क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अकेले ही पहाड़ तोड़ने की कोशिश में अपनी कमर तुड़वा रहे हैं। बधाई हो। आप जिंदगी भर मेहनत करेंगे और अंत में हाथ खाली ही रहेगा। बिना सही लोगों के साथ के आपकी मेहनत सिर्फ एक थकान है और कुछ नहीं।
पावर रिलेशनशिप्स कोई जादू नहीं बल्कि एक आर्ट है जो आपकी जिंदगी बदल सकता है। आज हम एंड्रीयू सोबेल की बुक से वो ३ कीमती लेसन सीखेंगे जो आपको एक पावरफुल इंसान बना देंगे।
लेसन १ : क्यूरियोसिटी इज द सुपरपावर (सवाल पूछने की कला)
अक्सर हमें लगता है कि अच्छी बातें करना ही एक अच्छे रिश्ते की निशानी है। पर यकीन मानिए यह आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी है। आप घंटों अपनी तारीफ के पुल बांधते हैं और सोचते हैं कि सामने वाला आपसे इम्प्रेस हो गया। असल में वह बस इस बात का इंतज़ार कर रहा होता है कि कब आपका मुंह बंद हो और वह वहां से भागे। एंड्रीयू सोबेल कहते हैं कि दुनिया का सबसे दिलचस्प इंसान वह नहीं है जो बहुत बोलता है बल्कि वह है जो सही सवाल पूछता है।
सोचिए आप एक पार्टी में जाते हैं। वहां आपको एक ऐसा इंसान मिलता है जो सिर्फ अपने नए आईफोन और अपनी दुबई ट्रिप की कहानियां सुना रहा है। क्या आप दोबारा उससे मिलना चाहेंगे। शायद कभी नहीं। अब इमेजिन करिए आप एक दूसरे इंसान से मिलते हैं जो आपसे पूछता है कि आपका बचपन कैसा था या आपको काम में सबसे ज्यादा क्या पसंद है। आप बिना रुके बीस मिनट तक बोलते रहते हैं और अंत में आपको लगता है कि वह इंसान कितना समझदार है। यही वह जादू है जिसे हम क्यूरियोसिटी कहते हैं।
रिश्तों की दुनिया में सवाल पूछना एक ब्रह्मास्त्र की तरह है। जब आप किसी से उनकी लाइफ के बारे में पूछते हैं तो आप उन्हें दुनिया का सबसे खास इंसान महसूस कराते हैं। लोग अक्सर अपनी समस्याओं का हल नहीं चाहते बल्कि वे बस यह चाहते हैं कि कोई उन्हें ध्यान से सुने। अगर आप किसी बिजनेस मीटिंग में हैं और सिर्फ अपने प्रोडक्ट की पीपीटी दिखा रहे हैं तो आप एक सेल्समैन हैं। लेकिन अगर आप क्लाइंट से उनके गोल्स के बारे में पूछ रहे हैं तो आप उनके पार्टनर बन जाते हैं।
अगर आप किसी के बारे में कुछ नहीं जानते तो आप उनके साथ कभी गहरा रिश्ता नहीं बना सकते। जिज्ञासा का मतलब यह नहीं कि आप पुलिस की तरह पूछताछ शुरू कर दें। इसका मतलब है सामने वाले की कहानी में खुद को खो देना। जब आप पूछते हैं कि आपने यह कैसे किया तब आप उनकी मेहनत को सम्मान दे रहे होते हैं। और यकीन मानिए हर इंसान को अपनी तारीफ और अपनी कहानी सुनना बहुत पसंद है।
मान लीजिए आपका एक दोस्त बहुत उदास बैठा है। आप जाकर उसे लेक्चर देने लगते हैं कि भाई खुश रहा कर और जिंदगी बहुत छोटी है। वह मन ही मन आपको गालियां देगा। लेकिन अगर आप बस उसके पास बैठें और पूछें कि अंदर क्या चल रहा है तो वह अपना दिल खोल कर रख देगा। यही वह मोमेंट है जब एक साधारण रिश्ता एक पावर रिलेशनशिप में बदल जाता है।
ज्यादातर लोग अपनी बारी का इंतज़ार करते हैं ताकि वे अपनी बात ठूंस सकें। वे सुनते नहीं बल्कि जवाब देने के लिए तैयार रहते हैं। आपको यह गलती नहीं करनी है। आपको एक जासूस की तरह नहीं बल्कि एक दोस्त की तरह उत्सुक होना है। यह लेसन हमें सिखाता है कि जवाबों से ज्यादा ताकत सवालों में होती है। जितना कम आप अपने बारे में ढिंढोरा पीटेंगे लोग उतना ही आपके करीब आना चाहेंगे। तो अगली बार जब किसी से मिलें तो अपनी उपलब्धियों की लिस्ट घर पर छोड़कर जाएं और एक खाली दिमाग लेकर जाएं जो दूसरों को जानने के लिए बेताब हो।
लेसन २ : गिविंग विदाउट एक्सपेक्टेशन (बिना उम्मीद के मदद करना)
आज की दुनिया में हम सबका दिमाग एक कैलकुलेटर बन चुका है। हम किसी को 'हेलो' भी बोलते हैं तो पीछे एक छोटा सा हिसाब चल रहा होता है कि इस बंदे से मेरा क्या फायदा होगा। अगर फायदा बड़ा है तो हमारी मुस्कुराहट बड़ी हो जाती है और अगर सामने वाला किसी काम का नहीं तो हम उसे ऐसे इग्नोर करते हैं जैसे वह कोई यूट्यूब का बोरिंग विज्ञापन हो। एंड्रीयू सोबेल कहते हैं कि अगर आप असली पावर रिलेशनशिप बनाना चाहते हैं तो आपको यह कैलकुलेटर उठाकर कचरे के डिब्बे में डालना होगा।
एक कड़वा सच जान लीजिए। जब आप किसी की मदद इस उम्मीद में करते हैं कि वह कल को आपके लिए कुछ करेगा तो वह हेल्प नहीं बल्कि एक बिजनेस डील है। और लोग डील को महसूस कर लेते हैं। उन्हें आपकी आंखों में अपना मतलब साफ नजर आ जाता है। असली जादू तब शुरू होता है जब आप किसी के लिए कुछ ऐसा करते हैं जिससे आपको कोई डायरेक्ट फायदा नहीं होने वाला। इसे कहते हैं जेनेरोसिटी की पावर।
सोचिए आपका एक पुराना दोस्त है जो अभी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। आप उसे एक कॉल करते हैं और उसे एक ऐसी जॉब ओपनिंग के बारे में बताते हैं जो उसके करियर के लिए परफेक्ट है। आप बदले में उससे पार्टी नहीं मांगते और न ही यह उम्मीद रखते हैं कि वह आपकी कभी सिफारिश करेगा। आपने बस उसकी मदद की क्योंकि आप कर सकते थे। जानते हैं क्या होगा। आपने उस इंसान के दिल में अपने लिए एक ऐसी जगह बना ली है जिसे कोई करोड़ों रुपये देकर भी नहीं खरीद सकता।
ज्यादातर लोग नेटवर्किंग का मतलब समझते हैं सिर्फ कार्ड्स बांटना या लिंक्डइन पर रिक्वेस्ट भेजना। पर भाई असली नेटवर्किंग तो तब होती है जब आप लोगों के लिए वैल्यू क्रिएट करते हैं। आप किसी को अच्छी सलाह दे सकते हैं या किसी सही इंसान से मिलवा सकते हैं। जब आप बिना किसी स्वार्थ के दूसरों के लिए दरवाजे खोलते हैं तो कुदरत आपके लिए अपने आप नए रास्ते खोल देती है। इसे हम कर्मा कहें या फिर रिश्तों का गणित पर यह काम जरूर करता है।
यहाँ एक मजेदार बात समझिए। जो लोग हमेशा यह पूछते हैं कि मेरे लिए इसमें क्या है वे अक्सर अकेले रह जाते हैं। उनकी मदद करने के लिए भी लोग तभी आते हैं जब उनका अपना कोई लालच जुड़ा हो। लेकिन जो इंसान देने में यकीन रखता है उसके पास वफादार लोगों की एक पूरी फौज खड़ी होती है। एक पावरफुल रिलेशनशिप का नियम बहुत सीधा है। पहले बीज बोना पड़ता है और फिर फसल का इंतज़ार करना पड़ता है। अगर आप आज बीज ही नहीं डालेंगे और कल फल की उम्मीद करेंगे तो लोग आपको बेवकूफ ही समझेंगे।
इसे एक ऑफिस के उदाहरण से देखते हैं। मान लीजिए आपका जूनियर किसी प्रेजेंटेशन में फंस गया है। आप अपनी मीटिंग छोड़कर उसे दस मिनट देते हैं और उसका काम आसान कर देते हैं। आपने अपनी ईगो को साइड में रखा और उसकी मदद की। अब वह जूनियर आपके लिए उस दिन से ज्यादा वफादार हो जाएगा जितना आपका बॉस भी नहीं है। यह छोटी सी इन्वेस्टमेंट आगे चलकर बड़े रिवॉर्ड्स देती है।
रिश्ते बनाना कोई सौदेबाजी नहीं है। यह एक गहरा जुड़ाव है। जब आप दूसरों की कामयाबी में खुश होने लगते हैं और उनकी राह आसान करते हैं तो आप खुद एक मैग्नेट बन जाते हैं। लोग आपके साथ जुड़ना चाहते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि आप सिर्फ लेने वाले नहीं बल्कि देने वाले इंसान हैं। तो अपना हाथ हमेशा देने के लिए आगे बढ़ाइए। जब आप बिना शर्त मदद करते हैं तो आप सिर्फ एक कांटेक्ट नहीं बल्कि एक लीजेंड बन जाते हैं।
लेसन ३ : द पावर ऑफ वल्नरेबिलिटी (अपनी कमियां स्वीकार करना)
हम सबको एक ऐसी बीमारी है जिसे 'परफेक्ट दिखने की चाहत' कहते हैं। सोशल मीडिया ने तो हमें ऐसा बना दिया है कि हम अपनी दाल-रोटी की फोटो भी ऐसे खिंचते हैं जैसे वह किसी फाइव स्टार होटल का मेनू हो। हम चाहते हैं कि दुनिया हमें सिर्फ एक विनर की तरह देखे जिसके पास हर सवाल का जवाब है और जिसकी लाइफ में कभी कोई प्रॉब्लम नहीं आती। लेकिन एंड्रीयू सोबेल एक बहुत गहरी बात कहते हैं। लोग आपकी सफलताओं से जल सकते हैं या आपसे इम्प्रेस हो सकते हैं पर वे आपसे जुड़ते तब हैं जब आप अपनी कमजोरियां दिखाते हैं।
सोचिए आप किसी ऐसे इंसान से मिलते हैं जो बस अपनी जीत के किस्से सुनाता है। वह बताता है कि कैसे उसने हर मुश्किल को चुटकी में हल कर दिया। आपको वह इंसान थोड़ा घमंडी और बनावटी लगेगा। लेकिन वही इंसान अगर आपसे कहे कि भाई एक वक्त ऐसा भी था जब मैं रातों को रोता था और मुझे समझ नहीं आता था कि कल का खाना कहाँ से आएगा। बस। उसी पल आपके और उसके बीच की दीवार गिर जाती है। आपको लगता है कि यह तो मेरे जैसा ही इंसान है।
अपनी कमियां बताना कोई कमजोरी नहीं बल्कि बहुत बड़ी हिम्मत का काम है। जब आप अपनी गलतियां स्वीकार करते हैं तो आप सामने वाले को यह मैसेज देते हैं कि यहाँ कोई जजमेंट नहीं होगा। आप उसे यह परमिशन देते हैं कि वह भी अपना मास्क उतारकर आपके सामने सच बोल सके। पावर रिलेशनशिप्स हमेशा सच्चाई की बुनियाद पर टिके होते हैं और सच हमेशा सुंदर नहीं होता। उसमें दाग होते हैं और वही दाग हमें इंसान बनाते हैं।
इसे एक बिजनेस के नजरिए से देखिए। अगर आप अपने क्लाइंट को कहते हैं कि सर हमसे यह गलती हो गई और हम इसे ठीक करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। तो यकीन मानिए वह क्लाइंट आपके ऊपर पहले से ज्यादा भरोसा करेगा। क्यों। क्योंकि आपने झूठ का सहारा नहीं लिया। आपने अपनी कमियां सामने रख दीं। लोग रोबोट्स के साथ काम करना पसंद नहीं करते। वे इंसानों के साथ जुड़ना चाहते हैं। और इंसान होने का मतलब ही है कि हम कभी-कभी गलत हो सकते हैं।
अक्सर हमें डर लगता है कि अगर लोगों को हमारी असलियत पता चल गई तो वे हमें छोड़ देंगे। लेकिन सच इसके बिलकुल उल्टा है। जब आप अपनी कहानी पूरी ईमानदारी से सुनाते हैं जिसमें आपके फेलियर्स और आपके डर शामिल होते हैं तो आप लोगों के दिल में एक खास जगह बना लेते हैं। यही वह सीक्रेट सॉस है जो एक प्रोफेशनल रिश्ते को एक अटूट दोस्ती में बदल देता है। आप किसी के साथ तब तक गहरा संबंध नहीं बना सकते जब तक आप अपने दिल के दरवाजे नहीं खोलते।
तो अगली बार जब आप किसी से मिलें तो सुपरमैन बनने की कोशिश न करें। अपनी छोटी-मोटी गलतियों पर हंसना सीखें। अपनी उन कहानियों को शेयर करें जिन्होंने आपको आज बनाया है। जब आप खुद को पूरी तरह जाहिर करते हैं तो आप दूसरों को भी खुद के करीब आने का मौका देते हैं। रिश्ते सिर्फ हाथ मिलाने से नहीं बनते बल्कि दिल से दिल मिलाने से बनते हैं। और दिल तब मिलता है जब आप अपनी वल्नरेबिलिटी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं।
रिश्ते बनाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है बल्कि यह खुद को एक बेहतर इंसान बनाने का सफर है। याद रखिए आपके पास कितनी डिग्रियां हैं या बैंक बैलेंस कितना है इससे लोग कुछ देर के लिए प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन आप उन्हें कैसा महसूस कराते हैं इसी से वे आपको उम्र भर याद रखते हैं। आज ही अपने किसी पुराने दोस्त या कलीग को कॉल करें और बिना किसी मतलब के उनकी खैरियत पूछें। क्या आप तैयार हैं अपने रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए। नीचे कमेंट में बताएं कि इन ३ लेसन्स में से कौन सा आपकी लाइफ बदलने वाला है।
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