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क्या आप अभी भी उसी घिसे पिटे आइडिया के साथ बैठे हैं जिसे आप दुनिया का बेस्ट समझते हैं। मुबारक हो आप अपनी लाइफ बर्बाद करने की रेस में सबसे आगे हैं। जबकि पूरी दुनिया नए कमाल कर रही है और आप बस ख्याली पुलाव पका रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि आप ओरिजिनल नहीं हैं।

आज हम एडम ग्रांट की किताब ओरिजिनल्स की मदद से उन सीक्रेट्स को समझेंगे जो आपको भीड़ से अलग खड़ा कर देंगे। चलिए जानते हैं वे 3 बड़े लेसन जो आपकी सोच और लाइफ को हमेशा के लिए बदल कर रख देंगे।


लेसन १ : रिस्क के खिलाड़ी नहीं रिस्क के मैनेजर बनिए

ज्यादातर लोगों को लगता है कि ओरिजिनल होने का मतलब है अपनी सारी जमा पूंजी दांव पर लगा देना। लोग सोचते हैं कि अगर आपको अपना बिजनेस शुरू करना है तो आज ही अपनी नौकरी को लात मारनी होगी। लेकिन एडम ग्रांट कहते हैं कि यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। असली विद्रोही या ओरिजिनल्स वे नहीं होते जो बिना सोचे समझे खाई में कूद जाते हैं। वे तो वे लोग हैं जो एक पैर जमीन पर मजबूती से टिका कर दूसरा पैर हवा में बढ़ाते हैं।

सोचिए आपके पास एक क्रांतिकारी आइडिया है। अब आप जोश में आकर अपने बॉस को रिजाइन थमा देते हैं। अगले दिन आप घर पर खाली बैठे हैं और रेंट देने के पैसे नहीं हैं। क्या अब आप अपने आइडिया पर शांति से काम कर पाएंगे। बिल्कुल नहीं। आपका दिमाग तो रोटी और बिजली के बिल में उलझा रहेगा। आप क्रिएटिविटी की जगह सर्वाइवल मोड में चले जाएंगे। एडम ग्रांट ने अपनी रिसर्च में पाया कि जो लोग अपनी फुल टाइम जॉब के साथ अपना साइड बिजनेस शुरू करते हैं उनके सफल होने के चांस उन लोगों से तैंतीस परसेंट ज्यादा होते हैं जो सब कुछ छोड़ छाड़ कर कूद पड़ते हैं।

हैरानी की बात है ना। हमें तो फिल्मों में सिखाया जाता है कि रिस्क लो वरना हार जाओगे। लेकिन असलियत में वारन बफेट जैसे लोग भी हर कदम फूंक फूंक कर रखते हैं। वे जुआरी नहीं हैं। वे तो रिस्क को ऐसे बैलेंस करते हैं जैसे कोई सर्कस का कलाकार रस्सी पर चलता है। अगर आप एक तरफ बहुत बड़ा रिस्क ले रहे हैं तो दूसरी तरफ आपको सेफ्टी की जरूरत होती है।

मान लीजिए आपको पैराशूट पहनकर कूदना है। क्या आप बिना चेक किए कूद जाएंगे क्योंकि आपको रिस्क लेना पसंद है। नहीं ना। आप दस बार चेक करेंगे कि पैराशूट सही है या नहीं। ओरिजिनल्स भी यही करते हैं। वे अपने आइडिया पर तब तक काम करते हैं जब तक वह ठोस ना हो जाए। वे मार्केट को समझते हैं। वे छोटे छोटे एक्सपेरिमेंट करते हैं। वे हारने के डर को खत्म नहीं करते बल्कि हारने के नुकसान को कम कर देते हैं।

तो अगर आपका दोस्त आपसे कहे कि भाई नौकरी छोड़ दे और मेरा साथ दे हम दुनिया बदल देंगे तो उसे पहले चाय पिलाइए और बोलिए कि भाई पहले संडे को काम शुरू करते हैं। दुनिया बाद में बदलेंगे पहले अपना बैंक बैलेंस बचाते हैं। ओरिजिनल होना कोई पागलपन नहीं है। यह तो एक बहुत ही कैलकुलेटेड गेम है। अगर आप आज अपनी लाइफ में कुछ नया करना चाहते हैं तो उसे एक सेफ्टी नेट के साथ शुरू कीजिए। जब आपका नया काम आपके पुराने काम जितनी इनकम देने लगे तब आप छलांग लगाइए। यही असली समझदारी है और यही ओरिजिनल होने का पहला कदम है।


लेसन २ : क्वालिटी के पीछे मत भागिए क्वांटिटी का ढेर लगाइए

हम सब के अंदर एक छोटा सा कलाकार छिपा होता है जो हमेशा परफेक्ट बनने की कोशिश करता है। हमें लगता है कि अगर हम कोई एक मास्टरपीस बना देंगे तो दुनिया हमारे कदमों में होगी। लेकिन सच तो यह है कि दुनिया को आपके उस एक आइडिया की परवाह नहीं है। एडम ग्रांट इस किताब में एक बहुत ही कड़वा सच बताते हैं। वे कहते हैं कि अगर आपको एक महान आइडिया चाहिए तो आपको पहले कचरा आइडियाज की बाढ़ लानी होगी। लोग अक्सर सोचते हैं कि जो जीनियस होते हैं वे बस बैठते हैं और उनके दिमाग में बिजली कड़कती है और एक कमाल का विचार आ जाता है। असल में ऐसा कुछ नहीं होता।

पिकासो का नाम तो सुना ही होगा आपने। आपको क्या लगता है कि उन्होंने सिर्फ दो चार पेंटिंग्स बनाईं और फेमस हो गए। नहीं। उन्होंने अपनी लाइफ में हजारों स्केच और पेंटिंग्स बनाईं जिनमें से सिर्फ कुछ ही मशहूर हुईं। यही हाल शेक्सपियर का था। उन्होंने सैकड़ों कविताएं और नाटक लिखे लेकिन आज हमें सिर्फ कुछ ही याद हैं। ओरिजिनल्स का सबसे बड़ा सीक्रेट यही है कि वे कभी रुकते नहीं हैं। वे जानते हैं कि दस में से नौ आइडियाज घटिया होंगे और शायद दसवां आइडिया ही दुनिया बदलेगा।

अब आप सोच रहे होंगे कि भाई यह तो बहुत मेहनत का काम है। लेकिन रुकिए। असल समस्या यह है कि हम खुद अपने सबसे बड़े जज बन जाते हैं। हम एक लाइन लिखते हैं और फिर उसे काट देते हैं क्योंकि वह हमें अच्छी नहीं लगती। हम सोचते हैं कि लोग क्या कहेंगे। अरे भाई लोग तो वैसे भी कुछ ना कुछ कहेंगे ही। आपका काम है बस बनाते जाना। जब आप बहुत सारी चीजें करते हैं तो आपके सफल होने की प्रोबेबिलिटी यानी संभावना बढ़ जाती है। यह वैसा ही है जैसे आप किसी मेले में गुब्बारे पर निशाना लगा रहे हों। अगर आप सिर्फ एक बार कोशिश करेंगे तो चूकने के चांस ज्यादा हैं। लेकिन अगर आप सौ बार निशाना लगाएंगे तो कोई ना कोई तो फूटेगा ही।

हम अक्सर यह पहचान ही नहीं पाते कि हमारा कौन सा आइडिया बेस्ट है। हमें अपना सबसे बेकार काम सबसे अच्छा लग सकता है और जिसे हम कचरा समझते हैं वह दुनिया को पसंद आ सकता है। इसलिए खुद जज मत बनिए। मार्केट को फैसला करने दीजिए। अगर आप एक यूट्यूबर बनना चाहते हैं तो पहली ही वीडियो को ऑस्कर लेवल का बनाने की मत सोचिए। बस वीडियो बनाइए और अपलोड कीजिए। फिर दूसरी बनाइए और फिर तीसरी। धीरे धीरे आप खुद समझ जाएंगे कि लोग क्या देखना चाहते हैं।

जो लोग कहते हैं कि मुझे तो बस एक परफेक्ट आइडिया का इंतजार है वे असल में आलसी होते हैं। वे बस काम शुरू ना करने का बहाना ढूंढ रहे हैं। ओरिजिनल लोग डरते नहीं हैं कि उनका काम खराब होगा। वे तो बस इस बात से डरते हैं कि कहीं वे कोशिश करना ही ना छोड़ दें। तो आज से ही अपने दिमाग के दरवाजे खोल दीजिए। डायरी उठाइए और हर वो फालतू बात लिख डालिए जो आपके मन में आती है। याद रखिए कूड़े के ढेर में ही कभी कभी हीरा मिल जाता है। अगर आप हीरा चाहते हैं तो कूड़ा साफ करने की हिम्मत रखनी होगी।


लेसन ३ : काम टालना बंद मत कीजिए बस सही तरीके से टालिए

बचपन से हमें सिखाया गया है कि आज का काम अभी करो और अभी का काम बस अभी निपटा दो। जो लोग काम को कल पर टालते हैं उन्हें समाज में आलसी और नाकामयाब समझा जाता है। लेकिन एडम ग्रांट यहाँ एक बहुत बड़ा बम फोड़ते हैं। वे कहते हैं कि ओरिजिनल बनने के लिए कभी कभी काम को टालना यानी प्रोक्रेस्टिनेशन करना बहुत जरूरी होता है। चौंक गए ना। आपको लगा होगा कि मैं आपको टाइम मैनेजमेंट सिखाऊंगा लेकिन यहाँ तो कहानी ही उल्टी है।

असल में प्रोक्रेस्टिनेशन दो तरह का होता है। एक वो जहाँ आप डर के मारे काम शुरू ही नहीं करते और दूसरा वो जहाँ आप काम शुरू तो कर देते हैं लेकिन उसे पूरा करने के लिए थोड़ा समय लेते हैं। एडम ग्रांट इसे स्ट्रैटेजिक प्रोक्रेस्टिनेशन कहते हैं। जब आप किसी प्रॉब्लम के बारे में सोचते हैं और फिर उसे थोड़ी देर के लिए छोड़ देते हैं तो आपका दिमाग शांत नहीं बैठता। वह बैकग्राउंड में उस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के तरीके ढूंढता रहता है। इसे इनक्यूबेशन कहते हैं।

सोचिए आप एक पेंटिंग बना रहे हैं और आपको समझ नहीं आ रहा कि कौन सा रंग इस्तेमाल करें। अगर आप जबरदस्ती उसी वक्त उसे पूरा करेंगे तो रिजल्ट शायद फीका ही होगा। लेकिन अगर आप ब्रश रखकर टहलने निकल जाएं या कोई दूसरा काम करने लगें तो अचानक चलते फिरते आपके दिमाग में वो परफेक्ट रंग आ जाएगा। दुनिया के बड़े बड़े लीडर्स जैसे मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने भी यही किया था। उनके मशहूर आई हैव ए ड्रीम वाले भाषण के कुछ हिस्से उन्होंने मंच पर चढ़ने से चंद मिनट पहले ही लिखे थे। क्योंकि उन्होंने अपने दिमाग को अंत तक सोचने का मौका दिया।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप सोफे पर लेटकर नेटफ्लिक्स देखें और कहें कि मैं तो ओरिजिनल बन रहा हूं। काम टालने का फायदा तभी होता है जब आप पहले उस पर जी तोड़ मेहनत कर चुके हों। जब आप किसी काम को अधूरा छोड़ते हैं तो वह आपके दिमाग में एक खुजली की तरह बना रहता है। इसे जिगार्निक इफेक्ट कहते हैं। हमारा दिमाग अधूरी चीजों को पूरा करने के लिए तड़पता है और इसी तड़प में वो नए और अनोखे रास्ते ढूंढ निकालता है। जो लोग बहुत जल्दी काम खत्म कर लेते हैं वे अक्सर पहले से चले आ रहे घिसे पिटे रास्तों पर चलते हैं। वे कुछ नया नहीं सोच पाते क्योंकि वे बस काम खत्म करने की जल्दी में होते हैं।

तो अगली बार जब आपको लगे कि आप किसी प्रोजेक्ट में फंस गए हैं तो थोड़ा ब्रेक लीजिए। अपने दिमाग को भटकने दीजिए। ओरिजिनल होने का मतलब मशीन बनना नहीं है। यह तो एक आर्ट है जहाँ आपको पता होना चाहिए कि कब तेजी से दौड़ना है और कब रुककर तितलियों को देखना है। जल्दबाजी में की गई क्रिएटिविटी अक्सर बोरिंग होती है। लेकिन जो आइडिया वक्त के साथ धीरे धीरे पकता है उसका स्वाद ही कुछ और होता है। बस ध्यान रहे कि आप काम टाल रहे हों उसे छोड़ नहीं रहे हों। आलस और ओरिजिनैलिटी के बीच की यह पतली सी लकीर ही आपको एक आम इंसान से एक लेजेंड बना देगी।


तो दोस्तों, ओरिजिनल होना कोई सुपरपावर नहीं है जो सिर्फ कुछ खास लोगों के पास होती है। यह तो एक चॉइस है। क्या आप भीड़ के पीछे भागना चाहते हैं या अपनी खुद की राह बनाना चाहते हैं। एडम ग्रांट की यह बातें हमें सिखाती हैं कि डरना ठीक है काम टालना भी ठीक है और बहुत सारी गलतियां करना तो और भी ज्यादा ठीक है। बस रुकना ठीक नहीं है।

अगर आपको आज के इन तीन लेसन से कुछ नया सीखने को मिला है तो कमेंट में अपनी राय जरूर दें। क्या आप भी किसी बड़े आइडिया पर काम कर रहे हैं या बस सही समय का इंतजार कर रहे हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा परफेक्ट बनने के चक्कर में कुछ शुरू ही नहीं कर पाता। चलिए साथ मिलकर दुनिया को थोड़ा और ओरिजिनल बनाते हैं।

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