Meatball Sundae (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो घटिया प्रोडक्ट पर करोड़ों का विज्ञापन चलाकर खुद को मार्केटिंग जीनियस समझते हैं। बधाई हो आप अपनी मेहनत की कमाई को नाली में बहा रहे हैं क्योंकि बिना सही तालमेल के मार्केटिंग करना मीटबॉल के ऊपर आइसक्रीम डालना है। लोग आप पर हँस रहे हैं और आपको पता भी नहीं है।

आज के इस ब्लॉग में हम सेठ गोडिन की मशहूर किताब मीटबॉल संडे की गहराई में उतरेंगे। हम उन ३ बड़े लेसन को समझेंगे जो आपके डूबते हुए मार्केटिंग प्लान को फिर से जिंदा कर सकते हैं और आपको असली सक्सेस दिलाएंगे।


लेसन १ : मार्केटिंग मिक्स और इंटरनेट का सही तालमेल

मान लीजिए आपको एक बहुत ही आलीशान पार्टी में जाना है और आप वहां पहुँचने के लिए एकदम ब्रांड न्यू फेरारी रेंट पर लेते हैं। गाड़ी चमक रही है और इंजन की आवाज सुनकर पड़ोसियों को जलन हो रही है। लेकिन एक छोटी सी दिक्कत है। आप उस फेरारी में इंजन आयल की जगह सरसों का तेल डाल देते हैं। अब आप सोच रहे हैं कि गाड़ी चलेगी क्यों नहीं। भाई साहब यही हाल आज के कल के मार्केटिंग गुरुओं का है। वो नए जमाने के इंटरनेट टूल्स को पुराने जमाने के घटिया प्रोडक्ट्स के साथ मिक्स करने की कोशिश कर रहे हैं। सेठ गोडिन इसी अजीब कॉम्बिनेशन को मीटबॉल संडे कहते हैं। मीटबॉल यानी आपका पुराना और बोरिंग बिजनेस मॉडल और संडे यानी वो मीठी और चमकीली डिजिटल मार्केटिंग जो आप ऊपर से थोप रहे हैं। अब आप ही बताइए क्या दुनिया में कोई भी समझदार इंसान मीटबॉल के ऊपर चॉकलेट सिरप और चेरी डालकर खाना पसंद करेगा। सुनने में ही उल्टी आ रही है ना। तो फिर आप अपने बिजनेस के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं।

आजकल हर दूसरे स्टार्टअप फाउंडर को लगता है कि अगर उनका सेल नहीं हो रहा है तो बस फेसबुक पर एक एड चला दो और रातों रात पैसा बरसने लगेगा। अरे भाई अगर आपका प्रोडक्ट ही एवरेज है और उसमें कोई खास बात नहीं है तो इंटरनेट सिर्फ आपकी बेइज्जती को और तेज रफ्तार से फैलाएगा। पुराने जमाने में टीवी एड्स चलते थे क्योंकि तब लोगों के पास ऑप्शन कम थे। लोग वही देखते थे जो दिखाया जाता था। लेकिन आज कस्टमर बहुत चालाक हो गया है। वो आपके उस झूठे संडे को एक सेकंड में पहचान लेता है। अगर आपके बिजनेस की बुनियाद इंटरनेट के हिसाब से नहीं बनी है तो आप चाहे कितना भी पैसा फूँक लें नतीजा जीरो ही रहेगा। इंटरनेट कोई जादू की छड़ी नहीं है जो आपके बेकार आईडिया को सोना बना दे। यह तो सिर्फ एक बड़ा लाउडस्पीकर है। अगर आप बकवास करेंगे तो यह पूरी दुनिया को जोर से सुना देगा कि आप बकवास कर रहे हैं।

असल में मार्केटिंग का मतलब अब सिर्फ एड्स बेचना नहीं रह गया है। अब आपको अपने प्रोडक्ट के अंदर ही मार्केटिंग को घोलना होगा। आपको कुछ ऐसा बनाना होगा जो खुद अपनी कहानी कहे। लोग अक्सर पूछते हैं कि भाई वायरल कैसे होते हैं। वायरल होने के लिए आपको अपनी उस पुरानी मीटबॉल वाली सोच को कचरे के डिब्बे में डालना होगा। आपको समझना होगा कि डिजिटल टूल्स तभी काम करते हैं जब आपका विजन और आपकी सर्विस भी उसी डिजिटल स्पीड से मैच करती हो। अगर आप अभी भी वही पुराना घिसा पिटा काम कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि एआई और सोशल मीडिया आपको बचा लेंगे तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे किसी बैलगाड़ी पर जेट इंजन लगा देना। रफ्तार तो बढ़ेगी लेकिन ढांचा बिखर जाएगा। इसलिए सबसे पहले अपने बेस को सुधारें और फिर उस पर इंटरनेट की आइसक्रीम सजाएं। वरना लोग आपकी मार्केटिंग देखकर सिर्फ हँसेंगे और आगे बढ़ जाएंगे।


लेसन २ : अपनी ऑडियंस के साथ डायरेक्ट कनेक्शन बनाना

सोचिए आप एक अंधेरी गली में खड़े हैं और चिल्ला रहे हैं कि मुझसे सामान खरीद लो। कोई आपको नहीं देख रहा और जो देख रहे हैं वो आपको पागल समझ कर कन्नी काट रहे हैं। पुराने जमाने की मार्केटिंग ऐसी ही थी। बड़े-बड़े ब्रांड्स टीवी पर आकर चिल्लाते थे और हम मजबूरी में उन्हें सुनते थे। लेकिन सेठ गोडिन कहते हैं कि अब वो पावर बिचौलियों और न्यूजपेपर वालों के हाथ से निकलकर आपके हाथ में आ गई है। अब आपको किसी बड़े चैनल को करोड़ों रुपये देने की जरूरत नहीं है कि वो आपकी बात लोगों तक पहुंचाए। लेकिन इस आजादी के साथ एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी आई है। वो है अपने कस्टमर के साथ एक सच्चा और गहरा रिश्ता बनाना। अगर आप अभी भी वही घिसी पिटी ईमेल लिस्ट और स्पैम वाले मैसेज भेज रहे हैं तो आप असल में कनेक्शन नहीं बना रहे बल्कि लोगों को परेशान कर रहे हैं।

आजकल के दौर में अटेंशन ही असली पैसा है। लेकिन दिक्कत यह है कि आप लोगों का अटेंशन जबरदस्ती नहीं छीन सकते। आपको उसे कमाना पड़ता है। मान लीजिए आपके पास एक बहुत ही शानदार बेकरी है। आप चाहे तो पूरे शहर में पर्चे बंटवा सकते हैं जिसमें ९० परसेंट लोग तो उसे बिना पढ़े ही डस्टबिन में डाल देंगे। या फिर आप एक ऐसा तरीका निकाल सकते हैं जिससे लोग खुद आपके पास आएं और कहें कि भाई हमें अपनी नई रेसिपी के बारे में बताओ। इसे ही सेठ गोडिन डायरेक्ट कनेक्शन कहते हैं। जब आप अपने कस्टमर से बिना किसी शोर-शराबे के सीधे बात करते हैं तो आप एक ऐसी अथॉरिटी बन जाते हैं जिसे कोई भी बड़ा एड बजट टक्कर नहीं दे सकता। यह वैसा ही है जैसे एक मोहल्ले का वो दुकानदार जिससे आपके दादाजी भी सामान लेते थे और आप भी लेते हैं। क्यों। क्योंकि वहां एक भरोसा है और वो भरोसा ही असली मार्केटिंग है।

इंटरनेट ने हमें यह मौका दिया है कि हम अपनी एक छोटी ही सही पर बहुत ही वफादार आर्मी तैयार कर सकें। लोग अक्सर नंबर्स के पीछे भागते हैं कि मेरे पास एक लाख फॉलोअर्स होने चाहिए। लेकिन सेठ गोडिन का मानना है कि अगर आपके पास १०० ऐसे लोग हैं जो आपकी बात को पत्थर की लकीर मानते हैं तो आप उन दस लाख लोगों से ज्यादा पावरफुल हैं जो बस आपको स्क्रोल करते हुए देखते हैं। आपको अपने कस्टमर को एक इंसान की तरह ट्रीट करना होगा न कि एक डेटा पॉइंट की तरह। जब आप उनके दुख और उनकी जरूरतों को समझते हैं और बिना किसी स्वार्थ के उन्हें वैल्यू देते हैं तो वो आपके ब्रांड के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते हैं। और यकीन मानिए जब कोई इमोशनली जुड़ता है तो वो कॉम्पिटिशन की तरफ देखता भी नहीं है। इसलिए अपने कस्टमर की बात सुनना शुरू कीजिए न कि सिर्फ अपनी बात सुनाना। अगर आप उनके साथ एक मजबूत धागा बांध लेते हैं तो मार्केट में चाहे कितनी भी मंदी आए आपका बिजनेस कभी नहीं डूबेगा।


लेसन ३ : एवरेज प्रोडक्ट के लिए मास मार्केटिंग अब फेल है

क्या आपने कभी सोचा है कि आप उस रेस्टोरेंट में दोबारा क्यों नहीं जाते जहाँ का खाना बस ठीक-ठाक था। मतलब न तो बहुत बुरा था और न ही बहुत अच्छा। बस एवरेज था। असलियत यह है कि आज की दुनिया में एवरेज होना सबसे बड़ा रिस्क है। सेठ गोडिन कहते हैं कि अगर आप एक ऐसा प्रोडक्ट बना रहे हैं जो सबको पसंद आए तो यकीन मानिए आप कुछ ऐसा बना रहे हैं जो किसी को भी पसंद नहीं आएगा। पुराने जमाने में एवरेज सामान बनाना और उसे टीवी पर खूब प्रमोट करना एक बहुत बढ़िया स्ट्रेटेजी थी। लेकिन आज इंटरनेट की वजह से हर किसी के पास एक माइक्रोस्कोप है। लोग आपके प्रोडक्ट की कमियों को सेकंड्स में ढूंढ निकालते हैं। अगर आपकी सर्विस में वो खास बात नहीं है जो लोगों को हैरान कर दे तो आप चाहे चाँद-तारे तोड़कर लाने वाले एड्स बना लें आपका बिजनेस धड़ाम से गिरेगा।

हममें से ज्यादातर लोग सुरक्षित खेलना चाहते हैं। हम सोचते हैं कि अगर हम कुछ ऐसा बनाएंगे जो थोड़ा-थोड़ा सबको पसंद आए तो हमारी सेल बढ़ जाएगी। लेकिन यहीं हम गलती कर देते हैं। जब आप सबको खुश करने की कोशिश करते हैं तो आप अपनी पहचान खो देते हैं। आप उस भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं जहाँ सब एक जैसे दिखते हैं। और भीड़ में कभी भी पैसा नहीं होता। पैसा हमेशा उस चीज में होता है जो हटकर हो जो रिमार्केबल हो। सोचिए अगर आप एक ऐसी कंपनी चला रहे हैं जो जूते बेचती है। अगर आपके जूते बस वैसे ही हैं जैसे बाजार में मिलने वाले हजार और जूते तो लोग आपके पास क्यों आएंगे। सिर्फ इसलिए क्योंकि आपने इंस्टाग्राम पर एक चमकता हुआ फोटो डाला है। बिल्कुल नहीं। लोग तब आएंगे जब आपके जूतों में कुछ ऐसा हो जिसके बारे में वो अपने दोस्तों को चाय की दुकान पर बता सकें।

आज का कस्टमर बोरियत से नफरत करता है। अगर आपका प्रोडक्ट लोगों की लाइफ में कोई स्पार्क पैदा नहीं कर रहा है तो आप बस एक और मीटबॉल हैं। आपको वो संडे वाली चमक अपने काम के अंदर लानी होगी। मास मार्केटिंग का जमाना अब लद चुका है। अब जमाना है उन लोगों को ढूंढने का जो आपके आईडिया के लिए पागल हो सकें। उन थोड़े से लोगों को खुश कर दीजिए जो आपकी वैल्यू समझते हैं और वो आपके लिए फ्री में मार्केटिंग करेंगे। याद रखिए अगर आप रिस्क नहीं ले रहे हैं और कुछ अलग करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं तो आप धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। एवरेज का मतलब है मौत। इसलिए या तो कुछ ऐसा बनाइये जो लोगों को बोलने पर मजबूर कर दे या फिर चुपचाप अपनी दुकान बढ़ा लीजिए। क्योंकि इंटरनेट के इस समंदर में सिर्फ वही मछलियाँ बचेंगी जो चमकती हैं।


तो दोस्तों, मीटबॉल संडे का असली सच यही है। आप अपनी पुरानी सोच पर इंटरनेट की चाशनी नहीं चढ़ा सकते। आपको अपना पूरा सिस्टम बदलना होगा। आपको अपने कस्टमर से दिल का रिश्ता बनाना होगा और कुछ ऐसा क्रिएट करना होगा जो वाकई में बेमिसाल हो। आज ही अपने बिजनेस और अपने काम को गौर से देखिये। क्या आप भी बस भीड़ का हिस्सा बने हुए हैं। अगर हाँ तो आज ही एक छोटा ही सही पर ठोस कदम उठाइये और अपनी उस पहचान को ढूंढिए जो आपको दूसरों से अलग बनाती है। कमेंट में जरूर बताइये कि आपको इन तीनों लेसन में से कौन सा सबसे ज्यादा पसंद आया और आप इसे अपनी लाइफ में कैसे लागू करेंगे। इस ब्लॉग को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो मार्केटिंग के नाम पर सिर्फ पैसा बर्बाद कर रहे हैं।

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