Judgment (Hindi)


क्या आप भी अपनी लाइफ के फैसले उसी तरह लेते हैं जैसे कोई सिक्का उछालकर अपनी किस्मत दांव पर लगाता है। अगर हां, तो मुबारक हो, आप बहुत जल्द फेलियर की लाइन में सबसे आगे खड़े होने वाले हैं। क्योंकि असली लीडर्स तुक्के नहीं मारते, वो जजमेंट का इस्तेमाल करते हैं जो शायद आपके पास फिलहाल स्टॉक में नहीं है।

आज के इस आर्टिकल में हम नोएल टिची और वॉरेन बेनिस की फेमस बुक जजमेंट के उन सीक्रेट्स को खोलेंगे जो एक साधारण इंसान और एक वर्ल्ड क्लास लीडर के बीच का बड़ा अंतर बताते हैं। चलिए, इन 3 पावरफुल लेसन की गहराई में उतरते हैं।


लेसन १ : जजमेंट कोई जादू की छड़ी नहीं बल्कि एक लंबा प्रोसेस है

अक्सर लोगों को लगता है कि बड़े लीडर्स के दिमाग में अचानक से कोई बिजली कड़कती है और वो एक झटके में करोड़ों का फैसला ले लेते हैं। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो यकीन मानिए आप किसी पुरानी बॉलीवुड फिल्म के हीरो की दुनिया में जी रहे हैं। असल जिंदगी में जजमेंट कोई ऐसी चीज नहीं है जो रात को सोते समय सपने में आ जाए। नोएल टिची और वॉरेन बेनिस कहते हैं कि जजमेंट एक पूरा प्रोसेस है जिसके तीन बड़े हिस्से होते हैं। पहला है तैयारी यानी प्रिपरेशन। दूसरा है फैसला लेना यानी कॉल। और तीसरा है उस फैसले को जमीन पर उतारना यानी एक्जीक्यूशन।

सोचिए आप अपने किसी दोस्त की शादी में जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। आप हफ़्तों पहले से सोचते हैं कि कौन सा कुर्ता पहनना है और कौन से जूते चमकेंगे। यह आपकी तैयारी है। फिर शादी वाले दिन आप फाइनली आईने के सामने खड़े होकर अपना लुक फाइनल करते हैं। यह आपका फैसला है। लेकिन असली जजमेंट तब पता चलता है जब आप शादी में पहुँचते हैं और वहां के फोटोग्राफर आपकी फोटो खींचते हैं। अगर वहां कुर्ता फिट नहीं बैठा या जूतों ने काट लिया तो आपका जजमेंट फेल हो गया। लीडरशिप में भी बिल्कुल ऐसा ही होता है। लोग सिर्फ उस एक पल को देखते हैं जब लीडर हां या ना कहता है। लेकिन उस हां तक पहुँचने के लिए जो मेहनत हुई और उसके बाद जो एक्शन लिया गया वही असली जजमेंट है।

कई बार हमारे ऑफिस के बॉस या घर के बड़े बिना सोचे समझे कोई फरमान सुना देते हैं। फिर जब काम बिगड़ जाता है तो वो सारा दोष किस्मत या अपनी टीम पर मढ़ देते हैं। यह एक घटिया जजमेंट की सबसे बड़ी निशानी है। एक अच्छा लीडर जानता है कि अगर उसने फैसला ले लिया है तो अब उसे सही साबित करने की जिम्मेदारी भी उसी की है। अगर आपने सोचा कि आप एक नया बिजनेस शुरू करेंगे तो सिर्फ ऑफिस रेंट पर लेना फैसला नहीं है। असली जजमेंट तो तब शुरू होता है जब आप पहले कस्टमर को सर्विस देते हैं। अगर वहां आप फेल हो गए तो समझो आपका पूरा प्रोसेस ही खराब था।

जजमेंट के इस प्रोसेस में सबसे जरूरी बात यह है कि आप बीच रास्ते में अपनी दिशा बदलने के लिए तैयार रहें। इसे बुक में ज्ञान की भाषा में री डू लूप कहा गया है। यानी अगर आपको लग रहा है कि रास्ता गलत है तो ईगो को साइड में रखकर वापस मुड़ना ही समझदारी है। अब अगर आप अपनी शादी वाली शेरवानी पहनकर निकल चुके हैं और रास्ते में पता चले कि वेन्यू बदल गया है तो क्या आप पुरानी लोकेशन पर ही नाचते रहेंगे। बिल्कुल नहीं। आप तुरंत अपनी गाड़ी घुमाएंगे। यही फ्लेक्सिबिलिटी एक लीडर को महान बनाती है। बिना प्रोसेस के लिया गया फैसला सिर्फ एक जुआ है और जुए में सिर्फ घर बर्बाद होते हैं करियर नहीं बनते।


लेसन २ : लोग और रणनीति के बीच का सही बैलेंस ही असली लीडरशिप है

अगर आपको लगता है कि सिर्फ एक शानदार आईडिया या बहुत सारा पैसा आपको सक्सेसफुल बना देगा तो शायद आप किसी दूसरी ही दुनिया में रह रहे हैं। नोएल टिची और वॉरेन बेनिस साफ कहते हैं कि लीडरशिप के मैदान में दो सबसे बड़े खिलाड़ी होते हैं पहला लोग यानी पीपल और दूसरी रणनीति यानी स्ट्रेटजी। अक्सर लोग स्ट्रेटजी बनाने में इतने खो जाते हैं कि वो उन लोगों को ही भूल जाते हैं जो उस काम को पूरा करने वाले हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक बहुत ही महंगी और तेज रफ्तार स्पोर्ट्स कार खरीद लें लेकिन उसे चलाने के लिए किसी ऐसे ड्राइवर को रख लें जिसने आज तक साइकिल भी न चलाई हो। अब बताइए उस कार का क्या होगा। जाहिर है वो किसी गड्ढे में ही मिलेगी।

जजमेंट का असली टेस्ट तब होता है जब आपको सही काम के लिए सही बंदा चुनना होता है। हमारे देश में अक्सर लोग काबिलियत से ज्यादा जान पहचान या चापलूसी को अहमियत देते हैं। अगर आपने अपनी टीम में सिर्फ इसलिए किसी को रख लिया क्योंकि वो आपकी हर बात पर हां में हां मिलाता है तो मुबारक हो आपने खुद अपने लिए एक गड्ढा खोद लिया है। एक लीडर का जजमेंट तब चमकता है जब वो ऐसे लोगों को चुनता है जो उससे भी ज्यादा स्मार्ट हों और जो उसे गलत होने पर टोक सकें। अगर आपके पास दुनिया की सबसे बेस्ट स्ट्रेटजी है लेकिन उसे लागू करने वाले लोग निकम्मे हैं तो आपकी वो स्ट्रेटजी कूड़ेदान के लायक भी नहीं है।

अब बात करते हैं रणनीति यानी स्ट्रेटजी की। बहुत से लोग स्ट्रेटजी को इतना पेचीदा बना देते हैं कि उसे समझने के लिए नासा के साइंटिस्ट की जरूरत पड़ जाए। असली जजमेंट का मतलब है चीजों को सिंपल रखना। अगर आपकी टीम को यही नहीं पता कि उन्हें अगले छह महीने में क्या हासिल करना है तो वो बस ऑफिस आकर अपनी कुर्सी तोड़ेंगे और चाय समोसे का लुत्फ उठाएंगे। एक अच्छा लीडर अपनी रणनीति को इतना साफ रखता है कि ऑफिस का गार्ड भी उसे समझ सके। जब लोग और स्ट्रेटजी एक ही ट्रैक पर चलते हैं तभी कंपनी या कोई भी प्रोजेक्ट रॉकेट की तरह उड़ान भरता है।

लेकिन रुकिए यहां एक ट्विस्ट है। कई बार आपके पास बहुत अच्छे लोग होते हैं और स्ट्रेटजी भी दमदार होती है फिर भी रिजल्ट जीरो आता है। ऐसा क्यों होता है। क्योंकि वहां जजमेंट की कमी होती है। जजमेंट वह धागा है जो इन मोतियों को पिरोकर एक माला बनाता है। अगर आप अपने लोगों को सही दिशा नहीं दिखा पा रहे हैं या उन्हें सही समय पर सही रिसोर्स नहीं दे रहे हैं तो आपकी लीडरशिप सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएगी। याद रखिए लीडर का काम सिर्फ हुकुम चलाना नहीं है बल्कि यह देखना है कि क्या उसकी टीम के पास वो सब कुछ है जिससे वो जंग जीत सकें। अगर आप अपनी टीम को बिना तलवार के बॉर्डर पर भेज रहे हैं तो हार के लिए तैयार रहिए।


लेसन ३ : जब संकट आए तो असली चेहरा सामने आता है

जिंदगी हमेशा गुलाब के फूलों का बिस्तर नहीं होती और बिजनेस तो बिल्कुल भी नहीं। जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है तब तो गली का बच्चा भी खुद को बड़ा लीडर समझने लगता है। लेकिन असली जजमेंट का पता तब चलता है जब घर में आग लगी हो और आपके पास बुझाने के लिए सिर्फ एक बाल्टी पानी हो। संकट यानी क्राइसिस के समय एक लीडर या तो बिखर जाता है या फिर निखर जाता है। नोएल टिची और वॉरेन बेनिस कहते हैं कि मुश्किल वक्त में फैसला लेना किसी बिजली के नंगे तार को छूने जैसा है। अगर हाथ सही जगह नहीं पड़ा तो झटका बहुत जोर का लगेगा।

कल्पना कीजिए कि आप एक जहाज के कप्तान हैं और अचानक समंदर में भयंकर तूफान आ जाता है। अब आपके पास दो ही रास्ते हैं। या तो आप डर के मारे अपने केबिन में छुप जाएं और भगवान को याद करें या फिर बाहर निकलकर अपनी टीम को संभालें। खराब जजमेंट वाले लोग अक्सर संकट के समय गायब हो जाते हैं या फिर दूसरों पर चिल्लाना शुरू कर देते हैं। उन्हें लगता है कि शोर मचाने से तूफान शांत हो जाएगा। लेकिन एक सच्चा लीडर जानता है कि इस वक्त शांति और सटीक एक्शन ही उसकी नैया पार लगा सकते हैं। संकट के समय लिया गया एक छोटा सा सही फैसला आपको हीरो बना सकता है और एक छोटी सी चूक आपको इतिहास के पन्नों से मिटा सकती है।

जजमेंट का एक और जरूरी पहलू है अपनी गलती को स्वीकार करना। बहुत से लोग अपनी ईगो की वजह से गलत फैसले पर अड़े रहते हैं। अगर आपने देखा कि आपकी चुनी हुई स्ट्रेटजी काम नहीं कर रही है और पैसा पानी की तरह बह रहा है तो उसे तुरंत रोकना ही समझदारी है। इसे जिद नहीं बल्कि बेवकूफी कहते हैं। एक समझदार लीडर वह है जो अपनी हार मान ले और अपनी गलती को सुधारने के लिए नया रास्ता चुने। अगर आप गड्ढे में गिर गए हैं तो पहला काम यह होना चाहिए कि आप खोदना बंद करें। लेकिन हमारे यहाँ तो लोग गड्ढे में बैठकर उसे और गहरा करने की प्लानिंग करते हैं।

आर्टिकल के अंत में बस इतना ही कहूँगा कि जजमेंट कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप किसी दुकान से खरीद सकें। यह अनुभव गलतियों और सीखने की ललक से पैदा होता है। अगर आप आज अपनी लाइफ के छोटे छोटे फैसले सोच समझकर नहीं ले पा रहे हैं तो कल आप किसी बड़ी टीम या कंपनी को लीड करने का सपना छोड़ ही दें तो बेहतर है। खुद को तैयार कीजिए लोगों को परखना सीखिए और मुश्किल वक्त में अपना आपा मत खोइए। यही एक साधारण इंसान को महान लीडर बनाने का असली फॉर्मूला है।


तो दोस्तों, क्या आप अपनी लाइफ में सिर्फ तुक्के मार रहे हैं या वाकई अपने जजमेंट पर काम कर रहे हैं। नीचे कमेंट में जरूर बताएं कि आपका पिछला सबसे बड़ा फैसला क्या था और उससे आपने क्या सीखा। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो खुद को बहुत बड़ा तीस मार खां समझते हैं ताकि उन्हें भी असलियत का पता चले। याद रखिए आपका एक शेयर किसी की लीडरशिप की दिशा बदल सकता है।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#Leadership #SuccessMindset #DecisionMaking #BusinessGrowth #JudgmentBook


_

Post a Comment

Previous Post Next Post