Repositioning (Hindi)


आप अभी भी वही घिसी पिटी मार्केटिंग कर रहे हैं और फिर रोते हैं कि सेल्स क्यों नहीं बढ़ रही। आपके कॉम्पिटिटर आपकी नाक के नीचे से कस्टमर चुरा ले गए और आप बस एड्स पर पैसा फूंक रहे हैं। यह बुक नहीं पढ़ी तो अपनी कंपनी बंद करने की तैयारी कर लो।

मार्केट बदल चुका है और अगर आप अपने ब्रांड को रिपोजिशन करना नहीं जानते तो आप इतिहास बन जाएंगे। जैक ट्राउट की यह बुक आपको कॉम्पिटिशन के दौर में असली लीडर बनना सिखाएगी। चलिए इसके ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : कॉम्पिटिशन के माइंड में जगह बनाना

आज के दौर में अगर आप यह सोच रहे हैं कि सिर्फ अच्छी क्वालिटी का प्रोडक्ट बनाकर आप अमीर बन जाएंगे तो भाई साहब आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। मार्केट अब समंदर जैसा नहीं रहा बल्कि यह एक जंग का मैदान बन चुका है जहाँ हर गली में एक नया योद्धा खड़ा है। जैक ट्राउट कहते हैं कि मार्केटिंग अब आपके प्रोडक्ट की लड़ाई नहीं है बल्कि यह तो उस धारणा की लड़ाई है जो कस्टमर के दिमाग में बसी हुई है। लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं यह इस बात पर डिपेंड नहीं करता कि आप कितने अच्छे हैं बल्कि इस पर करता है कि आप अपने कॉम्पिटिटर से कितने अलग हैं।

जरा सोचिए अगर आप मार्केट में एक नया साबुन लेकर आते हैं और जोर जोर से चिल्लाते हैं कि मेरा साबुन सबसे ज्यादा झाग देता है तो क्या लोग आपकी बात सुनेंगे। बिल्कुल नहीं क्योंकि मार्केट में पहले से ही ऐसे हजार ब्रांड्स मौजूद हैं जो यही दावा कर रहे हैं। यहाँ काम आता है रिपोजिशनिंग का कांसेप्ट। आपको अपने बारे में बोलने से पहले अपने दुश्मन की कमजोरी पर वार करना होगा। यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन सच यही है कि आपको कस्टमर को यह बताना होगा कि सामने वाला ब्रांड अब पुराना या बेकार हो चुका है और आप क्यों आज की जरूरत हैं।

मान लीजिए एक तरफ एक बहुत बड़ी और पुरानी बर्गर की दुकान है जो सालो से अपने साइज के लिए फेमस है। अब आप वहाँ अपनी छोटी सी दुकान खोलते हैं। अगर आप भी साइज की बात करेंगे तो आप हार जाएंगे। लेकिन अगर आप यह कहना शुरू कर दें कि वह बड़ा बर्गर तो सेहत के लिए खतरनाक है और बहुत ज्यादा फैट वाला है जबकि आपका बर्गर छोटा लेकिन फ्रेश और ऑर्गेनिक है तो आप गेम बदल देंगे। आपने क्या किया। आपने उस बड़े ब्रांड की ताकत को ही उसकी कमजोरी बना दिया। इसी को कहते हैं दिमाग से खेलना।

ज्यादातर बिजनेस मालिक अपनी पूरी जिंदगी बस अपनी तारीफ करने में निकाल देते हैं। वह विज्ञापन देते हैं कि हम नंबर वन हैं हम बेस्ट हैं हम भरोसेमंद हैं। सच तो यह है कि कस्टमर को आपके नंबर वन होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। उसे बस इस बात से मतलब है कि आप उसकी लाइफ की कौन सी प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हैं जो दूसरा नहीं कर पा रहा। अगर आप अपने कॉम्पिटिटर को एक कोने में धकेल कर अपनी जगह नहीं बना सकते तो आप बस भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे।

याद रखिए कस्टमर का दिमाग एक भरी हुई अलमारी की तरह है जहाँ पहले से ही बहुत सारे ब्रांड्स ठूस ठूस कर भरे हुए हैं। अगर आपको अपनी जगह बनानी है तो किसी एक पुराने ब्रांड को वहां से हिलाना ही पड़ेगा। आप सीधे जाकर अपनी जगह नहीं मांग सकते आपको रिपोजिशनिंग का सहारा लेना ही होगा। कॉम्पिटिशन को सिर्फ नजरअंदाज मत कीजिए बल्कि उसकी इमेज को रिस्ट्रक्चर कीजिए ताकि आपकी इमेज चमक सके।

जब तक आप कस्टमर के दिमाग में अपने कॉम्पिटिटर की एक पुरानी या गलत इमेज सेट नहीं करेंगे तब तक वह आपकी नई इमेज को स्वीकार नहीं करेगा। यह वैसा ही है जैसे पुरानी फिल्म के हीरो को रिटायर घोषित किए बिना नया सुपरस्टार एंट्री नहीं ले सकता। इसलिए अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी में दुश्मन की कमजोरी को अपनी ढाल बनाइए और फिर देखिए कैसे मार्केट आपकी मुट्ठी में आता है।


लेसन २ : बदलाव और क्राइसिस का फायदा उठाना

मार्केट में जब सब कुछ अच्छा चल रहा होता है तब तो एक गधा भी बिजनेस चला लेता है। असली खिलाड़ी की पहचान तब होती है जब मार्केट में भूकंप आता है। जैक ट्राउट कहते हैं कि बदलाव और क्राइसिस यानी मुसीबत असल में आपके लिए रिपोजिशनिंग का सबसे बड़ा मौका लेकर आते हैं। आज कल टेक्नोलॉजी और लोगों की पसंद इतनी तेजी से बदल रही है कि जो कल तक राजा था वह आज सड़क पर आ सकता है। अगर आप हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे और यह सोचेंगे कि बुरा वक्त गुजर जाएगा तो यकीन मानिए आपके बिजनेस का वक्त ही गुजर जाएगा।

मान लीजिए आप एक ऐसी कंपनी चलाते हैं जो ऑफिस के लिए फॉर्मल कपड़े बनाती है। अचानक एक महामारी आती है और सब लोग घर से काम करने लगते हैं। अब कोई भी आपकी टाइट पैंट और कोट पहनकर सोफे पर नहीं बैठना चाहता। यहाँ पर दो तरह के लोग होंगे। पहले वह जो रोएंगे कि किस्मत खराब है और दूसरे वह जो तुरंत अपनी इमेज बदल देंगे। वह एडवर्टाइजमेंट करेंगे कि अब जब दुनिया घर से काम कर रही है तो उन्हें कम्फर्ट और स्टाइल दोनों चाहिए। उन्होंने खुद को रिपोजिशन कर लिया। वह अब सिर्फ ऑफिस वियर नहीं बेच रहे बल्कि वह वर्क फ्रॉम होम एक्सपर्ट बन गए हैं।

क्राइसिस के समय लोग डरे हुए होते हैं और उन्हें एक भरोसेमंद साथी की तलाश होती है। उस वक्त अगर आप वही पुरानी बातें करेंगे तो लोग आपको इग्नोर कर देंगे। आपको यह दिखाना होगा कि आप इस नई दुनिया के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पुराने और बड़े ब्रांड्स अक्सर भारी भरकम हाथी की तरह होते हैं। वह इतनी जल्दी अपनी दिशा नहीं बदल पाते। यही आपकी सबसे बड़ी ताकत है। आप छोटे हैं या नए हैं तो आप अपनी स्ट्रैटेजी को चुटकियों में बदलकर उन बड़े हाथियों को पछाड़ सकते हैं।

यह वैसा ही है जैसे जब मोहल्ले में लड़ाई होती है तो कुछ लोग डरकर घर में छिप जाते हैं और कुछ लोग वहां जाकर पंचायत बिठाकर नेता बन जाते हैं। आपको मार्केट की पंचायत का वह नेता बनना है जो संकट के समय समाधान लेकर आता है। अगर आपकी इंडस्ट्री में कोई नया कानून आता है या कोई नई टेक्नोलॉजी आती है तो उसे अपनी हार मत मानिए। उसे एक सीढ़ी बनाइए और उस पर चढ़कर चिल्लाइए कि पुराने तरीके अब बेकार हो गए हैं और सिर्फ आप ही हैं जो लेटेस्ट सोल्यूशन दे रहे हैं।

याद रखिए कि ब्रांडिंग पत्थर की लकीर नहीं है जिसे बदला न जा सके। लोग अक्सर अपनी पुरानी कामयाबी के प्यार में पागल हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि जो तरीका दस साल पहले काम करता था वह आज भी करेगा। लेकिन सच तो यह है कि जो बदलता नहीं है वह खत्म हो जाता है। क्राइसिस दरअसल कस्टमर के दिमाग की उस अलमारी को साफ करने का काम करता है जिसकी बात हमने पहले लेसन में की थी। जब पुरानी चीजें अलमारी से गिरती हैं तभी आपके लिए नई जगह बनती है। बस आपको उस जगह को भरने के लिए फुर्ती दिखानी होगी।


लेसन ३ : सादगी और क्लैरिटी की ताकत

आज के डिजिटल युग में इंसान का ध्यान एक सुनहरी मछली से भी कम हो गया है। हर तरफ जानकारी का ऐसा शोर है कि कस्टमर का दिमाग पूरी तरह थक चुका है। जैक ट्राउट बड़े प्यार से समझाते हैं कि अगर आपकी मार्केटिंग की भाषा कॉम्प्लेक्स है तो आप सीधे कूड़ेदान में जाएंगे। लोग उन चीजों को पसंद नहीं करते जिन्हें समझने के लिए उन्हें डिक्शनरी खोलनी पड़े या अपना कीमती दिमाग खर्च करना पड़े। मार्केटिंग में सादगी का मतलब कमजोरी नहीं बल्कि सबसे बड़ी ताकत है।

अक्सर बिजनेस मालिक अपनी वेबसाइट और एड्स में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जैसे वह कोई साइंटिफिक रिसर्च पेपर लिख रहे हों। वह कहेंगे कि हम आपको सिनेर्जिस्टिक ऑप्टिमाइज्ड सोल्यूशन प्रोवाइड करते हैं। अब भाई साहब यह सुनकर आम आदमी को सिर्फ चक्कर आएंगे और कुछ नहीं। जबकि अगर आप सीधे कहें कि हम आपका काम आधा कर देंगे और बिजली बचाएंगे तो कस्टमर को तुरंत समझ आएगा। जितना छोटा और साफ मैसेज होगा उतनी ही जल्दी वह कस्टमर के दिमाग में घर करेगा।

मान लीजिए एक लड़का किसी लड़की को प्रपोज करने जाता है। अगर वह वहां जाकर ब्रह्मांड की उत्पत्ति और दिल की धड़कनों के बायोलॉजिकल प्रोसेस पर लेक्चर देने लगे तो लड़की उसे पागल समझकर भाग जाएगी। लेकिन अगर वह सादगी से कहे कि मुझे तुम पसंद हो तो बात बन सकती है। बिजनेस में भी यही रूल काम करता है। आपका मैसेज इतना क्लियर होना चाहिए कि एक दस साल का बच्चा भी समझ जाए कि आप बेच क्या रहे हैं और वह उसे क्यों खरीदना चाहिए।

रिपोजिशनिंग का असली खेल ही शब्दों की छंटाई में है। आपको अपने ब्रांड के आसपास की फालतू बकवास को हटाकर सिर्फ एक असली सच को पकड़ना है। अगर आपका पिज्जा जल्दी पहुंचता है तो बस उसी पर फोकस कीजिए। यह मत कहिए कि हम दुनिया के सबसे बेहतरीन इटालियन शेफ से खाना बनवाते हैं और हमारे पास सबसे महंगी ओवन मशीन है। कस्टमर को सिर्फ भूख लगी है और उसे जल्दी खाना चाहिए। आपकी क्लैरिटी ही आपका सबसे बड़ा हथियार है।

आजकल के मार्केटर्स खुद को इतना स्मार्ट समझते हैं कि वह कस्टमर को भी प्रोफेसर मान लेते हैं। वह भूल जाते हैं कि कस्टमर ऑफिस से थका हारा घर आया है और उसे सिर्फ एक ऐसी चीज चाहिए जो उसकी लाइफ आसान बना दे। अगर आप उसे कन्फ्यूज करेंगे तो वह उस ब्रांड के पास चला जाएगा जो उसे आसानी से समझ आ रहा है। कन्फ्यूजन हमेशा सेल्स को मार देता है। इसलिए अपने ब्रांड को रिपोजिशन करते समय सबसे पहले अपने मैसेज को झाड़ू लगाकर साफ कीजिए।

तो क्या सीखा आपने। रिपोजिशनिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है। यह सिर्फ अपने कॉम्पिटिटर की कमजोरी को पहचानने मार्केट के बदलाव को गले लगाने और अपने मैसेज को बिल्कुल शीशे की तरह साफ रखने की कला है। अगर आप इन तीन लेसन्स को अपनी लाइफ और बिजनेस में उतार लेते हैं तो दुनिया का कोई भी बड़ा ब्रांड आपको हरा नहीं पाएगा। अब उठिए और अपने ब्रांड को एक नई पहचान दीजिए।


अगर आप भी वही पुरानी गलतियां कर रहे हैं तो आज ही रुक जाइए। अपने ब्रांड की कमियों को देखिए और मार्केट के बदलाव को एक मौके की तरह इस्तेमाल कीजिए। कमेंट में बताएं कि आपके बिजनेस का सबसे बड़ा कॉम्पिटिटर कौन है और आप उसे कैसे रिपोजिशन करेंगे। इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपने स्टार्टअप को लेकर परेशान हैं।

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