Payback Time (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो स्टॉक मार्केट के गिरने पर पैनिक होकर अपने शेयर बेच देते हैं और बाद में दूसरों को अमीर बनते देख अपनी किस्मत को कोसते हैं? मुबारक हो, आप अपनी मेहनत की कमाई को कचरे में फेंकने के एक्सपर्ट बन चुके हैं। जब मार्केट सेल लगाता है, तब आप डर कर भाग जाते हैं और फिर महंगे दामों पर कचरा खरीदकर खुद को इन्वेस्टर कहते हैं। अपनी इस नादानी से आप करोड़ों का नुकसान कर रहे हैं।

आज हम फिल टाउन की किताब पेबैक टाइम से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपको मार्केट के डर से लड़ना ही नहीं बल्कि उससे अमीर बनना सिखाएंगे। चलिए इन 3 लेसन के जरिए अपनी इन्वेस्टमेंट जर्नी को पूरी तरह बदलते हैं।


लेसन १ : स्टॉक मार्केट को सेल की तरह देखें

जरा सोचिए आप मॉल में गए हैं और वहां आपके पसंदीदा ब्रांड के जूतों पर 80% की सेल लगी है। आप क्या करेंगे? क्या आप डर कर मॉल से बाहर भाग जाएंगे और चिल्लाएंगे कि अरे बाप रे जूतों के दाम गिर गए अब मेरा क्या होगा? बिल्कुल नहीं। आप तो खुशी के मारे पागल हो जाएंगे और शायद दो की जगह चार जोड़ी उठा लेंगे। लेकिन जब बात स्टॉक मार्केट की आती है तो आपका दिमाग एकदम उल्टा काम करने लगता है। जैसे ही मार्केट गिरता है और अच्छे शेयर्स के दाम कम होते हैं आप ऐसे पैनिक करते हैं जैसे कल दुनिया खत्म होने वाली है। फिल टाउन कहते हैं कि यही वह मोमेंट है जब असली पैसा बनाया जाता है। अगर आप स्टॉक मार्केट में पैसा बनाना चाहते हैं तो आपको अपनी शॉपिंग वाली मेंटालिटी को यहां भी लागू करना होगा।

ज्यादातर लोग स्टॉक मार्केट को एक जुआ समझते हैं जहां वह तब घुसते हैं जब सब कुछ चमक रहा होता है। जब टीवी पर न्यूज आती है कि मार्केट रिकॉर्ड बना रहा है तब आप जैसे भोले लोग अपनी जेब से पैसे निकालकर वहां डालते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप जानबूझकर दुकान पर तब जाएं जब वहां सेल खत्म हो चुकी हो और हर चीज डबल दाम पर मिल रही हो। क्या आप अपनी असल जिंदगी में इतने महान काम करते हैं? नहीं ना। तो फिर इन्वेस्टमेंट के मामले में यह बेवकूफी क्यों? फिल टाउन हमें समझाते हैं कि जब मार्केट में गिरावट आती है तो वह दरअसल एक गिफ्ट है। वह अच्छे बिजनेस को सस्ते दामों पर खरीदने का एक सुनहरा मौका है। लेकिन दिक्कत यह है कि हमारे अंदर का डर हमें वह देखने ही नहीं देता जो सामने खड़ा है।

मान लीजिए आपके पड़ोस में एक बहुत बढ़िया और चलता हुआ शोरूम है जो हर महीने लाखों का प्रॉफिट कमाता है। अचानक शहर में कोई छोटी सी अफवाह उड़ती है या मार्केट थोड़ा सुस्त होता है और उस शोरूम का मालिक घबराकर उसे आधे दाम पर बेचने को तैयार हो जाता है। एक समझदार इंसान क्या करेगा? वह तुरंत पैसे अरेंज करेगा और उस शोरूम को खरीद लेगा क्योंकि उसे पता है कि शोरूम की असल वैल्यू कम नहीं हुई है बस वक्त खराब है। लेकिन हमारे स्टॉक मार्केट के शूरवीर क्या करते हैं? वह अपना पहले से खरीदा हुआ हिस्सा भी सस्ते में बेचकर भाग जाते हैं। यह तो वही बात हुई कि आपने अपना चलता हुआ बिजनेस सिर्फ इसलिए बेच दिया क्योंकि बाहर बारिश हो रही थी।

मार्केट का गिरना आपके लिए मातम मनाने का नहीं बल्कि जश्न मनाने का वक्त होना चाहिए। अगर आपको पता है कि आप जिस कंपनी के शेयर खरीद रहे हैं वह एक मजबूत बिजनेस है तो उसके दाम गिरने पर आपको दुखी होने के बजाय और ज्यादा शेयर खरीदने चाहिए। फिल टाउन इसे पेबैक टाइम की स्ट्रेटेजी कहते हैं। जब आप सस्ते में खरीदते हैं तो आपका पैसा रिकवर होने का टाइम यानी पेबैक टाइम कम हो जाता है। जो लोग मार्केट के उतार चढाव को अपनी धड़कनों से जोड़ लेते हैं वह कभी अमीर नहीं बन पाते। अमीर वह बनता है जो मार्केट की गिरावट को डिस्काउंट सेल समझकर झपट पड़ता है। तो अगली बार जब न्यूज में हेडलाइन आए कि मार्केट क्रैश हो गया है तो डरने के बजाय अपनी चेकबुक तैयार रखिए क्योंकि वह आपके अमीर बनने का सिग्नल है।


लेसन २ : पेबैक टाइम कैलकुलेट करना

क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप कोई नया फोन खरीदते हैं या किसी महंगी गाड़ी पर पैसे खर्च करते हैं, तो वह पैसा वापस कब आएगा? जवाब है: कभी नहीं। बल्कि वह हर दिन और कम होता जाएगा। लेकिन स्टॉक मार्केट में जब आप पैसा लगाते हैं, तो आपका सबसे पहला सवाल यह होना चाहिए कि मेरी जेब से गया हुआ एक-एक रुपया वापस मेरे पास कितने समय में लौटकर आएगा। फिल टाउन इसे ही असली पेबैक टाइम कहते हैं। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बल्कि एक बहुत ही सिंपल हिसाब है। अगर आप किसी बिजनेस को पूरा का पूरा खरीद लेते, तो वह बिजनेस अपने मुनाफे से कितने सालों में आपकी पूरी कीमत चुका देता? अगर वह 8 से 10 साल में आपको फ्री कर रहा है, तो समझ लीजिए आपने जैकपॉट जीत लिया है। लेकिन हम जैसे महान इन्वेस्टर क्या करते हैं? हम ऐसी कंपनियों में पैसा लगाते हैं जो अगले 50 साल तक मुनाफा नहीं कमाने वाली, फिर भी हम उम्मीद करते हैं कि हम रातों-रात करोड़पति बन जाएंगे। यह वैसी ही उम्मीद है जैसे किसी बंजर जमीन पर आम के बीज बोकर अगले दिन बाल्टी लेकर खड़े हो जाना।

मान लीजिए आपका एक दोस्त है 'पप्पू', जो एक चाय की दुकान खोलना चाहता है। वह आपसे कहता है कि मुझे 10 लाख रुपये दे दो और इस दुकान में आधे पार्टनर बन जाओ। अब आप पूछेंगे कि भाई यह दुकान महीने में कितना कमाती है? पप्पू कहता है कि सब खर्चा निकालकर महीने के 10 हजार रुपये बचते हैं। अब जरा हिसाब लगाइए। साल के हुए 1 लाख 20 हजार। आपका आधा हिस्सा हुआ 60 हजार। अब 10 लाख रुपये वापस पाने के लिए आपको 16 साल से भी ज्यादा इंतजार करना होगा। क्या आप यह डील लेंगे? बिल्कुल नहीं। आप पप्पू को टाटा-बाय-बाय बोल देंगे। लेकिन जब वही पप्पू किसी बड़ी टेक कंपनी का नाम लेकर शेयर बाजार में आता है, जिसके पास ऑफिस के नाम पर सिर्फ दो कुर्सियां हैं, तब आप अपना सारा बैंक बैलेंस वहां खाली कर देते हैं। क्यों? क्योंकि वहां ग्राफ ऊपर जा रहा था। स्टॉक मार्केट में ग्राफ देखना बंद कीजिए और बिजनेस का पेबैक टाइम देखना शुरू कीजिए।

फिल टाउन कहते हैं कि जब आप पेबैक टाइम कैलकुलेट करते हैं, तो आप केवल शेयर के दाम पर सट्टा नहीं लगा रहे होते। आप बिजनेस की कमाई पर दांव लगा रहे होते हैं। एक अच्छा इन्वेस्टर हमेशा यह देखता है कि फ्री कैश फ्लो कितना है। आसान भाषा में कहें तो कंपनी के हाथ में सब काट-पीटकर कितना नगद पैसा बच रहा है। अगर कंपनी की कमाई हर साल बढ़ रही है, तो आपका पेबैक टाइम छोटा होता जाएगा। यह वैसा ही है जैसे आपने एक गाय खरीदी जो हर साल पिछले साल से ज्यादा दूध देती है। थोड़े समय बाद वह गाय आपको मुफ्त की लगने लगेगी क्योंकि उसकी कीमत तो वसूल हो चुकी है। अब जो भी मिल रहा है, वह शुद्ध मुनाफा है। अमीर लोग इसी फ्री के पैसे से और ज्यादा अमीर बनते हैं।

ज्यादातर लोग मार्केट में इसलिए फेल होते हैं क्योंकि उन्हें पता ही नहीं होता कि वह किसी चीज के लिए कितनी कीमत चुका रहे हैं। वह बस भेड़ चाल में चलते हैं। जब आप पेबैक टाइम के हिसाब से इन्वेस्ट करते हैं, तो मार्केट की छोटी-मोटी हलचल से आपको फर्क पड़ना बंद हो जाता है। आपको पता होता है कि मार्केट चाहे ऊपर जाए या नीचे, आपका बिजनेस हर साल आपकी जेब भर रहा है। अगर आप बिना कैलकुलेशन के पैसा लगा रहे हैं, तो आप इन्वेस्ट नहीं कर रहे, आप दान पुण्य कर रहे हैं। और यकीन मानिए, स्टॉक मार्केट कोई चैरिटी संस्था नहीं है। यहां जो बिना दिमाग के आता है, मार्केट उसका सारा पैसा उन लोगों की जेब में डाल देता है जो कैलकुलेटर लेकर बैठते हैं। इसलिए अगली बार जब कोई आपको 'हॉट टिप' दे, तो उससे पहला सवाल यही पूछना कि भाई इसका पेबैक टाइम कितना है? अगर उसके पास जवाब न हो, तो समझ लेना कि वह आपको भी अपने साथ डूबाने की तैयारी में है।


लेसन ३ : मोट वाला बिजनेस चुनना

अब जब आप सेल में खरीदारी करना और पेबैक टाइम का हिसाब लगाना सीख गए हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर खरीदें क्या? क्या किसी भी सड़क चलते बिजनेस में पैसा लगा दें? बिल्कुल नहीं। फिल टाउन कहते हैं कि आपको सिर्फ उन कंपनियों में पैसा लगाना चाहिए जिनके पास एक 'मोट' (Moat) हो। पुराने जमाने में राजा-महाराजा अपने किले के चारों ओर एक गहरी खाई खुदवाते थे और उसमें मगरमच्छ छोड़ देते थे ताकि दुश्मन अंदर न आ सके। इसी खाई को 'मोट' कहा जाता है। बिजनेस की दुनिया में इसका मतलब है एक ऐसी ताकत जो कॉम्पिटिशन को आपसे कोसों दूर रखे। अगर आप किसी ऐसी कंपनी में पैसा लगा रहे हैं जिसका बिजनेस कल कोई भी शुरू कर सकता है, तो समझ लीजिए कि आप एक ऐसे किले में रह रहे हैं जिसके दरवाजे ही नहीं हैं। वहां आज नहीं तो कल डकैती पड़नी तय है।

मान लीजिए आप एक मोहल्ले में समोसे की दुकान खोलते हैं। आपके समोसे हिट हो जाते हैं। अगले ही हफ्ते आपके सामने वाली दुकान वाला भी समोसे बेचना शुरू कर देता है और वह आपसे पांच रुपये सस्ता बेचता है। अब आपके पास कोई मोट नहीं है, इसलिए आपकी दुकान बंद होने की कगार पर आ जाएगी। लेकिन अब जरा 'कोका कोला' या 'आईफोन' के बारे में सोचिए। क्या कोई भी एरा-गेरा नत्थू-खैरा आकर कोका कोला को टक्कर दे सकता है? नहीं, क्योंकि उनके पास ब्रांड की एक ऐसी गहरी खाई है जिसे पार करना नामुमकिन सा है। लोग कोका कोला सिर्फ प्यास बुझाने के लिए नहीं पीते, बल्कि वह उनके इमोशन से जुड़ा है। यही वह 'मोट' है जो उस बिजनेस को एक नोट छापने की मशीन बना देता है। अगर आपके बिजनेस के पास ऐसी कोई खास बात नहीं है, तो वह मार्केट की भीड़ में कहीं खो जाएगा और आपका पैसा भी उसी के साथ डूब जाएगा।

ज्यादातर लोग इन्वेस्टमेंट के नाम पर उन कंपनियों के पीछे भागते हैं जो कल की न्यूज में थीं। वह यह नहीं देखते कि कंपनी के पास ऐसा क्या है जो उसे दूसरों से अलग बनाता है। क्या वह उनकी सस्ती कीमत है? क्या वह उनका पेटेंट है? या फिर क्या वह उनका विशाल नेटवर्क है? फिल टाउन हमें चेतावनी देते हैं कि बिना मोट वाले बिजनेस में पैसा लगाना वैसा ही है जैसे छेद वाली नाव में बैठकर समंदर पार करने की कोशिश करना। आप चाहे जितना पानी बाहर निकाल लें, अंत में नाव डूबेगी ही। आपको ऐसी कंपनी ढूंढनी है जिसके पास एक 'सेक्रेट सॉस' हो। जब आप ऐसी कंपनी को मार्केट की गिरावट में सस्ते दाम पर खरीदते हैं, तब आप सच में अमीर बनने के रास्ते पर होते हैं।

तो कुल मिलाकर बात यह है कि अमीर बनना कोई किस्मत का खेल नहीं है। यह एक सिस्टम है। जब दुनिया डर रही हो, तब आप लालची बनिए। जब दुनिया बिना सोचे समझे पैसा फेंक रही हो, तब आप कैलकुलेटर लेकर पेबैक टाइम निकालिए। और हमेशा याद रखिए कि किला वही मजबूत होता है जिसके चारों तरफ गहरी खाई हो। अपनी इन्वेस्टमेंट जर्नी को आज ही बदलें। फालतू की टिप्स और न्यूज चैनल के शोर से दूर होकर खुद एक बिजनेस ओनर की तरह सोचना शुरू करें। क्योंकि असली बदला गरीबी से नहीं, बल्कि उस फाइनेंशियल फ्रीडम से लिया जाता है जिसे फिल टाउन 'पेबैक टाइम' कहते हैं। उठिए, रिसर्च कीजिए और अपने पैसे को काम पर लगाइए ताकि एक दिन आपको पैसों के लिए काम न करना पड़े।

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