Less Is More (Hindi)


आप दिन भर गधों की तरह मेहनत कर रहे हैं और सोच रहे हैं कि एक दिन आप करोड़पति बन जाएंगे। क्या जोक मारा है। जबकि असली खिलाड़ी कम काम करके आपसे दस गुना ज्यादा प्रॉफिट कमा रहे हैं और आप अभी भी फालतू की मीटिंग्स में बिजी हैं।

आज हम जेसन जेनिंग्स की किताब लेस इस मोर से वो ३ सीक्रेट्स जानेंगे जो आपकी प्रोडक्टिविटी को रॉकेट बना देंगे और आपको बिजनेस का असली विनर बनाएंगे। चलिए इन पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : सादगी का जादू और कॉम्प्लेक्सिटी का कचरा

अक्सर हमें लगता है कि अगर हम बहुत बिजी दिख रहे हैं तो हम बहुत बड़ा उखाड़ रहे हैं। सच तो यह है कि दुनिया की सबसे घटिया कंपनियां ही सबसे ज्यादा उलझी हुई होती हैं। जेसन जेनिंग्स कहते हैं कि अगर आप अपनी स्ट्रेटेजी एक छोटे बच्चे को नहीं समझा सकते तो समझ लीजिए कि आपका बिजनेस डूबने वाला है। आप शायद सोचते होंगे कि हजार पेज की रिपोर्ट और पांच घंटे की मीटिंग ही कॉर्पोरेट लाइफ की शान है। लेकिन भाई साहब असलियत में आप सिर्फ अपना और अपनी टीम का खून जला रहे हैं। सफल कंपनियां जैसे कि वालमार्ट या रिलायंस के शुरुआती दिन देख लीजिए। उनका एक ही मंत्र था सादगी। वे जानते थे कि जितनी ज्यादा फाइलें बढ़ेंगी उतना ही काम कम होगा।

मान लीजिए आप एक चाय की दुकान खोलते हैं। अब आप वहां ५०० तरह के फ्लेवर रख देते हैं। अदरक वाली चाय से लेकर चॉकलेट वाली मयौनीज चाय तक। अब कस्टमर कंफ्यूज है और आपका कारीगर उससे भी ज्यादा परेशान। नतीजा क्या होगा। दुकान पर भीड़ तो दिखेगी पर शाम को गल्ले में चिल्लर भी नहीं मिलेंगे। इसके मुकाबले वो फेमस टपरी वाला देखिए जिसके पास सिर्फ दो ही ऑप्शन हैं कड़क चाय या पानी। उसकी सर्विस बिजली से भी तेज है और मुनाफा आसमान पर। इसे कहते हैं सादगी से प्रोडक्टिविटी बढ़ाना।

जब चीजें सिंपल होती हैं तो गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है। आपको बड़ी बड़ी मोटिवेशनल बातें सुनने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि हर किसी को पता होता है कि उसे करना क्या है। सादगी का मतलब कंजूसी नहीं है बल्कि उन चीजों को हटा देना है जो सिर्फ दिखावे के लिए हैं। अगर आपकी कंपनी में फैसले लेने के लिए १० लोगों के साइन चाहिए तो समझ लीजिए कि आपकी ग्रोथ की गाड़ी में हैंडब्रेक लगा हुआ है।

ग्रेट कंपनियां अपने गोल को एकदम क्लियर रखती हैं। वे हर उस चीज को कचरे के डब्बे में डाल देती हैं जो उनके विजन के बीच में आती है। आप भी अपने काम को देखिए। क्या आप सच में काम कर रहे हैं या सिर्फ काम करने का नाटक कर रहे हैं। याद रखिए कि फालतू की भागदौड़ सिर्फ पसीना निकालती है पैसा नहीं। जब आप अपने सिस्टम से हर उस फालतू स्टेप को हटा देते हैं जो जरूरी नहीं है तब आप असली कॉम्पिटिटिव एडवांटेज पाते हैं। यह लेसन हमें सिखाता है कि कम चीजें करना लेकिन उन्हें परफेक्शन के साथ करना ही आपको भीड़ से अलग खड़ा करेगा।


लेसन २ : फालतू के बोझ को उतार फेंकना और फोकस की पावर

ज्यादातर लोग और कंपनियां एक बहुत बड़ी गलतफहमी में जीते हैं। उन्हें लगता है कि जितना ज्यादा सामान होगा या जितने ज्यादा प्रोजेक्ट्स हाथ में होंगे उतनी बड़ी उनकी इज्जत होगी। जेसन जेनिंग्स इस किताब में साफ कहते हैं कि यह सिर्फ एक भ्रम है। असली ताकत 'ना' कहने में है। आप शायद उन लोगों में से होंगे जो एक साथ दस काम शुरू कर देते हैं और आखिर में एक भी पूरा नहीं हो पाता। इसे बिजनेस की भाषा में 'ब्रेन ड्रेन' कहते हैं। आप अपनी एनर्जी को इतने हिस्सों में बांट देते हैं कि किसी भी एक काम को वो पावर नहीं मिल पाती जो उसे टॉप पर पहुंचा सके।

मान लीजिए एक जिम जाने वाला लड़का है जो पहले ही दिन बाइसेप्स, ट्राइसेप्स, चेस्ट और टांगों की एक्सरसाइज एक साथ करना चाहता है। ऊपर से वो डाइट में समोसे भी खा रहा है और प्रोटीन शेक भी पी रहा है। नतीजा क्या होगा। शरीर बनने के बजाय उसे अगले दिन हॉस्पिटल जाना पड़ेगा। बिजनेस का भी यही हाल है। कंपनियां नए नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करती रहती हैं बिना यह देखे कि पुराना वाला प्रॉफिट दे भी रहा है या नहीं। सफल कंपनियां अपने हर उस डिपार्टमेंट या प्रोडक्ट को बंद कर देती हैं जो सिर्फ खर्चा करवा रहा है।

सफल लोग जानते हैं कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती। वे अपनी लिस्ट में से उन ८० परसेंट कामों को काट देते हैं जो सिर्फ २० परसेंट रिजल्ट देते हैं। आपने देखा होगा कि कुछ ऑफिसेस में हर दस मिनट में एक नया ईमेल आता है या कोई न कोई फालतू की अपडेट मांगी जाती है। यह सब सिर्फ वक्त की बर्बादी है। जब आप अपने काम से फालतू का शोर खत्म कर देते हैं तब आपको वो शांति मिलती है जिसमें बड़े आइडियाज जन्म लेते हैं।

ग्रेट कंपनियां अपने रिसोर्सेज को गनपाउडर की तरह इस्तेमाल करती हैं। वे इसे हर जगह नहीं छिड़कतीं बल्कि एक जगह इकट्ठा करके बड़ा धमाका करती हैं। अगर आप भी अपने करियर या बिजनेस में अटके हुए महसूस कर रहे हैं तो आज ही अपनी लिस्ट चेक कीजिए। देखिए कि कौन सा काम है जो सिर्फ आपकी ईगो को शांत कर रहा है पर बैंक बैलेंस नहीं बढ़ा रहा। उसे तुरंत खत्म कीजिए। जब आप कम बोझ लेकर दौड़ेंगे तभी आपकी स्पीड बढ़ेगी। पिछला लेसन हमें सादगी सिखाता था और यह लेसन हमें उस सादगी को मेंटेन करने के लिए कड़े फैसले लेना सिखाता है।


लेसन ३ : कल्चर और स्पीड का घातक कॉम्बिनेशन

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ कंपनियां मार्केट में आते ही छा जाती हैं और कुछ सालों तक रगड़ने के बाद भी वहीं की वहीं रहती हैं। जेसन जेनिंग्स कहते हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण है 'स्पीड'। लेकिन यह वो स्पीड नहीं है जो बिना सोचे समझे कहीं भी भागने से आती है। यह वो स्पीड है जो एक मजबूत कल्चर से पैदा होती है। जिस कंपनी के लोग डरे हुए होते हैं वहां फैसले लेने में सदियां लग जाती हैं। और जहां लोग खुलकर बात करते हैं वहां काम बिजली की रफ्तार से होता है।

आपने शादियों में वो हलवाई की टीम देखी होगी। वहां कोई मैनेजर सूट पहनकर इंस्ट्रक्शन नहीं दे रहा होता। फिर भी ५०० लोगों का खाना टाइम पर तैयार हो जाता है। क्यों। क्योंकि उनका कल्चर सेट है। हर किसी को अपनी जिम्मेदारी पता है और फैसले लेने के लिए उन्हें किसी मालिक की परमिशन का इंतजार नहीं करना पड़ता। इसके उलट एक सरकारी दफ्तर को देखिए जहां एक छोटी सी फाइल आगे बढ़ाने के लिए भी दस खिड़कियों के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहां स्पीड मर चुकी है क्योंकि वहां का कल्चर सिर्फ जिम्मेदारी से बचने का है।

ग्रेट कंपनियां अपने एम्प्लॉइज को मालिक की तरह सोचना सिखाती हैं। वे उन्हें इतनी आजादी देती हैं कि वे खुद फैसले ले सकें। जब हर इंसान तेजी से काम करेगा तो पूरी कंपनी की रफ्तार अपने आप बढ़ जाएगी। आज के दौर में बड़ा मछली को नहीं खाता बल्कि तेज मछली धीरे चलने वाली मछली को खा जाती है। अगर आप अपने बिजनेस में सादगी ले आए हैं और फालतू का बोझ भी हटा दिया है लेकिन आप अभी भी कछुए की चाल चल रहे हैं तो आप हार जाएंगे।

सफल होने के लिए आपको अपनी टीम में भरोसे का माहौल बनाना होगा। जब लोग बिना डरे नए आईडिया शेयर करते हैं तो प्रोडक्टिविटी अपने आप बढ़ जाती है। याद रखिए कि टेक्नोलॉजी तो कोई भी खरीद सकता है पर ऐसा कल्चर बनाना जो हर रुकावट को तोड़ दे ही आपकी असली जीत है। सादगी से शुरू हुआ यह सफर स्पीड पर जाकर खत्म होता है। अगर आप इन तीनों लेसन को अपनी लाइफ में उतार लेते हैं तो आपको सक्सेसफुल होने से कोई नहीं रोक सकता।


दोस्तों, असली खेल ज्यादा काम करने का नहीं बल्कि सही काम को कम समय में खत्म करने का है। क्या आप भी अपनी लाइफ में फालतू का बोझ ढो रहे हैं। आज ही कमेंट बॉक्स में बताइए कि आप अपनी डेली रूटीन से कौन सी एक फालतू चीज को हमेशा के लिए हटाने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा बिजी होने का रोना रोता रहता है पर रिजल्ट कुछ नहीं देता। चलिए साथ मिलकर अपनी प्रोडक्टिविटी को अगले लेवल पर ले जाते हैं।

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