Net Ready (Hindi)


अगर आप आज भी पुराने घिसे पिटे बिजनेस तरीके अपना रहे हैं तो मुबारक हो। आप अपनी बरबादी का सामान खुद तैयार कर रहे हैं। बिना नेट रेडीनेस के ई कोनोमी में टिकना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल की गाड़ी को धक्का मारना। सब आगे निकल जाएंगे और आप पीछे धूल चाटते रह जाएंगे।

चलिए देखते हैं वह ३ लेसन जो आपकी डूबती नैया को पार लगा सकते हैं और आपको डिजिटल किंग बना सकते हैं।


Lesson : नेट रेडीनेस: क्या आपका माइंडसेट अपडेटेड है या अभी भी विंडोज ९५ पर चल रहा है?

आज के दौर में हर कोई कहता है कि भाई मेरा तो ऑनलाइन बिजनेस है। फेसबुक पर पेज बना लिया और व्हाट्सएप पर ऑर्डर ले लिए तो लगता है कि हम तो ई कोनोमी के राजा बन गए। लेकिन अमीर हार्टमैन और जॉन सिफोनिस कहते हैं कि ठहरिए। केवल इंटरनेट पर होना और नेट रेडी होना दो अलग बातें हैं।

नेट रेडीनेस का असली मतलब है आपकी कंपनी का डीएनए। क्या आपके कर्मचारी और आपका काम करने का तरीका डिजिटल युग के हिसाब से बदला है? इमेजिन कीजिए एक ऐसी मिठाई की दुकान जहाँ मालिक ने ऑनलाइन पेमेंट का क्यूआर कोड तो लगा रखा है पर जब आप स्कैन करते हैं तो वह कहता है कि भाई नेटवर्क नहीं आ रहा या फिर कैश ही दे दो। यह वही बात हुई कि आपने नई फरारी तो खरीद ली पर उसे चलाने के लिए सड़क ही नहीं बनाई।

नेट रेडी होने के लिए आपको चार खंभों पर ध्यान देना होगा। पहला है गवर्नेंस यानी आपका मैनेजमेंट। क्या आपके बॉस अभी भी फाइलों के ढेर में दबे हैं? दूसरा है विजन। क्या आपको पता है कि अगले पांच साल में इंटरनेट कहाँ होगा? तीसरा है टेक्नोलॉजी। और चौथा सबसे जरूरी है कल्चर।

अगर आपके ऑफिस का कल्चर ऐसा है जहाँ ईमेल का जवाब देने में तीन दिन लगते हैं तो आप नेट रेडी नहीं बल्कि नेट डेड हैं। ई कोनोमी में मुकाबला केवल पड़ोस की दुकान से नहीं बल्कि पूरी दुनिया से है। यहाँ कस्टमर को पलक झपकते ही सर्विस चाहिए। अगर आप उसे इंतजार कराएंगे तो वह एक क्लिक में आपके कॉम्पिटिटर के पास चला जाएगा।

कई कंपनियाँ सोचती हैं कि एक महंगी वेबसाइट बनवा ली तो काम हो गया। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे जिम की मेंबरशिप लेकर सोचना कि अब तो बॉडी अपने आप बन जाएगी। भाई साहब जिम जाना पड़ता है और पसीना बहाना पड़ता है। वैसे ही नेट रेडीनेस के लिए अपनी पूरी टीम की सोच को बदलना पड़ता है।

जब तक आपका पूरा सिस्टम एक सुर में डिजिटल नहीं सोचेगा तब तक आप ई कोनोमी की रेस में पैदल ही चलेंगे। इसलिए अपने सिस्टम को अपडेट कीजिए वरना मार्केट आपको डिलीट कर देगा।


Lesson : कस्टमर फोकस और स्पीड: पलक झपकते ही सर्विस या फिर टाटा बाय बाय!

ईकोनोमी में एक बहुत पुरानी कहावत है कि बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है। लेकिन अमीर हार्टमैन और जॉन सिफोनिस कहते हैं कि भाई साहब यह जमाना अब बदल चुका है। अब बड़ी मछली छोटी को नहीं बल्कि तेज मछली धीरे चलने वाली मछली को चट कर जाती है।

इमेजिन कीजिए कि आपने ऑनलाइन एक बिरयानी आर्डर की। आपको भूख जोर की लगी है और ऐप दिखा रहा है कि डिलिवरी पार्टनर अभी रेस्टोरेंट पर ही खड़ा है। पंद्रह मिनट बाद भी वह वहीं है। आधे घंटे बाद आपको मैसेज आता है कि भाई बिरयानी खत्म हो गई। गुस्सा आएगा या नहीं? आप उस ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल कर देंगे और दूसरे ऐप पर चले जाएंगे। यही है ई कोनोमी की कड़वी सच्चाई।

यहाँ कस्टमर का ईगो सातवें आसमान पर है और होना भी चाहिए। उसके पास ऑप्शंस की कमी नहीं है। अगर आपकी वेबसाइट लोड होने में पांच सेकंड से ज्यादा ले रही है तो समझ लीजिए आपने अपना कस्टमर खो दिया। लोग अब भगवान के दर्शन के लिए लाइन में लग सकते हैं पर एक वेब पेज के खुलने का इंतजार नहीं कर सकते।

मजे की बात तो यह है कि कई बिजनेस सोचते हैं कि हमने कस्टमर केयर का नंबर दे दिया तो हम कस्टमर फोकस्ड हो गए। भाई साहब वह नंबर तो अक्सर बिजी आता है या फिर रोबोट बोलता रहता है कि कृपया प्रतीक्षा करें। ई कोनोमी में प्रतीक्षा शब्द ही गाली जैसा लगता है। आपको कस्टमर की जरूरत उसके बोलने से पहले समझनी होगी।

अगर अमेज़न आपको वह सामान दिखा रहा है जिसकी आपको कल जरूरत पड़ने वाली है तो वह जादू नहीं है। वह नेट रेडीनेस है। वह डेटा का सही इस्तेमाल है। आपको भी अपनी सर्विस में यही बिजली जैसी फुर्ती लानी होगी।

सर्कस के शेर की तरह नहीं बल्कि जंगल के चीते की तरह दौड़ना होगा। अगर आप अपनी इंटरनल फाइलों को एक डेस्क से दूसरे डेस्क तक घुमाने में हफ्ता बिता देते हैं तो कस्टमर को क्या खाक सर्विस देंगे? ई कोनोमी में जो रुक गया समझो वह झुक गया। स्पीड ही आपकी असली करेंसी है। इसे बचाकर रखिए वरना मार्केट आपकी वैल्यू जीरो कर देगा।


Lesson : वैल्यू नेटवर्क: अकेले चने भाड़ नहीं फोड़ते और अकेले बिजनेस ई कोनोमी नहीं जीतते!

पुराने जमाने में बिजनेस करने का तरीका था कि अपनी दुकान के शटर गिरा लो और अंदर बैठकर अपनी तिजोरी गिनो। किसी को अपना सीक्रेट मत बताओ। लेकिन अमीर हार्टमैन और जॉन सिफोनिस कहते हैं कि ई कोनोमी में अगर आप अकेले द्वीप बनकर रहना चाहते हैं तो डूबने के लिए तैयार रहिए। आज का जमाना पार्टनरशिप का है। इसे कहते हैं वैल्यू नेटवर्क बनाना।

इमेजिन कीजिए एक ऐसी शादी जहाँ हलवाई कहता है कि मैं बस खाना बनाऊंगा पर प्लेट्स खुद लेकर आओ। टेंट वाला कहता है कि मैं बस कपड़ा लगाऊंगा पर डंडे आप ढूंढो। ऐसी शादी में दूल्हा भी भाग जाएगा। ई कोनोमी में भी यही होता है। आपको अपने सप्लायर्स और पार्टनर्स के साथ ऐसा डिजिटल रिश्ता बनाना होगा कि कस्टमर को लगे कि सब कुछ एक ही जगह से हो रहा है।

मजे की बात देखिए। आप जब जोमैटो से खाना मंगवाते हैं तो क्या आपको फर्क पड़ता है कि रेस्टोरेंट का अपना सॉफ्टवेयर क्या है या डिलीवरी बॉय की बाइक कौन सी है? नहीं। आपको बस गर्म खाना चाहिए। पीछे एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा है जो आपस में डेटा शेयर करता है।

अगर आप सोचते हैं कि मैं सॉफ्टवेयर भी खुद बनाऊंगा और डिलीवरी भी खुद करूँगा और मार्केटिंग भी अकेले ही सँभालूँगा तो भाई साहब आप थक जाएंगे। नेट रेडी होने का मतलब है अपनी कमजोरियों को पहचानना और उन लोगों के साथ हाथ मिलाना जो उस काम में बेस्ट हैं।

हंसी तो तब आती है जब बड़े बड़े लाला जी सोचते हैं कि ई कोनोमी का मतलब है कॉम्पिटिटर को खत्म करना। असल में ई कोनोमी का मतलब है कॉम्पिटिटर के साथ भी कभी कभी हाथ मिला लेना ताकि मार्केट बड़ा हो सके। अगर आप अपने सप्लायर को हफ्ता भर पेमेंट के लिए लटकाते हैं तो वह आपको डिजिटल स्पीड कभी नहीं देगा।

वैल्यू नेटवर्क एक मकड़ी के जाले की तरह होता है। जितना बड़ा और मजबूत जाला होगा उतना ही ज्यादा शिकार यानी प्रॉफिट मिलेगा। अकेले उड़ते रहेंगे तो किसी दिन दीवार से टकराकर गिर जाएंगे। ई कोनोमी में जीत उसी की होती है जिसका नेटवर्क सबसे ज्यादा नेट रेडी होता है।


नेट रेडी होना कोई चॉइस नहीं है बल्कि मजबूरी है। अगर आप कल के सूरज को बिजनेस की दुनिया में देखना चाहते हैं तो आज ही अपने माइंडसेट को ई कोनोमी के साँचे में ढाल लीजिए। अपनी स्पीड बढ़ाएं और अपना नेटवर्क मजबूत करें। याद रखिए मार्केट निर्दयी है। वह केवल उन्हीं को इनाम देता है जो वक्त से पहले अपडेट हो जाते हैं।

तो क्या आप अपनी कंपनी को नेट रेडी बनाने के लिए तैयार हैं? या फिर अभी भी उसी पुरानी फाइल सिस्टम के साथ खुश हैं? अपनी राय हमें जरूर बताएं और इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अभी भी डिजिटल क्रांति को मजाक समझ रहा है।

बदलिए वरना बदल दिए जाएंगे।

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