क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो पूरा दिन गधे की तरह मेहनत करते हैं पर महीने के एंड में सेल्स टारगेट का डब्बा गोल रहता है। मुबारक हो आप अपनी कीमती लाइफ और पैसा दोनों बर्बाद कर रहे हैं क्योंकि आपको काम करना आता ही नहीं।
इस बुक समरी में हम जिल कोनराथ के उन सीक्रेट्स को जानेंगे जो आपके बिजी रहने के भ्रम को तोड़कर आपको कम समय में ज्यादा सेल्स क्लोज करने वाला मास्टर बना देंगे। चलिए इन 3 पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : सेल्स मेनिया के जाल को तोड़ना और फोकस का जादू
आज के दौर में हर सेल्स वाला इंसान एक अजीब सी बीमारी से जूझ रहा है जिसे जिल कोनराथ सेल्स मेनिया कहती हैं। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आप सुबह ऑफिस पहुँचते हैं और खुद को बहुत बिजी दिखाने की कोशिश करते हैं। आप पागलों की तरह ईमेल चेक करते हैं। फोन की हर नोटिफिकेशन पर ऐसे झपटते हैं जैसे कोई लॉटरी लगी हो। पर सच तो यह है कि दिन खत्म होने तक आपके हाथ में कुछ नहीं होता। आप बस थक चुके होते हैं और आपकी सेल्स पाइपलाइन वैसी की वैसी ही खाली पड़ी रहती है।
हम इंडियन्स को लगता है कि जो इंसान पसीने में लथपथ है और जिसके हाथ में हमेशा फोन है वही असली काम कर रहा है। लेकिन असलियत में वह इंसान बस अपनी एनर्जी और समय की चिता जला रहा है। मान लीजिए कि राहुल एक सेल्स एग्जीक्यूटिव है। राहुल को लगता है कि हर क्लाइंट का मैसेज आते ही रिप्लाई करना उसकी महानता है। वह मीटिंग के बीच में भी व्हाट्सएप चेक करता है। उसे लगता है कि वह मल्टीटास्किंग का राजा है। पर असल में वह एक सर्कस का जोकर बन चुका है जो एक साथ दस गेंदे हवा में उछालने की कोशिश में सब नीचे गिरा देता है।
जिल कहती हैं कि बिजी होना और प्रोडक्टिव होना दो अलग बातें हैं। अगर आप बिना किसी प्लान के बस भाग रहे हैं तो आप कहीं नहीं पहुँचेंगे। सेल्स मेनिया का मतलब है कि आप अपने दिमाग को उन छोटे और बेकार कामों का गुलाम बना चुके हैं जो आपको बड़ी डील क्लोज करने से रोक रहे हैं। आपको यह समझना होगा कि हर नोटिफिकेशन एक इमरजेंसी नहीं होती। जब आप अपनी डेस्क पर बैठते हैं तो आपका मकसद काम निपटाना होना चाहिए न कि बस कीबोर्ड पर उँगलियाँ चलाना।
क्या आपको वाकई लगता है कि हर दो मिनट में ईमेल चेक करने से आपकी सेल्स बढ़ जाएगी। अगर ऐसा होता तो आज हर कोई करोड़पति होता। असल में आप बस अपने दिमाग को डोपामाइन की वैसी ही लत लगा रहे हैं जैसी किसी नशेड़ी को होती है। आप जब भी कोई फालतू नोटिफिकेशन देखते हैं तो आपका दिमाग मुख्य काम से हट जाता है। फिर उस मुख्य काम पर वापस आने में आपको कम से कम बीस मिनट लगते हैं। जरा सोचिए आपने दिन भर में कितनी बार यह गलती की।
इस लेसन का सबसे बड़ा टेकअवे यही है कि आपको अपनी प्रायोरिटी सेट करनी होगी। क्या वह कॉल ज्यादा जरूरी है जो आपकी बड़ी डील फाइनल कर सकती है या वह रील देखना जो आपके दोस्त ने भेजी है। सेल्स में सक्सेस पाने के लिए आपको बिजी दिखने का नाटक छोड़ना होगा और असली काम पर ध्यान देना होगा। जब तक आप इस पागलपन को नहीं रोकेंगे तब तक आप बस चूहे की दौड़ में भागते रहेंगे और कभी जीत नहीं पाएंगे।
लेसन २ : डिस्ट्रैक्शन फ्री सेलिंग और डीप वर्क की ताकत
अब जब आपने समझ लिया है कि बिजी रहना बेवकूफी है तो सवाल यह आता है कि आखिर काम कैसे करें। जिल कोनराथ यहाँ हमें डीप वर्क और डिस्ट्रैक्शन फ्री सेलिंग का कॉन्सेप्ट समझाती हैं। हमारे आसपास की दुनिया इस तरह बनाई गई है कि वह आपका ध्यान भटका सके। फोन। फेसबुक। चाय के ब्रेक पर होने वाली गपशप। यह सब आपकी सेल्स के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
सोचिए आप एक बहुत जरूरी प्रपोजल बना रहे हैं। अचानक आपके फोन की लाइट जलती है। आप सोचते हैं कि बस एक सेकंड देख लेता हूँ किसका मैसेज है। वह मैसेज किसी ग्रुप का फालतू जोक होता है। पर उस एक सेकंड के चक्कर में आपका जो फ्लो बना था वह टूट गया। अब आप फिर से वही प्रपोजल शुरू करेंगे तो आपको याद ही नहीं आएगा कि आप किस पॉइंट पर थे। यह वैसा ही है जैसे एक तेज रफ्तार गाड़ी के सामने अचानक कोई कुत्ता आ जाए और ड्राइवर को जोर से ब्रेक मारना पड़े। गाड़ी फिर से उसी स्पीड पर आने में वक्त लेगी।
जिल कहती हैं कि सेल्स क्लोज करने के लिए आपको एकाग्रता की जरूरत होती है। आपको ब्लॉक टाइमिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। मतलब यह कि दिन के कुछ घंटे ऐसे होने चाहिए जब आपका फोन साइलेंट हो और आप दुनिया के लिए गायब हो जाएं। उस समय में सिर्फ और सिर्फ प्रोस्पेक्टिंग या फॉलोअप होना चाहिए। अगर आप ऑफिस में बैठकर सबको यह दिखाना चाहते हैं कि आप कितने कूल हैं और सबके साथ गप्पे मार रहे हैं तो समझ लीजिए कि आपकी सैलरी कभी नहीं बढ़ने वाली।
मजे की बात यह है कि हम खुद को धोखा देने में एक्सपर्ट हैं। हम कहते हैं कि सेल्स में तो हमेशा अवेलेबल रहना पड़ता है। क्लाइंट कभी भी फोन कर सकता है। पर सच बताइए क्या आपका क्लाइंट आपको हर पांच मिनट में फोन करता है। नहीं। यह सिर्फ आपका डर है। अगर आप अपने काम की क्वालिटी सुधारना चाहते हैं तो आपको बाउंड्री बनानी होगी।
जब आप बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के काम करते हैं तो आपका दिमाग ऐसे आइडियाज सोचता है जो आपको भीड़ से अलग करते हैं। एक शांत दिमाग बेहतर सेल्स पिच तैयार कर सकता है। लेकिन अगर आपका दिमाग एक बंदर की तरह यहाँ से वहाँ कूद रहा है तो आप बस घिसे पिटे डायलॉग बोलेंगे जिन्हें सुनकर क्लाइंट फोन काट देगा। इसलिए अपने आसपास के शोर को बंद कीजिए। अपने काम करने की जगह को मंदिर की तरह पवित्र मानिए जहाँ डिस्ट्रैक्शन की कोई जगह न हो। तभी आप कम समय में वह रिजल्ट ला पाएंगे जिसकी लोग सिर्फ कल्पना करते हैं।
लेसन ३ : अपनी वर्कफ्लो को रीसेट करना और चुम्बकीय सेल्स पाइपलाइन
पिछले दो लेसन में हमने दिमाग को शांत करना और फोकस करना सीखा। लेकिन अगर आपकी प्रोसेस ही पुरानी और जंग लगी हुई है तो फोकस भी आपको नहीं बचा पाएगा। जिल कोनराथ का तीसरा लेसन आपकी पूरी कार्यप्रणाली को हिला कर रख देगा। वह कहती हैं कि सेल्स में सक्सेस पाने के लिए आपको अपनी वर्कफ्लो को रीसेट करना होगा। आप अभी भी शायद उन पुराने तरीकों से काम कर रहे हैं जो दादा आदम के जमाने के हैं। वही ठंडी कॉल करना और वही बोरिंग ईमेल भेजना जिससे क्लाइंट को नींद आ जाए।
सोचिए आप एक मैकेनिक हैं जो एक ऐसी कार को ठीक करने की कोशिश कर रहा है जिसका इंजन ही गायब है। आप कितनी भी पॉलिश कर लें वह कार नहीं चलेगी। वैसे ही अगर आपकी सेल्स पाइपलाइन में केवल ऐसे लोग भरे हैं जो कभी आपका सामान नहीं खरीदेंगे तो आप बस अपना खून जला रहे हैं। जिल कहती हैं कि अपनी सेल्स एक्टिविटी को छोटे और तेज हिस्सों में बांटिए। जिसे वह 'बंचिंग' कहती हैं। यानी एक ही तरह के काम को एक साथ निपटाना। अगर आपको कॉल करनी है तो लगातार बीस कॉल कीजिए। बीच में ईमेल मत खोलिए। अगर रिसर्च करनी है तो सिर्फ रिसर्च कीजिए।
भारत में सेल्स वालों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वह 'फॉलोअप' के नाम पर क्लाइंट को परेशान करते हैं। "सर क्या सोचा" या "सर कब ले रहे हो" जैसे सवाल पूछकर आप अपनी वैल्यू जीरो कर लेते हैं। जिल के अनुसार आपको एक 'वैल्यू प्रोवाइडर' बनना होगा। आपकी हर बातचीत में क्लाइंट के लिए कुछ नया होना चाहिए। अगर आप बस एक सेल्समेन बनकर रहेंगे तो लोग आपका फोन उठाना बंद कर देंगे। पर अगर आप उनकी समस्या का हल लेकर जाएंगे तो वह आपका इंतजार करेंगे।
अपनी वर्कफ्लो को रीसेट करने का मतलब यह भी है कि आप टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करें। क्या आप अभी भी डायरी और पेन लेकर हिसाब करते हैं। अगर हाँ तो आप पत्थर के युग में जी रहे हैं। टूल्स का इस्तेमाल कीजिए जो आपके फालतू के कामों को ऑटोमेट कर सकें। जब आप अपना समय बचाते हैं तभी आप उस समय को नई डील्स ढूंढने में लगा पाते हैं। याद रखिए सेल्स कोई जादू नहीं है बल्कि एक गणित है। जितना बेहतर आपका सिस्टम होगा उतने ही ज्यादा पैसे आपकी जेब में आएंगे। अगर आप अभी भी वही घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं और सोच रहे हैं कि किस्मत साथ देगी तो आप गलत हैं। किस्मत भी उन्हीं का साथ देती है जिनके पास एक मजबूत सिस्टम होता है।
दोस्तों, 'मोर सेल्स लेस टाइम' सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि उन लोगों के लिए एक आईना है जो खुद को बिजी दिखाकर बेवकूफ बना रहे हैं। सेल्स की दुनिया बहुत बेरहम है। यहाँ सिर्फ वही टिकता है जो स्मार्ट काम करना जानता है। आज ही अपने फोन की नोटिफिकेशंस बंद कीजिए। अपना एक ब्लॉक टाइम सेट कीजिए और देखिए कैसे आपकी परफॉरमेंस आसमान छूने लगती है।
अगर आपको लगता है कि इस आर्टिकल ने आपकी आँखों से बिजी रहने का चश्मा उतार दिया है तो इसे अपने उस सेल्स वाले दोस्त को जरूर भेजें जो हमेशा कहता रहता है कि उसके पास सांस लेने का भी वक्त नहीं है। नीचे कमेंट में बताएं कि इन 3 लेसन में से आप कल से ही अपनी लाइफ में कौन सा बदलाव शुरू करने वाले हैं। याद रखिए समय कम है और सेल्स के टारगेट बहुत बड़े। तो चलिए अब काम पर लग जाइए।
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