Momentum (Hindi)


आप शायद अभी भी यही सोच रहे हैं कि आपका बिजनेस या करियर कछुए की चाल क्यों चल रहा है। सच तो यह है कि बिना मोमेंटम के आप बस एक जगह खड़े होकर पसीना बहा रहे हैं और दुनिया आगे निकल रही है। अपनी पुरानी घिसी पिटी स्ट्रेटेजी के साथ फेल होने का मजा लेते रहिये क्योंकि असल गेम तो वो बड़े प्लेयर्स खेल रहे हैं जिनके पास अनस्टॉपेबल मार्केट फोर्स है। अगर आपको लगता है कि सिर्फ मेहनत काफी है तो मुबारक हो आप बहुत बड़ी गलतफहमी पाल कर बैठे हैं।

आज के इस आर्टिकल में हम रॉन रिकी और जॉन वोकमैन की किताब मोमेंटम से वो सीक्रेट्स निकालेंगे जो आपकी सोच बदल देंगे। हम उन 3 बड़े लेसन्स पर बात करेंगे जो किसी भी कंपनी या इंसान को मार्केट में एक ऐसी ताकत बना देते हैं जिसे रोकना नामुमकिन हो जाता है।


लेसन १ : कस्टमर का भरोसा जीतना ही असली मोमेंटम है

मार्केट में आपने कई ऐसी कंपनियां देखी होंगी जो कल तक आसमान पर थीं और आज उनका नामो निशान भी नहीं है। क्या आपको लगता है कि उनके पास पैसा कम था। या शायद उनके ऑफिस की कॉफी अच्छी नहीं थी। बिल्कुल नहीं। असल में उन्होंने वो खो दिया जिसे यह किताब मोमेंटम का सबसे बड़ा पिलर मानती है और वो है कस्टमर का अटूट भरोसा। रॉन रिकी और जॉन वोकमैन कहते हैं कि अगर आपकी कंपनी मार्केट में एक अनस्टॉपेबल फोर्स बनना चाहती है तो आपको प्रोडक्ट बेचने से पहले अपनी क्रेडिबिलिटी यानी साख बनानी होगी।

मान लीजिये आपके मोहल्ले में दो हलवाई हैं। एक वो है जो शुद्ध देसी घी के लड्डू बनाता है और सालों से उसकी क्वालिटी एक जैसी है। दूसरा वो है जो हर दूसरे महीने अपना तेल बदल देता है और दिवाली पर मिलावटी खोया पकड़ा जाता है। अब आप खुद सोचिये कि मोमेंटम किसके पास होगा। जाहिर है उस पहले वाले के पास जिसे एडवरटाइजिंग की जरूरत नहीं है क्योंकि उसके कस्टमर्स ही उसके ब्रांड एम्बेसडर हैं। वह हलवाई सिर्फ मिठाई नहीं बेच रहा बल्कि वह भरोसा बेच रहा है। जब मार्केट में आपकी बात की कीमत सोने जैसी हो जाती है तब आपका मोमेंटम अपने आप बढ़ने लगता है।

आजकल के स्टार्टअप्स को लगता है कि इंस्टाग्राम पर फनी मीम्स डाल देने से या भारी डिस्काउंट दे देने से बिजनेस चमक जाएगा। भाई साहब अगर आपकी सर्विस में दम नहीं है और आप कस्टमर की प्रॉब्लम सॉल्व नहीं कर रहे हैं तो आपका डिस्काउंट सिर्फ आपकी बर्बादी की तारीख आगे बढ़ा रहा है। मोमेंटम का मतलब यह नहीं है कि आप कितनी तेज भाग रहे हैं बल्कि यह है कि आपके पीछे कितने लोग खड़े हैं। अगर आपके कस्टमर को यह महसूस होने लगा कि आप सिर्फ उनकी जेब ढीली करने में लगे हैं तो समझ लीजिये आपका मोमेंटम वही खत्म हो गया।

सच्चाई तो यह है कि मार्केट एक बहुत बड़ा और बेरहम जज है। यह आपको तब तक सिर पर बिठाएगा जब तक आप उसकी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। जैसे ही आपने धोखेबाजी शुरू की या अपनी क्वालिटी से समझौता किया वैसे ही मार्केट आपको उठाकर कचरे के डिब्बे में डाल देगा। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी कंपनी का नाम सुनकर इज्जत से सिर झुकाएं तो पहले खुद को साबित कीजिये। याद रखिये कि मोमेंटम एक दिन में नहीं बनता लेकिन एक गलत फैसले से टूट जरूर सकता है। जब आपका कस्टमर आपकी ढाल बन जाता है तब कोई भी कॉम्पिटिटर आपका रास्ता नहीं रोक पाता। यही वह जादू है जो एक साधारण कंपनी को एक अनस्टॉपेबल मार्केट फोर्स बना देता है।


लेसन २ : इंटरनल एलाइनमेंट की असली ताकत

अक्सर लोग समझते हैं कि मार्केट में आग लगाने के लिए सिर्फ बाहर का शोर काफी है। लेकिन रॉन रिकी और जॉन वोकमैन हमें एक बहुत ही कड़वा सच बताते हैं। वह कहते हैं कि अगर आपकी कंपनी के अंदर के लोग एक दूसरे का मुंह नोच रहे हैं या सबको अलग अलग दिशा में जाना है तो आपका मोमेंटम किसी फुस्स पटाखे जैसा होगा। जब तक आपकी टीम का विजन और कंपनी के गोल्स एक पटरी पर नहीं आते तब तक आप बाहर की दुनिया में कभी भी अनस्टॉपेबल नहीं बन सकते। इसे ही इंटरनल एलाइनमेंट कहते हैं।

सोचिये एक ऐसी नाव है जिसमें दस लोग बैठे हैं और हर किसी के पास एक चप्पू है। अब अगर पांच लोग उत्तर की तरफ चप्पू चला रहे हैं और बाकी पांच दक्षिण की तरफ तो वह नाव कहाँ जाएगी। कहीं नहीं। वह बस बीच पानी में गोल गोल घूमेगी और आप लोग पसीने से लथपथ होकर थक जाएंगे। यही हाल उन ऑफिसों का है जहाँ बॉस कुछ और चाहता है और एम्प्लॉई अपनी ही दुनिया में मस्त हैं। जब तक कंपनी के हर इंसान को यह नहीं पता होगा कि असली मंजिल क्या है तब तक आप मार्केट में सिर्फ धूल उड़ाते रह जाएंगे।

ज्यादातर कंपनियों में क्या होता है। सेल्स टीम कहती है कि मार्केटिंग वाले फालतू लीड्स ला रहे हैं। मार्केटिंग वाले कहते हैं कि प्रोडक्ट ही बेकार है। और प्रोडक्ट टीम कहती है कि किसी को उनका विजन समझ ही नहीं आ रहा। यह सर्कस जैसा माहौल मोमेंटम का सबसे बड़ा दुश्मन है। अगर आपके घर के अंदर ही गृह युद्ध चल रहा है तो आप पड़ोसियों से जंग जीतने का सपना कैसे देख सकते हैं। असली मोमेंटम तब पैदा होता है जब प्यून से लेकर सीईओ तक सबको पता हो कि आज हम किस लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं। जब पूरी कंपनी एक सुर में बात करती है तब मार्केट में आपकी आवाज किसी धमाके जैसी सुनाई देती है।

एक और बात जो बहुत जरूरी है वह है कल्चर। अगर आपके ऑफिस का कल्चर ऐसा है जहाँ लोग सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने के लिए दूसरों की टांग खींचते हैं तो समझ लीजिये आपका पतन निश्चित है। एक अनस्टॉपेबल मार्केट फोर्स बनने के लिए आपको एक ऐसी टीम चाहिए जो एक दूसरे की ताकत बने। जब कंपनी के अंदर का मोमेंटम बढ़ता है तो वह धीरे धीरे बाहर की तरफ फैलता है। फिर आपके कस्टमर्स और आपके पार्टनर्स भी उस ऊर्जा को महसूस करने लगते हैं। यह बिल्कुल किसी इंजन की तरह है। अगर इंजन के अंदर के पुर्जे आपस में टकरा रहे हैं तो गाड़ी कभी सौ की रफ्तार नहीं पकड़ पाएगी। इसलिए अपने इंटरनल मोमेंटम पर ध्यान दीजिये क्योंकि असली जीत की शुरुआत आपके अपने ऑफिस की चारदीवारी से ही होती है।


लेसन ३ : लगातार इनोवेशन और अडैप्टिबिलिटी की लहर

मार्केट कोई ठहरा हुआ तालाब नहीं है बल्कि यह एक उफनता हुआ समंदर है। रॉन रिकी और जॉन वोकमैन बड़े साफ शब्दों में कहते हैं कि अगर आप अपनी पुरानी कामयाबी के सोफे पर बैठकर आराम करने लगे तो लहरें आपको बहा ले जाएंगी। मोमेंटम का असली टेस्ट तब होता है जब चीजें बदलने लगती हैं। एक अनस्टॉपेबल मार्केट फोर्स वही है जो वक्त से पहले यह भांप ले कि हवा का रुख किधर है। अगर आप खुद को समय के साथ नहीं बदल सकते तो आपकी जगह म्यूजियम में होगी मार्केट में नहीं।

याद कीजिये उन पुराने वीडियो पार्लर्स को जहाँ हम वीसीआर की कैसेट लेने जाते थे। जब तक सीडी और डीवीडी आई तब तक तो वो लोग जैसे तैसे टिके रहे। लेकिन जैसे ही इंटरनेट और पेनड्राइव का जमाना आया वो दुकान वाले गायब हो गए। क्यों। क्योंकि उन्होंने सोचा कि लोग हमेशा उनके पास कैसेट मांगने आएंगे। उन्होंने मोमेंटम की लहर को नहीं पहचाना। वहीं दूसरी तरफ नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों को देखिये जो पहले डीवीडी भेजती थीं और जैसे ही उन्हें लगा कि दुनिया ऑनलाइन जा रही है उन्होंने अपना पूरा बिजनेस मॉडल ही बदल दिया। इसे कहते हैं लहर पर सवार होना।

कई लोग कहते हैं कि हमारी कंपनी तो सौ साल पुरानी है हमें क्या फर्क पड़ेगा। भाई साहब मार्केट को आपकी उम्र से कोई मतलब नहीं है। उसे बस इस बात से मतलब है कि आप आज की प्रॉब्लम को कैसे सॉल्व कर रहे हैं। अगर आप आज भी वही घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं जो दादाजी के जमाने में चलते थे तो आपकी हार तय है। इनोवेशन का मतलब यह नहीं है कि आप हर दिन रॉकेट साइंस बनाएं। इसका मतलब बस इतना है कि आप अपने कस्टमर की बदलती जरूरतों को समझें और खुद को उस हिसाब से ढाल लें। जो कंपनी झुकना और बदलना जानती है वही टूटने से बचती है।

जब आपके पास मोमेंटम होता है तो लोग आपको कॉपी करने की कोशिश करते हैं। अगर आप एक ही जगह खड़े रहेंगे तो आपके कॉम्पिटिटर्स आपको ओवरटेक कर लेंगे। आपको अपनी रफ्तार बनाए रखने के लिए हर थोड़े दिन में इंजन को ट्यून करना पड़ेगा। मोमेंटम को बनाए रखना उसे शुरू करने से ज्यादा मुश्किल है। यह बिल्कुल साइकिल चलाने जैसा है। अगर आपने पैडल मारना बंद किया तो बैलेंस बिगड़ेगा और आप सीधे जमीन पर होंगे। इसलिए कभी यह मत सोचिये कि आप परफेक्ट बन गए हैं। हमेशा कुछ नया सीखने और कुछ नया करने की भूख ही आपको मार्केट में एक अजेय योद्धा बनाए रखेगी।


तो दोस्तों, यह थे मोमेंटम के वो तीन बड़े लेसन्स जो किसी भी साधारण बिजनेस को एक महाशक्ति बना सकते हैं। याद रखिये कि मोमेंटम कोई किस्मत का खेल नहीं है बल्कि यह भरोसे एलाइनमेंट और बदलाव का सही कॉम्बिनेशन है। क्या आप भी अपनी लाइफ या बिजनेस में वो मोमेंटम महसूस कर रहे हैं या अभी भी पुराने चप्पलों की तरह घिस रहे हैं। कमेंट्स में अपनी राय जरूर बताएं और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे एक जबरदस्त पुश की जरूरत है। आज ही कदम उठाएं क्योंकि रुका हुआ पानी और रुका हुआ इंसान दोनों ही अपनी चमक खो देते हैं।

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