब सोचिये आपने प्लान बनाया कि हमें कस्टमर सर्विस को रॉकेट की तरह तेज़ करना है। लेकिन अगर एक छोटे से रिफंड के लिए वेटर को मैनेजर से और मैनेजर को मालिक से पूछना पड़े तो आपकी वह तेज़ सर्विस वाली स्ट्रेटेजी दम तोड़ देगी। यहाँ आपका स्ट्रक्चर ही आपकी ग्रोथ का दुश्मन बन गया है। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे आप डाइटिंग करने की कसम खाएं लेकिन आपके फ्रिज में हमेशा समोसे और मिठाई भरी रहे। जब तक आप अपने आस पास का माहौल यानी स्ट्रक्चर नहीं बदलेंगे आपकी कसम धरी की धरी रह जाएगी।
ह्रेबिनियाक एक और गहरी बात बताते हैं कि पावर और जिम्मेदारी साथ साथ चलनी चाहिए। हमारे यहाँ सिस्टम क्या है? काम की जिम्मेदारी जूनियर की और मलाई खाने की पावर सीनियर की। जब तक आप उस इंसान को फैसला लेने की ताकत नहीं देंगे जो असली काम कर रहा है तब तक आपकी फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक ही घूमती रहेंगी। यह जो लाल फीताशाही और बाबूगिरी वाला कल्चर है यह किसी भी अच्छी स्ट्रेटेजी के लिए ज़हर है। आपको अपनी टीम को यह भरोसा दिलाना होगा कि अगर वे कुछ नया करने के लिए रिस्क लेते हैं तो उन्हें दबाया नहीं जाएगा।
अक्सर जब कोई कंपनी अपनी स्ट्रेटेजी बदलती है तो उसे अपने डिपार्टमेंट्स के बीच की दीवारें भी गिरानी पड़ती हैं। सेल्स वाले मार्केटिंग वालों से बात नहीं करते और प्रोडक्शन वालों को क्वालिटी वालों से चिढ़ होती है। ये सब अपनी अपनी रियासतें बनाकर बैठे होते हैं। अगर आपकी कंपनी के अंदर ही महाभारत चल रही है तो आप बाहर की दुनिया से खाक लड़ेंगे? एक सफल लीडर वही है जो इन दीवारों को तोड़कर सबको एक ही दिशा में मोड़ दे। स्ट्रक्चर ऐसा होना चाहिए जो काम को रोके नहीं बल्कि उसे रफ़्तार दे।
आपको अपनी टीम में पावर का बंटवारा इस तरह करना होगा कि हर कोई खुद को मालिक समझे न कि सिर्फ एक नौकर। जब तक लोगों को यह महसूस नहीं होगा कि उनके पास बदलाव लाने की असली पावर है तब तक वे सिर्फ उतना ही काम करेंगे जिससे उनकी नौकरी बची रहे। ह्रेबिनियाक की यह सीख साफ़ है कि अगर आप अपनी मंजिल बदलना चाहते हैं तो आपको अपना रास्ता और अपनी सवारी दोनों बदलनी पड़ेगी। पुरानी जर्जर सवारी पर बैठकर आप नई ऊंचाइयों को नहीं छू सकते।
लेसन ३ : कंट्रोल और इंसेंटिव्स का रोल
अब मान लीजिये आपने बेहतरीन एक्सेक्यूशन प्लान बना लिया और स्ट्रक्चर भी सेट कर दिया। लेकिन क्या गारंटी है कि आपके लोग उसी जोश के साथ काम करते रहेंगे? यहीं पर काम आता है कंट्रोल और इंसेंटिव्स का सही कॉम्बिनेशन। लॉरेंस ह्रेबिनियाक कहते हैं कि बिना रिवार्ड के किसी से काम की उम्मीद करना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के गाड़ी चलाने की कोशिश करना। अगर आप अपनी टीम से चाहते हैं कि वे पहाड़ तोड़ दें पर बदले में आप उन्हें सिर्फ एक कप चाय और शाबाशी दे रहे हैं तो यकीन मानिए अगले दिन से वे पहाड़ तो क्या एक कंकड़ भी नहीं छुएंगे।
इंसानी फितरत बहुत सिंपल है। हम वही काम करते हैं जिसके लिए हमें फायदा दिखता है। अगर आपकी स्ट्रेटेजी कहती है कि हमें क्वालिटी पर ध्यान देना है लेकिन आप बोनस सिर्फ ज्यादा माल बेचने पर दे रहे हैं तो आपकी टीम क्वालिटी को कचरे में फेंक देगी और सिर्फ नंबर्स के पीछे भागेगी। इसे कहते हैं गलत इंसेंटिव्स। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे आप अपने बच्चे को कहें कि सेहत बनाना जरूरी है पर उसे इनाम में हर रोज़ पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक खिलाएं। आपका रिवार्ड सिस्टम आपकी स्ट्रेटेजी के साथ तालमेल में होना चाहिए।
कंट्रोल का मतलब यह नहीं है कि आप सीसीटीवी कैमरा लगाकर बैठ जाएं और हर किसी की सांसें गिनें। असली कंट्रोल का मतलब है 'फीडबैक लूप'। आपको यह पता होना चाहिए कि जो काम आपने शुरू किया था वह सही दिशा में जा रहा है या नहीं। अगर कहीं कोई गड़बड़ हो रही है तो उसे तुरंत पकड़ना और सुधारना जरूरी है। कई लीडर्स को लगता है कि एक बार काम सौंप दिया तो बस खत्म। पर भाई साहब अगर आप रास्ते में मैप नहीं देखेंगे तो आप कहीं भी पहुँच सकते हैं सिवाय अपनी मंजिल के। आपको ऐसे मीटर और स्केल बनाने होंगे जो साफ़ बता सकें कि प्रोग्रेस कितनी हुई है।
सफलता सिर्फ बड़े गोल्स अचीव करने में नहीं है बल्कि छोटे छोटे स्टेप्स को सेलिब्रेट करने में भी है। जब लोगों को पता होता है कि उनकी मेहनत को नोटिस किया जा रहा है और सही समय पर उन्हें उसका फल मिलेगा तो वे अपना दिल और जान उस काम में झोंक देते हैं। ह्रेबिनियाक हमें यह समझाते हैं कि कंट्रोल डर से नहीं बल्कि डेटा और भरोसे से आना चाहिए। जब आपकी टीम को साफ़ दिखेगा कि उनके अच्छे काम से कंपनी और उनका खुद का फायदा जुड़ा है तो आपकी स्ट्रेटेजी को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
अंत में यह याद रखिये कि एक महान लीडर वह नहीं है जो सिर्फ सपने देखता है बल्कि वह है जो उन सपनों को पूरा करने के लिए एक सटीक सिस्टम बनाता है। स्ट्रेटेजी सिर्फ दिमाग का खेल नहीं है यह आपके व्यवहार और आपकी टीम के पसीने का नतीजा है। अब समय आ गया है कि आप अपनी उन धूल फाँटती फाइलों को बाहर निकालें और उन्हें सच में लागू करने की हिम्मत जुटाएं।
स्ट्रेटेजी बनाना एक आर्ट है लेकिन उसे हकीकत में बदलना एक तपस्या है। क्या आप आज भी सिर्फ प्लानिंग के बहाने अपने फेलियर को छुपा रहे हैं या आप सच में बदलाव के लिए तैयार हैं? नीचे कमेंट्स में हमें बताइये कि आपकी सबसे बड़ी चुनौती एक्सेक्यूशन है या प्लानिंग। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा बड़े बड़े आइडियाज तो देता है पर करता कुछ नहीं है। चलिए आज से सिर्फ बातें नहीं काम शुरू करते हैं।
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