Managing for the Long Run (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि दादा का बनाया बिजनेस पोते तक पहुँचते ही डूब जाएगा। अगर आप सिर्फ आज के प्रॉफिट के पीछे भाग रहे हैं और लॉन्ग टर्म विजन गायब है तो बधाई हो आप बहुत जल्द मार्केट से बाहर होने वाले हैं। अपनी ईगो और पुराने ढर्रे को पकड़कर बैठे रहिए और देखते रहिए कि कैसे छोटे स्टार्टअप्स आपकी सल्तनत को उखाड़ फेंकते हैं।

पीटर ड्रकर की यह किताब हमें सिखाती है कि महान फैमिली बिजनेस सदियों तक कैसे राज करते हैं। आज हम उन 3 खास लेसन्स पर बात करेंगे जो आपके बिजनेस को अमर बना सकते हैं और आपको कॉम्पिटिटिव एडवांटेज दिलाएंगे।


लेसन १ : प्रॉफिट का लालच छोड़ो और लंबी रेस के घोड़े बनो

अक्सर लोग बिजनेस इसलिए शुरू करते हैं क्योंकि उन्हें अगले महीने नई गाड़ी लेनी होती है या पड़ोस वाले शर्मा जी को नीचा दिखाना होता है। लेकिन पीटर ड्रकर साहब अपनी इस किताब में साफ कहते हैं कि अगर आप सिर्फ अगले क्वार्टर के नंबर्स देख रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं जुआ खेल रहे हैं। महान फैमिली बिजनेस कभी भी कल की कमाई के लिए आज की इज्जत दांव पर नहीं लगाते। उनका पूरा फोकस कंटिन्यूटी यानी लगातार बने रहने पर होता है।

मान लीजिए आपके शहर में एक मशहूर हलवाई की दुकान है जो पिछले 80 सालों से चल रही है। अब वहां का मालिक अगर ये सोचे कि दूध में थोड़ा पानी मिला देता हूँ तो आज का मुनाफा 20 परसेंट बढ़ जाएगा तो शायद वो आज तो अमीर हो जाए पर अगले साल तक उसकी दुकान पर ताला लग जाएगा। फैमिली बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वे जानते हैं कि उन्हें यह गद्दी अपने बच्चों को सौंपनी है। इसलिए वे ऐसे फैसले लेते हैं जो आज थोड़े कड़वे लगें पर 20 साल बाद मीठा फल दें।

आजकल के कई मॉडर्न स्टार्टअप्स को देखिए। वे आते हैं बहुत सारा पैसा जलाते हैं और दो साल बाद गायब हो जाते हैं। क्यों। क्योंकि उनका मकसद मार्केट जीतना नहीं बल्कि खुद को ऊंचे दाम पर बेचकर निकल जाना होता है। इसे कहते हैं शॉर्ट टर्म सोच। ड्रकर बताते हैं कि जो बिजनेस टिके रहते हैं वे अक्सर मंदी के समय भी अपने कर्मचारियों को नहीं निकालते। वे जानते हैं कि स्किल्ड लोग ही उनकी असली संपत्ति हैं। वे कैश बचाकर रखते हैं ताकि जब बुरा वक्त आए तो उन्हें बैंक के सामने हाथ न फैलाना पड़े।

आज के जमाने में लोग एक रिलेशनशिप छह महीने नहीं टिक पा रहे और ड्रकर साहब हमसे सदियों पुराना बिजनेस चलाने की बात कर रहे हैं। लेकिन सच तो यही है कि अगर आप अपने कस्टमर के साथ सिर्फ एक ट्रांजेक्शन का रिश्ता रखेंगे तो वो आपको भूल जाएगा। अगर आप उसे एक वैल्यू देंगे तो वो आपके पास बार बार आएगा। कॉम्पिटिटिव एडवांटेज कोई जादुई छड़ी नहीं है। यह बस इस बात का नतीजा है कि आप अपने कॉम्पिटिटर से ज्यादा धैर्य रखते हैं।

जब पूरी दुनिया पागलों की तरह भाग रही हो तब आप रुककर अपनी जड़ें मजबूत कीजिए। याद रखिए कि बरगद का पेड़ एक दिन में खड़ा नहीं होता पर जब खड़ा होता है तो बड़ी से बड़ी आंधी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाती। आपका बिजनेस भी ऐसा ही होना चाहिए जिसे हिलाना नामुमकिन हो। क्या आप सिर्फ आज का पेट भरने के लिए काम कर रहे हैं या एक ऐसी विरासत छोड़ना चाहते हैं जिस पर आपके पोते गर्व करें। फैसला आपका है क्योंकि बिना विजन के आप सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा हैं।


लेसन २ : अपनी जड़ों को पकड़ो और कल्चर को ढाल बनाओ

आजकल हर दूसरे बिजनेस ओनर को लगता है कि बस एक चकाचक ऑफिस और महँगे सॉफ्टवेयर लगा लेने से उनकी कंपनी नंबर वन बन जाएगी। लोग भूल जाते हैं कि लोहा मशीन नहीं बल्कि उसे चलाने वाला इंसान और उसकी सोच होती है। पीटर ड्रकर साहब कहते हैं कि महान फैमिली बिजनेस की सबसे बड़ी पावर उनका वैल्यू बेस्ड कल्चर होता है। यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप किसी कंसल्टेंट से खरीद सकें या किसी वर्कशॉप में सीख सकें। यह तो रगों में दौड़ता है।

कल्पना कीजिए एक ऐसी कंपनी की जहाँ बॉस से लेकर चपरासी तक सबको पता है कि चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए हम क्वालिटी से समझौता नहीं करेंगे। अब ऐसे माहौल में अगर कोई नया लड़का आकर कहे कि सर थोड़ा घटिया माल लगा देते हैं सस्ता पड़ेगा तो बाकी टीम ही उसे बाहर का रास्ता दिखा देगी। इसे कहते हैं कल्चर की ताकत। सफल फैमिली बिजनेस में लोग सिर्फ सैलरी के लिए काम नहीं करते बल्कि वे उस लेगेसी का हिस्सा महसूस करते हैं। जब कर्मचारी को लगता है कि यह घर जैसा है तो वो अपना खून पसीना एक कर देता है।

मान लीजिए आप किसी पुश्तैनी साड़ी की दुकान पर जाते हैं। वहां का सेल्समैन आपको ऐसे अटेंड करेगा जैसे आप उसके घर के दामाद हों। वो आपको चाय पिलाएगा आपकी पसंद समझेगा और शायद दो घंटे बात करने के बाद आप बिना कुछ खरीदे भी निकल जाएं तो भी वो मुस्कुराकर आपको विदा करेगा। क्यों। क्योंकि उसे मालिक ने सिखाया है कि ग्राहक सिर्फ पैसा देने वाली मशीन नहीं बल्कि एक रिश्ता है। दूसरी तरफ किसी बड़े मॉडर्न शोरूम में जाइए जहाँ टारगेट के मारे सेल्समैन आपको ऐसे घूरते हैं जैसे आपने उनकी किडनी मांग ली हो। अब आप ही बताइए आप दोबारा कहाँ जाना चाहेंगे।

ड्रकर समझाते हैं कि कॉम्पिटिटिव एडवांटेज इसी भरोसे से आता है। जब मार्केट में मंदी आती है और हर कोई डिस्काउंट के पीछे भाग रहा होता है तब आपका कल्चर ही आपको बचाता है। आपके कस्टमर्स को पता होता है कि आप उन्हें धोखा नहीं देंगे। लेकिन आजकल के कूल दिखने वाले आंत्रप्रेन्योर्स को लगता है कि वैल्यूज और एथिक्स की बातें सिर्फ किताबों में अच्छी लगती हैं। असल जिंदगी में तो जुगाड़ चलता है। यही वो मोड़ है जहाँ वे गलती करते हैं और ड्रकर साहब उन पर मन ही मन हंस रहे होते हैं।

अगर आपके बिजनेस का कोई उसूल नहीं है तो आपकी कोई पहचान भी नहीं है। बिना पहचान के आप बस एक और ऐसी दुकान हैं जो आज खुली है और कल बंद हो सकती है। लोग ब्रांड्स से नहीं बल्कि कहानियों और भरोसे से जुड़ते हैं। महान फैमिली बिजनेस अपनी कहानियों को जिन्दा रखते हैं। वे अपनी गलतियों से सीखते हैं और अपनी सफलताओं को अपनी परंपरा बना लेते हैं। क्या आपके पास ऐसी कोई वैल्यू है जिसके लिए आप नुकसान सहने को भी तैयार हैं। अगर नहीं तो साहब आप अभी तक बिजनेस की एबीसीडी भी नहीं सीखे हैं।


लेसन ३ : परंपरा को पालो पर बदलाव से डरो मत

कई लोग समझते हैं कि फैमिली बिजनेस का मतलब है वही पुरानी मेज वही पुराना हिसाब का रजिस्टर और वही घिसी पिटी सोच। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो आप ड्रकर साहब की इस फिलॉसफी को बिलकुल नहीं समझे। महान बिजनेस अपनी जड़ों को तो पकड़कर रखते हैं पर अपनी डालियों को आसमान छूने के लिए खुला छोड़ देते हैं। असली कॉम्पिटिटिव एडवांटेज तब आता है जब आप अपनी सालों पुरानी साख को आज की नई टेक्नोलॉजी के साथ मिला देते हैं। इसे कहते हैं स्मार्ट इवोल्यूशन।

सोचिए उस मिठाई वाले के बारे में जिसका जिक्र हमने पहले किया था। अगर वो आज भी सिर्फ दुकान पर बैठकर ग्राहक का इंतजार करे तो शायद वो पिछड़ जाएगा। लेकिन अगर वही मिठाई वाला अपनी शुद्धता को बरकरार रखते हुए अपनी वेबसाइट बना ले और इंस्टाग्राम पर अपनी मेकिंग की वीडियो डालने लगे तो वो ग्लोबली छा जाएगा। यहाँ परंपरा वही रही पर तरीका बदल गया। ड्रकर कहते हैं कि जो बिजनेस वक्त के साथ खुद को अपडेट नहीं करते वक्त उन्हें कूड़ेदान में डाल देता है। फिर चाहे आपका खानदान कितना ही बड़ा क्यों न हो।

कुछ लोग बदलाव के नाम पर अपनी आत्मा ही बेच देते हैं। वे सोचते हैं कि नया दिखने के लिए उन्हें अपनी पुरानी वैल्यूज छोड़नी पड़ेंगी। यह वैसा ही है जैसे कोई अपनी नानी की हाथ की बनी दाल की रेसिपी छोड़कर पैकेट वाला सूप बेचने लगे सिर्फ इसलिए क्योंकि वो मॉडर्न दिखना चाहता है। यह बेवकूफी है। असली टैलेंट इसमें है कि आप अपनी कोर स्ट्रेंथ को न छोड़ें बल्कि उसे नए लिबास में पेश करें। अगर आपकी ताकत ईमानदारी है तो उसे एआई के दौर में और भी ज्यादा मजबूती से दिखाएं।

ड्रकर ने गौर किया कि सफल फैमिली बिजनेस अक्सर बहुत ही बारीक संतुलन बनाकर चलते हैं। वे इनोवेशन से नहीं डरते पर वे बिना सोचे समझे हर नई चमकती चीज के पीछे भी नहीं भागते। वे पहले देखते हैं कि क्या यह नया बदलाव उनके लॉन्ग टर्म विजन में फिट बैठता है। आज के दौर में जहाँ हर कोई चैट जीपीटी और ऑटोमेशन के पीछे पागल है वहां अगर आप अपनी सर्विस में वो पुराना इंसानी टच बनाए रखते हैं तो वही आपका सबसे बड़ा हथियार बन जाता है। लोग रोबोट से नहीं बल्कि इंसानों से जुड़ना चाहते हैं।

अंत में बात वही आती है कि क्या आप सिर्फ एक दुकानदार हैं या एक लेगेसी के रखवाले। मैनेजिंग फॉर द लॉन्ग रन हमें सिखाती है कि बिजनेस सिर्फ पैसा छापने का जरिया नहीं बल्कि समाज में एक छाप छोड़ने का तरीका है। अगर आप इन तीन लेसन्स को अपनी जिंदगी और काम में उतार लेते हैं तो यकीन मानिए आपको हराना नामुमकिन होगा। तो अब उठिए अपने शॉर्ट टर्म चश्मे को उतारिए और दूर की कौड़ी देखिए। क्या आप तैयार हैं अपने बिजनेस को एक ऐसी मिसाल बनाने के लिए जो आपके जाने के बाद भी सदियों तक लोगों के दिलों में धड़कती रहे।

याद रखिए रेस वही जीतता है जो अंत तक मैदान में टिका रहता है।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#BusinessStrategy #FamilyBusiness #PeterDrucker #LongTermSuccess #EntrepreneurshipIndia


_

Post a Comment

Previous Post Next Post